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रोज़ाना लस्सी पीने से पास नहीं आएंगी ये बीमारियां

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गर्मियों में शरीर को हाईड्रेट रखने के लिए पेय पदार्थों के सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसलिए आप अपने शरीर को स्वास्थ्य रखने के लिए लस्सी ट्राई कर सकते हैं।

लस्सी पीने से जहां एक ओर शरीर को ठंडक मिलती है वहीं इसके ढेर सारे फायदे भी हैं। जिन्हें जानकर आप इसको अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करना कर सकते हैं। जो लोग दूध से परहेज करते है उन लोगों के लिए भी लस्सी एक बेहतर ऑप्शन साबित होती है, क्योंकि इसमें दूध के गुण भी शामिल होते हैं।

लस्सी में कैल्शियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो शरीर को स्वस्थ्य रखने में मदद करते हैं। प्लेन लस्सी आप अगर नहीं भी पीना चाहें तो फ्रूट लस्सी भी ट्राई की जा सकती है।

आइए हम आपको बताते है लस्सी पीने के फायदे…

ब्लड प्रेशर रहेगा नॉर्मल

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो आप लस्सी का सेवन करना शुरू कर सकते है। लस्सी में मौजूद पोटैशियम और राइबोफ्लेविन तत्व हाई ब्लड प्रेशर को नार्मल रखता हैं।

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पेट की समस्या होगी दूर

लस्सी पीने से सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसके सेवन से पेट से संबंधित समस्याओं से निजात मिलती है। इसको पीने से फूड प्वॉइजनिंग जैसी समस्या होने की का खतरा कम हो जाता है। लस्सी हमारे खाने को पचाने में मदद करती है। इसका प्रोबायोटिक गुण बैक्टीरिया को खत्म करता है साथ ही कब्ज की समस्या भी नहीं होती।

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हड्डियों को मजबूत करती है लस्सी

दूध को न पीने वाले लोगों में अक्सर कैल्शियम की कमी हो जाती है। ऐसे में आप दूध के सब्सीट्यूट की तरह लस्सी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे जहां एक ओर शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन मिलता है वहीं कैल्शियम भी इसमें प्रचुर मात्रा में होता है।

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जिसकी वजह से आपकी हड्डियां तो मज़बूत होती ही हैं, साथ ही ये मसल्स को ग्रो करने में भी ये आपकी मदद करती है।

इम्यूनिटी पॉवर बढ़ती है

लस्सी को पीने की वजह से आपकी इम्यूनिटी पावर भी बढ़ती है। लस्सी में मौजूद लैक्टिक एसिड और विटामिन डी आपकी इम्यूनिटी पावर को बढ़ाता है।

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कोलेस्ट्रॉल लेवल होगा कम

दही का प्रोबायोटिक गुण शरीर से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है। मेटबॉलिज्म भी लस्सी पीने की वजह से बढ़ने लगता है।

बालों की सेहत के लिए है खास

लस्सी में मौजूद विटामिन बी 12 बालों को सफेद होने से बचाता है। लस्सी को बालों की कंडीशनिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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गांधीनगर रेडीमेड गार्मेट मार्केट की दुकानें खुलीं, रौनक गायब

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नई दिल्ली, एशिया के सबसे बड़े रेडिमेड गार्मेंट के थोक बाजार देश की राजधानी दिल्ली स्थित गांधीनगर मार्केट में दुकानें तो अब खुलने लगी हैं, लेकिन ग्राहकी नहीं होने की वजह से बाजार की रौनक गायब है।

कोरोना के कारण गांधीनगर मार्केट की चहल-पहल लुप्त हो गई है। कारोबारी दुकान खोलते हैं, लेकिन ग्राहक नहीं होने की वजह से शाम होने से पहले ही बंद कर देते हैं। कई दुकानें तो इसलिए भी बंद हैं कि दुकानों पर काम करने वाले स्टाफ घर लौट चुके हैं। मतलब, गांधीनगर मार्केट की रौनक गायब होने और सूनापन छाने की वजह दिल्ली से मजूदरों का पलायन भी है।

गांधीगनगर के कपड़ा कारोबारी हरीश कुमार ने आईएएनएस को बताया कि दुकानें खुल रही हैं, लेकिन ग्राहक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि बमुश्किल पहले के मुकाबले 25 फीसदी ग्राहक ही पहुंच रहे हैं, इसलिए जो लोग दुकानें खोलते भी हैं, वे दोपहर बाद बंद कर देते हैं।

उन्होंने बताया कि फैक्टरियां अभी भी बंद हैं, क्योंकि न तो ऑर्डर मिल रहे हैं और न ही कारीगर और स्टाफ हैं। यहां तक कि फैक्टरियों में सफाई करने के लिए भी स्टाफ नहीं हैं, इसलिए कई लोग फैक्टरियां नहीं खोल पा रहे हैं।

हरीश ने बताया कि दिल्ली की सीमाएं सील होने के कारण बाहर के थोक खरीदार नहीं आ रहे हैं जो भी खरीदार हैं वो सब लोकल ही है।

कारोबारी कहते हैं कि रेडिमेड गार्मेंट का एशिया का सबसे बड़ा थोक बाजार गांधीनगर की रौनक तब तक नहीं लौटेगी, जब तक आवागमन का साधन सुगम नहीं होगा।

गांधीनगर स्थित रामनगर रेडिमेड गार्मेंट मर्चेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट एस.के. गोयल ने कहा कि जब तक दिल्ली की बोर्डर चारों तरफ से सील है, तब तक बाजार खुलने से भी कोई भी फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि ग्राहकी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि 20-25 फीसदी लोकल ग्राहक ही इस समय आ रहे हैं।

कारोबारी बताते हैं कि जो कोई इस समय दुकानें व फैक्टरियां खोल रहे हैं, वो सिर्फ साफ-सफाई और मन बहलाव के लिए जा रहे हैं।

गांधीनगर की ही कपड़ा कारोबारी कैलाश अग्रवाल ने भी एक दिन पहले से अपने फैक्टरी जाना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि आधी-अधूरी दुकानें ही इस समय खुल रही हैं, क्योंकि मांग नहीं है।

कारोबारी बताते हैं कि जब तक मांग नहीं निकलेगी और नए ऑर्डर नहीं आएंगे, तब तक गार्मेंट फैक्टरियों का कामकाज पटरी पर नहीं लौटेगा।

आईएएनएस

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एन95 या कॉटन मास्क? फैशन की दुनिया में छिड़ी जंग

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नई दिल्ली: लॉकडाउन के पांचवे चरण में सरकार द्वारा ढील दिए जाने के बाद लोग अब घरों से बाहर निकलने लगे हैं। ऐसे में फेस मास्क और सुरक्षा उपकरणों की मांग पहले से काफी ज्यादा बढ़ गई है।

जहां एन95 और सर्जिकल मास्क सबसे ज्यादा मशहूर है, वहीं कपड़ों के बने मास्क भी बेहद प्रभावी व फैशनेबल माने गए हैं। ये मुलायम, आरामदेह और सहज होते हैं और इनसे नाक व चेहरे को पर्याप्त कवरेज भी मिल जाता है।

इनमें कई सारे फीचर्स भी हैं जैसे कि ट्रिपल लेयर फिल्ट्रेशन, लीकेज कंट्रोल (धूल के कण छन जाते हैं), अल्ट्रा-कूल टेक्नोलॉजी और प्रदूषण, धूल, धुआं से सुरक्षा इत्यादि।

सबसे जरूरी बात तो यह है कि इन्हें धोकर इनका दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है। बीते दिनों एन95/सर्जिकल मास्क की भारी मांग रही, ऐसे में भारत सरकार और रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने वायरस को फैलने से रोकने और खुद को स्वस्थ रखने के लिए कपड़ों के बने मास्क या होममेड मास्क के उपयोग के लिए एक सलाह जारी की।

महिलाओं के लिए लुई फिलिप, जैक एंड जॉन्स, मैक्स और डब्ल्यू जैसी कई प्रमुख कंपनियों ने क्लॉथ मास्क को बनाकर उन्हें ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया। अमेजन फैशन की तरफ से एक ऐसे स्टोर की भी पेशकश की गई है, जिसमें देश भर के 35 से विक्रेताओं से पांच सौ से अधिक मास्क उपलब्ध हैं। आप चाहें तो स्थानीय विक्रेताओं से वियर योर ओपिनियन, बॉन ऑर्गेनिक और रैप्सोडिया जैसे तमाम मास्क की खरीदारी कर उन्हें इस्तेमाल में ला सकते हैं।

यहां कुछ ऐसे ही मास्क सुझाए गए हैं, जिन्हें आप अपनी पसंद व फैशन के मुताबिक पहन सकते हैं।

प्रिंटेड

प्रिंट का फैशन हमेशा से ही चलन में रहा है। ये मुलायम मास्क ट्रोपिकल, जियोमेट्रिक और कई अन्य लुभावने डिजाइन्स में उपलब्ध हैं।

फ्लोरल

ये कुछ ऐसे हैं, जो हर रोज के उपयोग के लिए उपयुक्त हैं और महिलाओं को यह बेहद भाता भी है।

चेक और स्ट्राइप्स

ये दिखने में काफी प्रोफेश्नल लगते हैं और पहनने में लुक भी काफी अच्छा आता है।

मोनोटोन

ब्राइट, बोल्ड और सॉलिड कलर्ड के ये मास्क भी आजकल काफी चलन में हैं, जिन्हें अपनी पसंद के रंग अनुसार पहना जा सकता है।

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विश्वप्रसिद्ध पश्मीना शॉल को हिमाचल दे रहा बढ़ावा

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शिमला, 3 जून (आईएएनएस)। दुनिया भर में मशहूर पश्मीना शॉल को हिमाचल प्रदेश बढ़ावा दे रहा है। इस बारे में बुधवार को पशुपालन मंत्री ने जानकारी दी। 

चांगथांगी नाम की यह भेड गरीबी से त्रस्त जनजातियों की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने आईएएनएस को बताया कि राज्य में सालाना 1,000 किलोग्राम पश्मीना ऊन का उत्पादन होता है और इसका उत्पादन पांच साल में दोगुना करने का लक्ष्य है।

ये बकरियां कश्मीर की प्रसिद्ध पश्मीना शॉल के लिए ऊन उपलब्ध कराती हैं, जो दुनिया भर में इसकी भारी मांग को पूरा करती हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत चंबा जिले के लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों और पांगी में बर्फ से निर्मित क्षेत्रों में परिवारों को चंगथंगी और चेगू नस्ल की 638 भेड मुहैया कराएगा।

इस वित्तीय वर्ष में ही यह पशुधन उपलब्ध कराया जाएगा।

वर्तमान में, पशमीना का उत्पादन मुख्य रूप से दारचा, योची, ररिक-चिका गांवों और लाहौल में मेयर घाटी के अलावा किन्नौर जिले के स्पीति, नाको, नामग्या और लियो में किब्बर, लंग्जा और हेंगंग के अलावा चंबा की पांगी घाटी में होता है।

राज्य में लगभग 10 संगठित शॉल निर्माण इकाइयां काम कर रही हैं। लगभग 90 फीसदी पश्मीना ऊन का उपयोग शॉल, स्टोल और मफलर जैसे अन्य उत्पाद बनाने में किया जाता है और बाकी का उपयोग हाई-एंड कोट ट्वीड्स बनाने में होता है।

बता दें कि पश्मीना उत्पादकों को पारिश्रमिक मूल्य मिल रहा है। वर्तमान में, कच्चे पश्मीना की कीमत लगभग 3,500 रुपये प्रति किलोग्राम है।

संगठित और असंगठित क्षेत्र में, राज्य में लगभग 12,000 कारीगर काम कर रहे हैं। वहीं ये राज्य 2,500 चंगथंगी बकरियों का घर है।

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