1984 सिख दंगे- सिख समुदाय से माफी मांगने को तैयार टाइटलर | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
Connect with us

राष्ट्रीय

1984 सिख दंगे- सिख समुदाय से माफी मांगने को तैयार टाइटलर

Published

on

1984 सिख दंगे
1984 सिख दंगे

आखिरकार 32 साल बाद 1984 दंगों के मुख्य आरोपी जगदीश टाइटलर ने सिख समुदाय से माफी मांगने की इच्छा जाहिर की है।

जगदीश टाइटलर ने कहा कि अकाल तख्त साहिब पर पेश होकर लिखित रूप में माफी मांगने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनका 1984 में हुए सिख दंगों से कोई भी ताल्लुक नहीं है और ना ही वह किसी भी रूप में इसमें शामिल थे।
आपको बता दें कि टाइटलर ने गुरुवार को चंडीगढ़ में कहा कि दंगों की कई जांचें हो चुकी हैं और सीबीआई भी उन्हें क्लीनचिट दे चुकी है लेकिन राजनीतिक कारणों के चलते उन्हें बार-बार इसमें फंसाया जा रहा है।

1994-wefornewshindi-min

टाइटलर के मुताबिक जिस दिन इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी, उस दिन वे अमेठी में थे जबकि 1 नवंबर को जब उनका संस्कार हुआ था वो तब भी वहां मौजूद थे। जाहं दूरदर्शन से इसकी रिकॉर्डिंग लेकर इसे देखा जा सकता है। टी.वी. को दिए अपने एक इंटरव्यू में जगदीश टाइटलर ने दावा किया कि उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह से मिलने के लिए समय मांगा है ताकि वह श्री अकाल तखत साहिब के सम्मुख पेश हो सकें।

टाइटलर के बयान पर फूलका ने निकाली भड़ास

आम आदमी पार्टी के नेता और कई सालों से दंगा पीडि़तों के केस लड़ रहे सीनियर एडवेाकेट एचएस फूलका ने इसे पाॅलिटिकल स्अंट बताते हुए कहा है कि अगले साल चुनाव आ रहे है इसलिए टाइटलर ऐसे बयान दे रहे है।
इधर, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व मैंबर अमरिंदर सिंह ने जगदीश टाइटलर की माफी के प्रस्ताव पर कहा है कि कातिलों को माफी नहीं दी जा सकती और जगदीश टाइटलर के श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने के बारे में भी उनका कहना है कि अकाल तख्त साहिब पर केवल सिख ही पेश हो सकते हैं किसी गैर सिख को पेश होने की इजाजत नहीं है।

ये हैं आरोप

गौरतलब है कि जगदीश टाइटलर ने 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद दिल्ली के वजीरपुर इलाके में टाइटलर ने दंगाइयों को भड़काया था। साथ ही हिंसा में भी शामिल हुए थे।

मनोरंजन

दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने दोबारा भेजा समन

Published

on

अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक उन्हें दोबारा समन भेजा गया है। 

इससे पहले 25 सितंबर को दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश एनसीबी के एसआईटी कार्यालय पहुंचीं थीं। उन्हें ड्रग्स मामले की जांच में शामिल होने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने समन देकर बुलाया था।

दीपिका से जब एनसीबी ने ड्रग्स चैट को लेकर पूछताछ तो दीपिका ने चैट को लेकर पहले मना कर दिया था लेकिन जब करिश्मा को उनके सामने बैठाकर पूछताछ की गई, तो काफी बहस के बाद उन्होंने कबूला की उन्हें चैट में ‘माल’ मंगाया था। जिसका मतलब सिगरेट होता है।

बता दें एनसीबी के हाथ कुछ वॉट्सऐप चैट लगी थीं। इस चैट में साफ तौर पर ‘D’ और ‘K’ लेटर्स सामने आए। देखा गया कि D, K से ‘माल’ यानी ड्रग्स की मांग कर रही हैं। बाद में पता चला कि D से दीपिका पादुकोण और K से उनकी मैनेजर करिश्मा इस चैट का हिस्सा थीं।

Continue Reading

राष्ट्रीय

एनडीएमसी ने जारी किया डॉक्टरों का सितंबर तक का वेतन, डॉक्टर बोले- वेतन खाते में न आने तक हड़ताल रहेगी जारी

Published

on

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने डॉक्टरों का सितंबर 2020 तक का वेतन जारी कर दिया है। निगम ने डॉक्टरों का जुलाई से लेकर सितंबर तक का वेतन जारी किया गया है। उत्तरी निगम ने सिर्फ डॉक्टरों का ही नहीं बल्कि सफाई कर्मचारियों और डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स की सैलरी भी अगस्त 2020 तक की रिलीज कर दी है।

वहीं दूसरी तरफ उत्तरी निगम के कस्तूरबा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि, निगम वेतन जारी करने को लेकर झूठी खबर फैला रहा है। किसी भी डॉक्टर के खाते में पैसे नहीं आए हैं और जब तक खाते में पैसे नहीं आ जाते वे हड़ताल बंद नहीं करेंगे।

नर्सों का जुलाई तक का वेतन, स्वास्थ्य कर्मचारियों का जून तक वेतन जारी कर दिया गया है। वहीं उत्तरी नगर निमग से संबद्ध शिक्षकों और अन्य ग्रुप ए, बी, सी, अन्य क्लास फोर स्टाफ और दिहाड़ी मजदूरों की जून 2020 तक की सैलरी जारी की गई है। वहीं अप्रैल 2020 तक के पेंशन जारी किए गए हैं।


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अस्पतालों के डॉक्टरों को बिना वेतन के काम करने के लिए मजबूर करना शर्मनाक है। साथ ही उन्होंने केंद्र से नगर निगमों को अनुदान देने का अनुरोध भी किया ताकि वे डॉक्टरों का वेतन दे पाएं।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कई डॉक्टरों ने दावा किया है कि वे पिछले तीन महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं और इसको लेकर वे पिछले दो सप्ताह से प्रदर्शन भी कर रहे हैं। केजरीवाल ने एमसीडी के कामकाज में घोर कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि चीजें सही करने का समय आ गया है।

गाजीपुर के कुक्कुट और मछली बाजार में अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के संयंत्र का उद्घाटन करते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘मुझे इस बात का काफी दुख है कि डॉक्टरों को वेतन के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है। इन डॉक्टारों ने वैश्विक महामारी के दौरान हमारे लिए अपने जीवन को खतरे में डाला। यह शर्मनाक है।’

उन्होंने पूछा, ‘हम देख रहे हैं कि कई वर्षों से नगर निकाय अपने शिक्षकों, सफाई कर्मचारियों और डॉक्टरों को वेतन नहीं दे पा रहे। आखिर एमसीडी में कोष की कमी क्यों है?’

केजरीवाल ने कहा, पूर्व सरकारों की तुलना में हमने एमसीडी को कहीं अधिक कोष दिया है। हमने बकाया से अधिक दिया है। केजरीवाल ने कहा कि डॉक्टरों के वेतन के मामले पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए और उनको वेतन मिले, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र ‘दिल्ली को छोड़कर देश के सभी नगर निगमों को अनुदान दे रहा है।’

Continue Reading

राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नए कृषि कानून लागू करने का निर्देश देने से किया इन्कार

Published

on

Supreme_Court_of_India

सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया जिसमें सभी राज्यों को केंद्र सरकार के हालिया कृषि कानूनों को लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

प्रधान न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘क्षमा कीजिए, हम याचिका में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हैं।’

हिंदू धर्म परिषद की ओर से दाखिल इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि सभी राज्यों को कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम, 2020; मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा पर किसान (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) समझौता अधिनियम, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू करने के निर्देश दिए जाएं।

हाल ही में कांग्रेस शासित राज्य पंजाब ने राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार के उक्त तीनों कानूनों को खारिज कर दिया था। कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी इसी तरह के प्रस्ताव पारित करने पर विचार कर रहे हैं।

दरअसल, देशभर में कई स्थानों पर विपक्षी दल और किसान संगठन इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि नए कृषि कानून किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी नहीं देते। जबकि सरकार का कहना है कि नए कानूनों में एमएसपी को खत्म नहीं किया गया है।

Continue Reading

Most Popular