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गर्मियों में गन्ने का रस पीने से होते है ये 5 फायदे…

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sugarcanejuice

गर्मियों के मौसम में गन्ने का जूस शरीर से गर्मी ही नहीं दूर करता है। बल्कि इस मौसम में होने वाली कई परेशानियों में भी राहत देता है।

इसीलिए इस जूस का सेवन रोजाना करें, लेकिन चिलचिलाती धूप में आने के बाद थोड़ी देर रुककर इसे पिएं। बिना बर्फ के यह जूस ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि बर्फ वाला गन्ने का रस कई लोगों के लिए सर्दी खांसी की वजह बन सकता है।

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आइए हम आपको बताते है गन्ने का जूस पीने के फायदे…

1. थकान करे कम

गन्ने में अच्छी मात्रा में काइब्रोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, आयरन, पोटेशियम और एनर्जी ड्रिंक में मिलने वाली सभी जरूरी न्यूट्रिएंट्स होते हैं। जिसकी वजह से एक ग्लास गन्ने का रस आपने शरीर को एनर्जी से भर थकान खत्म कर देता है।

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2. पीलिया में दे राहत

सदियों से पीलिया से पीड़ित मरीजों को गन्ने का रस दिया जाता है। क्योंकि इसका जूस पीलिया के कारण लिवर को प्रभावित करने वाला बिलीरुबिन नामक तत्व (लिवर में पाए जाने वाला भूरे-पीले रंग का द्रव्य, जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है) को कम करता है, जिससे लिवर धीरे-धीरे मजबूत बनता है।

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3. एसिडिटी से दिलाए राहत

जो लोग पेट में बार-बार होने वाली एसिडिटी से परेशान हों, वो इसका सेवन कर सकते है। साथ ही यह पेट में जलन में भी राहत देता है।

4. बुखार करे ठीक

बच्चे हो या बड़े, बुखार से गर्म शरीर का तापमान कम करने में गन्ने का रस बड़ा फायदेमंद है, खासकर बच्चों को। यह रस शरीर में प्रोटीन की हानि को कम करता है, जिससे बुखार में आराम मिलता है।

5. इम्यून सिस्टम करे बूस्ट

जल्दी बीमार पड़ना, हर वक्त थकान रहना, जरा-सी मेहनत करने से सांस फूलना और शरीर में दर्द रहने जैसी अगर दिक्कतें हो तो गन्ने का रस जरूर पिएं। यह सारे लक्षण कमजोर इम्यून सिस्टम के हैं, जिसे गन्ने का रस बूस्ट कर सकता है।

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इस गर्मी चटख रंगों के कपड़ों से पाएं आकर्षक लुक

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tall looking clothes
फाइल फोटो

इस गर्मी में अपने कपड़ों को आपके मन की बात कहने दीजिए और बेहतरीन फैशन स्टेटमेंट के लिए वार्डरोब में चटख रंगों कपड़ों को शामिल कीजिए। फ्रेंच कनेक्शन की मार्केटिंग मैनेजर प्रेरणा लोहिया और ‘कूव्स’ की डिजाइन प्रमुख समांथा चिल्टन ने फैशन ट्रेंड के बारे में कुछ सुझाव दिए हैं, जिन्हें अपनाकर इस गर्मी में अलग लुक पाया जा सकता है :

* जैसा कि गर्मियां आ रही हैं, यह सीजन भड़कीले रंगों और खुद की अभिव्यक्ति के बारे में है। लाल, गुलाबी, बोडरे, पीले शेड वाले परिधान गर्मी के महत्वपूर्ण रंगों सफेद और नीले रंग के साथ एक अलग आकर्षक लुक देते हैं।

* मजेदार और प्रेरक संदेश लिखी टी-शर्ट आपके मन की बात जाहिर करती हैं। इस मौसम में चेक शर्ट का भी बोलबाला रहेगा। महिलाओं के लिए फ्लोरल प्रिंट वाले परिधान चलन में रहेंगे।

* औरों से अलग नजर आने के लिए इस मौसम में हल्के रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं।

* गर्मियों के लिए नया हॉट रंग हरा है और यह फ्लोरल प्रिंट, सॉलिड और पैटर्न में देखा जा सकता है।

* मौसम में फ्लोरट प्रिंट से लेकर नियॉन कोमो और ढीलेढाले स्लीवलेस शर्ट पहने जा सकते हैं।

* गमरी में लेयरिंग के लिए टी-शर्ट के ऊपर कढ़ाई वाला डेनिम जैकेट पहना जा सकता है, जो आपको स्मार्ट लुक देगा।

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अब गर्मियों में भी शान से पहनिए बनारसी साड़ियां

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कई महिलाओं को लगता है कि गर्मियों में बनारसी साड़ी पहनने से ज्यादा गर्मी लगती है। इसी वजह से इस मौसम में जॉर्जेट या फिर लिनेन की साड़ी ही शादी या फंक्शन्स में प्रेफर की जाती है।

लेकिन बनारसी साड़ी आजकल काफी पॉपुलर हो गई है।  इन्हें ट्रेडिशनल जूलरी के साथ पहनने का ट्रेंड जोरो पर है। इसीलिए ऑनलाइन स्टोर वीवरस्टोरी 10 और 11 अप्रैल को दिल्ली में स्थित आगा खान हॉल, मंडी हाउस में हाथों से बुनकर तैयार किए गए नए ‘बानारसी समर कलेक्शन’ को पेश करेगा।

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प्रदर्शनी में वीवरस्टोरी द्वारा नए चंदेरी सिल्क, बनारसी कॉटन्स, बंधेज साड़ी, दुपट्टा, लहंगा और चंदेरी के साथ रेडी टू वियर सूट भी प्रदर्शित किए जाएंगे। चंदेरी एक पारंपरिक एथनिक कपड़ा है जिसे पहनने से शानदार अनुभव होता है। चंदेरी कपड़े पारंपरिक रेशम के धागे और सोने के जरी के काम से तैयार होता है।

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बंधेज साड़ी जिसे बांधनी साड़ी के नाम से भी जाना जाता है। वह विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात में मिलती है। इन साड़ियों की अच्छी किस्में मांडवी, भुज, जामनगर, पोरबंदर, अजमेर, बीकानेर आदि में बनाई गई हैं।

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इस संग्रह के कुछ आकर्षण रहेंगे कूल बनारस कॉट्सन्स, हैंडब्लॉक मुद्रित अनारकली सेमीस्टिच्ड सूट, नई रेंज के बनारसी मूंगा सिल्क कुर्ता विद कड़वा मीनाकारी बूटा और चंदेरी सिल्क दुपट्टा आदि।

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भारत का मिनी स्विट्जरलैंड है कौसानी

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भारत में ऐसी कई जगह हैं, जो खूबसूरती में किसी विदेश की जगह से कम नहीं है। ऐसी ही एक जगह है कौसानी, जिसे भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में 6075 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर बसा है खूबसूरत हिल स्टेशन कौसानी।

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दिलकश नज़ारों के चलते ही इस जगह को भारत का स्विट्जरलैंड कहा जाता है। कहीं-कहीं इसे कुमाऊं का स्वर्ग भी कहते हैं। कौसानी पहुंचकर आपको हिमालय की चोटियों का 350 किलोमीटर फैला नजारा एक ही जगह से देखने का मौका मिलता है।

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पहाड़ों से नीचे झांके तो कटौरी घाटी और गोमती नदी मन मोह लेती है। कौसानी पिंगनाथ चोटी पर बसा है। यहीं से नंदा देवी पर्वत की चोटी को करीब से देखा जा सकता है। इन खूबसूरत नजारों से रूबरू होने के लिए ही देश-दुनिया से टूरिस्ट कौसानी खिंचे चले आते हैं। रुद्रधारी फॉल्स, लक्ष्मी आश्रम, गांधी आश्रम और टी एस्टेट यहां के फेवरिट टूरिस्ट पॉइंट्स हैं।

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कौसानी में लोग खुद को कुदरत के एकदम करीब महसूस करते हैं। चाय के बागान करीब 210 हेक्टेयर एरिया में फैले हैं। चाय पीने के शौकीनों के लिए तो कमाल की जगह है। यहां किस्म-किस्म की चाय पत्तियां उगाई जाती हैं।

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यहां की बेस्ट चाय पत्ती ‘गिरियास टी’ की खेती भी यहां होती है। इसके अलावा ऑर्गेनिक टी भी मिलती है। कुछ एक चाय पत्तियां तो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और कोरिया तक एक्सपोर्ट की जाती हैं।

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चाय के साथ ’आलू गुटका’ खूब खाया जाता है। उबले आलू को नमक-मिर्च का तड़का लगा कर बनाते हैं। चाय के साथ यही स्नैक सबसे ज्यादा खाया जाता है। कौसानी और आसपास के पहाड़ी शहरों की बाल मिठाई भी मशहूर है। दूध को घंटों काढ़-काढ़ कर बनाते हैं। चॉकलेट फ्लेवर के ऊपर सफेद मीठी चीनी के दाने लगे होते हैं।

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पौराणिक कथाओं के मुताबिक यह आदि कैलाश है। यहीं भगवान शिव और विष्णु का वास था। यहां आने-जाने का रास्ता कठिन नहीं है। कौसानी के पास 12 किलोमीटर ट्रेकिंग करते-करते भी यहां पहुंच सकते हैं। ठंडे पानी का झरना काफी ऊंचाई से गिरता है।

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जाने कैसे पहुंचे गए

दिल्ली से कौसानी सड़क मार्ग से जुड़ा है और इसकी दूरी करीब 410 किलोमीटर है। दिल्ली से कौसानी पहुंचने में करीब 9-10 घंटे का समय लगता है। नैनीताल कौसानी 120 किलोमीटर दूर है, जबकि अल्मोड़ा से इसकी दूरी सिर्फ 50 किलोमीटर है।

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कौसानी का नजदीकी एयरपोर्ट पंत नगर है। हालांकि एयरपोर्ट भी करीब 180 किलोमीटर दूर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जहां से अल्मोड़ा होकर कौसानी की दूरी 140 किलोमीटर के आसपास है। मार्च से जून के बीच कौसानी घूमने-फिरने का बेस्ट सीजन है। फिर सितंबर से नवंबर का समय भी अच्छा है।

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