अन्यसेब के बगीचे में आज भी भटकती है एक अंग्रेज की आत्मा!

Julie TiwariDecember 5, 20151591 min

उत्तराखंड के उत्तरकाशी का गांव हरसिल अगर सेब की खेती के लिए मशहूर है तो आज भी इस गांव में एक फिरंगी की आवाजें यहां के लोगों को सुनाई देती हैं. खास बात ये है कि यहां के सेब की खेती और उस अंग्रेज के बीच बहुत ही गहरा रिश्ता है.इस अंग्रेज को यहां पहाड़ी विल्सन या राजा विल्सन के नाम से जाना जाता है. विल्सन ही इस इलाके में सेब की खेती लेकर आया था.

जिसके बाद पहाड़ों की खामोशी में सिमटे इस इलाके के लोगों की जिंदगी में रौनक आ गई.ये बात 19वीं शताब्दी की है जब भारत में अंग्रेजों का शासन था और उस समय एडवेंचर खेलों का शौकीन और एक अंग्रेज व्यापारी फ्रेडरिक ई विल्सन हरसिल गांव आया था. जिसने यहां के लोगों को लकड़ी का व्यापार और सेब की खेती करना सिखाया था.

smoke-spirit-cafleurebon-min

चांदनी रात में दिखती है विल्सन की रूह
ये गांव गंगोत्री के दर्शन करने वाले दर्शानार्थियों के लिए रुकने का स्थान है. यहां के ग्रामीण बताते हैं कि विल्सन की रूह अक्सर हम लोगों को दिखती है. गंगोत्री श्राइन के पुजारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि विल्सन की आत्मा आज भी यहां के बगीचों और पहाड़ों में भटकती है. ज्यादातर ये चांदनी रात में हमको दिख जाती है.

आखिर क्यों दिखती है विल्सन की आत्मा
जब ग्रामीणों से पूछा गया कि इस अंग्रेजी व्यापारी की आत्मा यहां क्यों भटकती है. इसके पीछे क्या वजह है तो भोले-भाले लोगों का जवाब चौंकाने वाला था. सेब की खेती करने वाले बहादुर सिंह का कहना है कि विल्सन की आत्मा पवित्र है.वो हमें याद दिलाती है कि हम लोग किस तरह से उनके आभारी हैं. धर्मवीर उनको राजा हुलसेन के नाम से भी जाना जाता है. मरने के बाद विल्सन को मंसूरी में दफनाया गया था.इसी इलाके के रहने और लोक गायक रजनीकांत सेमवाल ने बताया कि वो बचपन से विल्सन की कहानियां सुनते आ रहे हैं. विल्सन यहां पर पहली बार राजमा, सेम और सेब की खेती लेकर आया था.

ghost-557ec4c82c23a_exlst-min

विल्सन से नफरत भी करते हैं कुछ लोग
विल्सन से जुड़े इतिहास का एक काला पहलू भी है. इलाके में ही कुछ लोग उसको प्राकृतिक संसाधनों का लुटेरा मानते हैं. वो कहते हैं कि उसने यहां पर बड़े पैमाने पर वन्य जीवों का शिकार किया और मजदूरों को गुलाम बनाकर रखा. उसकी महत्वकांक्षा थी कि वो लकड़ी का व्यापार करके भारत का सबसे अमीर बन जाए.

देवताओं ने दिया था श्राप
गंगोत्री श्राइन के पुजारी दयाराम सेमवाल कहते हैं कि विल्सन के वंश में कोई नहीं बचेगा, क्योंकि उसके पापों की वजह से उसे यहां के स्थानीय देवता ने श्राप दिया था. तभी उसके लकड़ी के गोदाम में आग लग गई थी.

विल्सन की वजह से मिली थी गांव को पहचान
एक सच्चाई ये भी की इस गांव को विल्सन की वजह से पहचान मिली है. आज उसका लकड़ी का घर वन विभाग के पास है, जिसे विल्सन हाउस कहा जाता है. जिस सेब के बगीचे को उसने यहां लगाया था उनके रस से यहां बियर बनाई जाती है.हरसिल के सेबों और कुदरती खूबसूरती ने ब़ॉलीवुड को भी यहां खींचा. शोमैन राजकपूर ने 1980 में अपनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ की शूटिंग यहीं पर की थी.

wefornews bureau