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भुट्टे के ऊपर पानी पीने से हो सकती हैं ये बीमारियां…

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बारिश के मौसम में भुट्टा खाने का एक अलग ही स्वाद होता है। हर कोई भुट्टा खाने का शौकीन होता है। कई बार हम इसे पॉपकॉर्न के रूप में भी खाते हैं।

लेकिन अगर आप भुट्टे के ऊपर पानी पी लेते है तो ये आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता है। भुट्टा खाने के बाद तुरंत पानी पीने से पेट की कई समस्या हो जाती है।

साथ ही ये पेट को फूल देता है। इतना ही नहीं भुट्टे का सेवन करने से आपका पाचन तंत्र भी कमजोर होने लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें कार्बोस और स्टार्च की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जब इन दोनों का साथ सेवन करते है तो पेट में गैस रुकने लगती है।

जिसके कारण पेट में एसिडीटी, पेट में दर्द जैसी गंभीर समस्या होने लगती है। अगर आपको भुट्टे के ऊपर पानी ही पीना है तो 45 मिनट पहले पी लें इसके बाद ना पीए। ऐसा करने से आपको कोई गभीर बीमारी नहीं होगी।

इतना ही नहीं आप मानसून में होने वाली समस्याओं से बच सकते है। और आप हमेशा हेल्थी भी बने रहंगे।बता दे भुट्टे का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से आपको विटामिन की कमी जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

इतना ही नहीं भुट्टे को कच्चा खाने से आपको दस्त और पेट से संबंधित कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ लोगो को भुट्टे के सेवन से एलर्जी और त्वचा पर चकत्ते या उल्टी जैसी परेशानिया हो जाती है।

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इन बीमारी के मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोना वायरस…

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कोरोना का कहर पुरी दुनिया में जारी हैं। वहीं, एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना वायरस से डाईबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को ज्यादा खतरा होता है।

‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें कोरोना से थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। क्योंकि इस बीमारी में जो मरीज को ड्रग दिया जाता है उसे ACE (एंजियोटेंसिन कन्वर्टिंग एंजाइम) कहते है।

इसका असर इंसान की की कोशिकाओं पर पड़ता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ड्रग से कोशिकाओं में बदलाव आने के बाद कोरोना वायरस के लिए हमला करना आसान हो जाता है। पूरी दुनिया में हर साल करोड़ों लोग डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए इन दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं।

अब जो डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज है उनके मन में यह सवाल जरूर आएगा की वो इस ड्रग का सेवन बंद करे या नहीं। लेकिन इस विशेषज्ञों की मानें तो उनका कहना है की बिना डॉक्टर्स की सलाह के दवाइयां बंद ना करें।

भारत में भी जिन लोगों की मौत इस जानलेवा वायरस के चलते हुई है उनकी उम्र काफी ज्यादा थी। साथ ही, दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ने वाली महिला को तो डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का मरीज भी बताया जा रहा है। इसलिए ऐसे मरीजों को थोड़ा सवाधनी बरतनें की जरूरत हैं।

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‘कोरोना पर हर वक्त सोचने से पड़ सकते हैं बीमार’

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नई दिल्ली, चीन से विश्व भर में फैले तथा दुनिया में महामारी घोषित हुए कोविड-19 यानी कोरोना वायरस को मात देने के लिए सरकार और समाज के द्वारा अनेकों प्रयास जारी है। ऐसे में अपने दिलो-दिमाग पर कोरोना के भय को कतई प्रभावी ना होने दें।

हर वक्त कोरोना के बारे में सोचने से आप बेवजह मानसिक तनाव में आ सकते हैं। राज्य नोडल अधिकारी (मानसिक स्वास्थ्य) डॉ. सुनील पाण्डेय ने बताया कि हम जिस विषय में भी बहुत देर तक सोचते व मनन करते हैं वह हम पर हावी हो जाता है। ऐसे में उसका नफा-नुकसान नजर आने लगता है, जो कि किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की स्थिति में सभी चीजें ठहर सी गई हैं। इसके लिए जरूरी है कि अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं और यदि आवश्यक सेवाओं से नहीं जुड़ें हैं, तो घर से बाहर निकलने से परहेज करें।

टीवी, अखबार और सोशल मीडिया में सिर्फ कोरोना के बारे में देखने-समझने और अपनो से सिर्फ उसी बारे में बात करने से बचें। ऐसा करने से आप मानसिक तनाव में आकर अपने साथ ही घर के अन्य सदस्यों को बीमार बना सकते हैं।

उन्होंने इससे ध्यान हटाने के लिए टीवी सीरियल देखने, पुस्तकें पढ़ने आदि की सलाह देते हुए कहा, “खाना बनाने का शौक है तो किचेन में कुछ वक्त बिताएं, यदि आपको घर पर ही रहना है तो अपने शौक को जिंदा रखें। अगर खाना बनाने का शौक है तो अपने हाथों से कुछ नई डिश बनाएं और अपनों के साथ शेयर करें। “

–आईएएनएस

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कॉलोनियों के मंदिरों से दूर नहीं हो पा रहे श्रद्धालु

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नई दिल्ली, 26 मार्च | देश भर के तमाम बड़े मंदिरों को कोरोनावायरस के खतरे के मद्देनजर बंद किया जा चुका है। लेकिन कई छोटे मंदिर अभी भी खुले हुए हैं। खासतौर पर अलग-अलग कॉलोनियों व मोहल्लों में बनाए गए मंदिरों में लोग अभी भी पहुंच रहे हैं। चांदनी चौक के एक ऐसे ही मंदिर के पुजारी शिव प्रसाद त्रिपाठी ने कहा, “हमारा मंदिर काफी छोटा है। यहां दिन भर में 30-40 लोग ही पूजा करने आते हैं, वह भी अलग-अलग समय पर। इसके अलावा हमने स्वयं से किसी भी व्यक्ति को मंदिर आने या न आने के लिए नहीं कहा है।”

त्रिपाठी ने कहा कि वह दिन में तीन बार मंदिर के मुख्य द्वार और भगवानों की मूर्ति को साफ करते हैं, लेकिन नवरात्र होने के कारण मंदिर के दरवाजे बंद नहीं कर सके।

उन्होंने कहा कि अब वह मंदिर के द्वार बंद रखेंगे, ताकि लोगों में इस बीमारी का संक्रमण न फैल सके।

चांदनी चौक स्थित नई सड़क इलाके के मंदिर दर्शन के लिए पहुंची शिवानी शर्मा ने कहा, “हम लोग अपने स्थानीय मंदिर में ही जा रहे हैं। नवरात्र पूजा के लिए हम किसी बड़े या भीड़भाड़ वाले इलाके अथवा मंदिर में नहीं गए। हमारे स्थानीय मंदिर में भी हम लोग तब जा रहे हैं जब वहां अधिक लोग मौजूद नहीं हैं।”

इस प्रकार की लापरवाही लगातार कई स्थानों पर सामने आई है, जहां लोग सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचने के बाद अपने-अपने तर्क देते नजर आए। हैरानी की बात तो यह है कि यहां कई लोग ऐसे मंदिरों के बाहर भी पहुंचे, जिनके दरवाजों पर ताला लगा हुआ है।

चांदनी चौक स्थित मोर सराय में रहने वाली वाली मीना देवी अपने बच्चों के साथ एक ऐसे ही मंदिर के बाहर पूजा करने गईं। उन्होंने कहा, “हम बरसों से नवरात्र में मंदिर के लिए भोग और भेंट निकालते हैं और इस बार भी हमने ऐसा ही किया है। मंदिर बंद था इसीलिए मंदिर के बाहर से ही हमने आरती की और भोग एवं भेट अर्पित किया।”

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