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‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने सऊदी अरब के लापता पत्रकार का अंतिम लेख छापा

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Jamal Khashoggi
फोटो साभार- The Washington post

वाशिंगटन पोस्ट ने सऊदी अरब मूल के अपने लापता पत्रकार जमाल खशोग्गी का लिखा अंतिम लेख प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने संपूर्ण अरब जगत में प्रेस की आजादी के बदतर हालात के बारे में लिखा है।

खशोग्गी के संपादक कारेन एतियाह ने पत्रकार के अनुवादक से यह लेख दो अक्टूबर को उनके लापता होने से एक दिन बाद प्राप्त किया था। एतियाह ने बुधवार को कहा, “इसको प्रकाशित करने में देरी हुई, क्योंकि हमें आशा थी कि जमाल हमारे पास वापस आ जाएंगे और हम साथ मिलकर इसे संपादित करेंगे।

अब मुझे स्वीकार करना होगा। यह नहीं होने जा रहा है। उन्होंने कहा, “खशोग्गी के अंतिम लेख का शीर्षक ‘अरब जगत को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सबसे ज्यादा जरूरत’ का समर्थन करता है, जो उनकी अधिकतर जिंदगी को अरब जगत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अनुप्राणित करता है।”

सऊदी अरब के सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान में एक आरामदायक पद को छोड़कर वाशिंगटन बस जाने वाले पत्रकार ने अपने अंतिम लेख में एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय मंच की रचना का आह्वान किया है, जो प्रोपगेंडा के माध्यम से नफरत फैलाने वाली राष्ट्रवादी सरकारों के प्रभाव से अलग रहे। खशोग्गी ने वाशिंगटन में रहकर द पोस्ट में लेखों के जरिए योगदान की शुरुआत की थी।

–आईएएनएस

अंतरराष्ट्रीय

जापान में विस्फोट, 42 घायल

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explosion fire blast

जापान के सापोरो शहर में एक पब के पास विस्फोट में 42 लोग घायल हो गए। जापान टाइम्स के मुताबिक, यह विस्फोट शहर के टोयोहिरा वार्ड में रविवार रात लगभग 8.30 बजे के आसपास हुआ। आग पर देर रात 2.10 बजे ही काबू पाया जा सका।

पुलिस के मुताबिक, यह संदिग्ध गैस विस्फोट लकड़ी की इमारतों में हुआ, जिसमें एक जापानी शैली का पब, एक रियल एस्टेट एजेंसी और एक क्लिनिक था, जो नष्ट हो गए।

घायलों में रियल एस्टेट ऑफिस का एक पुरूष कर्मचारी भी है, जिसकी हालत गंभीर है। पुलिस को अंदेशा है कि यह विस्फोट या तो पब में हुआ या रियल एस्टेट के ऑफिस में हुआ। इस विस्फोट में घटनास्थल के आसपास के घरों और रेस्तरां की खिड़कियां नष्ट हो गईं। कई लोगों को ऐसा लगा कि भूकंप आया।

–आईएएनएस

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अंतरराष्ट्रीय

पेरिस समझौते को लागू करने पर बनी वैश्विक सहमति

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Paris Climate Agreement
पेरिस समझौता-2015 को लागू करने पर वैश्विक सहमति बनी है। (फोटो क्रेडिट: टाइम्‍स नाउ)

काटोवाइस। ऐतिहासिक 2015 पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते को लागू करने के लिए दुनियाभर के लगभग 200 देशों के बीच सहमति बन गई है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में शनिवार को अंतिम घंटों में इस पर सहमति बनी। यह सहमति ब्राजील और तुर्की के विरोध के बाद बनी।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मलेन को सीओपी24 भी कहा जाता है।

पेरिस समझौते की 133 पन्नों वाली नियमावली के साथ वार्ता खत्म हुई, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

पेरिस समझौता 2020 में लागू होगा।

इन दिशानिर्देशों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपट रहे सभी देशों के बीच विश्वास को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

सीओपी24 के अध्यक्ष माइकल कुर्तिका ने कहा, “सभी देशों ने अथक मेहनत की है। सभी देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। सभी देश केटोवाइस से गर्व की अनुभूति के साथ जा सकते हैं, यह जानकर कि उनके प्रयास सफल हुए हैं।”

कुर्तिका ने कहा, “कैटोवाइस क्लाइमेट पैकेज में शामिल ये दिशानिर्देश 2020 से पेरिस समझौते के लागू होने का आधार प्रदान करता है।”

इस समझौते में कुछ मुद्दों पर आपत्ति जताते हुए भारत के मुख्य वार्ताकार रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत वैश्विक स्थिति के निर्णय में समानता के संदर्भ में अपना कड़ा संदेह व्यक्त करता है।

उन्होंने कहा, “पेरिस समझौते की धारा 14 में समनता का विशेष तौर पर उल्लेख है। यह संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन और पेरिस समझौते का बुनियादी सिद्धांत है। अगर प्रक्रिया, इनपुट, तकनीकी आकलन और वैश्विक स्थिति के आकलन में समानता का ध्यान नहीं रखा गया तो वैश्विक स्थिति के आकलन की यह पूरी प्रक्रिया ही बेकार हो जाएगी।”

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सचिवालय के मुताबिक, इस समझौते के क्रियान्वयन से सभी क्षेत्र के लोगों विशेषकर वंचितों को लाभ होगा।

–आईएएनएस

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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी भड़का

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इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावेसी प्रांत में रविवार को ज्वालामुखी के भड़कने से आसमान पर 7.5 किलोमीटर तक राख के बादल छा गए। आपदा प्रबंधन एजेंसी ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि माउंट सोपुतान में सबसे पहले सुबह 7.43 बजे विस्फोट हुआ और उसके बाद 8.57 बजे विस्फोट हुआ।

राख दक्षिण पश्चिम और ज्वालामुखी पड़ाड़ के मुख के दक्षिणी ओर तक गई और छोटे झटकों ने इलाके को दहला दिया। प्रवक्ता ने कहा, “ज्वालामुखी के सतह से निकल रहे लावा और गर्म राख के मद्देनजर आसपास के लोगों से ज्वालामुखी के चार किलोमीटर के दायरे से दूर रहने के लिए कहा गया है और प्रशासन ने भी इसके 6.5 किलोमीटर के दायरे तक लोगों के जाने पर प्रतिबंध घोषित कर दिया है।”

–आईएएनएस

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