ठंड का कहर: मगरमच्छ बन गया बर्फ...देखें वीडियो | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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कड़ाके की ठंड से जूझ रहे अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक मगरमच्छ नजर आ रहा है जो कि ठंड की वजह से नदी में जमा हुआ है।

बता दें कि पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में इस समय काफी ठंड पड़ रही है। ठंड का आलम ये है कि नदियां जम गई हैं जिसकी वजह से नदी में मगरमच्छ भी अंदर ही जम गया है, केवल उसका मुंह बाहर नजर आ रहा है।

शेलोट रिवर स्वैम्प पार्क ने अपने फेसबुक पेज पर इसका वीडियो शेयर किया है जिसमें चारों तरफ सिर्फ बर्फ ही नजर आ रही है और बीच में मगरमच्छ फंसा हुआ है। इस वीडियो में एक शख्‍स पीछे से वहां का हाल बयां करता नजर आ रहा है।

Update: Alligators in Ice!

UPDATE on our SUPER Reptiles! #oib #oibswamppark #natgeo #northcarolina #visitnc #visitmyrtlebeach #alligators #swamp #wect #wral #wway #bombcyclone #winter #survival

Posted by The Swamp Park on Sunday, January 7, 2018

 

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सुरक्षा, क्षमता निर्माण पर होगी रेलवे की नजर : रेलवे बोर्ड अध्यक्ष

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Dinesh Kumar Yadav

नई दिल्ली, 1 फरवरी | रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी.के. यादव ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रेल को अब तक की सबसे ज्यादा पूंजीगत व्यय राशि 1.85 लाख करोड़ रुपये मिली है और रेलवे का मुख्य फोकस सुरक्षा साधन, क्षमता निर्माण, मॉबिलिटी में सुधार और यात्रियों की सुरक्षा पर होगा। वित्तमंत्री पीयूष गोयल द्वारा संसद में अंतरिम बजट पेश किए जाने के बाद रेलभवन में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यादव ने कहा, “वित्त एवं रेलमंत्री पीयूष गोयल ने जैसाकि अंतरिम बजट भाषण में जिक्र किया है कि यह साल अब तक का सबसे सुरक्षित साल रहा है।”

रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा, “हमारा ध्यान सुरक्षा साधनों, क्षमता निर्माण, मॉबिलिटी और यात्रियों की सुरक्षा पर होगा।”

उन्होंने कहा कि रेलवे ने बड़ी लाइन के अपने नेटवर्क में सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग को समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि रेलवे ऑटोमेटिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली पर काम कर रही है।

यादव ने कहा कि रेलवे ने पूर्वोत्तर के राज्यों में 43 परियोजनाएं शुरू की हैं जिनपर अनुमानित लागत 93,000 करोड़ रुपये आएगी।

इससे पहले रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए इन्फ्रास्ट्रक्च र आवंटन 21 फीसदी बढ़ाकर 2019-20 में 58,166 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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बांधवगढ़ ले जाए जाएंगे उत्पाती हाथी

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Elephant

भोपाल, 19 सितंबर | छत्तीसगढ़ में उत्पात मचाने वाले हाथी काफी समय से मध्य प्रदेश के सीधी जिले में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं। इस दौरान दो लोगों की मौत होने के अलावा संपत्ति का भारी नुकसान हो चुका है। वन अमले ने इन हाथियों को कब्जे में ले लिया है और इन्हें बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भेजने की तैयारी हो रही है। वन विभाग की ओर से बुधवार को दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के हाथी मवई नदी को पार कर सीधी जिले में घुस गए और यहां जमकर उत्पात मचाया। इन हाथियों ने कुंदौर गांव के कच्चे घरों को तोड़कर उनमें रखा अनाज खा लिया और खेतों की फसलों को तबाह कर दिया।

हाथियों के बढ़ते आतंक को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने तत्काल सोलर लाइट गांव की सीमा पर लगा कर हाथियों को गांव में घुसने से रोका। इसके बाद हाथी अन्य गांवों में भी इसी तरह उत्पात मचाते हुए सीधी मुख्यालय की 15 किलोमीटर की परिधि में पहुंच गए। हाथियों को भगाने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ भी बुलाए गए। अगस्त से सितंबर के बीच इन उत्पाती हाथियों ने दो ग्रामीणों की जान भी ले ली।

उत्पाती हाथियों पर काबू पाने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संचालक मृदुल पाठक के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मचारियों के दल ने अभियान चलाया और कुल पांच हाथियों को कब्जे में ले लिया है। इन हाथियों को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा।

–आईएएनएस

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हिंदी ब्लॉग्स को हर महीने 3 करोड़ पेज व्यू : मॉमस्प्रेसो

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Hindi Blog

नई दिल्ली, 14 सितम्बर | भारत के महिलाओं के लिए सबसे बड़े यूजर-जनरेटेड कंटेंट प्लेटफार्म मॉमस्प्रेसो ने हिंदी दिवस (14 सितंबर) पर अपने 6,500 से ज्यादा ब्लॉगर्स के डेटा का विश्लेषण कर नई रिपोर्ट प्रस्तुत की है। विश्लेषण कहता है कि हिन्दी ब्लॉग्स ने हर महीने 3 करोड़ से ज्यादा पेज व्यू हासिल की है। इसमें से 95 प्रतिशत की खपत पाठकों ने मोबाइल पर की है।

प्लेटफार्म ने बताया कि हिंदी पेज व्यू अंग्रेजी से ज्यादा हो गए हैं और इस समय कुल पेज व्यू का 50 प्रतिशत हो गया है।

मॉमस्प्रेसो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्लेटफार्म पर हिंदी में लेखन की सूची मुख्य रूप से उन शहरों की माताओं ने तैयार की है, जिनकी तुलनात्मक रूप से भागीदारी कम रही है। इनमें पटना, आगरा, लखनऊ, शिमला, भुवनेश्वर और इंदौर शामिल है। 75 प्रतिशत हिन्दी ब्लॉग्स को मॉमस्प्रेसो मोबाइल ऐप के जरिये लिखा गया है, जबकि अंग्रेजी में ऐसा नहीं है। 60 प्रतिशत ब्लॉगर्स अभी भी ब्लॉग लिखने के लिए डेस्कटॉप उपयोग करते हैं। मोबाइल ऐप पर बने हिन्दी ब्लॉग्स में से 93 प्रतिशत एंड्रायड फोन पर बने हैं। प्लेटफार्म पर इस समय 1,595 हिन्दी ब्लॉगर्स हैं, जिन्होंने अब तक 14,746 ब्लॉग्स बनाए हैं। हर महीने करीब 1,800 ब्लॉग्स जोड़े जा रहे हैं।

मॉमस्प्रेसो ने बताया कि हिन्दी की अधिकतम रीडरशिप लखनऊ, जयपुर, इंदौर, चंडीगढ़, आगरा और पटना से है। यह भी बताया गया कि 95 प्रतिशत यूजर्स ने लेखन का इस्तेमाल मोबाइल पर किया। जिस कंटेंट ने अधिकतम रीडरशिप (65 प्रतिशत) हासिल की, वह ‘मां की जिंदगी’ या ‘मॉम्स लाइफ’ सेक्शन था। रिलेशनशिप्स से लेकर पैरेंटिंग और सामाजिक उत्तरदायित्व तक का लेखन इस पर उपलब्ध है। अन्य लोकप्रिय सेक्शन में प्रेग्नेंसी, बेबी, हेल्थ और रैसिपी भी शामिल हैं।

हिंदी पोस्ट्स को अंग्रेजी की तुलना में 4.2 गुना ज्यादा एंगेजमेंट मिला। इसमें लाइक्स, शेयर और कमेंट्स शामिल हैं। हिन्दी में हाइपर एंगेजमेंट की एक बड़ी वजह हिन्दी कंटेंट की क्वालिटी है। पहली बार महिलाओं को कई मुद्दों पर अपने विचार अभिव्यक्त करने के लिए सुरक्षित स्थान मिला है। कई महिलाएं जो लैंगिंक भेदभाव, सामाजिक मुद्दों और अन्य वजहों से खुलकर बोल नहीं पाती थी, वह भी इस पर अपने आपको अभिव्यक्त कर रही है।

मॉमस्प्रेसो के सह-संस्थापक और सीईओ विशाल गुप्ता ने कहा, “हमारा विजन यह है कि अगले तीन वर्षो में हमारे प्लेटफॉर्म पर सभी माताओं में से 70 फीसदी को लेकर आना है और क्षेत्रीय भाषा लेखन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है। हमें गर्व है कि मॉमस्प्रेसो एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है जहां भारत भर की माताएं बिना डर के अपने विचार व्यक्त कर रही हैं। इन विषयों पर बहस और चर्चाओं को प्रोत्साहित करती हैं। पिछले 12 महीनों में हमारे ट्रैफिक चार गुना बढ़ा है और हिंदी की भूमिका इस विकास में महत्वपूर्ण रही है। इस समय हमारे पास चार अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लेखन है और वर्ष के अंत से पहले हमारी योजना 3 और जोड़ने की है।

हिंदी भाषा लेखन का उपयोग करने वाले ब्रांड्स की संख्या 2017 के 6 फीसदी से बढ़कर 2018 में 27 फीसदी हो गई है। इसमें पैम्पर्स, डेटॉल, बेबी डव, नेस्ले, जॉनसन एंड जॉन्सन, एचपी, ट्रॉपिकाना एसेंशियल्स और क्वैकर जैसे ब्रांड शामिल हैं।

–आईएएनएस

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