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सर्दियों में ऐसे रखें सेहत का ख्याल…

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Winter
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सर्दियों में हर किसी के लिए अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। कुछ खास सावधानियां बरतकर आपक खुद को तंदुरुस्त रख सकते है। आइए जानें किन बातों का ध्यान रखें।

ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें 

* अपने ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखें। इस समय नमक का सेवन कम मात्रा में करें, क्योंकि ज्यादा नमक से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

खाने-पीने की आदतें : साबुत अनाज, दलिया आदि दिल की सेहत के लिए अच्छे हैं और वजन कम करने में भी मदद करते हैं। तले हुए तथा सैचुरेटेड खाद्य पदार्थो का सेवन न करें। फलों और सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करें। इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स इस मौसम में बीमारियों से लड़ने के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

पानी पीने की आदत : सर्दियों में पानी का सेवन ज्यादा मात्रा में करें। हर्बल-टी पीने से एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम होता है।

अपने वजन पर नियंत्रण रखें, फिट रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। सैर करें, यह अच्छा व्यायाम है। साथ ही चलने से शरीर में गर्मी आती है। दिन में 6-8 घंटे की नींद लें। रोज कम से कम 15 मिनट चलें, इससे खून का दौरा बढ़ता है।

दिल की बीमारियों से बचने के लिए धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।

अपने आपको गर्म कपड़ों से कवर करके रखें, खासतौर पर पैर, सिर और कानों को ढक कर रखें।

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बाईपास सर्जरी करा चुके लोगों के लिए रात की अच्छी नींद के लिए मॉर्निग वाक जरूरी

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लंदन, 5 जुलाई (आईएएनएस)। दिल की बाईपास सर्जरी करा चुके लोग यदि रात को अच्छी नींद चाहते हैं तो उन्हें सुबह आधा घंटा टहलना चाहिए। यह बात एक अध्ययन में कही गई है।

मिस्र की काहिरा यूनिवर्सिटी के अध्ययन के लेखक हादी आतेफ ने कहा है, दिल की बाईपास सर्जरी कराने के बाद कई मरीजों में नींद की समस्या पैदा हो जाती है।

उन्होंने कहा, यह स्थिति छह महीने से ज्यादा बने रहने के बाद दिल की स्थिति बिगड़ जाती है और मरीज में दोबारा सर्जरी का जोखिम बढ़ जाता है। लिहाजा बाईपास सर्जरी कराने के बाद नींद में सुधार के उपाय खोजना अत्यंत जरूरी है।

इस अध्ययन में नींद और कार्यक्षमता दोनों पर कसरत के असर की पड़ताल की गई है। इसमें 45 से 65 साल के ऐसे 80 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें दिल की बाईपास सर्जरी के छह सप्ताह बाद नींद की समस्या थी और उनकी कार्यक्षमता भी घट गई थी।

मरीजों को रैंडमली दो कसरत समूह आवंटित किए गए : एयरोबिक एक्सरसाइज और रजिस्टैंस एक्सरसाइज।

दोनों समूहों ने 10 सप्ताह की अवधि के दौरान सुबह 30 एक्सरसाइज सत्र किए।

एयरोबिक एक्सरसाइज सत्र के दौरान भागीदारों ने एक ट्रेडमिल पर 30-45 मिनट तक वाक की।

एयरोबिक और रजिस्टैंस एक्सरसाइज सत्रों के दौरान भागीदारों ने एक ट्रेडमिल पर 30-45 मिनट तक वाक की और सर्किट वेट ट्रेनिंग (हल्के रजिस्टैंस एक्सरसाइज का एक रूप) की।

10 सप्ताह बाद दोनों एक्सरसाइज समूहों के बीच नींद और कार्यक्षमता में बदलावा की तुलना की गई।

दोनों एक्सरसाइज कार्यक्रमों -अकेले एयरोबिक और एयरोबिक व रजिस्टैंस संयुक्त रूप से- से 10 सप्ताह की अवधि के दौरान नींद और कार्यक्षमता में सुधार हुआ।

अध्ययन के अनुसार, लेकिन अकेले एयरोबिक एक्सरसाइज संयुक्त एक्सरसाइज की तुलना में नींद और कार्यक्षमता के लिए बहुत लाभकारी रहा।

इस अध्ययन को यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ईएससी) के एक वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म, एसीएनएपी एसेंसियल्स 4 यू पर प्रस्तुत किया गया है।

आतेफ ने कहा, नींद की समस्या और सामान्य गतिविधि में समस्या महसूस करने वाले हर्ट बाईपास मरीजों के लिए हमारी रिफारिश है कि वे सिर्फ एयरोबिक एक्सरसाइज करें।

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फेयर एंड लवली का नाम अब ‘ग्लो एंड लवली’

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नई दिल्ली, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का प्रमुख स्किन केयर ब्रांड फेयर एंड लवली को अब ग्लो एंड लवली के नाम से जाना जाएगा।

एचयूएल कंपनी ने सुंदरता के सकारात्मक पहलू में और अधिक समावेशी ²ष्टिकोण अपनाया है।कंपनी ने कहा कि अगले कुछ महीनों में ग्लो एंड लवली ब्रांड खुदरा दुकानों पर उपलब्ध होगा। इसके साथ ही इस उत्पाद के साथ भविष्य के नवाचार सामने लाए जाएंगे।

पुरुषों के लिए उसके उत्पादों की रेंज को अब ग्लो एंड हैंडसम कहा जाएगा। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) ने पहले घोषणा की थी कि वह ब्रांड फेयर एंड लवली में ब्यूटी की अधिक समावेशी ²ष्टि के साथ फेयर शब्द का इस्तेमाल करना बंद कर देगा। एचयूएल ने कहा कि यह ब्रांड सभी स्किन टोन के लिए प्रतिबद्ध है।

फेयर एंड लवली ब्रांड की आलोचना कुछ भारतीय वर्गो द्वारा किया गया, जिन्होंने कंपनी पर स्किन टोन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

–आईएएनएस

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कंप्यूटर, रसायन, फार्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी के छात्र ढूढ़ेंगे कोरोना की दवा

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नई दिल्ली। देश में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस की दवा तैयार करने में अब कंप्यूटर विज्ञान, रसायन विज्ञान, फार्मेसी, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) जैसे विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर, शिक्षक, शोधकर्ता और छात्र भी हिस्सा लेंगे।

किसी दवा की खोज में हो रहे प्रयासों को संबल देने के लिए यह अपने आप में एक अनोखी राष्ट्रीय पहल है। इस विषय पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, किसी दवा की खोज करना एक बेहद जटिल और महंगी प्रक्रिया है।

इस प्रक्रिया को कम समय में और कम लागत में पूरा करने के लिए कम्प्यूटेशनल ड्रग डिजाइन प्रक्रिया का उपयोग किया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्री ने कहा, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पहल दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए है क्योंकि हम अपने प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को शामिल करने के लिए भी इच्छुक हैं।

इस कार्य योजना के लिए गुरुवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने संयुक्त रूप से ड्रग डिस्कवरी हैकाथॉन लांच किया।

इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) भी शामिल हैं। इस हैकाथॉन को तीन ट्रैक्स में पूरा किया जायेगा। पहले ट्रैक में ड्रग डिजाइन के लिए कम्प्यूटेशनल मॉडल का इस्तेमाल किया जायेगा या मौजूदा डाटाबेस से ऐसे कंपाउंड की पहचान की जाएगी जिसमें कि सार्स-कोव-2 को रोकने की क्षमता हो।

दूसरे ट्रैक में प्रतिभागियों को डाटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस एवं मशीन लनिर्ंग का उपयोग करके नए उपकरण और एल्गोरिदम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा ताकि न्यूनतम विषाक्तता और अधिकतम विशिष्टता के साथ दवा जैसे कंपाउंड को ढूंढा जा सके। तीसरे ट्रैक में मून-शॉट दृष्टिकोण के द्वारा केवल नए और अनूठे विचारों को देखा व समझा जायेगा। यह हैकाथॉन सीडैक (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग), मायगाव, श्रोडिंगर और केमाक्सोन द्वारा समर्थित है।

आईएएनएस

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