राष्ट्रीययूपीए सरकार के नोट बैन के फैसले का एनडीए ने किया था खुला विरोध, गरीबों की बर्बादी का दिया था वास्ता

Rukhsar AhmadNovember 11, 2016331 min

नई दिल्ली: 500 और 1000 के नोट बंद करने का मोदी के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।

आपको बता दें कि 23 जनवरी 2014 को एक निजी चैनल की न्यूज वेबसाइट में एक खबर छपी थी। इस खबर में बीजेपी ने तत्कालीन यूपीए सरकार के नोट बदलने के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। उस वक्त बीजेपी ने इसे चुनावी स्टंट बताया था, साथ ही गरीबों और मजदूरों के बर्बाद होने की बात भी कही थी।

अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि अब जब विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर अचानक बीजेपी ने नोट बंदी क्यों की। उस वक्त जब ये खबर छपी थी, तब बीजेपी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने यूपीए सरकार के बड़े करेंसी नोटों के वापस लेने के फैसले का खुला विरोध किया था। तब बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपने प्रचार में जुटे थे। उसी समय यूपीए की सरकार ने 2005 से पहले के करेंसी नोटों को वापस लेने का निर्णय किया था लेकिन विपक्ष में बैठी एनडीए ने उसका पूरी तरह से विरोध किया था।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि सरकार ने कालेधन पर काबू पाने के नाम पर वर्ष 2005 से पहले के सभी करेंसी नोट वापस लेने का जो निर्णय किया है, वह आम आदमी को परेशान करने और उन चहेतों को बचाने के लिए है। भाजपा ने कहा था कि यह निर्णय दूर दूराज के इलाकों में रहने वाले उन गरीब लोगों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को मुश्किल में डाल देगा, जिसे उन्होंने जरूरत के वक्त के लिए जमा किया है। आखिर आज उनकी वह सोच कैसे बदल गई। अब इस फैसले पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं।

WeForNews Bureau

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