बायोफार्मा सेक्टर की नई पहल: लाइटहाउस को अल्जाइमर ट्रायल के लिए निवेश और सैनथेरा का न्यूरोमस्कुलर बीमारियों पर जोर

न्यूरोडीजेनेरेटिव और सूजन संबंधी बीमारियों के लिए नई दवाएं विकसित करने वाली कंपनी लाइटहाउस फार्मास्युटिकल्स (Lighthouse Pharmaceuticals) ने अपनी ‘सीरीज ए’ फंडिंग के तहत 12 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इस निवेश दौर का नेतृत्व डबल पॉइंट वेंचर्स (Double Point Ventures) ने किया, जिसमें कुछ नए और मौजूदा निवेशकों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज की। इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी के प्रमुख प्रोग्राम LHP588 को आगे बढ़ाने और उनकी दवाओं की पाइपलाइन के विस्तार के लिए किया जाएगा।

अल्जाइमर के इलाज के लिए ‘स्प्रिंग’ ट्रायल

फिलहाल कंपनी ‘स्प्रिंग’ (SPRING) नाम से अपना एक अहम फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल कर रही है। यह परीक्षण पी. जिंजिवलिस-पॉजिटिव (P. gingivalis-positive) वाले हल्के से मध्यम अल्जाइमर के मरीजों पर किया जा रहा है। LHP588 दरअसल एक ओरल (मुंह से ली जाने वाली) दवा है जिसे दिन में सिर्फ एक बार लेना होता है। यह दवा सीधे पी. जिंजिवलिस बैक्टीरिया को निशाना बनाती है। यह वही बैक्टीरिया है जो मसूड़ों की बीमारी से जुड़ा है और जिसे अल्जाइमर के उत्पन्न होने और इसके बढ़ने का एक बड़ा कारण माना जाता है। इस ट्रायल को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के तहत काम करने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग (NIA) की ओर से 49.2 मिलियन डॉलर का भारी अनुदान भी मिला है। वर्तमान में इस ट्रायल के लिए पूरे अमेरिका में मरीजों को नामांकित करने की प्रक्रिया जारी है।

नेतृत्व और भविष्य की रणनीति

लाइटहाउस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केसी लिंच का कहना है कि उनकी कंपनी ठोस वैज्ञानिक और क्लीनिकल डेटा के आधार पर एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण अपना रही है। लिंच मानते हैं कि इस नई फंडिंग और NIA के सहयोग से स्प्रिंग ट्रायल को कुशलतापूर्वक पूरा करने में काफी मदद मिलेगी। अल्जाइमर के एक विशिष्ट वर्ग को लक्षित करके, कंपनी मरीजों के लिए अधिक सटीक और प्रभावी उपचार लाना चाहती है। इस निवेश सौदे के साथ ही, डबल पॉइंट वेंचर्स के पार्टनर डॉ. कैंपबेल मरे अब लाइटहाउस के निदेशक मंडल (Board of Directors) में शामिल हो गए हैं। लाइफ साइंसेज में निवेश, कंपनी निर्माण और क्लीनिकल डेवलपमेंट में उनका एक लंबा और गहरा अनुभव है। डॉ. मरे के अनुसार, LHP588 के जरिए कंपनी एक ऐसे जैविक कारण पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिस पर अब तक ज्यादा काम नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यह ट्रायल कंपनी को न्यूरोडीजेनेरेशन के क्षेत्र में एक इनोवेटिव लीडर के रूप में स्थापित करेगा।

सैनथेरा फार्मास्युटिकल्स का मस्कुलर रोगों पर फोकस

एक तरफ जहां लाइटहाउस अल्जाइमर जैसी बीमारी से लड़ रही है, वहीं दूसरी ओर स्विट्जरलैंड की प्रमुख कंपनी सैनथेरा फार्मास्युटिकल्स होल्डिंग एजी (Santhera) भी इसी तरह के जटिल चिकित्सा क्षेत्रों में अपना योगदान दे रही है। फार्मा सेक्टर की यह दिग्गज कंपनी मुख्य रूप से एक ही बिजनेस सेगमेंट में सक्रिय है। सैनथेरा का पूरा फोकस न्यूरोमस्कुलर और माइटोकॉन्ड्रियल जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए दवाओं की रिसर्च, उनके विकास और व्यावसायीकरण पर है। इन दोनों ही कंपनियों के हालिया कदम इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि आधुनिक बायोटेक उद्योग अब उन गंभीर बीमारियों के सटीक और लक्षित इलाज की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिनके लिए मेडिकल साइंस में अब तक बहुत सीमित विकल्प मौजूद थे।