राज्यस्तरीय कविता प्रतियोगिता में किशोर अर्जुन का परचम: मराठी और कोंकणी रचनाओं के लिए सर्वोच्च सम्मान

रवींद्र भवन में हुआ सम्मान समारोह

प्रसिद्ध कवि, लेखक और निर्देशक किशोर अर्जुन ने साहित्य जगत में एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हाल ही में संपन्न हुई राज्यस्तरीय कोंकणी और मराठी कविता लेखन प्रतियोगिता में उनकी रचनाओं को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। साहित्य प्रेमियों और विद्वानों की उपस्थिति में रवींद्र भवन में आयोजित एक गरिमामय सार्वजनिक समारोह के दौरान उन्हें इन पुरस्कारों से नवाजा गया। यह सम्मान न केवल उनकी लेखनी की परिपक्वता को दर्शाता है, बल्कि दोनों भाषाओं पर उनकी समान पकड़ को भी प्रमाणित करता है।

शहरी जीवन और ग्रेस की विरासत

किशोर अर्जुन को यह सम्मान उनकी दो विशिष्ट रचनाओं के लिए मिला है। कोंकणी श्रेणी में उनकी कविता ‘शार’ (शहर) को राज्य स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह कविता आधुनिक शहरी जीवन की भागदौड़ और उसमें छिपी संवेदनाओं का सजीव चित्रण करती है। वहीं, मराठी श्रेणी में उन्होंने अपनी कविता ‘मणिकरावंचे आवर्तन’ के लिए प्रथम पुरस्कार हासिल किया। यह कविता प्रसिद्ध मराठी कवि ग्रेस के काव्यात्मक संसार को समर्पित है, जो उनकी साहित्यिक समझ की गहराई को बयां करती है।

दर्द और संवेदनाओं का गहरा सागर

किशोर अर्जुन की लेखनी की सबसे बड़ी खासियत उनकी कविताओं में छिपी भावनात्मक गहराई है। वे मानवीय रिश्तों, विरह और जीवन के संघर्षों को बहुत ही मार्मिक ढंग से शब्दों में पिरोते हैं। उनकी रचनाओं में अक्सर वह दर्द झलकता है जो सीधे पाठक के दिल में उतर जाता है। उनकी शैली को समझने के लिए उनकी कुछ पंक्तियाँ बेहद सटीक बैठती हैं, जो एक तरफ तो विरह की पीड़ा बयां करती हैं तो दूसरी तरफ टूटते हुए इंसान की व्यथा:

“चंद सांसें बची हैं आखिरी दीदार दे दो, झूठा ही सही मगर एक बार प्यार दे दो। हम तो उम्र भर के मुसाफिर हैं मत पूछ, तेरी तलाश में कितने सफर किए हैं हमने।”

इसी तरह, मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की नाजुकता पर उनका यह दृष्टिकोण भी गौरतलब है:

“टूट कर बिखर जाते हैं वो लोग दीवारों की तरह, जो खुद से भी ज्यादा किसी और से मुहब्बत करते हैं।”

कवि की जुबानी: पुरस्कार के मायने

इस उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए किशोर अर्जुन ने कहा कि ‘शार’ और ‘मणिकरावंचे आवर्तन’ दोनों ही कविताएं उनके दिल के बेहद करीब हैं। उन्होंने बताया कि इन कविताओं में जिन अनुभवों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को पिरोया गया है, वह उनके लिए निजी तौर पर बहुत मायने रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक ही प्रतियोगिता में दो अलग-अलग भाषाओं की रचनाओं का चुना जाना उनके लिए गर्व की बात है। विशेष रूप से, कोंकणी कविता लेखन के लिए पहली बार पुरस्कार प्राप्त करना उनके लिए एक अलग ही तरह की खुशी और संतोष का विषय है।