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स्वास्थ्य

थाइरॉइड विकारों का महिलाओं पर ज्यादा असर

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एक ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि लगभग 32 प्रतिशत भारतीयों में थायरॉइड के असामान्य स्तर पाए जाते हैं और वे विविध थायरॉइड रोगों से पीड़ित होते हैं, जैसे थायरॉइड नोड्यूल, हाइपरथायरॉइडिज्म, गॉयटर, थायरॉइडाइटिस और थायरॉइड कैंसर।

रिपोर्ट से यह भी संकेत मिलता है कि सब क्लिनिकल हाइपोथायराइडिज्म असल में हाइपोथायरॉइडिज्म का एक हल्का रूप है। यह एक साइलेंट कंडीशन है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है और पूरे देश में थायरॉइड विकार का सबसे प्रचलित रूप है।

सब-क्लिनिकल हाइपोथायराइडिज्म का पता तब चलता है, जब किसी व्यक्ति में हाइपोथायरॉइडिज्म के हल्के लक्षण दिखते हैं, थायरॉइड-उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) का उच्च स्तर मिलता है और थायरॉक्सिन (टी4) का सामान्य स्तर मिलता है।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि थायरॉइड रोग महिलाओं में अधिक होता है। इससे वजन और हार्मोन असंतुलन जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। थायरॉइड हार्मोन और टीएसएच में वृद्धि के निर्धारण में आनुवंशिकी की एक प्रमुख भूमिका है।

इससे ऑटोइम्यून थाइरॉइड रोग का पता लगाना भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा, “थायरॉइड समस्याओं के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को थायरॉइड असामान्यता का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, अपने परिवार के चिकित्सा इतिहास के बारे में जागरूक होना और पहले से सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।”

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि हाइपोथायरॉइडिज्म के कुछ सामान्य क्लिनिकल लक्षणों में डिप्रेशन और थकान, हाइपरलिपिडेमिया और हाइपर होमोसिस्टीनेमिया, गॉइटर, रूखे बाल, ठंड बर्दाश्त न कर पाना, कब्ज और वजन बढ़ना, सुनने में कठिनाई, मेनोरेगिया, ब्रेडिकार्डिया और कोरोनरी धमनी रोग या हृदय रोग आदि प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि लोगों के बीच थायरॉइड के कारण, लक्षण, उपचार और समस्याओं के परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा की जाए। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इन रोगों का महिलाओं के लिए अधिक जोखिम है। गर्भवती महिलाओं या गर्भधारण की इच्छुक महिलाओं के लिए यह जरूरी है कि वे अपने थायरॉइड की जांच करा लें।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

एडीएचडी से पीड़ित बच्चों की कुछ इस तरह करें मदद…

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पढ़ाई के प्रति किसी बच्चे में ध्यान का अभाव पाया जाता है, या अतिशय चंचलता के कारण उसका पढ़ने में मन नहीं लगता है तो स्कूल इन बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

यह बात हालिया एक शोध में सामने आई है। यह शोध उन बच्चों पर केंद्रित है, जो ध्यानाभाव अति सक्रियता विकार (एडीएचडी) से पीड़ित हैं। एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में एकाग्रता का अभाव होता है और उनमें चंचलता काफी ज्यादा होती है।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के प्रोफेसर टामसिन फोर्ड ने कहा है, “एडीएचडी से पीड़ित बच्चे काफी निराले होते हैं। यह एक जटिल समस्या है और इसे दूर करने का कोई एक उपाय नहीं है, जो सबके लिए अनुकूल हो।”

फोर्ड ने कहा, “हालांकि हमारे शोध में काफी मजबूत तथ्य सामने आया है कि बगैर दवाई के स्कूल इस रोग से निजात दिलाने में मदद कर सकता है और बच्चे को उसकी क्षमता के अनुरूप उसके शैक्षणिक व अन्य नतीजों को हासिल करने लायक बना सकता है।”

रिव्यू ऑफ एजुकेशन नामक पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में शोधकर्ताओं की एक टीम ने एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को स्कूल में मदद के लिए औषधि रहित उपायों को लेकर 28 बेतरतीब नियंत्रित प्रयोग किए। अध्ययन के अनुसार, ज्यादा आवेग वाले बच्चे, जो एकाग्र नहीं हो पाते हैं, उनके लिए स्व नियमन कठिन कार्य है।

इसके अलावा बच्चों के लिए रोजाना एक लक्ष्य तय किया जाता है, उसकी समीक्षा एक कार्ड के जरिए की जाती है। बच्चे यह कार्ड स्कूल से घर और घर से स्कूल लाते और ले जाते हैं। इसमें उनको पारितोषिक दिया जाता है, जिससे वे अपने लक्ष्य को पूरा करने को लेकर उत्साहित होते हैं।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

अगर है ये बीमारियां तो कराए स्वाइन फ्लू की जांच

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अगर किसी व्यक्ति को खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, मतली और उल्टी के लक्षण हैं, तो स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए। इस स्थिति में दवाई केवल चिकित्सक की निगरानी में ही ली जानी चाहिए।

हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने एक बयान में कहा है, “स्वाइन फ्लू में खांसी या गले में खरास के साथ 1000 फारेनहाइट से अधिक तक बुखार हो सकता है। निदान की पुष्टि आरआरटी या पीसीआर तकनीक से किए गए लैब टैस्ट से होती है।”

उन्होंने कहा, “हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू बुखार, खांसी, गले में खरास, नाक बहने, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ आता है। हल्के मामलों में, सांस लेने में परेशानी नहीं होती है। लगातार बढ़ने वाले स्वाइन फ्लू में छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम

रक्तचाप, भ्रम, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है।”डॉ. अग्रवाल ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में, फ्लू भ्रूण की मौत सहित अधिक गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

हल्के-फुल्के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कहा कि 23-27 अक्टूबर तक यहां तालकटोरा स्टेडियम में 25वें परफेक्ट हैल्थ मेले में स्वाइन फ्लू पर चर्चा होगी।उन्होंने कहा है कि सितंबर माह में बेंगलुरू में सकारात्मक एच1एन1 मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।

अक्टूबर के पहले सप्ताह के दौरान 68 सकारात्मक मामले सामने आए थे, जो कुछ ही दिनों में 21 और बढ़ गए। ऐसे में सावधानी सबसे बड़ा उपाय है। गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा-ए वायरस के एक स्ट्रेन के कारण होती है और सुअरों से इंसानों में संचरित होती है। समय पर इलाज नहीं होने पर एच1एन1 घातक भी हो सकता है।

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जयपुर में जीका का कहर, 100 पहुंची मरीजों की संख्या

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राजस्थान के जयपुर में जीका वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ये संख्या अब 100 तक पहुंच गई है। सरकार की तरफ से बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सभी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

केंद्र ने बुधवार को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एक टीम वहां भेजी ताकि रोग पर नियंत्रण के उपायों में तेजी लाई जा सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि बीमारी से पीड़ित 100 लोगों में से 23 गर्भवती महिलाएं भी हैं। रोकथाम के लिए जिन कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है उन्हें बदलने के लिए आईसीएमआर ने एक टीम जयपुर भेजी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयास सफल भी हो रहे हैं। जीका संक्रमण से पीड़ित मरीजों में से उपचार के बाद अधिकतर में सुधार भी दिख रहा है। जयपुर में जीका संक्रमण के अधिकतर मामले शास्त्री नगर इलाके से आए हैं। जो प्रभावित इलाके हैं वहां लगातार फॉगिंग और लारवा को नष्ट करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।

लक्ष्ण क्या हैं?

इसके लक्षण फ्लू की तरह होते हैं। यानी बुखार, शरीर और सिर में दर्द। डब्लूएचओ का कहना है कि इन लक्षणों का इलाज दर्द और बुखार की दवाओं, आराम और अधिक पानी से हो सकता है। अगर लक्षण और भी घातक हों तो लोग चिकित्सकीय सलाह ले सकते हैं।

इसके और भी कई लक्षण हैं, जैसे रैशेज हो जाना जैसे डेंगू के कारण होते हैं। वहीं कुछ लोगों को कंजाक्तिविटिस की शिकायत भी होती है। कंजाक्तिविटिस में आंखों में सूजन या आंखों की बाहरी झिल्ली और आंतरिक पलक में संक्रमण फैल जाता है। इसके लक्षण पता चलने में 13 से 14 दिन लग जाते हैं।

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