Connect with us

ओपिनियन

मप्र में गायों की दशा ने गौशाला निर्माण की प्रेरणा दी : कमलनाथ

Published

on

Kamal Nath

देश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री रह चुके कमलनाथ एक समय संकट में फंसी विश्व व्यापार वार्ता में भारत का चेहरा थे।

वह कृषि सब्सिडी पर एक समन्वित पश्चिमी गतिरोध के आगे कभी नहीं झुके और एक तरह से विश्व व्यापार संगठन को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने भारतीय किसानों के हितों की पैरवी की।

संप्रग-2 और इसके पहले की कांग्रेस सरकारों में भी कई महत्वपूर्ण पद संभाल चुके और लोकसभा के लिए नौ निर्वाचित हो चुके कमलनाथ हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेहरा थे।

इस 72 वर्षीय राजनेता ने अपने जोरदार चुनावी अभियान के जरिए शिवराज सिंह चौहान के शासन (13 साल) को समाप्त कर दिया। कमलनाथ ने आईएएनएस के साथ एक बेबाक बातचीत में मध्य भारत के प्रमुख राज्य के बारे में अपनी योजनाएं गिनाई।

भाजपा के 15 वर्षो के शासन के बाद, निश्चित रूप से ऐसी कई सारी चीजें होंगी, जिसे उनकी अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार राज्य में दुरुस्त करना चाहती है। आईएएनएस ने उनसे पूछा कि उनके एजेंडे में ऐसी कौन-सी पांच चीजें शीर्ष पर हैं?

नाथ ने कहा, “यह कहना गलत नहीं होगा कि 15 वर्षो के खराब शासन के कारण मध्यप्रदेश बुरी हालत में है। ऐसी बहुत-सी चीजें हैं, जिन्हें दुरुस्त करने की जरूरत है। हमारी पहली प्राथमिकता राज्य में किसानों की बेहतरी और कृषि क्षेत्र का विकास होगी। किसान भाजपा शासित राज्य में सबसे ज्यादा पीड़ित थे। उन्हें बमुश्किल ही कभी उनके काम का इनाम मिला।”

उन्होंने कहा, “कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पूर्ववर्ती सरकार ने कई सारे वादे किए थे। हालांकि इस बाबत बहुत कम काम किया गया। दूसरा काम राज्य की वित्तीय सेहत सुधारने का होगा। भाजपा सरकार के अंधाधुंध खर्च के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है।”

उन्होंने कहा, “हमें इसे दुरुस्त करने की जरूरत है। हम राज्य में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। बीते दशक के दौरान संसाधनों को बर्बाद किया गया है, उसे दुरुस्त करने की जरूरत है। जैसा कि हमने वादा किया है, हम महिलाओं के लिए भी राज्य में सुरक्षित और स्वस्थ्य माहौल बनाएंगे। इनसब के अलावा, आपूर्ति प्रणाली को भी मजबूत करने की जरूरत है, ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।”

उन्होंने सत्ता संभालते ही कृषि ऋण माफ करने के अपने वादे को पूरा किया, जिसे कईयों ने खराब आर्थिक निर्णय कहा। लेकिन क्या उनकी सोच ने किसान समुदाय की बुरी दशा को प्रतिपादित किया है, जिसके कारण उन्हें यह विकल्प चुनना पड़ा?

उन्होंने कहा, “जब से मैं मुख्यमंत्री की भूमिका में हूं, यहां तक कि इसके पहले भी मुझसे बार-बार यह प्रश्न पूछा गया है। मध्यप्रदेश के किसानों की दशा देखते हुए, हमें उनकी बेहतरी के लिए कोई कदम उठाना था और कर्जमाफी एक तर्कसंगत समाधान था। हम एक कृषि प्रधान देश हैं, इसके बावजूद यहां कई किसान कर्ज में पैदा होते हैं और कर्ज में ही मर जाते हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने कहा, “हम राज्य के किसानों की मदद करके उनपर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं। वे हमारे प्रमुख अन्नदाता हैं और उनके ऋण माफ करना उनकी दशा सुधारने और राज्य में विकास का सूत्रपात करने की दिशा में एक प्रयास है। मैं इसे राज्य की भलाई में किए गए दीर्घकालिक निवेश के तौर पर देखता हूं। इसके अलावा मुझे विश्वास है कि जो इसे खराब अर्थशास्त्र कह रहे हैं, वे कृषि व अर्थव्यवस्था के बारे में बहुत कम जानते हैं। हम सभी इस तथ्य से वाकिफ हैं कि बैंक उद्योगों और व्यापारिक घरानों के ऋण माफ करते हैं, कई मामलों में ऋण 50 प्रतिशत तक माफ किया जाता है। अगर व्यापारिक समुदाय के लिए ऋण माफ करना एक अच्छा अर्थशास्त्र है, तो यह कैसे गलत हो गया जब हम इसे आर्थिक रूप से गरीब किसानों के लिए करते हैं?”

कमलानाथ कई केंद्रीय कैबिनेट में लंबे समय तक शीर्ष मंत्री रहे हैं। उनकी नई जिम्मेदारी बिल्कुल अलग है। ऐसे में राज्य की राजनीति में वह कैसे सामंजस्य बिठाते हैं?

उन्होंने कहा, “राज्य की राजनीति केंद्रीय राजनीति से बहुत अलग होती है। कैबिनेट मंत्री और एक मुख्यमंत्री होने में बड़ा अंतर है। राज्य की राजनीति का दायरा बहुत बड़ा होता है और एक मुख्यमंत्री के तौर, चीजें आपके आस-पास सिमटी रहती हैं।”

कमलनाथ ने कहा, “इसके अलावा, चुनौतियां और जिम्मेदारियां बहुत बड़ी होती हैं। केंद्रीय मंत्री के तौर पर मैंने जो बदलाव किए थे, उसके सकारात्मक नतीजे भी आए थे और मैंने राज्यस्तर पर भी इसे फिर से दोहराने का विचार किया है। हालांकि दोनों के बीच जो एक सामान्य बात है, वह जनसेवा है। जो भी राजनीति में मौजूद है, वह जनता और देश की सेवा करने को उत्सुक रहता है और मैं भी यही कर रहा हूं। पिछले चार दशकों के दौरान मैंने जो भी जिम्मेदारी निभाई, उसका मूल उद्देश्य हमेशा जनता की सेवा ही रहा है। मेरा एक मात्र मकसद जनसेवा है।”

निश्चित ही मध्यप्रदेश जैसे पिछड़े राज्य के लिए अपेक्षाकृत यह चुनौती कठिन होगी, क्योंकि आकार के मामले में देश के एक सबसे बड़े राज्य की अपनी अलग समस्याएं हैं? कमलनाथ ने तपाक से जवाब दिया, “किसान आत्महत्या, बेरोजगारी के लिहाज से मध्य प्रदेश में कई सारी चुनौतियां हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य का स्तर काफी नीचे है।”

उन्होंने कहा, “राज्य के पिछड़ेपन के पीछे कुछ बड़े कारण हैं। भारत के दूसरे सबसे बड़े राज्य के रूप में, हमारा क्षेत्रफल बहुत बड़ा है और संभावनाएं असीमित हैं। हालांकि पूर्ववर्ती सरकार ने अवसरों का इस्तेमाल करने के बारे में कभी नहीं सोचा और वे संसाधनों का दोहन करने में व्यस्त रहे। राज्य को ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी से बाहर निकालने के उनके सभी दावे झूठ का पुलिंदा के अलाव कुछ नहीं थे।”

उन्होंने कहा, “पिछले 15 वर्षो में, राज्य की आर्थिक दशा सुधारने से शायद ही कुछ किया गया। विकास का हमारा मॉडल विकेंद्रीकरण का है। हम सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करा रहे हैं, जिससे राज्य का समग्र विकास होगा। हम जिलास्तर पर शासन खड़ा करना चाहते हैं और जमनी स्तर पर विकास सुनिश्चित करना चाहते हैं। सभी सुविधाएं जमीनी स्तर पर मुहैया होंगी, ताकि लोगों को अपना काम कराने के लिए बड़े शहरों में न आना पड़े। राज्य में ऐसे विभाग, परिषद, बोर्ड और विश्वविद्यालय हैं, जहां बदलाव की जरूरत है। हम इन क्षेत्रों की भी पहचान कर रहे हैं।”

कईयों का मानना है कि नाथ एक चालाक राजनेता की तरह प्रतिस्पर्धा में गौ राजनीति कर रहे हैं। गौशालाओं के निर्माण का काम कैसा चल रहा है? सभी जानते हैं कि यह कांग्रेस की एक चुनाव पूर्व योजना थी, लेकिन क्या यह प्रतिगामी नहीं है?

उन्होंने कहा, “‘प्रतिगामी’ शब्द मुझे परेशान करता है, क्योंकि मुझे यह समझ में नहीं आता कि मवेशियों के लिए छत का निर्माण प्रतिगामी कैसे हो सकता है। प्रारंभ में गौशाला का निर्माण हमारे घोषणा-पत्र का हिस्सा नहीं था, लेकिन बाद में इसे शामिल किया गया। एक रैली में मैंने देखा कि कैसे गायों के साथ बुरा बर्ताव किया जा रहा है। यह परेशान करने वाला दृश्य था और इसलिए मैंने अपने घोषणा-पत्र के जारी होने के तीन महीने पहले इसकी घोषणा की।”

कमलनाथ ने कहा, “यह कोई चुनाव पूर्व की योजना नहीं थी, क्योंकि एक पार्टी के नाते हम मवेशी राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं। एक देश में जहां गायों को इतना ज्यादा सम्मान दिया जाता है, मैं उनकी रक्षा करने में विश्वास करता हूं और सभी पंचायतों में गौशाला का निर्माण करना महत्वपूर्ण है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह न तो कोई चुनाव-पूर्व की योजना थी और न कोई प्रतिस्पर्धी योजना ही है। अब, चार महीनों में हम मध्यप्रदेश के विभिन्न गांवों में एक हजार गौशालाओं का निर्माण करने जा रहे हैं, जहां अनाथ गायों की देखभाल की जाएगी। इसमें छत, चापाकल, बायोगैस संयंत्र आदि सुविधाएं होंगी।”

कमलनाथ ने कहा, “गौशालाओं का मॉडल इस तरह से डिजाइन किया गया है कि समाज, किसान और आम आदमी गौशाला को चलाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इससे जनभागीदारी बढ़ेगी और यह मॉडल अधिक विश्वसनीय बनेगा। शहरी विकास विभाग इस परियोजना का नोडल विभाग होगा।”

उन्होंने कहा, “इस परियोजना से ग्रामीण इलाकों में रोजगार सृजन होगा। इससे विभिन्न तरीके से लोगों की भागीदारी के अवसर पैदा होंगे। लोग सरकार द्वारा आवंटित जमीन पर गौशाला बनाकर, गौशाला निर्माण की देखभाल कर, और गौ अभियान व गौ सदन की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेकर इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।”

ओपिनियन

पाकिस्तान को पानी रोकने पर विशेषज्ञों की राय बंटी

Published

on

By

indus water treaty

नई दिल्ली, 16 फरवरी | सीआरपीएफ की टुकड़ी पर गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद कड़ी कार्रवाई करने की मांग को देखते हुए विशेषज्ञ पश्चिम और पूरब की तरफ बहने वाली सिंधु और ब्यास नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, कुछ इसकी संभाव्यता पर शक जता रहे हैं।

जल संसाधन मंत्रालय के सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी एम. एस. मेनन का कहना है कि पाकिस्तान को दिए जानेवाले पानी को रोका जा सकता है। उन्होंने सिंधु जल समझौते पर लंबे समय से काम किया है।

उन्होंने कहा, “हमने अधिक पानी उपभोग करने की क्षमता विकसित कर ली है। स्टोरेज डैम में निवेश बढ़ाकर हम ऐसा कर सकते हैं। झेलम, चेनाब और सिंधु नदी का बहुत सारा पानी देश में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।”

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता पूरब की तरफ बहने वाली नदियों – ब्यास, रावी और सतलुज के लिए हुआ है और भारत को 3.3 करोड़ एकड़ फीट (एमएएफ) पानी मिला है, जबकि पाकिस्तान को 80 एमएएफ पानी दिया गया है।

विवादास्पद यह है कि संधि के तहत पाकिस्तान को भारत से अधिक पानी मिलता है, जिससे यहां सिंचाई में भी इस पानी का सीमित उपयोग हो पाता है। केवल बिजली उत्पादन में इसका अबाधित उपयोग होता है। साथ ही भारत पर परियोजनाओं के निर्माण के लिए भी सटीक नियम बनाए गए हैं।

एक दूसरे सेवानिवृत्त अधिकारी, जो मंत्रालय में करीब दो दशकों तक सिंधु आयुक्त रह चुके हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पानी रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अंतराष्ट्रीय संधि है, जिसका भारत को पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “मैं नहीं समझता कि इस प्रकार का कुछ करना संभव है। पानी प्राकृतिक रूप से बहता है। आप उसे रोक नहीं सकते।”

पूर्व अधिकारी ने कहा कि अतीत में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन लोग ऐसी मांग भावनाओं में बहकर करते रहते हैं।

Continue Reading

ओपिनियन

काले धन को सफेद करने के लिए भावांतर योजना शुरू की गई थी : कमलनाथ

Published

on

kamal nath

प्रमुख राज्यों और सहयोगियों को संभालने वाले एक सशक्त कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस महासचिव कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की सत्ता के केंद्र भोपाल को बखूबी अपना लिया है। विशुद्ध राजनीति की कला में माहिर राज्य के 18वें मुख्यमंत्री जिन्होंने भारत को कांग्रेस मुक्त करने की भाजपा के विजय रथ को रोक दिया है, उन पर अब एक बड़ी जिम्मेदारी है। जन्मजात रणनीतिक और सामरिक सोच के धनी नेता अब राज्य में हर उस चीज को दुरुस्त करने के काम में जुट गए हैं जो गड़बड़ाई हुई है।

राज्य में खेती और ग्रामीण संकट के साथ ही संभवत: बेरोजगारी वह एकमात्र सबसे बड़ा कारण रही, जिसने कांग्रेस को जीत दिलाई।

इस संकट की गंभीरता के बारे में पूछे जाने पर नाथ ने इसके उन्मूलन के उपायों पर बात करते हुए कहा, “राज्य में रोजगार की स्थिति बहुत बुरी है। जिन संसाधनों का प्रयोग राज्य के विकास को गति देने के लिए किया जा सकता था, उनका व्यर्थ जाना बेहद दुखद है। पद संभालने के पहले दिन ही, मैंने राज्य में 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को उद्यमों में रोजगार देना अनिवार्य कर दिया ताकि उन्हें औद्योगिक प्रोत्साहन मिले।”

उन्होंने कहा, “समय के साथ हम ऐसी और योजनाएं लेकर आएंगे, जिनसे रोजगार पैदा होंगे और उद्यमों के सशक्तीकरण के लिए काम करेंगे। हमारी सरकार युवाओं के कौशल विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए उद्यमों के विकास और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दे रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर हमने एक नई योजना ‘युवा स्वाभिमान योजना’ की घोषणा की। इसके तहत हम साल में पूरे 100 दिन राज्य के युवाओं को काम देंगे। कृषि संकट के मामले में, पिछले कुछ सालों में मंदसौर दो बार किसानों के लिए कृषि संकट के क्षेत्र में भाजपा की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मुख्य केंद्र बना।”

दिल्ली में बैठे हुए भी, हर किसी ने मध्यप्रदेश में कृषि संकट और किस प्रकार मंदसौर इसके खिलाफ विरोध का केंद्र बना, इस बारे में सुना।

कमलनाथ ने भाजपा सरकार की भावांतर योजना शुरू होने और फिर उसे बंद करने के बारे में बात करते हुए कहा, “मध्यप्रदेश भारत के सबसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में से एक है। इसकी करीब 70 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि से जुड़ी है। यह बेहद दुख की बात है कि किसानों की आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में सबसे ऊपर है। अगर राज्य किसानों के लिए किसी आदर्श स्थिति में होता, जैसा कि पिछली भाजपा सरकार द्वारा कहा जा रहा था, तो स्थिति काफी अलग होती।”

उन्होंने कहा, “किसानों का आक्रोश और उनके प्रति सरकार की बेरुखी मंदसौर की घटना से ही स्पष्ट है। कृषि संकट का एक बड़ा कारण यह है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता। भावांतर योजना केवल काले धन को सफेद करने के लिए शुरू की गई थी, इस संकट को दूर करने के लिए नहीं। यह पूरी तरह त्रुटिपूर्ण थी और इसलिए इसका विफल होना तय था।”

कमलनाथ ने कहा, “हम ‘भावांतर योजना’ को नए रूप में पेश करने जा रहे हैं और ऐसे उपाय लेकर आ रहे हैं, जिनसे किसानों को उनका हक मिलेगा। अपने वादे पर कायम रहते हुए हमने सरकार में आते ही किसानों के ऋण माफ कर दिए और राज्य के किसानों के कल्याण के लिए ऐसी और भी नीतियां बनाएंगे।”

फिर से कांग्रेस के केंद्र की सत्ता में आने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि हम बहुमत के साथ सत्ता में आएंगे। पिछले चुनाव में भाजपा की जीत और कुछ नहीं, बस एक संयोग था। हालांकि आप लोगों को लंबे समय तक मूर्ख नहीं बना सकते। नोटबंदी और जीएसटी जैसी चीजें पूरी तरह विफल हुई हैं और लोग अब बदलाव चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “लोगों में भाजपा विरोधी भावना है और हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में यह साफ दिखाई दे रहा है। अगर हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की बात करें तो यह कम होने लगी है। हमारे प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ जहां नीचे गिर रहा है, राहुल गांधी का ऊपर बढ़ रहा है।”

भाजपा और कांग्रेस का वोट शेयर काफी ज्यादा था और अंत में केवल मामूली अंतर से ही कांग्रेस को जीत हासिल हुई। कांग्रेस के पक्ष में बाजी जाने में किस चीज की भूमिका रही?

इस सवाल पर दून स्कूल और कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल से शिक्षित कमलनाथ ने कहा, “वक्त है बदलाव का। राज्य के लोग विकास की धीमी गति से थक चुके थे और बदलाव चाहते थे। हमारी रैलियों में भी सरकार विरोधी भावना साफ नजर आई।”

उन्होंने कहा, “अब राज्य के लोग दोनों सरकारों के बीच के अंतर को साफ महसूस कर रहे हैं। एक प्रदर्शन कर रही है और दूसरी ने कभी नहीं किया। मुझे पूरा भरोसा है कि लोग कांग्रेस को समर्थन देंगे जिसकी राज्य के विकास और सम्पन्नता के लिए काम करने की मजबूत इच्छाशक्ति है।”

Continue Reading

ओपिनियन

मोदी की किसान आय योजना सही उपाय नहीं : चिदंबरम

Published

on

By

chidambaram

नई दिल्ली, 9 फरवरी | पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने अंतरिम बजट में सरकार द्वारा किसानों के लिए की गई सीधी आय सहयोग योजना (डायरेक्ट इनकम सपोर्ट स्कीम) को विलाप बताया।

उन्होंने कहा कि यह सही उपाय के बदले एक विलाप है क्योंकि इसका लाभ सिर्फ भूस्वामी को ही मिलेगा और गरीबों का एक बड़ा वर्ग वंचित रह जाएगा।

उधर, राहुल गांधी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर देशभर के किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। उनकी इस घोषणा की आलोचनाओं को खारिज करते हुए चिदंबरम ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए इसकी जरूरत है।

कांग्रेस द्वारा गरीबों के लिए किए गए न्यूनतम आय गारंटी के वादे का बचाव करते हुए पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि यह लागू होने योग्य योजना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस योजना की रूपरेखा की व्याख्या की जाएगी कि यह किस प्रकार लागू होगी।

चिदंबरम ने अपनी किताब ‘अनडॉटेड-सेविंग द आइडिया ऑफ इंडिया’ के विमोचन के मौके पर आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “यह (सरकार की किसान राहत योजना) एक विलाप है। यह कहना सही युक्ति नहीं कि मैं आपके हर परिवार को 6,000 रुपये देता हूं। ये 6,000 रुपये किनको मिलेंगे? भूस्वामियों को यह रकम मिलेगी। भू-स्वामी खुद कृषक हो सकते हैं। लेकिन अनेक मामलों में भूस्वामी नदारद रहते हैं क्योंकि वे राज्य की राजधानी में बैठे होते हैं।”

उन्होंने कहा, “काश्तकार किसानों को पैसे नहीं मिलते हैं। खेतिहर मजदूरों को पैसे नहीं मिलते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले खेती नहीं करने वाले सुनार, बढ़ई, लुहार, दुकानदार और दर्जी को पैसे नहीं मिलते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर सरकार गरीबों की मदद की बात कर रही है तो फिर वह अधिकांश गरीबों को छोड़कर सिर्फ भू-स्वामियों को क्यों इस योजना का लाभ दे रही है। हालांकि उनमें गरीब भूस्वामी हो सकते हैं, लेकिन उनमें अनुपस्थित रहने वाले भू-स्वामी (ऐसे लोग हैं जो गांव में रहते ही नहीं हैं और अपनी जमीन खेती के लिए किराए पर किसी काश्तकार को देते हैं।) भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “इसलिए इससे गरीबों को फायदा नहीं होता है।”

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम समेत अन्य लोगों द्वारा कृषि कर्जमाफी की आलोचना किए जाने पर चिदंबरम ने कहा कि कर्ज के बोझ तले दबे लोगों की मदद करना सरकार का कर्तव्य है।

कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम ने कृषि कर्जमाफी को नैतिक संकट बताया है।

चिदंबरम ने कहा, “कर्जमाफी को अनैतिक बताने पर मुझे हंसी आती है। तो फिर आप उद्योपतियों के लिए बैंकों को राहत (हेयरकट) देने के लिए क्यों कहते हैं। इसलिए नैतिकता के तर्क को इससे अलग रखें और सरल अर्थशास्त्र और कृषि से जुड़े लोगों की समस्या पर गौर करें।”

उन्होंने कहा, “कर्जदार किसान 90,000 से लेकर एक लाख रुपये का कर्ज कैसे चुका सकता है, क्योंकि वह आईसीयू में है। आपको सबसे पहले उनकी जिंदगी बचानी है। उनको तंदुरुस्त करना है। कर्जमाफी का यही मकसद है। अगर लोग सूखा या बाढ़ या अन्य कारणों से कर्ज में दबे हुए हैं तो सरकार कैसे कह सकती है कि मैं आपको कर्ज से राहत नहीं दूंगा।”

हालांकि वह इस बात से सहमत हैं कि यह पूर्ण समाधान नहीं है। कांग्रेस ने कहा, “इसके बाद आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि उत्पादकता और उत्पादन में बढ़ोतरी हो और किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम मिले। अगर आप ऐसा करने में विफल होंगे तो 10 साल बाद आपको वैसी ही समस्या से जुझना पड़ेगा।”

रोजगार सृजन से जुड़े सवालों पर चिदंबरम ने कहा, “कांग्रेस को मालूम है कि रोजगार का सृजन कैसे होता है। हमें मालूम है कि नौकरियां देनेवाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं। हमारे घोषणा पत्र में यह बताया जाएगा कि नौकरियां देने वाले क्षेत्रों के माध्यम से नौकरियां कैसे पैदा की जा सकती हैं।”

Continue Reading
Advertisement
hafiz saeed pakistan
अंतरराष्ट्रीय9 hours ago

पाकिस्तान ने हाफिज सईद के संगठन जेयूडी पर फिर से पाबंदी लगायी

raveena-tandon-min
मनोरंजन13 hours ago

रवीना टंडन शहीदों के बच्चों की शिक्षा के लिए मदद करेंगी

sensex-min
व्यापार13 hours ago

शेयर बाजारों में तेजी, सेंसेक्स 142 अंक ऊपर

राष्ट्रीय13 hours ago

मोदी ने दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालय में गांधीजी की प्रतिमा का किया अनावरण

Archana Puran
मनोरंजन13 hours ago

सिद्धू की जगह लेने की संभावना है : अर्चना

शहर13 hours ago

दिल्ली में अक्षरधाम के पास फायरिंग

व्यापार14 hours ago

ईपीएफओ की ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी

Farmers
राजनीति14 hours ago

महाराष्ट्र में किसानों का फिर से शुरू हुआ ‘लॉन्ग मार्च’

Samsung
टेक14 hours ago

Samsung ने पहला 5G स्मार्टफोन किया लॉन्च

Supreme_Court_of_India
राष्ट्रीय14 hours ago

पूर्व न्यायाधीश जैन बीसीसीआई के लोकपाल नियुक्त किया

rose day-
लाइफस्टाइल2 weeks ago

Happy Rose Day 2019: करना हो प्यार का इजहार तो दें इस रंग का गुलाब…

Teddy Day
लाइफस्टाइल2 weeks ago

Happy Teddy Day 2019: अपने पार्टनर को अनोखे अंदाज में गिफ्ट करें ‘टेडी बियर’

vailtine day
लाइफस्टाइल1 week ago

Valentines Day 2019 : इस वैलेंटाइन टैटू के जरिए करें प्यार का इजहार

chili-
स्वास्थ्य21 hours ago

हरी मिर्च खाने के 7 फायदे

face recognition india
टेक2 weeks ago

क्या चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग रोकने में सक्षम है भारत?

Digital Revolution
ज़रा हटके3 weeks ago

अरबपति बनिया कैसे बन गए डिजिटल दिशा प्रवर्तक

vijay mallya-min
ब्लॉग2 weeks ago

ईडी की जांच में हुआ खुलासा, माल्या ने कर्ज लेकर रकम देश से बाहर भेजी, लौटाने का इरादा नहीं था

Priyanka Gandhi Congress
ओपिनियन4 weeks ago

क्या प्रियंका मोदी की वाक्पटुता का मुकाबला कर पाएंगी?

Priyanka Gandhi
ओपिनियन4 weeks ago

प्रियंका के आगमन से चुनाव-पूर्व त्रिकोणीय हलचल

Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi
ब्लॉग3 weeks ago

राहुल, प्रियंका के इर्द-गिर्द नए-पुराने कई चेहरे

Most Popular