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कॅाफी बनाने की ये 5 रेसिपी जो गर्मी में भी आपको रखेंगी ‘कूल’…

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एक ठंडा कॉफी का गिलास गर्म और हुमस भरे दिन में राहत देने का काम करता है। यह आपको ठंडक महसूस करता है साथ ही रीफ्रेश फील देगा।

इसके साथ ही आपको आलस भरे दिनों में एक्टिव बनाए रखेगा। लेकिन कॉफी शेक रेगुलर पीना कई बार आपको बोरियत महसूस करा सकते हैं। अगर आप उन लोगों में से हैं जो एक्सपेरिमेंट और रोज कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो यकीनन आप रोज-रोज कॉफी शेक पीकर खुश नहीं हो सकते।

coffee lemonade

आइए हम आपको बताते है कॉफी बनाने के ये 5 आसान तरीके जो आप अपना सकते हैं इस मौसम में…

1. नारियल पानी कॉफी (Coconut Water Coffee)

नारियल के पानी और कॉफी का यह मेल पहली बार अजीब लग सकता है, लेकिन हमें भरोसा है कि यह मेल एक साथ आपको काफी पसंद आएगी। नारियल का पानी इलेक्ट्रोलाइट्स में समृद्ध है, और इसलिए कॉफी के साथ इसे मिलाकर पीने से न केवल ऊर्जा मिलती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है।

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विधि

एक ग्लास नारियल का पानी
2 चम्मच चीनी
आधा चम्मच तत्काल कॉफी

coconut water coffee

सामग्रियों को एक साथ मिलाएं और बर्फ के साथ ठंडी-ठंडी सर्व करें।

2. कॉफी लेमेनेड (Coffee Lemonade)

दोनों पेय जो अपने आप में एकदम अलग अलग हैं अब एक साथ आकर आपकों एक नया जायका देंगे। इस पेय को सबसे पहले स्वीडन में बनाया और परोसा गया। लेकिन इसके स्वाद और महक ने बहुत जल्द ही दुनिया के फूडी लोगों की जुबां पर जगह बना ली।

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विधि

3 टेबल चम्मच चीनी
आधा नींबू
एक चम्मच इंस्टेंट कॉफी
एक गिलास ठंडा पानी

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ठंडे पानी के गिलास में नींबू निचोड़ लें। अब इसमें चीनी और इंस्टेंट कॉफी ड़ालें और अच्छी तरह मिला लें। अब इसमें बर्फ डालें और सर्व करें।

3. कॉफी लस्सी (Coffee Lassi)

सामान्य कॉफी पीने वालों के लिए कॉफी में यह देसी ट्विस्ट काफी मजेदार साबित होगा। लस्सी की मिठास और कॉफी की कड़वाहट मिल कर बड़ा ही मजेदार फ्लेवर तैयार करती है। यह ड्रिंक जरा हट कर साबित होगा।

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विधि
5 बड़ा चमचा दही
1/2 ग्लास चीनी वाला मीठा पानी
1/2 चम्मच इंस्टेंट कॉफी

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सामग्रियों को एक साथ मिलाएं और बर्फ के साथ सर्व करें।

4. थाई आईस्ड कॉफी ( Thai Iced Coffee)

इलायची अपने स्वाद और लाभ के साथ एक बार फिर लौटी है। यह ड्रिंक थाईलैंड में खोजा गया था और इसके बाद इसमें बहुत सारे एक्सपेरिमेंट किए गए बार-बार। यह इस पहले से ही प्रचलित ड्रिंक का एक और वर्जन है।

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विधि
1 इलायची टुकड़ा
3 चम्मच चीनी मिला गाढ़ा दूध ( कन्डेंस्ड मिल्क )
गर्म कॉफी

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कॉफी बनाने के दौरान इलायची डालें। कॉफी को रूम टेम्प्रेचर जितना ठंडा होने दें। कन्डेंस्ड मिल्क को इसमें मिलाएं और अच्छी तरह घोल दें। आप अपने स्वाद के अनुसार ही इसमें कन्डेंस्ड मिल्ड एड करें।

5. नारियल / बादाम कॉफी (Coconut/Almond coffee)

यह कॉफी उन लोगों के लिए है जो दूध या दूग्ध पदार्थों से एलर्जिक हैं। lactose intolerant वाले लोगों के लिए यह कॉफी को एक अच्छा विकल्प है। इसमें सादे या स्किम्ड दूध के बजाय नारियल या बादाम के दूध को वैकल्पिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पोषण से भरपूर और स्वाद में अच्छा है।

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विधि
बादाम / नारियल के दूध के 2/3 गिलास
2 चम्मच चीनी
1 चम्मच इंस्टेंट कॉफी
1/4 गिलास पानी

coffee lassi

सामग्रियों को एक साथ मिलाएं और बर्फ से इसकी सेवा करें।

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गलत मुद्रा में बैठना शरीर के निचले हिस्से के लिए हानिकारक

“शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है। इससे थकान, पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द की शुरुआत हो सकती है।”

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Sitting Wrong Posture

नई दिल्ली, 15 सितम्बर | दफ्तर में कामकाज के दौरान गलत मुद्रा में लगातार चार-पांच घंटे तक बैठे रहने से कमर दर्द की शिकायत हो सकती है। बैठे रहना संभवत: नया धूम्रपान है और पीठ दर्द नवीनतम जीवनशैली का विकार है। बैठने की मुद्रा और शारीरिक गतिविधि पर पर्याप्त ध्यान देना आवश्यक है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल का मानना है कि आज लगभग 20 प्रतिशत युवाओं को 16 से 34 साल आयु वर्ग में ही पीठ और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं हो रही हैं।

डॉ. अग्रवाल ने यहां जारी एक बयान में कहा है, “एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर भारी दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, टेढ़े होकर बैठने से रीढ़ की हड्डी के जोड़ खराब हो सकते हैं और रीढ़ की हड्डी की डिस्क पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने से भी स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है। इससे थकान, पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द की शुरुआत हो सकती है।”

पीठ और रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के लक्षणों में वजन घटना, शरीर के तापमान में वृद्धि (बुखार), पीठ में सूजन, पैर के नीचे और घुटनों में दर्द, मूत्र असंतुलन, मूत्र त्यागने में कठिनाई और जननांगों की त्वचा का सुन्न पड़ जाना शामिल है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया, “योग पुरानी पीठ दर्द के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय है, क्योंकि यह कार्यात्मक विकलांगता को कम करता है। यह इस स्थिति के साथ गंभीर दर्द को कम करने में भी प्रभावी है। यदि आप सुबह उठते हैं या कुछ घंटे के लिए अपनी डेस्क पर बैठे होने पर थकान या दर्द का अनुभव करते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी मुद्रा सही नहीं है।”

–आईएएनएस

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ऑफिस को इस तरह बनाएं रचनात्मक…

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प्रतीकात्मक तस्वीर

ऑफिस ऐसी जगह है जहां आप भले ही दिन का एक तिहाई वक्त बिताते हों, पर यह वह समय होता है, जब दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और इसी वजह से यह दिनभर का सबसे प्रोडक्टिव समय भी माना जाता है।

ऐसे में ऑफिस का इंटीरियर ऐसा होना चाहिए कि कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करे।

लाइट का संतुलन : लाइट कर्मचारियों के मूड पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है। इसलिए इसका खास ध्यान रखा जाना चाहिए। डेस्क के पास लाइट 300-400 लक्स की होनी चाहिए और अगर एलईडी लाइट लगी हो तो और भी बेहतर होता है।

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लाइटिंग के दौरान अधिक फोकस चमक और विजन पर होना जरूरी है, इससे कर्मचारियों को आंखों में जलन भी नहीं होती और बिना आंखों पर जोर डाले वह ज्यादा काम कर पाते हैं। लाइट को इस तरह प्लान करके भी लगाना चाहिए कि वह बाहर से आने वाली गर्मी और रोशनी का भी संतुलन बनाने में सक्षम हों।

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स्वच्छ फर्श : ऑफिस का फर्श साफ और सुरक्षित होना चाहिए। फर्श को ज्यादातर कड़क और नरम फर्श में बांटा जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि फर्श थर्मल प्रतिरोधी व ज्वलनशील हो, साथ ही फर्श ऑफिस में होने वाले शोर को भी सोख लेने में सक्षम हो ताकि काम ज्यादा बेहतर तरीके से हो सके। इसके अलावा इसे साफ करना आसान हो और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, फर्श में कम कार्बन फुटप्रिंट होना चाहिए।

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रंगों का सही मिश्रण : रंग न केवल मूड पर प्रभाव डालते हैं, बल्कि ऑफिस के माहौल, मौसम के असर, प्रोडक्टिविटी और व्यवहार पर भी कारगर होता है। ऑफिस के लिए हमेशा हल्के रंग जैसे नीला, सफेद, हल्का हरा, हल्का पीला आदि इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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आरामदायक फर्नीचर : एर्गोनोमिक फर्नीचर (कार्यस्थल के लिया बनाया गया खास फर्नीचर) को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। काम करने वाली टेबल का साइज पर्याप्त होना चाहिए, कंप्यूटर, स्टेशनरी आदि आने के बाद भी कुछ जगह खाली होनी चाहिए। 4 फीट बाय 2 फीट की टेबल प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए सबसे उचित मानी जाती है।

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चलने की जगह : ऑफिस के अंदर चलने और खड़े होने के लिए खुली जगह होना बहुत जरूरी है। कोरिडोर, बालकनी, और बाकी खुली जगह का साइज पर्याप्त होना जरूरी है। कोरिडोर और खुली जगह इस तरह की हो कि वहां से वेंटिलेशन सही होने के साथ ज्यादा भीड़ या आपातकाल के समय में कोई दिक्कत न उत्पन्न हो। खुली जगह ऑफिस को सुंदर और मजेदार भी बनती है, जो प्रोडक्टिविटी पर सीधा असर डालती है।

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घर के किचन में मौजूद ये चीज हमेशा रखेगी जवां

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प्रतीकात्मक फोटो

काम के प्रेशर के चलते और बदलते खानपान से आजकल इंसान समय से पहले बूढ़ा हो जाता है। इसलिए जवा दिखने के लिए लोग बॉडी मसाज से लेकर अलग-अलग थैरेपी लेते हैं। महिलाएं सुंदर दिखने के लिए हर महीने पार्लर पर जाकर पैसे खर्च करती है। बुढ़ापे में हमारे शरीर में शारीरिक कमजोरी आ जाती है, और चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।

लेकिन बहुत से ऐसे लोग होते हैं, जो बुढ़ापे में भी जवानों की तरह दिखते हैं। उनकी सेहत का कुछ राज होता है। दोस्तों आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसका रोज सेवन करने से आप बुढ़ापे तक जवान रह सकते हैं। बुढ़ापे तक जवान रहने के लिए पिस्ते का सेवन बहुत ही उपयोगी होता है, लेकिन यह थोड़ा महंगा होता है, इसलिए हर कोई इसका सेवन नहीं कर सकता है।

इसके अलावा अजवाइन भी शरीर को स्वस्थ और ताकतवर बनाए रखने के लिए काफी लाभदायक होती है। नियमित रूप से रोज शाम 10 ग्राम अजवाइन का सेवन करने से त्वचा ग्लोइंग बनी रहती है, तथा चेहरे पर झुर्रियां भी नहीं पड़ती। रोज अजवाइन खाने से शरीर में बीमारियां भी नहीं होती हैं। किडनी और पेट संबंधी बीमारियों में अजवाइन बहुत ही लाभदायक होती है।

यह शरीर के रक्त के प्रवाह को भी सुचारू तरीके से संचार करने में मददगार होती है। इसके लिए अजवाइन को पीसकर उसका पाउडर बना लें। रोज शाम सोने से पहले 10 ग्राम अजवाइन पाउडर में थोड़ा सा काला नमक मिलाकर उसका पानी के साथ सेवन करें। ऐसा नियमित रूप से करने से आप बुढ़ापे तक जवा रह सकती हैं।

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