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नोटबंदी में कैश जब्त करना नहीं था मकसद : अरुण जेटली

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नोटबंदी को आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के समर्थन में एक ब्लॉग लिखा है। जेटली के मुताबिक, नोटबंदी से ब्लैक मनी पर लगाम लगी है साथ ही टैक्स बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने लिखा है, ‘नोटबंदी सरकार के अहम फैसलों की एक कड़ी है जो अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए ज़रूरी है’। जेटली ने लिखा, नोटबंदी के बाद टैक्स चोरी करना मुश्किल हो गया है। जेटली ने आगे लिखा, ‘नोटबंदी की लोग ये कहते हुए आलोचना कर रहे हैं कि लगभग सारा कैश बैंकों में वापस आ गया।

लेकिन नोटबंदी के सहारे हमारा मकसद सिर्फ कैश को ज़ब्त करना नहीं था। हमारी कोशिश थी कि लोग टैक्स के दायरे में आए। क्योकि इसके जरिए हमें कैशलेस इकॉनमी से डिजिटल लेन-देन की दुनिया में आना था। नोटबंदी से ज़्यादा टैक्स रेवेन्यू जमा करने और टैक्स बेस को बढ़ाने में मदद मिल रही है।

जेटली ने ब्लॉग में लिखा है कि वित्त साल 2018-19 (31-10-2018) तक जो पर्सनल इनकम टैक्स जमा हुए हैं, वो पिछली बार के मुकाबले 20.2% ज़्यादा है। कॉर्पोरेट टैक्स 19.5% ज़्यादा जमा हुए हैं। इसके अलावा डाइरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी 6.6% और 9% हो गया है। जेटली के मुताबिक, टैक्स चोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद बैंकों की कर्ज देने की ताकत भी बढ़ गई है। काफी सारा पैसा म्यूचुअल फंड में भी जमा हुआ है।

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अमेरिकी हैकर का दावा- 2014 के आम चुनाव में हैक हुई थीं ईवीएम!

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लंदन में बैठे हैकर ने ईवीएम को लेकर खुलासा किया। (फोटो: एनडीटीवी)

2014 के आम चुनाव में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की हैकिंग को लेकर खुलासा हुआ है। लंदन में एक क्लोज इवेंट में एक अमेरिकी हैकर ने यह दावा किया। यूरोप में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजेए) ने इवेंट का आयोजन किया। भारतीय मूल के इस अमेरिकी हैकर का नाम सैयद सूजा बताया जा रहा है।

हैकर ने दावा किया कि 2014 के चुनावों में हैकिंग हुई थी। हैकर ने बताया कि 2015 के दिल्ली चुनावों में उसकी टीम ने ईवीएम की हैकिंग को रोका था, वरना आम आदमी पार्टी की जगह बीजेपी की जीत होती।

हैकर ने दावा किया है कि सीनियर जर्नलिस्ट गौरी लंकेश उनकी स्टोरी चलाने के लिए तैयार हुई थीं लेकिन उनकी हत्या कर दी गई। हैकर ने खुलासा किया कि बीजेपी सिनीयर लीडर गोपीनाथ मुंडे की ‘हत्या’ की गई, क्योंकि उन्हें इस बारे में सब कुछ पता था।

हैकर सैयद सूजा कौन है और उनके दावों में कितनी सच्चाई है इसके बारे में फिलहाल कुछ साफ नहीं कहा जा सकता। हैकर दावा कर रहा है वो इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का पूर्व कर्मचारी भी रह चुका है। बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का ईवीएम डिजाइन में सहयोग रहता है।

हैकर का दावा है कि इस गड़बड़ी में बीजेपी सहित कई राजनीतिक दल शामिल हैं।

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जांच में खुलासा- ‘भय्यूजी को खुदकुशी के लिए अपनों ने किया मजबूर’

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आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज (फाइल फोटो)

इंदौर। मध्य प्रदेश ही नहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में ‘राष्ट्रसंत’ कहलाने वाले उदय सिंह देशमुख उर्फ भय्यूजी महाराज आत्महत्या मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। उन्हें आत्महत्या के लिए गैरों ने नहीं, बल्कि अपनों ने मजबूर किया, जिनकी नजर उनकी संपत्ति पर थी। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है। भय्यूजी महाराज ने 12 जून 2018 को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद बेटी कुहू और दूसरी पत्नी आयुषी के बीच विवाद को प्रचारित किया गया था, ताकि इस दुखद घटना के लिए उन्हें ही जिम्मेदार मान लिया जाए। मगर वक्त गुजरने के साथ जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। उनके सबसे करीबी ही उनकी जान के दुश्मन निकले।

केयर टेकर बनी पलक पुराणिक जहां भय्यूजी को अपना जीवन साथी बनाना चाहती थी, वहीं सेवादार उनकी संपत्ति पर कब्जे की साजिश रचे हुए थे। पुलिस के अनुसार, “भय्यूजी महाराज आत्महत्या मामले में सेवादार शरद देशमुख व विनायक दुधाले और केयर टेकर से प्रेमिका बनी पलक पुराणिक को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन तीनों पर भय्यूजी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा है।” इंदौर के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरि नारायणचारी मिश्रा ने माना कि भय्यूजी महाराज को अपनों द्वारा ब्लैकमेल किए जाने के चलते आत्महत्या करनी पड़ी। विनायक, शरद व पलक इस साजिश के अहम किरदार थे।

पलक भय्यू महाराज से शादी करना चाहती थी और विनायक व शरद उनका साथ दे रहे थे। डीआईजी ने कहा, “तीनों ने उन्हें ब्लैकमेल किया, जिसके चलते भय्यूजी महाराज ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। पुलिस को मोबाइल चैट से भी इसके सबूत मिले हैं।” पुलिस के अनुसार, “भय्यूजी महाराज की पहली पत्नी माधवी की मौत के बाद पलक को केयर टेकर के तौर पर रखा गया था, वक्त गुजरने के साथ पलक की उनसे नजदीकी बढ़ी।

इसी दौरान भय्यू महाराज ने डॉ. आयुषी से विवाह किया, तो पलक व अन्य ने उन्हें ब्लैकमेल करने की चेतावनी दी। पलक ने जून, 2018 के अंत तक शादी करने का अल्टीमेटम दिया था। इसी के चलते उन्होंने 12 जून, 2018 को खुद को गोली मार ली।” पुलिस को जांच में सबूत मिले हैं कि तीनों मिलकर उन्हें ब्लैकमेल करते थे। कई अश्लील वीडियो चेट भी मिले है। जांच में पता चला कि पलक व विनायक उन्हें दवाएं देते थे, जिनमें शारीरिक तौर पर कमजोर करने की भी दवाएं होती थीं।

–आईएएनएस

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मथुरा के जवाहर बाग हिंसा मामले में 45 दोषियों को 3 साल की कैद

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फाइल फोटो

साल 2016 में उत्तर प्रदेश के मथुरा के जवाहर बाग हिंसा के मामले में एक अदालत ने 45 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, वही सभी को अधिकतम 3 साल की कैद की सजा सुनाई है। वहीं मुख्य आरोपी चंदन बोस, उसकी पत्नी पूनम बोस और अन्य महिला श्यामवती को बरी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि 2 जून 2016 को रामवृक्ष यादव द्वारा कब्जा किये गए जवाहर बाग को खाली कराने के दौरान हिंसा भड़क गई थी। रामवृक्ष यादव के समर्थकों ने जवाहर बाग खाली करा रहे पुलिस पर हमला कर दिया था। इसी दौरान एसपी (सिटी) मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार यादव समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी।

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