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लाइफस्टाइल

वीकेंड पर घूमने की ये जगह हैं सबसे बेस्ट

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दिल्लीवाले घूमने के शौकीन होते हैं, लेकिन ये समझ नहीं पाते कि 1 या 2 दिन की छुट्टी में कहां जाएं। हम आपको दिल्ली के आस-पास की कुछ ऐसी जगहों के बारे में बता रहे हैं जहां आप एक दिन में घूमकर आ सकते हैं और अपनी छुट्टी को यादगार बना सकते हैं। आइए जानें…

मोरनी– मोरनी हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह दिल्ली से केवल 260 किलोमीटर की दूरी है। वीकेंड बिताने के लिए यह बेहतरीन ऑप्शन है। दिल्ली से यहां पहुंचने में लगभग 5 घंटे का समय लगता है। यहां की खूबसूरत वादियां और झील किसी के भी मन को खुश कर देती हैं।

वीकेंड पर दिल्लीवासियों के लिए घूमने की ये जगह हैं सबसे बेस्ट

दमदमा झील- दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण से भरे वातारण में रहते-रहते दिल्ली वाले बोर हो जाते हैं। ऐसे में शांति के साथ सुकून की छुट्टी बिताने के लिए दिल्ली वालों के लिए दमदमा झील एक बेहतरीन जगह है। यह दिल्ली से केवल 60 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पहुंचने में लगभग 1 घंटा 30 मिनट का समय लगता है। दमदमा झील हरयाणा की सबसे खूबसूरत झीलों में से एक है। इसके आस-पास कैंपिग की सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

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मुरथल– जब भी आप रोड ट्रिप प्लान करते होंगे तो सबसे पहले आपके मन में मुरथल का ख्याल जरूर आता होगा। लॉन्ग ड्राइव के साथ अच्छे खाने का स्वाद लेना हो तो मुरथल से अच्छा ऑप्शन दिल्ली वालों के लिए नहीं हो सकता है। यहां कई ढाबे मौजूद हैं। साथ ही लोगों के मनोरंजन के लिए फॉक डांस से लेकर कई दूसरी चीजें भी उपलब्ध हैं।

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नीमराना किला– राजस्थान के किलों में नीमराना किला एक प्रसिद्ध किला है। दिल्ली की भागदौड़ से दूर कपल्स के लिए यह किला एक दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने के लिए बेहद खास है। यहां जाने के लिए मॉनसून का समय सबसे बेहतर होता है। बरसात के मौसम में किले के चारों तरफ फैली हरियाली पर्यटकों के मन मोह लेती है। यह किला दिल्ली से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में लगभग 2 घंटे 30 मिनट का समय लगता है।

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कुचेसर किला– 18वीं शताब्दी में तैयार किया गया कुचेसर किला मड फोर्ट होटल के नाम से भी जाना जाता है। यह किला दिल्ली से लगभग 84 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में केवल 2 घंटे का समय लगता है। इस किले में हर क्लास के कमरे उपलब्ध हैं. इसके अलावा यहां बैलगाड़ी की सवारी के साथ-साथ कई सारे इंडोर और आउटडोर खेलों का भी आनंद लिया जा सकता है।

वीकेंड पर दिल्लीवासियों के लिए घूमने की ये जगह हैं सबसे बेस्ट

परवाणू– यह जगह दिल्ली से करीबन 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। परवाणू हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में चंडीगढ़ और शिमला के रास्ते में पड़ता है। हालांकि यह दिल्ली के ज्यादा नजदीक नहीं है, लेकिन यहां की रोड ट्रिप किसी के लिए भी यादगार साबित हो सकती है। यहां पहुंचने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है। यहां प्रकृति के खूबसूरत नजारे, चारों तरफ फैली हरियाली, चौड़ी सड़कें, सुहाना मौसम किसी की भी छुट्टियों को यादगार बना सकता है।

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भरतपुर– राजस्थान का यह एक प्रमुश शहर है। यहां मौजूद बर्ड सेंचुरी बेहद प्रसिध्द हैं। यहां घने जंगल मौजूद हैं, जिस वजह से यह जगह पक्षी प्रेमियों को अपनी ओर काफी आकर्षित करती है। आप यहां रिक्शा में बैठकर बर्ड सेंचुरी का आनंद ले सकते हैं। यह जगह दिल्ली से लगभग 182 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में 3 घंटे 40 मिनट का समय लगता है।

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मथुरा और वृंदावन– जिन लोगों को पूजा पाठ और भगवान के दर्शन करने में ज्यादा आनंद मिलता है वो अपनी 1 या 2 दिन की छुट्टी में मथुरा और वृंदावन जाकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं। मथुरा, वृंदावन और आसपास के इलाकों में भगवान श्रीकृष्ण के कई मंदिर हैं, जहां हमेशा श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। यह दिल्ली से लगभग 144 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में करीबन 3 घंटे का समय लगता है।

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आगरा– प्यार में डूबे लोगों के लिए छुट्टी बिताने के लिए आगरा से बेहतर घूमने की जगह कोई हो ही नहीं सकती है। आगरा में मौजूद ताजमहल सच्चे प्यार की एक खूबसूरत मिसाल है। ताज महल के अलावा आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी, मेहताब बाग, जामा मस्जिद, अकबर का मकबरा, गुरु का ताल, मोती मस्जिद। दिल्ली गेट, अमर सिंह गेट, सिकंदरा और कांच महल आदि घूमने के लिए शानदार जगहें हैं। यह दिल्ली से करीबन 202 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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ओपिनियन

संशय भरे आधुनिक युग में हिंदू आदर्श धर्म : थरूर

वह धर्म जो सर्वज्ञानी सृजनकर्ता पर सवाल करता हो वह मेरे विचार से आधुनिक और उत्तर आधुनिक चैतन्य के लिए अनोखा धर्म है।

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Shashi-Tharoor

न्यूयॉर्क, 21 सितंबर | कांग्रेस सांसद व लेखक शशि थरूर के अनुसार, हिंदू एक अनोखा धर्म है और यह संशय के मौजूदा दौर के लिए अनुकूल है। थरूर ने धर्म के राजनीतिकरण की बखिया भी उधेड़ी।

न्यूयॉर्क में जयपुर साहित्य महोत्सव के एक संस्करण में के बातचीत सत्र के दौरान गुरुवार को थरूर ने कहा, “हिंदूधर्म इस तथ्य पर निर्भर करता है कि कई सारी बातें ऐसी हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं।”

मौजूदा दौर में इसके अनुकूल होने को लेकर उन्होंने कहा, “पहली बात यह अनोखा तथ्य है कि अनिश्चितता व संशय के युग में आपके पास एक विलक्षण प्रकार का धर्म है जिसमें संशय का विशेष लाभ है।”

सृजन के संबंध में उन्होंने कहा, “ऋग्वेद वस्तुत: बताता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति कहां से हुई, किसने आकाश और धरती सबको बनाया, शायद स्वर्ग में वह जानता हो या नहीं भी जानता हो।”

उन्होंने कहा, “वह धर्म जो सर्वज्ञानी सृजनकर्ता पर सवाल करता हो वह मेरे विचार से आधुनिक और उत्तर आधुनिक चैतन्य के लिए अनोखा धर्म है।”

उन्होंने कहा, “उससे भी बढ़कर आपके पास असाधारण दर्शनग्रहण है और चूंकि कोई नहीं जानता कि भगवान किस तरह दिखते हैं इसलिए हिंदूधर्म में हर कोई भगवान की कल्पना करने को लेकर स्वतंत्र है।”

कांग्रस सांसद और ‘व्हाइ आई एम हिंदू’ के लेखक ने उन लोगों का मसला उठाया जो स्त्री-द्वेष और भेदभाव आधारित धर्म की निंदा करते हैं।

मनु की आचार संहिता के बारे में उन्होंने कहा, “इस बात के बहुत कम साक्ष्य हैं। क्या उसका पालन किया गया और इसके अनेक सूत्र विद्यमान हैं।”

उन्होंने उपहास करते हुए कहा, “इन सूत्रों में मुझे नहीं लगता कि हर हिंदू कामसूत्र की भी सलाह मानते हैं।”

थरूर ने कहा, “प्रत्येक स्त्री विरोधी या जातीयता कथन (हिंदू धर्मग्रंथ में) के लिए मैं आपको समान रूप से पवित्र ग्रंथ दे सकता हूं, जिसमें जातीयता के विरुद्ध उपदेश दिया गया है।”

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

गलत मुद्रा में बैठना शरीर के निचले हिस्से के लिए हानिकारक

“शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है। इससे थकान, पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द की शुरुआत हो सकती है।”

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Sitting Wrong Posture

नई दिल्ली, 15 सितम्बर | दफ्तर में कामकाज के दौरान गलत मुद्रा में लगातार चार-पांच घंटे तक बैठे रहने से कमर दर्द की शिकायत हो सकती है। बैठे रहना संभवत: नया धूम्रपान है और पीठ दर्द नवीनतम जीवनशैली का विकार है। बैठने की मुद्रा और शारीरिक गतिविधि पर पर्याप्त ध्यान देना आवश्यक है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल का मानना है कि आज लगभग 20 प्रतिशत युवाओं को 16 से 34 साल आयु वर्ग में ही पीठ और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं हो रही हैं।

डॉ. अग्रवाल ने यहां जारी एक बयान में कहा है, “एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर भारी दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, टेढ़े होकर बैठने से रीढ़ की हड्डी के जोड़ खराब हो सकते हैं और रीढ़ की हड्डी की डिस्क पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने से भी स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है। इससे थकान, पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द की शुरुआत हो सकती है।”

पीठ और रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के लक्षणों में वजन घटना, शरीर के तापमान में वृद्धि (बुखार), पीठ में सूजन, पैर के नीचे और घुटनों में दर्द, मूत्र असंतुलन, मूत्र त्यागने में कठिनाई और जननांगों की त्वचा का सुन्न पड़ जाना शामिल है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया, “योग पुरानी पीठ दर्द के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय है, क्योंकि यह कार्यात्मक विकलांगता को कम करता है। यह इस स्थिति के साथ गंभीर दर्द को कम करने में भी प्रभावी है। यदि आप सुबह उठते हैं या कुछ घंटे के लिए अपनी डेस्क पर बैठे होने पर थकान या दर्द का अनुभव करते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी मुद्रा सही नहीं है।”

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

ऑफिस को इस तरह बनाएं रचनात्मक…

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office-
प्रतीकात्मक तस्वीर

ऑफिस ऐसी जगह है जहां आप भले ही दिन का एक तिहाई वक्त बिताते हों, पर यह वह समय होता है, जब दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और इसी वजह से यह दिनभर का सबसे प्रोडक्टिव समय भी माना जाता है।

ऐसे में ऑफिस का इंटीरियर ऐसा होना चाहिए कि कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करे।

लाइट का संतुलन : लाइट कर्मचारियों के मूड पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है। इसलिए इसका खास ध्यान रखा जाना चाहिए। डेस्क के पास लाइट 300-400 लक्स की होनी चाहिए और अगर एलईडी लाइट लगी हो तो और भी बेहतर होता है।

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लाइटिंग के दौरान अधिक फोकस चमक और विजन पर होना जरूरी है, इससे कर्मचारियों को आंखों में जलन भी नहीं होती और बिना आंखों पर जोर डाले वह ज्यादा काम कर पाते हैं। लाइट को इस तरह प्लान करके भी लगाना चाहिए कि वह बाहर से आने वाली गर्मी और रोशनी का भी संतुलन बनाने में सक्षम हों।

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स्वच्छ फर्श : ऑफिस का फर्श साफ और सुरक्षित होना चाहिए। फर्श को ज्यादातर कड़क और नरम फर्श में बांटा जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि फर्श थर्मल प्रतिरोधी व ज्वलनशील हो, साथ ही फर्श ऑफिस में होने वाले शोर को भी सोख लेने में सक्षम हो ताकि काम ज्यादा बेहतर तरीके से हो सके। इसके अलावा इसे साफ करना आसान हो और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, फर्श में कम कार्बन फुटप्रिंट होना चाहिए।

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रंगों का सही मिश्रण : रंग न केवल मूड पर प्रभाव डालते हैं, बल्कि ऑफिस के माहौल, मौसम के असर, प्रोडक्टिविटी और व्यवहार पर भी कारगर होता है। ऑफिस के लिए हमेशा हल्के रंग जैसे नीला, सफेद, हल्का हरा, हल्का पीला आदि इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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आरामदायक फर्नीचर : एर्गोनोमिक फर्नीचर (कार्यस्थल के लिया बनाया गया खास फर्नीचर) को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। काम करने वाली टेबल का साइज पर्याप्त होना चाहिए, कंप्यूटर, स्टेशनरी आदि आने के बाद भी कुछ जगह खाली होनी चाहिए। 4 फीट बाय 2 फीट की टेबल प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए सबसे उचित मानी जाती है।

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चलने की जगह : ऑफिस के अंदर चलने और खड़े होने के लिए खुली जगह होना बहुत जरूरी है। कोरिडोर, बालकनी, और बाकी खुली जगह का साइज पर्याप्त होना जरूरी है। कोरिडोर और खुली जगह इस तरह की हो कि वहां से वेंटिलेशन सही होने के साथ ज्यादा भीड़ या आपातकाल के समय में कोई दिक्कत न उत्पन्न हो। खुली जगह ऑफिस को सुंदर और मजेदार भी बनती है, जो प्रोडक्टिविटी पर सीधा असर डालती है।

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