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यदि ‘पूत के पाँव पालने में ही नज़र आते हैं’ तो अब से यूपी में परीक्षा में नक़ल ख़त्म!

yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ को ‘सिर मुड़ाते ही ओलों’ का मुक़ाबला करना है! उत्तर प्रदेश में ये वक़्त परीक्षाओं का है। चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश में सक्रिय नक़ल-माफ़िया को बड़ा मुद्दा बनाया था। परीक्षाओं में होने वाली नक़ल को राजनीतिक मुद्दा बनाने की वजह बहुत वाज़िब थी। क्योंकि उत्तर प्रदेश में जारी नक़ल का गोरखधन्धा क़रीब 5 हज़ार करोड़ रुपये का जा पहुँचा है! नक़ल के ज़रिये परीक्षा पास कराने का ठेका प्रति छात्र 10 हज़ार से 1 लाख रुपये तक होता है। मनचाहे परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा देने के लिए 50 हज़ार रुपये तक लगते हैं। परीक्षा केन्द्र बनवाने का रेट प्रति सौ छात्रों पर कम से कम एक लाख रुपये होता है।

परीक्षाओं में नक़लख़ोरी की समस्या और चुनौती सिर्फ़ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। बल्कि इस राजरोग ने उत्तर भारत के तक़रीबन सभी हिन्दी भाषी राज्यों को अपने बाहुपाश में जकड़ रखा है। मज़े की बात ये है कि अभी ज़्यादातर हिन्दी भाषी राज्यों में बीजेपी की हुक़ूमत है। इसीलिए यदि नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दशकों से जारी इस महामारी पर क़ाबू पा लेते हैं तो वो न सिर्फ़ उनके लिए निजी तौर पर बहुत बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि इससे बीजेपी की शान में भी बेहद इज़ाफ़ा होगा। साथ ही योगी अन्य बीजेपी शासित राज्यों के लिए भी शानदार नज़ीर पेश करेंगे। लेकिन यदि नक़ल की रोकथाम के मोर्चे पर योगी फिस्सडी साबित हुए तो बीजेपी की साख पर ज़बरदस्त बट्टा भी लगेगा।

अभी वक़्त योगी को शुभकामनाएँ देने का है कि परमात्मा और हिन्दुत्व उन्हें इतनी शक्ति और साहस दे कि वो उत्तर प्रदेश को नक़ल मुक्त करने का बीजेपी का चुनावी वादा निभाकर दिखाने में सफल हों। काश! अबकी बार से ही नक़ल की प्रवृत्ति इतिहास में दफ़्न हो जाए।
आमीन!

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बीजेपी का अगला अहम वादा उत्तर प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था को चमकाना होगा। चुनाव प्रचार में इस मुद्दे ने ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरी थीं। लेकिन भारी संशय है कि संविधान की शपथ लेने के बाद क्या उच्चशृंखल हिन्दुत्ववादियों पर क़ानून का डंडा चल पाएगा? क्या हिन्दू-मुस्लिम दंगों का शर्मनाक सिलसिला वाक़ई में हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा? क्या अख़लाक़ जैसे लोगों को घर में घुसकर मार डालने की प्रवृत्ति अब ख़त्म हो जाएगी? क्या जिन-जिन बीमारियों ने भारतवर्ष के पुलिस तंत्र को खोखला कर रखा है, उनका उत्तर प्रदेश में यथाशीघ्र सफ़ाया हो जाएगा? यदि इन सवालों का जवाब ‘हाँ’ में हो सके तो उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार को अनन्त काल तक क्यों नहीं रहना चाहिए!

क़ानून-व्यवस्था के लिहाज़ से बीजेपी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में जो वादे किये हैं, ज़रा उन पर भी ग़ौर-फ़रमाते चलें।
• महिला सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो दल
• 1.5 लाख पुलिस वालों की भर्ती
• हर ज़िले में 3 महिला थाना, और
• भू-माफ़िया के ख़िलाफ़ स्पेशल टास्क फोर्स का गठन।

उम्मीद करनी चाहिए कि इनमें से भर्ती को छोड़ सभी वादों को नयी सरकार इसी महीने पूरा कर देगी। हालाँकि, बीजेपी के घोषणापत्र में इन वादों को निभाने के लिए किसी समय-सीमा को तय नहीं किया गया था। फिर भी सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक कौशल का दम भरने वालों से इतनी अपेक्षा रखना व्यावहारिक क्यों नहीं होगा? बाक़ी, योगी के मुख्यमंत्री बनते ही श्मशान-क़ब्रिस्तान मुद्दे का समाधान तो अपने-आप ही हो गया। अब हिन्दू-मुसलमान के बीच किसी भेदभाव की गुंज़ाइश ही नहीं रहेगी! क्योंकि अब आरोप लगाने वाले मुद्दई ही मुंसिफ़ बन चुके हैं! चरित्रवान मुंसिफ़ों का ख़ानदान अब निश्चित रूप से सुशासन स्थापित करेगा? गुंडाराज का अब नामोनिशाँ नहीं दिखेगा? ख़ाक़ी वर्दी में तो अब कोई पाप नहीं होगा!

अब उत्तर प्रदेश में विकास की वो आँधी न सिर्फ़ फिर से चलेगी बल्कि कई गुना तेज़ी से चलेगी जैसी कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में चला करती थी! अभी तो बस उसका आग़ाज़ हुआ है! दिल थाम कर बैठिए, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले यूपी निश्चित रूप से उत्तम प्रदेश बन जाएगा! इस पृथ्वी के सबसे बड़े सत्यवादियों श्रीमान मोहन भागवत जी, श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी और श्रीमान अमित शाह जी की कही गयी बातें किसी भी सूरत में असत्य साबित नहीं हो सकतीं!

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