उन्नाव घटना पर गम, गुस्सा और अनसुलझे सवाल | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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उन्नाव घटना पर गम, गुस्सा और अनसुलझे सवाल

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि यहां कई दशक में ऐसी घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को पता नहीं क्या हो गया है। थोड़ी सी बात पर मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं।

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unnao rape case

उन्नाव, 7 दिसम्बर | उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता ने 43 घंटे जीवन से संघर्ष किया, मगर वह हार गई। गांव और उसके आस-पास के लोगों में घटना को लेकर गम, गुस्सा और कुछ अनसुलझे सवाल भी हैं। लड़की के घर में पहले से ही मातम पसरा हुआ था, मौत के बाद पूरा गांव गमगीन है। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। मामले के तूल पकड़ते ही बड़ी संख्या में राजनीतिक पार्टियों के लोगों का आना जाना लगा हुआ है। कुल मिलाकर सब यह दिखाने को तैयार हैं कि हम परिवार के साथ सबसे पहले खड़े हैं।

आक्रोश के चलते शुक्रवार को पुलिस ने अरोपियों को छिपाकर पीएचसी से मेडिकल करवाया। फिर कोर्ट में पेश किया। अब सभी आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं।

मामले में गांव की प्रधान के पति और बेटे को भी आरोपी बनाया गया है।

गांव वालों के अनुसार, दोनों परिवारों में दो साल पहले तक बहुत मधुर संबंध थे। पीड़ित परिवार का संबंध गांव के प्रधान से भी अच्छा था।

खुद पीड़ित लड़की के पिता इस बात को बताते हैं कि प्रधान परिवार उनकी काफी मदद करता था और सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल जाता था। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबंध खराब हो गए।

18 जनवरी 2018 को रायबरेली कोर्ट में पीड़िता और आरोपित शिवम त्रिवेदी ने शादी के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था।

अनुबंध में लिखा गया था कि शादी के बाद वह लड़की का पूरा ख्याल रखेगा। उसे हर्जा, खर्चा देगा। उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी शिवम की है। अनुबंध के कुछ दिन बाद ही सारी कसमें टूट गई। पीड़िता को अकेला छोड़कर शिवम चला गया। उसके बाद, पीड़िता ने अपना हक मांगा तो उसने धमकी दी गई। गांव में पंचायत हुई तो शिवम के घरवालों ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि रुपये ले लो और शिवम को छोड़ दो।

लड़की की भाभी बताती हैं, “दोनों ने कब शादी की थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। हम लोगों को शादी के बारे में तब पता चला, जब लड़के ने यहां पर लड़ाई-झगड़ा किया था। तब लड़की ने बताया कि उसने कोर्ट में शिवम से शादी की है, लेकिन अब वह उसे मानने से इनकार कर रहा है।”

उधर आरोपी शिवम की मां ने कहा, “न मेरे बेटे ने शादी की, न ही इस घटना में शामिल था, उसे तो सिर्फ फंसाया जा रहा है।”

इस मामले में गांव की प्रधान शांति देवी ने कहा, “मेरे पति और बेटे को राजनीति के कारण फंसाया जा रहा है। वह निर्दोष हैं। इस मामले की चाहे जो एजेंसी जांच कर ले।”

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि यहां कई दशक में ऐसी घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को पता नहीं क्या हो गया है। थोड़ी सी बात पर मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं। मामला शांति से सुलझाया जा सकता था।

आईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया, “पीड़िता के बयान के आधार पर सभी पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। सारे साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं। हमें जल्द से जल्द वास्तविक दोषियों का पता लगाना है।”

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नृत्यांगना मंजरी को कव्वाली पर कथक करने से रोका गया

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Kathak Dancer Manjari Chaturvedi
प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी (फोटो: आईएएनएस)

लखनऊ। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कथित तौर पर अपनी प्रस्तुति रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि वह एक कव्वाली पर नृत्य प्रस्तुत कर रही थीं। मंजरी ने आरोप लगाया कि जब वह प्रस्तुति दे रही थीं तो अचानक संगीत को बंद कर दिया गया और अगली प्रस्तुति की घोषणा कर दी गई।

उन्होंने एक समाचार चैनल से कहा, “मैंने सोचा कि यह तकनीकी गड़बड़ी है, लेकिन इसके बाद अगली प्रस्तुति की घोषणा कर दी गई। इससे साफ हो गया कि कोई गड़बड़ी नहीं है। जब मैंने संबंधित अधिकारियों से पूछा तो मुझसे कहा गया कि यहां कव्वाली नहीं चलेगी।”

मंजरी ने कहा कि उन्हें प्रस्तुति के लिए 45 मिनट का समय दिया गया था और यह पूर्व निर्धारित था, फिर भी उनकी प्रस्तुति रोकी गई और कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा, “मैंने इससे पहले अपने दो दशक पुराने करियर में इस तरह की चीज का सामना नहीं किया।”

संबंधित अधिकारी इस पर टिप्पणी से बचते रहे। एक सरकारी प्रवक्ता ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि प्रस्तुति को समय से पूरा करना था और इसके बाद रात्रि भोज का प्रबंध था।

उन्होंने कहा, “मंजरी चतुर्वेदी दो प्रस्तुति दे चुकी थीं और तीसरी चल रही थी। चूंकि कार्यक्रम देर से शुरू हुई और ब्रज प्रस्तुति भी होनी थी, इसलिए हम चाहते थे कि सभी कलाकारों को अवसर मिले। इस वजह से प्रस्तुति रोकी गई। प्रस्तुति को संगठनात्मक बाध्यताओं की वजह से रोका गया और इसे किसी धार्मिक या भाषाई पूर्वाग्रह की वजह से नहीं रोका गया।”

–आईएएनएस

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संविधान को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर 3 महीने में फैसला ले केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: देश के प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने और प्राइमरी स्कूल के पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान को शामिल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

न्यायाधीश न्यायमूर्ती एन.वी. रमना, नवीन सिन्हा और रामसुब्रमण्यम की पीठ ने यह आदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अश्विनी उपाध्याय की दलील सुनने के बाद दिया है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने और भारतीय संविधान को प्राथमिक स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने से भाषावाद और क्षेत्रवाद समाप्त होगा। राष्ट्रीय एकता और अखंडता मजबूत होगी, आपसी भाईचारा बढ़ेगा और गरीब छात्रों को भी समान अवसर मिलेगा।

उपाध्याय ने कहा कि अच्छे स्कूल के अभाव में तहसील मुख्यालय पर कार्यरत तहसीलदार ए न्यायिक अधिकारी, डॉक्टर, पुलिस इंस्पेक्टर अपने परिवार को जिला मुख्यालय पर रखते हैं इससे आने-जाने में समय बर्बाद होता है और वे ठीक से अपनी ड्यूटी नहीं कर पाते हैं।

गौरतलब है कि इसके पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उपाध्याय की जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि प्रत्येक तहसील में केंद्रीय विद्यालय खोलना और भारतीय संविधान को प्राइमरी स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करना नीतिगत मामला है और इस पर अदालत केंद्र सरकार को निर्देश नहीं दे सकती है।

अपनी याचिका में उपाध्याय ने कहा कि देश में कुल 5464 तहसील हैं, लेकिन केंद्रीय विद्यालय मात्र 1209 हैं, इसलिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलना चाहिए। इससे गरीब बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिलेगी, उन्हें समान अवसर मिलेगा, आपसी भाईचारा बढ़ेगा तथा देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी।

याचिका में आगे कहा गया है कि गरीबी के चलते किसान-मजदूर के होनहार बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा नहीं मिल पाती है। प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से उच्च कोटि की शिक्षा गरीब छात्रों तक पहुंचेगी, जो अभी तक इससे वंचित हैं।

याचिकाकर्ता की दलील थी कि तहसील में रहने वाले तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, कोतवाल, थानेदार, बिजली विभाग के अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अभियंता, लेक्च रर, प्रोफेसर और सरकारी डॉक्टर अपना परिवार साथ नहीं रखते, क्योंकि तहसील मुख्यालय पर उनके बच्चों के लिए अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा व्यवस्था नहीं होती है। प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से उक्त सभी लोग अपना परिवार अपने साथ रख सकेंगे। ऐसे में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रोजाना लंबी यात्रा नहीं करेंगे और छुट्टियों पर नहीं जाएंगे, जिसका सीधा फायदा यह होगा कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जरुरतमंद लोगों को हर समय उपलब्ध रहेंगे और इससे प्रशासनिक कार्य अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

याचिका में कहा गया है कि प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने पर राज्य के सरकारी स्कूलो में प्रतिस्पर्धा आयेगी, फलस्वरूप शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

–आईएएनएस

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निर्भया के दोषियों को अब 1 फरवरी को होगी फांसी

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Nirbhaya Case
निर्भया के दोषी (फाइल फोटो)

दिल्ली का पटियाला कोर्ट हाउस ने निर्भया के चारों दोषियों को 1 फरवरी को फांसी की तारीख मुकर्रर की है। कोर्ट ने कहा है कि पहली फरवरी को सुबह 6 बजे चारो गुनहगारों को फांसी पर लटकाया जाए। इससे पहले दोषियों का डेथ वारेेंट 22 जनवरी के लिए जारी हुआ था।

गौरतलब है कि इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाने की तारीख तय की थी लेकिन इसके बाद दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगा दी थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा निर्भया के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी किया है।

वहीं, इस मामले में नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि जब तक दोषियों को फांसी पर नहीं लटका दिया जाता है, तब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, मुझको पिछले सात साल से तारीख पर तारीख दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम ऐसा है कि जहां दोषी की सुनी जाती है, हर जगह निर्भया के गुनहगारों का ही मानवाधिकार देखा जा रहा है, हमारा मानवाधिकार कोई नहीं देख रहा है।

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