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उत्तराखंड: अल्मोड़ा बस हादसे में 13 लोगों की मौत

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा से एक दर्दनाक हदासे होने की खबर सामने आई है। जहां टोटाम इलाके में एक बस खाई में जा गिरी। जानकारी के मुताबिक इस हादसे में 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हो गए।

हादसे की खबर मिलते ही मौके पर बचावकर्मी पहुंच गए। बस में से लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बताया गया कि बस देघाट से रामनगर आ रही थी।

जहां यह बस खाई में गिरी है वह स्थल रामनगर से 60 किमी. दूर है। खबरों के मुताबिक बस अनियत्रित होकर खाई में जा गिरी। अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। उत्तराखंड डिजास्टर मैनेजमेंट फोर्स और पुलिस के जवान रेस्क्यू में जुटे हुए हैं।

Wefornews Bureau

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ताजगंज में नहीं लगने दी शाखा तो डीएम-एसपी पर गिरी गाज

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आरएसएस की शिकायत पर योगी सरकार ने तीन पुलिस अफसरों को हटा दिया है।

बता दें कि पिछले सोमवार को आगरा के ताजगंज में पुलिस अधिकारियों ने संघ की एक शाखा रोक दी थी। इलाक़े के मुस्लिम समाज की शिकायत पर ऐसा हुआ था। आरोप था कि आरएसएस के लोग जिस जगह पर शाखा चलाते हैं वहां एक मज़ार है लेकिन स्वयंसेवक वहां मीटिंग करने की ज़िद करने लगे। पुलिस की टीम पहुंची। संघ के विरोध के बावजूद शाखा रोक दी गई लेकिन यहीं से विवाद बढ़ गया।

संघ और बीजेपी के नेताओं ने आसमान सर पर उठा लिया। बीजेपी की सरकार में संघ की शाखा बंद हो जाए। पार्टी के विधायकों और नेताओं ने सीएम योगी आदित्यनाथ को सारी बात बताई। लखनऊ से आदेश जारी हुआ।

इसके बाद योगी सरकार ने अनुपम सिंह को आगरा के सिटी एसपी के पद से हटा कर लखनऊ में एटीएस का एएसपी बना दिया। गौरव दयाल को आगरा के डीएम पद से हटा कर पर्यटन विभाग का विशेष सचिव बना दिया है। संघ के कहने पर आगरा के एसएसपी अमित पाठक ने ताजगंज के थानेदार शैलेंद्र सिंह और चौकी इंचार्ज राजकुमार यादव को भी हटा दिया है। शैलेंद्र का तबादला शिकायत सेल में हो गया है। यादव को तो लाइन हाज़िर कर दिया गया है।

जिन पुलिस अफ़सरों ने संघ की शाखा बंद करवाई थी, सब हटा दिए गए। आगरा के डीएम गौरव दयाल का भी तबादला हो गया। लेकिन एसएसपी अमित पाठक अपनी कुर्सी बचानें में कामयाब रहे।

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मध्य प्रदेश : हज यात्रियों को प्रशिक्षण 26 जून से शुरू

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मध्य प्रदेश से हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को 26 जून से प्रशिक्षण दिया जाएगा। हज कमेटी द्वारा इन यात्रियों को प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों को यहां विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

आधिकारिक तौर पर सोमवार को दी गई जानकारी में बताया गया है कि पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ललिता यादव ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि हज-2018 के लिए 4758 यात्रियों का चयन किया गया है।

इस विशेष प्रशिक्षण में हज कमेटी के अध्यक्षों को भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षिकों को विशेष प्रशिक्षण गाइड तथा अन्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। हज यात्रियों को 26 जून से 25 जुलाई के बीच प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस वर्ष सऊदी अरब में प्रदेश के हज यात्रियों की सहायता के लिए 23 खादिमुल हुज्जाजों (विशेष जानकार) को भेजा जा रहा है। हर 200 हज यात्रियों के बीच में एक खादिमुल हुज्जाज की व्यवस्था की गई है।

मध्यप्रदेश राज्य हज कमेटी के सचिव एवं कार्यपालन अधिकारी दाऊद अहमद खान ने बताया है कि मुंबई इम्बार्केशन पॉइंट से 29 से 31 जुलाई तथा एक से 12 अगस्त तक और भोपाल इम्बार्केशन पॉइंट से छह एवं सात अगस्त को विभिन्न फ्लाइटों से हज यात्रियों को हज यात्रा पर भेजा जाना प्रस्तावित है। इस मौके पर अन्य अधिकारी एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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जहरीली हवा पेड़ों में कुपोषण पैदा कर रही

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वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य पर असर डालने के अलावा पेड़ों को भी कुपोषित कर रहा है। वायु प्रदूषण से एक कवक (फंजाई) को नुकसान पहुंच रहा है, जो पेड़ की जड़ों को खनिज पोषक तत्व प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।

एक नए शोध में यह पता चला है। माइकोराइजा कवक पेड़ों की जड़ों में पाया जाता है जो मिट्टी से पोषक पदार्थ प्राप्त करता है। ये कवक पेड़ से कार्बन के बदले उसे मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम देते हैं। यह पौधे व कवक का सहजीवी संबंध पेड़ के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

शोध में पता चलता है कि नाइट्रोजन व फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों के उच्च स्तर को माइकोराइजा पोषक पदार्थ के बजाय प्रदूषक में बदल देता है। कुपोषण का संकेत पत्तियों के पीले होने या पत्तियों के ज्यादा गिरने के रूप में देखा जा सकता है।

लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोध के प्रमुख मार्टिन बिडराटोनडो ने कहा, “यह पूरे यूरोप में पेड़ के कुपोषण की यह प्रवृत्ति खतरनाक चेतावनी दे रही है, जो वनों को कीटों, बीमारियों व जलवायु परिवर्तन के लिए असुरक्षित बना रही है।”

उन्होंने कहा, “मिट्टी और जड़ों में होने वाली प्रक्रियाओं को अक्सर अनदेखा किया जाता है, मान लिया जाता है, क्योंकि इसकी सीधे तौर पर अध्ययन मुश्किल होता है। लेकिन पेड़ की क्रियाविधि के आकलन के लिए यह महत्वपूर्ण है।”

–आईएएनएस

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