घरेलू बाजार: सोने में मामूली तेजी, चांदी हुई सुस्त साल 2026 के पहले ही दिन भारतीय सर्राफा बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला है। सोने की कीमतों में जहां बढ़त दर्ज की गई, वहीं चांदी के भाव थोड़े नरम पड़े। गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शाम 4 बजे तक फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाले सोने के भाव में 0.25 फीसदी यानी 332 रुपये का उछाल देखा गया। इसके साथ ही 10 ग्राम सोने की कीमत 1,35,779 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। बाजार को सोने में जितनी तेज उछाल की उम्मीद थी, वैसी तेजी तो नहीं आई, लेकिन इसने निवेशकों का भरोसा जरूर कायम रखा। इसके उलट, मार्च वायदा वाली चांदी 376 रुपये टूटकर 2,35,325 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि हाल ही में चांदी 2.50 लाख रुपये और सोना 1.5 लाख रुपये के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर को छू चुके हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि चांदी में दिख रही यह अभूतपूर्व तेजी एक ‘बबल’ भी हो सकती है, इसलिए निवेशकों को इस वक्त बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
ग्लोबल मार्केट और 2026 का आउटलुक वैश्विक स्तर पर देखें तो न्यूयॉर्क में सोने का वायदा भाव 0.9 प्रतिशत चढ़कर 4,533.30 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस हो गया है। एएनजेड (ANZ) के विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी बिकवाली के बाद निचले स्तर पर खरीदारी आने से सोने में यह रिकवरी दिखी है। हालांकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते ऊर्जा संकट के कारण इस महीने सोना कुल मिलाकर 13 फीसदी से ज्यादा नुकसान में है, जबकि महीने के दौरान गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ (ETF) से पैसे निकाले जाने के दबाव में यह 15 फीसदी तक भी गिर गया था।
आने वाले समय में सोने का भविष्य मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि सेंट्रल बैंक कितनी आक्रामकता के साथ अपनी खरीदारी जारी रखते हैं। महंगाई, कमजोर होती करेंसी और दुनियाभर में छाई भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं ऐसे बड़े कारण हैं जो किसी भी भारी गिरावट के खिलाफ बाजार को सपोर्ट देंगे। जानकारों का अनुमान है कि इन्हीं वजहों से आने वाले समय में सोने की कीमतें 4500 से 5000 डॉलर के बीच मजबूती से बनी रह सकती हैं। पिछला साल भी कुछ ऐसा ही था, जब 2025 में सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों ने जमकर दांव लगाया। औद्योगिक मांग बढ़ने और सप्लाई में कमी के चलते इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 150 फीसदी की बड़ी छलांग लगाते हुए दिसंबर के अंत तक 80 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई थी।
मिडिल ईस्ट में युद्ध का साया: कच्चे तेल और एल्युमीनियम पर सीधा असर कीमती धातुओं के अलावा, मिडिल ईस्ट के तनाव ने एनर्जी और बेस मेटल्स के बाजार में हड़कंप मचा दिया है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल पर मिसाइल दागने और युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने की जिम्मेदारी लेने के बाद, ब्रेंट क्रूड ऑयल 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें सीधा सोने की तेजी पर ब्रेक लगा रही हैं और केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें सख्त करने पर मजबूर कर रही हैं।
दूसरी तरफ, ईरान द्वारा बहरीन और यूएई में प्रमुख एल्युमीनियम उत्पादकों के ठिकानों पर हुए हमलों ने ग्लोबल सप्लाई चैन को तगड़ा झटका दिया है। वीकेंड पर हुए इन हमलों के बाद, लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में एल्युमीनियम का वायदा भाव शुरुआती यूरोपीय कारोबार में 5.4 फीसदी उछलकर 3,461 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर पहुंच गया। इस पूरे महीने में एल्युमीनियम 10 फीसदी से ज्यादा महंगा हो चुका है। दुनिया के सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादकों में से एक, एल्युमीनियम बहरीन (Alba) ने अपने ठिकानों पर हमले की पुष्टि की है और कंपनी फिलहाल नुकसान का जायजा ले रही है। वहीं, एमिरेट्स ग्लोबल एल्युमीनियम (EGA) ने भी बताया है कि अबू धाबी के अल तावीला स्थित उनके प्लांट को ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र से होने वाले 40 से 50 लाख टन निर्यात पर सीधा खतरा मंडरा रहा है और बाजार में इस कमी को पूरा करने के लिए कोई दूसरा ठोस विकल्प मौजूद नहीं है।