खगोलविदों और वैज्ञानिकों की नज़रें इस हफ़्ते आसमान पर टिकी हुई हैं, क्योंकि एक के बाद एक दो बड़े क्षुद्रग्रह (Asteroids) पृथ्वी के करीब से गुज़रने वाले हैं। 27 अगस्त को क्षुद्रग्रह 2025 PM2 और 29 अगस्त को 2025 QY4 हमारी पृथ्वी के पास से अपनी यात्रा पूरी करेंगे। नासा समेत दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां इन पर करीब से नज़र रख रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों खगोलीय चट्टानों से धरती को कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन ये घटनाएँ हमें ब्रह्मांड की विशालता और ग्रहों की सुरक्षा की अहमियत की याद दिलाती हैं।
पहला क्षुद्रग्रह: 2025 PM2 का सफ़र
इस क्रम में पहला क्षुद्रग्रह 2025 PM2 है, जो 27 अगस्त 2025 को पृथ्वी के पास से गुज़रेगा। यह क्षुद्रग्रह लगभग 190 फ़ीट (58 मीटर) चौड़ा है, जो किसी विमान के आकार के बराबर है। यह 41,390 मील प्रति घंटे (लगभग 66,600 किलोमीटर प्रति घंटे) की驚異的な गति से यात्रा कर रहा है। जब यह पृथ्वी के सबसे करीब होगा, तब इसकी दूरी लगभग 23.1 लाख मील (37.2 लाख किलोमीटर) होगी। यह दूरी सुनने में बहुत ज़्यादा लग सकती है, लेकिन खगोलीय पैमाने पर इसे काफ़ी नज़दीकी माना जाता है। यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का लगभग दस गुना है।
दूसरा क्षुद्रग्रह: 2025 QY4 की उड़ान
इसके ठीक दो दिन बाद, यानी 29 अगस्त 2025, शुक्रवार को, एक और क्षुद्रग्रह 2025 QY4 पृथ्वी के करीब आएगा। नासा के सेंटर फॉर नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज़ (CNEOS) के अनुसार, यह क्षुद्रग्रह भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 11:26 बजे पृथ्वी के सबसे नज़दीक होगा। इसका आकार लगभग 180 फ़ीट है और यह 39,205 मील प्रति घंटे (लगभग 63,094 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ़्तार से अंतरिक्ष में सफ़र कर रहा है। पृथ्वी से इसकी सबसे कम दूरी 28.1 लाख मील (लगभग 45.1 लाख किलोमीटर) होगी। ये दोनों क्षुद्रग्रह ‘एटेन समूह’ (Aten group) का हिस्सा हैं, जो ऐसे क्षुद्रग्रहों के लिए जाना जाता है जिनकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा को पार करती है।
वैज्ञानिक इन क्षुद्रग्रहों पर नज़र क्यों रखते हैं?
विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि इन दोनों क्षुद्रग्रहों से इस बार पृथ्वी को कोई ख़तरा नहीं है। नासा उन खगोलीय पिंडों को ‘संभावित रूप से ख़तरनाक’ (Potentially Hazardous) की श्रेणी में रखता है जो दो शर्तों को पूरा करते हैं: पहला, उनका आकार 85 मीटर से बड़ा हो और दूसरा, वे पृथ्वी से 74 लाख किलोमीटर से कम दूरी पर आएं। यद्यपि ये क्षुद्रग्रह आकार की शर्त को पूरा करते हैं, लेकिन वे निर्धारित दूरी से काफ़ी दूर से गुज़रेंगे।
इसके बावजूद, इन पर नज़र रखना ग्रहों की सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है। गुरुत्वाकर्षण या सौर विकिरण जैसे कारकों के प्रभाव से इनकी कक्षा में मामूली बदलाव भी भविष्य में इनके रास्ते को बदल सकता है। इसलिए नासा (NASA), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), जाक्सा (JAXA) और इसरो (ISRO) जैसी एजेंसियां लगातार ऐसे पिंडों की निगरानी करती हैं।
वैश्विक सहयोग और भारत की भूमिका
इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने हाल ही में इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत भी क्षुद्रग्रहों के अध्ययन में अपना योगदान बढ़ाने की योजना बना रहा है। भारत की नज़र विशेष रूप से 2029 में पृथ्वी के पास से गुज़रने वाले ‘एपोफिस’ (Apophis) जैसे बड़े क्षुद्रग्रहों पर है। इसरो इस क्षेत्र में नासा, ईएसए और जाक्सा के साथ सहयोग करने की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा, भारत ऐसे मिशन भी विकसित कर रहा है जो भविष्य में क्षुद्रग्रहों पर उतरकर उनके बारे में सीधे जानकारी इकट्ठा कर सकें।
संक्षेप में, 2025 QY4 और 2025 PM2 का पृथ्वी के पास से गुज़रना एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड हमेशा गतिशील रहता है। ये घटनाएँ अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों की सुरक्षा में वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित करती हैं।