Connect with us

ओपिनियन

महिलाओं का आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी : सारा पायलट

Published

on

Sara Pilot

नई दिल्ली, 27 नवंबर | जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी और कांग्रेस नेता सचिन पायलट की पत्नी सारा पायलट ने राजनीति से दूर रहकर अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बनाई है। योग प्रशिक्षक रह चुकीं सारा समाजसेवा में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। वह महिलाओं का आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी मानती हैं।

सारा चाहती हैं महिलाओं की आजादी और इतनी छूट कि वे जो करना चाहती हैं, सब कर सकें। खास बात यह कि राजनीतिक परिवार की सारा ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में राजनीति पर बात करने में रुचि नहीं दिखाई। वह कश्मीर और कश्मीरी शिल्प से काफी लगाव रखती हैं।

आप समाजसेवा और घर-परिवार में संतुलन कैसे बनाती हैं? इस सवाल उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आजकल के समय में हर महिला अपने घर और काम में संतुलन बना रही है और यह बहुत जरूरी भी है। महिलाओं का आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। महिलाओं को आजादी मिलनी चाहिए, ताकि वे वह सब कर सकें, जो करना चाहती हैं।”

सारा ने अगले ही पल कहा, “महिलाओं के लिए अपने बच्चों को संभालना बहुत जरूरी है, क्योंकि वह भावी पीढ़ी हैं। लेकिन ईश्वर ने हमें जो ज्ञान और प्रतिभा दी है, उसका भी इस्तेमाल करना..उसे भी साझा करना चाहिए। केवल परिवार तक सीमित रहने से आप दुनिया को नहीं समझ सकते, इसके लिए बाहर निकलना पड़ता है।”

सारा महिला सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों के काम करती हैं। वह कई समाजसेवी संगठनों का भी हिस्सा हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की बात पर जोर देते हुए सारा कहती हैं, “आजकल के दौर में महिला को किसी पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्हें आर्थिक तौर पर सशक्त होना चाहिए। खास बात यह है कि जब आपका परिवार आपको घर और काम में संतुलन बनाते हुए देखता है..आपकी प्रतिभा और लगन को देखता है तो वह भी धीरे-धीरे आपका समर्थन करने लगता है। इसलिए आज के समय में हर महिला को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और इसके लिए उसे खुद पहल करनी पड़ेगी।”

वह कहती हैं, “महिलाएं सिर्फ घर या बच्चों का हवाला नहीं दे सकतीं। उदाहरण के लिए पुरुष भी अगर ऐसा सोचने लगे कि अगर मैं ऑफिस जाऊंगा तो खाना टेबल पर कैसे आएगा तो फिर काम कैसे चलेगा..वह यह सब नहीं सोचते हैं तो महिलाएं क्यूं सोचें। महिलाओं को चाहिए कि वह अपने घरदारी के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को भी निखारें और उसे दुनिया में पहचान दिलाएं।”

हाल ही में सारा ने नई दिल्ली में पश्मीना शॉलों की एक प्रदर्शनी का हिस्सा बनीं। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक क्यूरेटर की भूमिका में हूं। मैंने वरुणा आनंद के पशमीना शॉलों के संकलन को देखा और मुझे लगा कि मैं इसका हिस्सा बन सकती हूं। मैंने बचपन में ऐसी शॉलें खूब देखी हैं, मगर आजकल ऐसी शॉलें बमुश्किल ही मिलती हैं। इन कारीगरों ने बहुत सुंदर शॉलें बनाई हैं। ये शॉलें कपड़े और डिजाइन के मामले में काफी अलग होती हैं।”

उन्होंने कहा, “मैंने और इस संस्था से जुड़े लोगों ने महसूस किया कि कश्मीर और कश्मीरी कारीगरों में अभी भी वह प्रतिभा है, जिसे हमें बाहर निकालना है। हम यह सोच रहे थे कि इसे कैसे देश के अन्य हिस्सों तक इसे पहुंचाएं। आखिर में मैंने इसके एक संकलन के क्यूरेटर की भूमिका निभाने का फैसला किया।”

चूंकि सारा खुद कश्मीर से हैं, ऐसे में उन्होंने इन शॉलों से जुड़ी विधि और कारीगरों के काम को काफी करीब से देखा है। पश्मीना से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए वह कहती हैं, “इन शॉलों को कारीगर बहुत मेहनत और लंबे वक्त में बना पाते हैं। इनमें उनकी मेहनत और हुनर झलकती है। आजकल पूरे देश में पश्मीना के नाम पर कई तरह की दूसरी शॉलें भी बेची जाती हैं, लेकिन असल में वह चीन में बनीं मशीनों की होती हैं और हमारे देश में हमारे ही पश्मीना के नाम से बेची जाती हैं। पश्मीना के बारे में जिन लोगों को नहीं पता है, उनके लिए इसकी पहचान करना मुश्किल होता है। असल पश्मीना पूरी तरह प्राकृतिक होता है। इसमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं होती।”

आप एक बड़े राजनीतिक परिवार की बेटी और बहू हैं। अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में क्या आप किसी तरह की भूमिका में नजर आएंगी? इस सवाल पर सारा मुस्कुराते हुए कहती हैं, “अभी तो मैं अपने काम में बहुत व्यस्त हूं। मेरे परिवार के लोग अपना काम कर रहे हैं और मैं अपना काम कर रही हूं। हम सभी अपने-अपने काम में व्यस्त हैं और बहुत खुश हैं।”

–आईएएनएस

ओपिनियन

समाज में बदलाव के लिए अपने घर में झांकने की जरूरत : निकिता आनंद

साल 2003 की मिस इंडिया का कहना है कि महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न पर लगाम लगाने व समाज में सुधार और बदलाव लाने के लिए घर से शुरुआत करनी चाहिए और बाहर के बजाय सबसे पहले घर में झांककर देखना चाहिए कि घर में क्या हो रहा है।

Published

on

By

नई दिल्ली, 7 दिसंबर | साल 2003 की मिस इंडिया टाइटल विजेता व अभिनेत्री निकिता आनंद का मानना है कि समाज में कोई भी सुधार लाने के लिए हमें सबसे पहले अपने घर में झांककर देखना चाहिए और घर से सुधार व बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।

निकिता हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंटरनेशनल वीमेन पॉलिटेक्निक’ द्वारा आयोजित ‘मिराकी 2018’ कार्यक्रम का हिस्सा बनीं, जहां उन्होंेने आईएएनएस से बात की।

निकिता से जब पूछा गया कि मॉडलिंग में उनका कैसे आना हुआ तो उन्होंने आईएएनएस को बताया, “मैं आर्मी बैकग्राउंड से हूं मेरे पिता डॉक्टर हैं। 10वीं के बाद या 12 वीं के आसपास मेरी मॉडलिंग शुरू हो गई थी और मैंने काफी लोकल पेजेन्ट्स भी जीते हैं और साथ ही साथ प्रोफेशनल रैंप वॉक भी शुरू कर दिया था और मैं एनआईएफटी की स्टूडेंट थीं तो फैशन डिजाइनिंग भी हो रही थी और फैशन रैंप वॉक भी हो रहा था। मुझे मिस इंडिया के लिए पार्टिसिपेट करने का ख्याल आया और थोड़ा सोचने के बाद हिस्सा ले लिया और फिर मैंने मिस इंडिया का टाइटल जीत लिया।”

टीएलसी के शो ‘ओ माई गोल्ड’ की मेजबानी कर चुकीं निकिता को वास्तविक जीवन में गोल्ड के बजाय प्लेटिनम ज्यूलरी ज्यादा पसंद है। शो के बारे में उन्होंने कहा, “इस शो के लएि हमने पूरे देशभर में ट्रैवल किया जो दिलचस्प था। इसमें हमने गोल्ड के बारे में बात की थी, क्योंकि भारत में पारंपरिक आभूषण के तौर पर ज्यादातर पीले सोने का इस्तेमाल होता है। शो करके मुझे मुझे दक्षिण भारतीय और बंगाली ज्यूलरी के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला, लेकिन मुझे निजी तौर पर गोल्ड के बजाय प्लेटिनम और डायमंड ज्यूलरी ज्यादा पसंद है। मैं इनेक आभूषण ज्यादातर पहनती हूं।”

साल 2003 की मिस इंडिया का कहना है कि महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न पर लगाम लगाने व समाज में सुधार और बदलाव लाने के लिए घर से शुरुआत करनी चाहिए और बाहर के बजाय सबसे पहले घर में झांककर देखना चाहिए कि घर में क्या हो रहा है।

उन्होंने कहा, “महिलाओं के साथ उत्पीड़न की बहुत सारी घटनाएं होती हैं। भारत में हर रोज हर क्षण कहीं न कहीं नाइंसाफी होती है। ऐसे लाखों केस होते होंगे जो कि रिपोर्ट नहीं होते हैं। किसी भी क्षेत्र में किसी भी किस्म के इंसान में बदलाव लाने का काम हमेशा शिक्षा से ही होता है। अपने बच्चों को क्या सिखाते हैं यह मायने रखता है। लोगों की मानसिकता होती है कि पहले बाहर देखो, वहां क्या खराब हो रहा है। लेकिन अपने घर में नहीं झांककर देखते कि उनके घर में क्या हो रहा है।”

निकिता ने कहा कि बच्चा स्कूल से ज्यादा वक्त घर में बिताता है, तो घर में अच्छे संस्कार व माहौल देने की कोशिश करनी चाहिए, तभी वह अच्छा नागरिक बन सकेगा। समाज में सुधार और बदलाव लाने की कोशिश घर से की जानी चाहिए। इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाने और समाज में बदलाव लाने के मानसिकता में बदलाव लाना बेहद जरूरी है।

उनका मानना है कि ‘हैशटैगमीटू’ मूवमेंट को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे और महिलाओं को भी आगे आकर अपनी दास्तां बयां करने का प्रोत्साहन मिले।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि इस मूवमेंट को आगे बढ़ाना चाहिए, आवाज तो हर किसी की है तो क्यों एक हिस्से को बोलने दिया जाए और एक हिस्से को दबाया जाए वो नहीं होना चाहिए। जब हम समानता की और सशक्तिकरण की बात करते हैं तो इसका मतलब यही है न कि सबको समान अधिकार मिले। अगर किसी और के आगे आने से और उसकी कहानी आगे आने से किसी और को प्रोत्साहन मिलता है तो ये एक अच्छी बात है। किसी भी महिला के लिए अपने हुए दर्दनाक वाकये को याद करना मुश्किल होता है। उसकी भावना को समझने की कोशिश करनी चाहिए।”

मॉडलिंग में आने की ख्वाहिश रखने वाली लड़कियों के लिए दिए संदेश में उन्होंने कहा, “सबसे पहले आपको तय करना चाहिए कि आपको कहां जाना है, क्योंकि यह आसान लाइन नहीं है, आपके पास जरूरी क्राइटेरिया होनी चाहिए जैसे रैंप वॉक के लिए एक परफेक्ट बॉडी स्ट्रक्चर और हाइट होनी चाहिए। अगर, आपको प्रिंट मॉडलिंग के लिए जाना है तो फिर आपके पास वैसा चेहरा-मोहरा, भाव-भंगिमा होनी चाहिए, जिसे कैमरा अच्छे से कैप्चर कर सकें। आप किसी भी फील्ड को बस इसलिए नहीं चुने कि वो आपको आकर्षित कर रहा है, बल्कि अच्छे से आकलन कर लें कि आप उसके लायक है या नहीं।”

निकिता ने ‘लाइफ में कभी-कभी’ और ‘फोर टू का वन’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है। लेकिन अब वह फिल्में नहीं कर रही हैं। फिल्मों से दूरी बनाने के बारे में उन्होंने कहा, “मैंने फिल्मों में काम किया है, लेकिन मुझे टेलीविजन प्रेजेंट करना या फिर लाइव शो करना ज्यादा पसंद है। आजकल मैं गायन का भी प्रशिक्षण ले रही हूं आगे जाकर मैं गायन में भी परफार्मेस दूंगी। अगर मैं टीवी की बात करूं तो मैंने लाइफस्टाइल के अलावा स्पोर्ट्स शो भी बहुत किया है, क्रिकेट पर भी बहुत शो किया है। मुझे टीवी बहुत पसंद आता है, क्योंकि निजी जिंदगी में मैं बहुत आर्गनाइज हूं और यही चीज टीवी में भी है।”

–आईएएनएस

Continue Reading

ओपिनियन

सहित्य साधना सृजन की चीज : वीणा ठाकुर

कथाकार वीणा का कहना है कि पुरस्कार एक उपलब्धि होती है, इसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन साहित्य सृजन की चीज है, जिसका सही मूल्यांकन पाठक ही करते हैं।

Published

on

By

veena thakur maithili sahitya
Picture Cridit : Swatva Samachar

दरभंगा, 6 दिसंबर | सर्वोच्च साहित्यिक संस्था साहित्य अकादमी से मिथिला क्षेत्र की समृद्ध मैथिली भाषा ही बिहार को अमूमन हर साल पुरस्कार दिलाती रही है। इस बार इस पुरस्कार के लिए दरभंगा की रहने वाली कथाकार प्रो.वीणा ठाकुर को चुना गया है। वीणा का चयन उनके कथा-संग्रह ‘परिणीता’ के लिए किया गया है।

वीणा का कहना है कि साहित्य साधना की चीज है। किसी भी कृति का समय खुद मूल्यांकन करता है, इस कारण साहित्यकारों को हड़बड़ी में नहीं, बल्कि किसी भी रचना के लिए धैर्य रखने की जरूरत है।

बचपन से ही लिखने-पढ़ने की शौक रखने वाली वीणा अपने संस्मरणों को याद करते हुए बताती हैं, “जब मैं पांचवीं कक्षा में थी, तभी तुलसीदास की रामचरित मानस पढ़ ली थी। यही नहीं, छठे वर्ग की पढ़ाई के दौरान ही घर से पैसे चुराकर विमल मित्र के बांग्ला उपन्यास का हिंदी अनुवाद ‘खरीदी कौड़ियों का मोल’ खरीदकर लाई थी और उसे मैंने पढ़ा था। पैसे चुराने को लेकर मुझे घर में डांट भी पड़ी थी।”

मधुबनी जिले के भवानीपुर की बेटी और दरभंगा के पंचोभ गांव की बहू वीणा ने अकादमी पुरस्कार की घोषणा के बाद आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि यह सम्मान मैथिली भाषा का है। इस पुरस्कार के बाद उनकी जिम्मेवारी और बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कहा, “वैसे तो साहित्यकारों के लिए कई पुरस्कार हैं, लेकिन साहित्य अकादमी पुरस्कार साहित्यकारों के लिए सर्वोच्च पुरस्कार है। मुझ पर ईश्वर की असीम अनुकंपा है कि इस पुरस्कार के लिए मेरा नाम चयनित हुआ।”

कथा-संग्रह ‘परिणीता’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस कथा संग्रह में वैसे तो कई कहानियां हैं, मगर कथा ‘निरूत्तरित प्रश्न’ आज की जीवनशैली के काफी नजदीक है। उन्होंने कहा कि इसमें बुढ़ापे की अवस्था में पहुंचने और पुत्रों के रवैये को बताया गया है।

उपन्यास ‘भारती’, कथा-संग्रह ‘आलाप’, समीक्षा ‘मैथिली रामकाव्यक परंपरा’, ‘विद्यापतिक उत्स’, ‘इतिहास दर्पण’, ‘वाणिनी’, ‘मैथिली गीत साहित्यक विकास आ परंपरा’ तथा अनुवाद की पुस्तक ‘हाट-बाजार’ और ‘भारतीय कविता संचयन : हिंदी’ की रचनाकार वीणा का कहना है कि आज के युवा साहित्यकार किसी भी काम में हड़बड़ी में रहते हैं और तुरंत सभी कुछ पा लेना चाहते हैं।

उनका मानना है साहित्य हड़बड़ी नहीं, धैर्य की चीज है, जिसमें आपकी कृति या रचना को पाठक अवलोकन और मूल्यांकन करते हैं।

कथाकार वीणा का कहना है कि पुरस्कार एक उपलब्धि होती है, इसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन साहित्य सृजन की चीज है, जिसका सही मूल्यांकन पाठक ही करते हैं।

मधुबनी जिले के भवानीपुर गांव में प्रो. मोहन ठाकुर के घर 19 मार्च, 1954 को जन्म लेने वाली और दरभंगा के पंचोभ गोव में पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ़ दिलीप झा की पत्नी वीणा ठाकुर बिरला फाउंडेशन के प्रतिष्ठित सम्मान के लिए गठित मैथिली भाषा समिति की संयोजिका हैं।

ललित नारायण विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर मैथिली विभाग की पूर्व अध्यक्ष वीणा की प्रारंभिक शिक्षा सहरसा में हुई और उच्च शिक्षा भागलपुर विश्वविद्यालय में हुई।

मैथिली भाषा के विषय में पूछे जाने पर प्रोफेसर वीणा कहती हैं, “मैंने तो मैथिली भाषा मां की गोद में सीखी। मैं इस भाषा की कृतज्ञ हूं। मेरे लिए यह भाषा नहीं, मेरा साहित्य सफर है। यही कारण है कि मेरी कहानियों में परंपरा, साहित्य, संस्कृति के साथ आधुनिकता से मैथिली के जुड़ने की भी कहानी रहती है।”


Continue Reading

ओपिनियन

आज के भारतीय सिनेमा में कंटेंट महत्वपूर्ण : मेघना गुलजार

“अब लोग कंटेंट के भूखे हैं..चीजें बदल गई हैं। पहले लोग अक्सर बड़े पर्दे पर बस अपने पसंदीदा सितारों को देखने के लिए थिएटर जाते थे, उन्हें कहानी से कोई मतलब नहीं होता था और अब वही लोग हैं जो कहानी के बारे में जानना चाहते हैं। वे फिल्म की समीक्षा पढ़ते हैं और उसके बाद किसी एक फिल्म को देखने के लिए थिएटर पर जाते हैं।”

Published

on

By

Filmmaker, Meghna Gulzar

फिल्मकार मेघना गुलजार का कहना है कि वह दिन चले गए जब फिल्में स्टार वैल्यू पर हिट हुआ करती थीं। अब भारतीय सिनेमा के दर्शक स्टार के साथ-साथ स्टोरी भी चाहते हैं। उनके मुताबिक, अच्छा कंटेंट आज के समय में फिल्मों की सफलता में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है।

टाइम्स लिटफेस्ट दिल्ली 2018 में रविवार को ‘हिंदी सिनेमा के बदलते चलन’ सत्र में मेघना ने कहा, “भारतीय सिनेमा में पहले हीरो और हिरोइनों को ज्यादा तवज्जो दी जाती थी लेकिन अब चीजें पहले जैसी नहीं हैं। अब लोग अभिनेताओं के अलावा कंटेंट को भी महत्व दे रहे हैं..कंटेंट भारतीय सिनेमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।”

पैनल का हिस्सा रहे गीतकार प्रसून जोशी ने भी इसपर सहमति जताई और कहा कि इस मामले में विकास हुआ है।

उन्होंने कहा, “अब लोग कंटेंट के भूखे हैं..चीजें बदल गई हैं। पहले लोग अक्सर बड़े पर्दे पर बस अपने पसंदीदा सितारों को देखने के लिए थिएटर जाते थे, उन्हें कहानी से कोई मतलब नहीं होता था और अब वही लोग हैं जो कहानी के बारे में जानना चाहते हैं। वे फिल्म की समीक्षा पढ़ते हैं और उसके बाद किसी एक फिल्म को देखने के लिए थिएटर पर जाते हैं।”

सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि भारत में ‘जानकार (इन्फॉर्म्ड) सिनेमा’ का उदय हुआ है।

–आईएएनएस

Continue Reading
Advertisement
MLA Raj Vallabh Yadav
शहर2 hours ago

बिहार: दुष्कर्म मामले में विधायक सहित 6 दोषी

Rafale deal scam
राष्ट्रीय3 hours ago

राफेल डील: फैसले की रिपोर्ट सही कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची मोदी सरकार

Rahul Gandhi
राजनीति4 hours ago

ट्वीट में राहुल ने छत्‍तीसगढ़ सीएम के नाम का किया इशारा

Amitav Ghosh-
मनोरंजन4 hours ago

अमिताव घोष ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले पहले अंग्रेजी लेखक

RAHUL
चुनाव4 hours ago

छत्तीसगढ़ में रविवार को होगी मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा

shaan and arjit
मनोरंजन4 hours ago

शान-अरिजीत ‘संगीत महासम्मान’ पुरस्कार से सम्मानित

लाइफस्टाइल5 hours ago

खूबसूरती निखारने के लिए मार्केट में आया फायर थेरेपी ब्यूटी ट्रेंड

Marriage
लाइफस्टाइल5 hours ago

शादीशुदा जिंदगी हो गई है बोरिंग तो करें ये 5 काम

pv-sindhu
खेल5 hours ago

बैडमिंटन : इंतानोन को हराकर वर्ल्ड टूर के फाइनल में सिंधु

Dinesh vijen-
मनोरंजन5 hours ago

प्रोड्यूसर दिनेश विजन के रिसेप्शन में पहुंचे ये बॉलीवुड सितारे

jewlary-
लाइफस्टाइल4 weeks ago

सर्दियों में आभूषणों से ऐसे पाएं फैशनेबल लुक…

Congress-reuters
राजनीति3 weeks ago

संघ का सर्वे- ‘कांग्रेस सत्ता की तरफ बढ़ रही’

Phoolwaalon Ki Sair
ब्लॉग4 weeks ago

फूलवालों की सैर : सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक

Sara Pilot
ओपिनियन3 weeks ago

महिलाओं का आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी : सारा पायलट

Bindeshwar Pathak
ज़रा हटके3 weeks ago

‘होप’ दिलाएगा मैन्युअल सफाई की समस्या से छुटकारा : बिंदेश्वर पाठक

bundelkhand water crisis
ब्लॉग3 weeks ago

बुंदेलखंड में प्रधानमंत्री के दावे से तस्वीर उलट

Toilets
ब्लॉग3 weeks ago

लड़कियों के नाम, नंबर शौचालयों में क्यों?

Tigress Avni
ब्लॉग3 weeks ago

अवनि मामले में महाराष्ट्र सरकार ने हर मानक का उल्लंघन किया : सरिता सुब्रमण्यम

Cervical
लाइफस्टाइल4 weeks ago

ये उपाय सर्वाइकल को कर देगा छूमंतर

Ranveer singh-
मनोरंजन2 weeks ago

दीपिका-रणवीर के रिसेप्शन में पहुंचे बॉलीवुड के ये सितारे, देखें तस्वीरें

Kapil Sibal
राष्ट्रीय1 day ago

राफेल पर सिब्‍बल का शाह को जवाब- ‘जेपीसी जांच से ही सामने आएगा सच’

Rajinikanth-
मनोरंजन3 days ago

रजनीकांत के जन्मदिन पर ‘पेट्टा’ का टीजर रिलीज

Jammu And Kashmir
शहर6 days ago

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में बर्फबारी

Rajasthan
चुनाव1 week ago

राजस्थान में सड़क पर ईवीएम मिलने से मचा हड़कंप, दो अफसर सस्पेंड

ISRO
राष्ट्रीय1 week ago

भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह कक्षा में स्थापित

ShahRukh Khan-
मनोरंजन2 weeks ago

शाहरुख की फिल्म ‘जीरो’ का दूसरा गाना रिलीज

Simmba-
मनोरंजन2 weeks ago

रणवीर की फिल्म ‘सिम्बा’ का ट्रेलर रिलीज

Sabarimala
राष्ट्रीय2 weeks ago

सबरीमाला विवाद पर केरल विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने दिखाए काले झंडे

Amarinder Singh
राष्ट्रीय3 weeks ago

करतारपुर कॉरिडोर शिलान्‍यास के मौके पर बोले अमरिंदर- ‘बाजवा को यहां घुसने की इजाजत नहीं’

मनोरंजन3 weeks ago

रजनीकांत की फिल्म ‘2.0’ का पहला गाना ‘तू ही रे’ रिलीज

Most Popular