भारतीय समाज में शादियां हमेशा से ही शान-ओ-शौकत और भारी-भरकम खर्च का पर्याय रही हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग सामाजिक दबाव में अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी एक दिन के समारोह में खर्च कर देते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई दो अलग-अलग खबरें बताती हैं कि कैसे अब शादी को लेकर नजरिया बदल रहा है और कैसे सरकार आर्थिक रूप से कमजोर तबकों की मदद के लिए आगे आ रही है।
नई सोच: शादी के खर्च से खरीदा अपना घर
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक जोड़े ने अपनी शादी में पानी की तरह पैसा बहाने के बजाय एक बेहद व्यावहारिक फैसला लिया। उन्होंने भव्य समारोह (लविश वेडिंग) से दूरी बनाते हुए उस पैसे को अपने भविष्य को सुरक्षित करने में लगाया और एक नया घर खरीद लिया। वायरल वीडियो में यह जोड़ा अपने इसी नए फ्लैट के अंदर बेहद सादगी से, सिर्फ करीबी परिजनों की मौजूदगी में शादी की रस्में निभाता नजर आ रहा है।
दूल्हे के भाई ने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि परिवार ने दिखावे पर खर्च करने के बजाय इस पैसे से घर खरीदना ज्यादा बेहतर समझा। इससे नवविवाहित जोड़े को अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए एक मजबूत आधार मिल गया है। सोशल मीडिया पर इस कदम की जमकर तारीफ हो रही है। लोग इसे ‘आर्थिक रूप से समझदारी भरा’ फैसला बता रहे हैं। एक यूजर ने इस पर टिप्पणी करते हुए सही ही लिखा है कि “समाज को यह समझने की जरूरत है कि शादी का मतलब 10 साल की मेहनत की कमाई को बर्बाद करना नहीं है।” यह घटना बताती है कि आज की युवा पीढ़ी के लिए दिखावे से ज्यादा महत्वपूर्ण जीवन की स्थिरता है।
यूपी शादी अनुदान योजना: गरीब परिवारों को सरकार का सहारा
जहां एक ओर सक्षम लोग स्वेच्छा से सादगी अपना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में ऐसे भी कई परिवार हैं जिनके लिए बेटी की शादी का खर्च उठाना किसी पहाड़ से कम नहीं है। इसी चिंता को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘यूपी शादी अनुदान योजना’ की एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, जिनमें अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के गरीब परिवार शामिल हैं, उनकी बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार की मंशा है कि पैसे की तंगी के कारण किसी भी बेटी के हाथ पीले होने में रुकावट न आए और बेटियों को लेकर समाज की नकारात्मक सोच बदली जा सके।
कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ?
सरकार ने इस योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ पात्रता मानदंड तय किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदनकर्ता उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए। आय सीमा की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों के परिवार की वार्षिक आय 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्रों के परिवारों की आय 56,460 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, शादी के समय लड़की की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक और लड़के की उम्र 21 वर्ष पूरी होनी अनिवार्य है। ध्यान रहे, इस योजना के तहत एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को ही अनुदान का लाभ मिल सकेगा।
आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इसके लिए आपको विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण कराना होगा। होम पेज पर आपको अपनी श्रेणी (सामान्य, एससी, एसटी आदि) के अनुसार विकल्प चुनना होगा और फॉर्म में सभी जरूरी जानकारियां जैसे- पुत्री की शादी की तारीख, जिला, तहसील और बैंक खाते का विवरण भरना होगा।
आवेदन को पूरा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों का होना अनिवार्य है। इनमें आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आवेदक का पहचान पत्र, बैंक पासबुक की कॉपी, मोबाइल नंबर और शादी का कार्ड या प्रमाण पत्र शामिल हैं। साथ ही, आवेदक और बेटी की पासपोर्ट साइज फोटो भी अपलोड करनी होगी। सभी जानकारी और दस्तावेज अपलोड करने के बाद ‘सेव’ के विकल्प पर क्लिक करते ही आपका फॉर्म जमा हो जाएगा। यह योजना निश्चित रूप से उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है जो अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं।