लीबिया के तट पर 117 शरणार्थियों के शव बहकर आए | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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लीबिया के तट पर 117 शरणार्थियों के शव बहकर आए

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लीबिया के पश्चिमी शहर जवाराह के तट पर शरणार्थियों के 117 शव बहकर आ गए।

ये शरणार्थी यूरोप जाने के लिए भूमध्यसागर को पार करने की कोशिश कर रहे थे कि रास्ते में ही इनकी नौका पलट गई। लीबियाई नौसेना के प्रवक्ता अयोब कासिम ने शुक्रवार को बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। शरणार्थियों को यूरोप ले जाने वाली नौका में आमतौर पर 125 लोग सवार हो सकते हैं।

जवाराह नगरपालिका परिषद ने गुरुवार को बयान जारी कर शहर में प्रवासी संकट के लिए देश के संस्थांनों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की निष्क्रियता की निंदा की।

उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस त्रासदी से निपटने के लिए मदद मुहेया कराने में नाकाम रही है।”

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के मुताबिक, इस सप्ताह यूरोप जाने के दौरान 880 शरणार्थियों की डूबकर मौत हो गई। तस्कर लीबिया में इस अस्थिरता का फायदा उठाते हैं और गैरकानूनी रूप से हजारों शरणार्थियों को यूरोप भेजते हैं।

हजारों की संख्या मे शरणार्थी भूमध्य सागर के जरिए लीबिया से यूरोप जाने का मार्ग चुनते हैं, जिसमें से अधिकतर की रास्ते में ही मौत हो जाती है।

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बांग्लादेश में अब तक कोरोना के 355,384 मामले, 5,072 मौतें

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बांग्लादेश में कोरोनावायरस के 1,540 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 355,384 हो गई है। एक दिन में यहां 28 नई मौतें हुई जिसके बाद मरने वालों का आंकड़ा 5,072 पहुंच गया है।

बांग्लादेश के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 12,900 नमूनों की जांच की गई। यहां एक दिन में 2,139 मरीज इस बीमारी से ठीक हो गए, जिसके बाद ठीक होने वालों की संख्या 265,092 हो गई है।

बांग्लादेश में मृत्यु दर 1.43 फीसदी है। जबकि रिकवरी रेट 74.59 फीसदी है।

बांग्लादेश में सबसे ज्यादा एक दिन में 4,019 नए मामले 2 जुलाई को रिकॉर्ड किए गए थे और 30 जून को एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें 64 दर्ज की गई थी।

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LAC पर तनाव के बीच चीन ने दोकलम के पास तैनात किए परमाणु बॉम्बर और क्रूज मिसाइल

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पिछले कई महीनों से पूर्वी लद्दाख पर तनाव चल रहा है, इसे खत्म करने के लिए दोनों देशों की तरफ से सैन्य और राजनैतिक स्तर पर बातचीत भी चल रही है।

लेकिन इसके बाद भी चीन अपनी धोखा देने वाली चालों से बाज नहीं आ रहा है। अब चीन पूर्वा भारत में तनाव का नया मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहा है।

चीन ने भूटान से लगे दोकलम के पास अपने एच-6 परमामू बॉम्बर और क्रूज मिसाइल को तैनात किया है। चीन अपने गोलमुड एयरबेस पर इन दोनों विनाशकारी हथियारों को तैनात कर रहा है और ये एयरबेस भारत की सीमा से मात्र 1,150 किमी की दूरी पर है। इससे पहले अक्साई चीन के काशगर एयरबेस पर चीन इस बॉम्बर की तैनाती कर चुका है।

इस परमाणु बॉम्बर की तस्वीर ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेट्रेस्फा की ओर से जारी की गई है। तस्वीरों में बॉम्बर के साथ केडी-63 लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भी नजर आ रही है। इधर एलएसी पर कोर कमांडर की ओर से वहां पहले जैसी स्थिति बनाए रखने के लिए बैठकें की जा रही हैं लेकिन भारत इस बार चीन को लेकर काफी सतर्क है।

भारत ने साफ कर दिया गया है जब तक चीन के पीछे हटने की खबर सामने नहीं आती तब भारत की सेना पैंगोंग की ऊंची पहाड़ियों पर तैनात रहेगी। चीन के साथ सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत के दो दिन बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि टकराव वाले बिंदुओं से सेना हटाने के लिए लगातार बातचीत की जा रही है। 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह प्रक्रिया लंबी और जटिल है। दोनों पक्षों को पारस्परिक बातचीत करते रहना होगा और जमीनी स्थिरता को भी बनाए रखना होगा। 

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उम्मीद है भारत-चीन सुलझा लेंगे सीमा विवाद, मदद की बात दोहराई: ट्रंप

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई की भारत और चीन अपने वर्तमान सीमा विवाद को सुलझा लेंगे। उन्होंने एक बार फिर दो एशियाई देशों की मदद के ऑफर को दोहराया।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘मुझे पता है कि अब चीन और भारत को कठिनाई हो रही है। उन्हें बहुत कठिनाई हो रही है। उम्मीद है कि वे इसपर काम करने में सक्षम होंगे। यदि हम मदद कर सकें तो हमें मदद करके अच्छा लगेगा।’

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले भारत और चीन के सैन्य कमांडरों ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर महीनों से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए बातचीत की है। दोनों देश हिमालय में विवादित सीमा पर अधिक सैनिकों को न भेजे जाने पर सहमत हो गए हैं। इसी बीच द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि सीमा संघर्ष भारत को एक असममित (असिमेट्रिक) प्रतिक्रिया के लिए प्रेरित कर रहा है।

अखबार ने कहा, ‘भारत नए जहाजों के निर्माण के दौरान अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास तेज कर रहा है। साथ ही तटीय निगरानी चौकियों का एक नेटवर्क स्थापित कर रहा है जो नई दिल्ली को हिंद महासागर के समुद्री यातायात पर नजर रखने की इजाजत देगा।’

ग्रांड तमाशा पॉडकास्ट में भारत और दक्षिण एशिया पर अमेरिकी विशेषज्ञ एशले टेलिस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इस संकट में भारत का बहुत पारदर्शी तौर पर समर्थन किया है। यह निश्चित रूप से चीन का व्यापक पैमाने पर सामना करने के अवसरों से प्रेरित है।

उन्होंने कहा कि चीनी आक्रमण इतना जबरदस्त रहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका स्टैंडबाय पर नहीं खड़ा नहीं हो सका और न ही वो तो इसे अनदेखा कर सकता है।

टेलिस ने कहा, ‘चीन ने सैन्य कार्रवाई की ओर तेजी से कदम बढ़ाए जिसके परिणामस्वरूप जानमाल का नुकसान हुआ है। मुझे लगता है कि उसने खुद को संयुक्त राज्य के विपरीत दिशा में खड़ा कर दिया है। इसके अलावा चीन के साथ ट्रंप प्रशासन की अपनी द्विपक्षीय समस्याएं हैं जिसकी वजह से उसके पास भारत का समर्थन करने की बजाय कोई और विकल्प नहीं है।’

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