सोपोर मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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सोपोर मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर

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जम्मू एवं कश्मीर के सोपोर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया। पुलिस ने कहा कि आंतकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने सोपोर के वदूरा पईन गांव में कल दोपहर घेराव कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

पुलिस ने बताया, “घेराव कड़ा करने पर छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया और हथियारों व गोला-बारूद के साथ उसका शव बरामद हुआ है।”

उन्होंने कहा कि मारे गए आतंकवादी की सटीक पहचान और वह किस समूह से जुड़ा था, इसका पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि जब तक घटनास्थल से सारी विस्फोटक सामग्री हटा नहीं ली जाती तब तक लोगों को वहां से दूर रहने की सलाह दी गई है।

इस बीच, अधिकारियों ने ऐहतियात के तौर पर सोपोर प्रखंड में आज सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है।क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है।

–आईएएनएस

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फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष को जारी दिल्ली विधानसभा की समिति के समन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

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फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष अजीत मोहन की ओर से दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया को दिल्ली हिंसा के मामले में नोटिस जारी किया था। 

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दिल्ली दंगों पर गवाही देने के लिए समन जारी करने से संबंधित फेसबुक उपाध्यक्ष की याचिका पर न्यायालय ने दिल्ली विधानसभा और केंद्र को नोटिस जारी किया। अदालत ने फेसबुक उपाध्यक्ष के खिलाफ 15 अक्तूबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने का आदेश दिया। अदालत मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को करेगी।

समिति ने 12 सितंबर को फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को बुलाने का फैसला लिया था। गवाहों की ओर से सौंपे गए साक्ष्य व रिकॉर्ड सामग्री की जांच के बाद राघव चड्ढा की अध्यक्षता में समिति ने फेसबुक पर लगाए गए आरोपों की सत्यता का पता लगाने के लिए ये फैसला लिया था। 

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सरकारी वकीलों के बकाया भुगतान को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख

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नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी वकीलों के लंबित बिलों के भुगतान नहीं होने के मामले में बुधवार को सरकार के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया।

अदालत एक सरकारी वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस वकील की पिछले आठ वर्षो से बिलों का भुगतान नहीं किया गया है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने सरकार से कहा, अपने अधिकारियों को बताएं कि यदि वकीलों को सुनवाई की अगली तारीख तक भुगतान नहीं किया गया, तो हम उनका वेतन रोकने का आदेश देंगे।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सतीश अग्रवाल ने कहा कि पिछले आठ साल से फीस के बिल लंबित हैं और यह राशि उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उनके भाई कैंसर से पीड़ित हैं।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई 4 दिसंबर तक टाल दी और कहा, आप सुधर जाएं .. यदि देय राशि का भुगतान अगली तारीख तक नहीं होता है तो तो हम ऑर्डर पास करेंगे।

अधिवक्ता कपिल गोयल के माध्यम से वकील पीयूष गुप्ता द्वारा दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रही थी।

गुप्ता ने अपनी याचिका में कहा कि सरकारी वकील न्यायिक प्रणाली में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन ये दुर्भाग्य की बात है कि अधिकारियों को इसकी चिंता नहीं कि उनके बिलों का भी भुगतान करें।

याचिका में ये भी कहा गया है कि संबंधित विभागों ने 3 सितंबर, 2015 तक अदालत के आदेश के बावजूद बिलों का भुगतान नहीं किया था।

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हाई कोर्ट में DU ने बताया- अक्टूबर के अंत तक आ पाएगा रिजल्ट

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दिल्ली विश्वविद्यालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि वह अपने फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स का रिजल्ट अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक ही घोषित कर पाएगा। पिछले हफ्ते हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कहा था कि वह अक्टूबर के पहले हफ्ते तक फाइनल ईयर के स्टूडेंट का रिजल्ट घोषित कर दें।

कोर्ट का कहना था कि रिजल्ट जारी होने से छात्रों को बाहर के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने में दिक्कत न हो जो मार्कशीट न होने के कारण एडमिशन की प्रक्रिया में पहले ही लेट हो चुके हैं। ॉ

लेकिन आज हाई कोर्ट में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया कि उसके पास सीमित संसाधन है, ऐसी स्थिति में फाइनल ईयर स्टूडेंट का रिजल्ट वह अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से पहले नहीं दे पाएगी।

बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की हाल ही में हुई ऑनलाइन परीक्षाओं के नतीजे पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि डीयू अपने सभी कॉलेजों को निर्देश दे कि सभी उत्तर पत्रिका का मूल्यांकन जल्द से जल्द किया जाए।

फाइनल ईयर के छात्रों का रिजल्ट अक्टूबर के पहले हफ्ते तक जारी करने की कोशिश करें, ताकि छात्रों को आगे एडमिशन लेने में देरी का सामना ना करना पड़े।

हाई कोर्ट ने यूजीसी से पहले ही कहा था कि वह एक एडवाइजरी जारी करे और बताए कि इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से एग्जाम देरी से हो रहे हैं। लिहाजा प्रोविजनल रिजल्ट, नए साल और नए क्लास में दाखिलों में देरी होगी. साथ ही ये भी बताए कि कट ऑफ लिस्ट में भी देरी होगी. इस वजह से छात्र प्रोविजनल रिजल्ट और दूसरी चीजों के लिए जोर न दें।

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