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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव नतीजों में TMC ने फिर से लहराया परचम

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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) फिर से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

पंचायत चुनावों में एक बार फिर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का डंका बजा है। अभी तक सामने आए नतीजों में टीएमसी ने 4713 ग्राम पंचायत सीटों पर कब्जा जमा लिया है, जबकि करीब 2,762 सीटों पर आगे चल रही है।

चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी ने अभी तक 898 ग्राम पंचायत सीटों पर कब्जा जमाया है, वहीं 142 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इनके अलावा 317 ग्राम पंचायत सीटें निर्दलीयों के हाथ में गई हैं, 136 सीटों पर अभी भी निर्दलीय बढ़त बनाए हुए है। आपको बता दें कि राज्य में कुल 31,802 ग्राम पंचायत सीटें हैं।

सिर्फ ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि जिला परिषद में भी टीएमसी का दबदबा बरकरार रहा है। करीब 19 जिलों में टीएमसी ने एक तरह से क्लीन स्वीप किया है। जबकि बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है।

कुल सीटों की संख्या –

जिला परिषद – 621 सीट

पंचायत समिति – 6119

ग्राम पंचायत – 31789

इससे पहले बुधवार को पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई दोबारा वोटिंग के दौरान भी हिंसा हुई। मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में तृणमूल कांग्रेस के 2 कार्यकर्ता घायल हो गए, यहां हमलावरों ने हथियारों के साथ हमला किया था, जबकि मालदा के बूथ नंबर 76 पर रिपोलिंग में अज्ञात हमलावर हथियार दिखाकर बैलट बॉक्स ही उठा ले गए।

बता दें कि समूचे पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को जिन 568 मतदान केन्द्रों पर हिंसा की शिकायतें मिली थीं, वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच फिर से मतदान गए।

हुगली में 10 मतदान केन्द्रों, पश्चिम मिदनापुर में 28 मतदान केन्द्रों, कूचबिहार में 52 मतदान केन्द्रों, मुर्शिदाबाद में 63 मतदान केन्द्रों, नादिया में 60 मतदान केन्द्रों, उत्तर 24 परगना में 59 मतदान केन्द्रों, मालदा में 55 मतदान केन्द्रों, उत्तर दिनाजपुर में 73 मतदान केन्द्रों और दक्षिण 24 परगना में 26 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान हुए।

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से नाराज कई उम्मीदवारों ने आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर पुनर्मतदान की मांग की थी। इस हिंसा में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गयी थी और 43 लोग घायल हो गये थे।

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उत्तर प्रदेश तय करेगा मोदी का भाग्य : नीरज शेखर

दिवंगत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी दलों के गठबंधन से घबराए हुए हैं। यही कारण है कि वह महामिलावट जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके इन पर निशाना साध रहे हैं।

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Narendra Modi

नई दिल्ली, 11 फरवरी | प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में पदार्पण से उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन इन दोनों दलों के एकजुट होने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जरूर घबराई हुई है। यह कहना है समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज शेखर का। उनकी माने तो उत्तर प्रदेश ही लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के भाग्य का फैसला करेगा।

दिवंगत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी दलों के गठबंधन से घबराए हुए हैं। यही कारण है कि वह महामिलावट जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके इन पर निशाना साध रहे हैं।

शेखर ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “राष्ट्रहित में हमारा लक्ष्य मोदी को हटाना है और मतदाता व कार्यकर्ता इस बात को अच्छी तरह जानते हैं। उनको यह भी मालूम है कि अगर मोदी दोबारा जीतते हैं तो कैसी स्थिति पैदा होगी।”

उनसे जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस को अलग रखने से प्रियंका गांधी के बतौर कांग्रेस महासचिव पूर्वी उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी के रूप में सक्रिय राजनीति में आने के बाद सपा-बसपा गठबंधन को इसकी कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी तो उन्होंने कहा कि इससे लोकसभा चुनाव 2019 में गठबंधन को फायदा होगा।

उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि सपा-बसपा गठबंधन भगवा पार्टी को एकल अंक तक सीमित कर देगा।

राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के किसानों और युवाओं में मोदी सरकार को लेकर काफी नाराजगी है, क्योंकि सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है।

शेखर ने कहा, “प्रधानमंत्री विपक्षी गठबंधन से इतने घबराए हुए हैं कि वह उनके खिलाफ मिलावट और महामिलावट जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे उनकी मायूसी झलकती है। उनको भी इस बात का भान हो गया है कि उनकी रवानगी की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने (भाजपा) 40 से अधिक दलों का गठबंधन किया है। उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर में भाजपा की विचारधारा की विरोधी रही पीपुल्स डेमोक्रेटि पार्टी के साथ गठबंधन किया, लेकिन जब हम गठबंधन कर रहे हैं तो उन्हें कष्ट होने लगा है।”

उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उस दावे को मजाक करार दिया जिसमें उन्होंने कहा है कि भाजपा और उसके सहयोगियों को उत्तर प्रदेश में 80 में से 73 से कम सीटें नहीं मिलेंगी। शेखर ने कहा कि सच्चाई यह है कि उत्तर प्रदेश ही मोदी के भाग्य का फैसला करेगा।

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उत्तर प्रदेश में अपने बूते चुनाव मैदान में उतरेगी कांग्रेस : राहुल

पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हें उत्तर प्रदेश न सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए भेजा गया है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया है कि प्रदेश में अगली सरकार कांग्रेस की बने।

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Rahl Priyanka Gandhi

लखनऊ, 11 फरवरी | कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने बूते आगामी लोकसभा चुनाव में उतरेगी। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि पार्टी उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत व क्षमता के साथ आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेगी। इस तरह राहुल गांधी ने प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए अपने दरवाजे लगभग बंद कर दिए, मगर उन्होंने कहा कि वह दोनों दलों के नेता मायावती और अखिलेश यादव का आदर करते हैं।

पार्टी दफ्तर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि समय आ गया है जब प्रदेश में कांग्रेस की विचारधारा को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।

पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हें उत्तर प्रदेश न सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए भेजा गया है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया है कि प्रदेश में अगली सरकार कांग्रेस की बने।

राहुल गांधी ने कहा, “प्रदेश के लोगों को काफी भुगतना पड़ा है। उन्होंने हर पार्टी को अजमा के दिख लिया और सबकी परीक्षा ले ली। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की प्रगति और समृद्धि के लिए अगली सरकार बनानी होगी।”

उधर, पार्टी कार्यकर्ता ‘राहुल भैया, राहुल भैया’ के नारे लगा रहे थे।

पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव-संग्राम के लिए कठिन परिश्रम करने को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक तरफ विचारधारा, एकता और भाईचारे और दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और नरेंद्र मोदी की विभाजनकारी और घृणा की राजनीति के बीच की लड़ाई है।

उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि किसी नेता को बाहर से नहीं लाया जाएगा, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर एक बार फिर निशाना साधा।

प्रियंका गांधी और सिंधिया के रोडशो के समाप्त होने पर राहुल गांधी ने कहा कि चाहे किसानों की कर्जमाफी हो, नौकरियों के वादे हो या भ्रष्टाचार, मोदी सरकार की आलोचना करने के लिए मुद्दों की कमी नहीं है। मोदी ने समाज के सभी वर्गो के लोगों को निराश किया है।

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मप्र में 3 नेताओं की पत्नियां चुनावी समर में भर सकती हैं हुंकार !

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MP Loksabaha Candidate

भोपाल, 11 फरवरी | मध्य प्रदेश में भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के विदिशा, कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह के राजगढ़ या इंदौर और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया के गुना से चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस मध्य प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की जुगत में है। इसके लिए दोनों दल उन सारे फॉर्मूलों पर काम कर रहे हैं, जो उन्हें जीत दिला सके। यही कारण है कि राज्य के तीन दिग्गज नेताओं की पत्नियों के भी हुंकार भरने के आसार हैं।

राज्य में डेढ़ दशक बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई है, लिहाजा उसके लिए आगामी लोकसभा चुनाव काफी अहम है, वहीं दूसरी ओर भाजपा अपनी पकड़ को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने देना चाहती। इन हालातों में दोनों दल राज्य के 29 लोकसभा क्षेत्रों के लिए अभी से फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही हर उस चेहरे का सियासी आकलन जारी है जो चुनाव लड़कर जीत दिलाने में सक्षम हों।

विदिशा से केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद सुषमा स्वराज के चुनाव लड़ने से इंकार किए जाने के बाद से इस संसदीय क्षेत्र से शिवराज अथवा उनकी पत्नी साधना सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है।

पार्टी सूत्रों का कहना है, “यह शिवराज का प्रभाव वाला क्षेत्र है लिहाजा पार्टी शिवराज को यहां से चुनाव लड़ाकर उन्हें एक क्षेत्र तक सीमित नहीं करना चाहेगी, उनका राज्य और बाहर उपयोग किया जाएगा। इस स्थिति में उनकी पत्नी को पार्टी चुनाव मैदान में उतार सकती है।”

साधना सिंह लंबे अरसे से शिवराज के साथ राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सेदारी के साथ बुधनी विधानसभा की चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाल चुकी हैं, साथ ही संगठन का भी अनुभव है।

पिछले कुछ अरसे से सोशल मीडिया पर साधना सिंह के समर्थन में अभियान चलाया जा रहा है और उन्हें विदिशा से उम्म्ीदवार बनाए जाने की मांग की जा रही है। सोशल मीडिया पर लगातार दावा किया जा रहा है कि साधना सिंह को विदिशा से उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी की जीत सुनिश्चित है, साथ ही उन्हें सशक्त उम्मीदवार भी बताया जा रहा है।

दूसरी ओर गुना संसदीय क्षेत्र से ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया के भी चुनाव लड़ने की संभावनाएं बन रही हैं। प्रियदर्शिनी को गुना से चुनाव लड़ाने का कांग्रेस कार्यकर्ता प्रस्ताव भी पारित कर चुके हैं। इसके अलावा प्रियदर्शिनी की 18 फरवरी से गुना संसदीय क्षेत्र में सक्रियता भी बढ़ रही है। वे यहां 24 फरवरी तक रहकर महिला सम्मेलनों में हिस्सा लेंगी।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रचार अभियान में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले मनीष राजपूत का कहना है, “प्रियदर्शिनी राजे के चुनाव लड़ने का फैसला तो सिंधिया परिवार ही करेगा, हां इतना जरूर है कि गुना संसदीय क्षेत्र से तो चुनाव वही जीतेगा जिसे सिंधिया राजघराने का समर्थन हासिल होगा। इसकी वजह है, सिंधिया परिवार के सदस्यों ने यहां के लोगों को अपने परिवार का सदस्य माना है और उनकी बेहतरी के लिए वह सब किया जो करना संभव था। लिहाजा क्षेत्रीय लोगों और सिंधिया परिवार का रिश्ता पारिवारिक है।”

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह के राजगढ़ से चुनाव लड़ने की चर्चाएं गर्म है। राजगढ़ सिंह के प्रभाव का क्षेत्र है, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटें जीती हैं, लिहाजा कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव में सुरक्षित सीट मानी जा रही है। सिंह स्वयं राज्यसभा के सदस्य हैं और चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी पर छोड़ चुके हैं। सिंह ने बीते साल नर्मदा यात्रा की थी, उस दौरान अमृता सिंह पूरे समय उनके साथ रहीं, साथ ही तमाम आयोजनों में उनकी मौजूदगी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है कि अमृता सिंह चुनाव लड़ सकती हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि राजगढ़ संसदीय क्षेत्र पूरी तरह कांग्रेस के लिए सुरक्षित है, लिहाजा पार्टी हाईकामन के निर्देश के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी, मगर इतना तो तय है कि उम्मीदवार वही होगा जिसे सिंह का समर्थन होगा। इस संसदीय क्षेत्र के राघौगढ़ विधानसभा से सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह, खिलचीपुर से भतीजे प्रियव्रत सिंह और चाचौड़ा से छोटे भाई लक्ष्मण सिंह विधायक हैं।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर का कहना है, “राज्य में भले ही कांग्रेस की सरकार बन गई हो मगर हकीकत यह है कि दोनों कांग्रेस और भाजपा जीतते-जीतते रह गए हैं, लिहाजा आगामी लोकसभा चुनाव में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता और जीतने वाले पर दाव लगाएंगे। इसलिए नेताओं की पत्नियों को चुनाव लड़ाने की बात हो रही है। कांग्रेस अगर मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी लोकसभा चुनाव लड़ाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।”

राज्य में अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, उसने बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों में कांग्रेस को 114, भाजपा को 109 सीटें मिली है। वहीं बसपा दो, सपा एक और निर्दलीय चार स्थानों पर जीते हैं। वहीं वोट प्रतिशत भाजपा का कांग्रेस से ज्यादा है। लोकसभा की 29 सीटों में से भाजपा के पास 26 और कांग्रेस के पास तीन सीटें हैं। अब कांग्रेस लोकसभा सीटों के फासले को कुछ कम करना चाहती है।

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