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लाइफस्टाइल

फैशन ज्वेलरी की देखभाल करें ऐसे..

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फाइल फोटो

महंगे आभूषण हों या फैशन ज्वेलरी, अगर इन्हें ज्यादा समय तक इस्तेमाल में लाना है तो इनकी उचित देखभाल करनी जरूरी होती है। अपनी फैशन ज्वेलरी को भी नए जैसा बनाए रखने के लिए इनकी उचित देखभाल जरूरी है।

फैशन ज्वेलरी को भी रोज नहीं पहनें और एसिड, अल्कोहल, विनेगर या अमोनिया वाले क्लीनर से इन्हें साफ नहीं करें। ‘मीरा’ ब्रांड की एक्सेसरी डिजाइनर राधिका जैन और मल्टी ब्रांडेड शोरूम ‘जूकी’ कि क्रिएटिव हेड चारु सिंह चौधरी ने इस संबंध में ये सुझाव दिए हैं :

* आभूषणों को साफ और सूखा रखें। फैशन ज्वेलरी किसी भी तरह की क्रीम, केमिकल उत्पाद, लोशन, परफ्यूम, तेल यहां तक कि पानी के संपर्क में आकर अपनी चमक व असली रंगत खो देते हैं।

पीतल, तांबा या ब्रॉन्ज के आभूषण ऑक्सीडाइज होकर अपनी असली रंगत खो देते हैं, इसलिए क्रीम, परफ्यूम आदि लगाने से पहले अपने आभूषण उतारना नहीं भूलें।

* अपनी फैशन ज्वेलरी को रोज नहीं पहनें। ये रोज पहनने के लिए नहीं होती, अगर आप इन्हें रोज पहनती हैं तो इसकी रंगत और चमक में बदलाव आ सकता है।

* फैशन ज्वेलरी को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए हर बार इस्तेमाल के बाद इसे साफ करना नहीं भूलें, इसके लिए इन्हें मुलायम कपड़े से साफ करें। पसीने, गंदगी से आभूषण का रंग फीका पड़ जाता है। अमोनिया, एल्कोहल, विनेगर या एसिड युक्त क्लीनर से इन्हें साफ नहीं करें, अन्यथा आपकी आभूषणों को नुकसान पहुंच सकता है।

* अपने फैशन ज्वेलरी को सावधानी से कॉटन, बटर पेपर, वेलवेट बॉक्स या जिप लॉक बैग में रखें। फैशन नेकलेस को वर्टिकल (लंबवत) रूप से लटकाकर रखें।

* आभूषणों को अलग-अलग रखें, ताकि वे उलझे नहीं।

–आईएएनएस

ज़रा हटके

4 साल में विकास के नाम पर गंगा का विनाश

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patna river ganga

गंगा के संरक्षण, प्रबंधन में अनदेखी और देरी करने वाले को जेल हो, क्योंकि पिछले चार साल में विकास के नाम पर गंगा के लिए काम के नाम पर गंगा का विनाश हुआ है। गंगा के प्रवाह को समझे बिना गंगा के किनारों पर जो घाट बने हैं, उनसे गंगा के प्रवाह में बाधाएं पैदा हुई हैं।

जल-शोधन के नाम पर बन रहे शोधन संयंत्रों में मल-जल को पहुंचाने की ठीक व्यवस्था नहीं होने के कारण वह पूर्वत: ही गंगा जी में जाता है। एक तरफ संयंत्र बनाने, दूसरी तरफ पाइप लाइन बिछाने और तीसरी तरफ संयंत्र को चलाने वाली व्यवस्था पर जो खर्च होता है, उसको उठाने के लिए स्थानीय तंत्र तैयार नहीं होता, उसमें बहुत भयानक भ्रष्टाचार है, इसलिए शोधन हुए बिना दूषित जल गंगा जी में मिलता रहता है। इसीलिए गंगा जी पहले से भी ज्यादा प्रदूषित हो गई हैं।

गंगा जी के काम में भ्रष्टाचार बढ़ा है। गंगा निर्मल बनाने का काम देश के बड़े राजनेताओं को अब ‘असंभव’ जैसा लगने लगा है, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले अपनी मुख्य घोषणाओं में घोषित किया था, जिनमें गंगा जी को अविरल-निर्मल बनाना शामिल था।

गंगा में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, इसलिए अब उन्होंने गंगा का नाम लेना भी बंद कर दिया है। गंगा जी दिन-ब-दिन और ज्यादा दूषित होती जा रही है। गंगा जी का बीओडी और सीओडी का लेवल बढ़ गया है। उसको ठीक करने के लिए एक समर्पित प्रधानमंत्री चाहिए जो गंगा के लिए समग्र रूप से समर्पित हो।

सन् 2014 में गंगा के लिए सबसे ज्यादा समर्पित और सक्षम व्यक्ति नरेंद्र मोदी दिखते थे, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद यह बात ‘झूठी’ हो गई है। अब हमें गंगा जी के लिए प्रो. जी.डी. अग्रवाल जैसा सक्षम और समर्पित व्यक्ति चाहिए, वही गंगा को निर्मल बनाने का विज्ञान समझते हैं तथा गंगा के संस्कृतिक आध्यात्मिक पहलू को भी जानते हैं। वे ही गंगा की अविरलता और निर्मलता के विज्ञान को जानते हैं, इन दोनों संबंधों को समझे बिना गंगा की चिकित्सा नहीं हो सकती।

गंगा नदी दुनिया की दूसरी नदियों से अलग विशिष्टताओं वाली नदी है। गंगाजल विशिष्ट है, यह सिद्ध करने वाले सैकड़ों शोध आधुनिक भारत में हो चुके हैं। जैसे कानपुर से 20 किलोमीटर ऊपर बिठूर से लिए गंगाजल में कॉलिफॉर्म नष्ट करने की विलक्षण शक्ति मौजूद है, जो कानपुर के जल आपूर्ति कुएं में आधी रह जाती है, और यहां के भूजल में यह शक्ति शून्य हो जाती है। यह गंगाजल में मौजूद सूक्ष्मकणों (बायोफाज्म) के कारण हैं।

हरिद्वार के गंगाजल में बीओडी को नष्ट करने की अत्याधिक क्षमता है। इसका क्षय करने वाले तत्वों का सामान्य जल से 16 गुना अधिक है। यह संभव है हिमालय की वनस्पति से आए अंशों के कारण। भागीरथी के जल में धातुओं के एक विशिष्ट मिश्रण से शक्ति का पता चला है। ऐसा मिश्रण संसार में अभी तक कहीं नहीं पाया गया है। जो अब टिहरी बांध से ऊपर गंगाजल में विशेष तžवों की नाशक क्षमता थी, ये सब गाद के साथ पीछे बैठ गए और बाध के नीचे आने वाले जल में कॉलिफॉर्म नाशक या सड़न नाशक क्षमता शून्य रह गई है।

अभी वर्ष 2017 में गंगा के डीएनए विश्लेषण से ऊपर की गंगा गाद में बीसों रोगों के रोगाणुओं को नष्ट करने की सक्षम शक्ति है। इसमें 18 रोगाणु की प्रजातियां जिनमें टीबी, हैजा, पेट की बहुत सी बीमारियां और टाइफाइड शामिल हैं। गंगाजल की ये सब विशिष्टताएं कुछ अंशों में पहले गणमुक्ते श्वर तक मिलती थी। अब गंगा जी में एक तरफ शहरों का गंदा जल और उद्योगों का रासायनिक जल मिलने लगा है, इसीलिए हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर के जल में अब काफी समानताएं हो गई हैं।

केंद्रीय जल बोर्ड और जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारी गंगाजल की विशिष्टताओं को समझकर गंगा मां का इलाज करने में सक्षम नहीं हैं। गंगा मां का प्रो. जी.डी. अग्रवाल जैसा व्यक्ति अच्छा इलाज कर सकता है। उन्हें वर्तमान सरकार अपना आदमी नहीं मान रही है, इसलिए उनसे गंगा की चिकित्सा नहीं कराना चाहती। जब मंत्री स्वयं बीमार होते हैं तो वह सबसे अच्छा चिकित्सक ढूंढते हैं, उस समय उन्हें किसी भी हॉस्पिटल में सर्वोत्तम डॉक्टर नहीं मिलता है तो कहीं से भी बुलाकर चिकित्सा करवाते हैं। तब वो अपना और पराये का भाव भूल जाते हैं।

भारत के सर्वोच्च मंत्री का इलाज एम्स में चल रहा था। ऑपरेशन करने के लिए डॉक्टर अपोलो से बुलाया गया था। ऐसा गंगा मइया के साथ नहीं हो रहा है। गंगा मइया के इलाज में ऐसा नहीं हो रहा है, गंगा मइया के हृदय के इलाज के लिए डॉक्टर तेहराम को बुलाना चाहिए, उसको न बुलाकर दांतों के डॉक्टर से गंगा मइया का इलाज कराया जा रहा है, इसीलिए गंगा की बीमारी और बढ़ती जा रही है। गंगा मइया की सही चिकित्सा नहीं हो पाई है, क्योंकि सरकारें गंगा के लिए डॉक्टर ढूढ़ते समय अपना और पराया देखते हैं।

गंगा के इलाज पर भारत सरकार का हजारांे-करोड़ रुपये बर्बाद हुआ है। कोई भी जल संशोधन संयंत्र ठीक से नहीं चल रहा है। सभी संयंत्रों के स्थान चयन में भी गड़बड़ हुई है। शायद संयंत्र स्थापन में भ्रष्टाचार हुआ है। जहां संयंत्र लग सकता है वहां घाट बनाए जा रहे हैं, घाटों का निर्माण वैज्ञानिक तरीकों से गलत है। गंगा जी के साथ पिछले चार सालों में जिन अधिकारी ने गलत काम किए हैं, उन्हें यदि जेल भेज दिया जाता तो फिर गंगा के इलाज के लिए अच्छे डॉक्टर ढूंढकर गंगा माई की चिकित्सा होती।

अधिकारियों के लिए गंगा माई नहीं कमाई है, इसीलिए अधिकारी माई से कमाई करके फल-फूल रहे हैं। एक भी अधिकारी को जेल नहीं भेजा गया। यदि ऐसे तीन अधिकारियों को भी जेल भेज दिया जाता तो गंगा जी की अविरलता-निर्मलता का ठीक दिशा में काम शुरू हो जाता।

अब गंगा जी में जहां जो काम करने की जरूरत है, वहां वह काम नहीं होता है। आज गंगा जी का सारा पैसा स्मार्ट सिटी के तहत एसटीपी बनाने और घाटों के निर्माण पर खर्च हो रहा है। यह तो शहरों का काम है, गंगा का नहीं। जो अधिकारी गंगा के पैसों को शहरों को खाने के लिए दे रहे हैं, उन्हें प्रधानमंत्री जी जेल भेजें और गंगा को अविरल-निर्मल बनाने वाले असली कामों को करने के लिए सक्षम एवं समर्पित लोगों को ढूंढ-ढूंढ कर गंगा जी के काम में लगाएं।

गंगा जी को अविरल और निर्मल बनाने के लिए पहला काम संसद में कानून पास करना है। इस कानून का प्रारूप सरकार के पास मौजूद है। इस कानून को सभी दल पारित कराने के लिए तत्पर होंगे, लेकिन भारत सरकार को इस दिशा में पहल करने की जरूरत है।

गंगा कानून संसद के इसी सत्र में पेश होना चाहिए। इसका प्रारूप सरकार के पास तैयार है, मंत्रालय में, शायद मंत्रालय के अधिकारी इस प्रारूप को मंत्री जी को नहीं सौप रहे हैं तो ऐसे सभी अधिकारियों को चाहिए कि वो अपनी जिम्मेदारी समय पर पूरी करें और गंगा एवं राष्ट्र हित में अपना फर्ज निभाएं। हमारी सरकार को गंगा की संवेदनाओं को समझकर अविरलता-निर्मलता सुनिश्चित करने वाला एक शीघ्र से शीघ्र अधिनियम बनाना चाहिए तभी प्रो. जी.डी. अग्रवाल के प्राण बचेंगे।

(‘जलपुरुष’ के नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह प्रख्यात पर्यावरणविद् हैं)

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

नारियल तेल के आश्चर्यजनक फायदे!

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File Photo

नारियल तेल के इस्तेमाल के कई फायदे हैं। कई गुणों से भरपूर यह तेल स्वास्थ्यपरक फायदों के लिए पीढ़ियों से इस्तेमाल में लाया जा रहा है। ‘

बिड़ला आयुर्वेद’ की आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर प्रियंका संपत ने नारियल तेल के ये फायदे बताए हैं :

* नारियल तेल त्वचा के लिए नैचुरल मॉइश्चराइजर का काम करता है, यह मृत त्वचा को हटाकर रंग निखारता है, चूंकि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, तो इसका इस्तेमाल त्वचा रोग, डर्मेटाइटिस, एक्जिमा और स्किन बर्न में किया जा सकता है। नारियल तेल स्ट्रेच मार्क्‍स हटाने में भी मदद करता है और होंठ को फटने से बचाने के लिए भी इसे नियमित रूप से होंठ पर लगाया जा सकता है।

* नारियल तेल बालों को घना, लंबा और चमकदार बनाने में काफी मददगार साबति होता है। सिर का मसाज सिर्फ पांच मिनट नारियल तेल से करने से न सिर्फ रक्त संचार में वृद्धि होती है, बल्कि खो चुके पोषक तत्वों की भी भरपाई करता है, नियमित रूप से नारियल तेल से मसाज करने से बालों में रूसी नहीं होता है।

* नारियल तेल को मुंह में करीब 20 मिनट तक रखने के बाद थूक देने से मुंह के कीटाणु और मसूड़ों की समस्याएं दूर होती है। स्वस्थ मसूड़ों के लिए सप्ताह में कम से कम तीन बार ऐसा करें।

* आयुर्वेद में पित्त वृद्धि के कारण नारियल तेल का इस्तेमाल गठिया, जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। यह हड्डियों में कैल्शियम और मैग्नीशियम अवशोषित करने की क्षमता में सुधार करता है।

‘हिंदूजा हेल्थकेयर सर्जिकल’ में टीम लीडर डायटीशियन इंद्रायनी पवार ने नारियल तेल के लाभ संबंधी ये बातें बताई हैं :

* नारियल तेल के इस्तेमाल से वजन भी कम किया जा सकता है। ताजे नारियल से निकाले गए तेल में अन्य नारियल तेलों की अपेक्षा ज्यादा मीडियम चेन फैटी एसिड्स (70-85 प्रतिशत) होता है।

मीडियम चेन फैटी एसिड्स आसानी से ऑक्सीडाइज्ड लिपिड्स होते हैं और एडीपोज ऊतक में संग्रहित नहीं होते हैं। इस प्रकार, मुख्य रूप से मीडियम चेन फैटी एसिड युक्त नारियल का तेल वजन घटाने में मददगार साबित होता है।

* नारियल तेल लॉरिक एसिड और कैप्रिक एसिड की तरह एंटीमाइक्रोबियल लिपिड का एक समृद्ध स्रोत होता है, जो एंटीफंगल और जीवाणुरोधी होते हैं।

* खाना पकाने में नारियल का तेल ज्यादा अच्छा रहता है। इसका तेल ऑक्सीकरण के प्रति कम असुरक्षित होता है, जो इसे खाना पकाने के लिए सबसे सुरक्षित बनाता है।

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

उड़द दाल से बने ये 5 फेस पैक करेंगे जादू की तरह काम…

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urad-dal

सभी की इच्छा होती है की उनकी निखरी त्वचा हो। लेकिन ऐसा हो सके इसके लिए हम त्वचा का उतना खयाल नहीं रख पाते। इसके लिए सबकी अपनी-अपनी वजहें हो सकती हैं।

इसलिए ही beauty treatments, ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर हम खूब पैसा भी लगा देते हैं, लेकिन कुछ समय बात त्वचा का वही हाल होता है। लेकिन हम आपको बता रहे हैं ऐसे kitchen ingredient के बारे में जो हर घर में मिलता है और आपकी त्वचा को दे सकता है नया ग्लो…हम बात कर रहें उड़द की दाल की।

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उड़द की दाल आपकी त्वचा के लिए कई कमाल कर सकती है। यह आपकी तवचा से जुड़ी कई समस्याओं को हल कर सकती है।

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आइए हम आपको बताते है की इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए।

1. धूल मिट्टी करे दूर (Exfoliates Skin)

उड़द की दाल आपके चेहरे पर जमी धूल-मिट्टी को दूर करती है और त्वचा के छिद्रों में इन्हें जाने से रोक सकती है।

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कैसे करें इस्तेमाल-

आधा कप उड़द की दाल को पूरी रात के लिए पानी में रख दें। सुबह इसका पेस्ट बना लें।

अब इस पेस्ट में 2-2 चम्मच दूध और घी मिला कर तैयार करें।

इस पेस्ट को अपने चेहरे पर करीब 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।

हल्के गर्म पानी से धो लें।

अच्छे परिणामों के लिए हफ्ते में तीन बार इस्तेमाल करें।

2. मुहांसे करे दूर (Treats Acne)

उड़द दाल एक प्राकृतिक एंटिसेप्टिक है। यह चेहरे पर बैक्टिरीया के चलने उभर आने वाले महांसों को दूर करता है। यह चेहरे पर अतिरिक्त तेल को भी दूर करता है और पोर्स को साफ करता है।

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कैसे करें इस्तेमाल –

आधा कप उड़द की दाल को पूरी रात के लिए पानी में रख दें। सुबह इसका पेस्ट बना लें।

अब इस पेस्ट में 2-2 चम्मच गुलाबजल और ग्लिसरीन मिला कर तैयार करें।

अब इसमें दो चम्मच बादाम का तेल मिलाएं।

इस पेस्ट को अपने चेहरे पर करीब 15 से 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।

ठंडे पानी से धो लें।

3. चेहरे पर लाए निखार (Healthy Glow)

अगर आपकी त्वचा डल या अनईवन है तो उड़द की दाल आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह नेचुरल ब्लीच के तौर पर आपका साथ निभाएगी और त्वचा का रंग निखारने में मदद करेगी।

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कैसे करें इस्तेमाल-

एक चौथाई कप उड़द की दाल और 8 से 9 बादाम पूरी रात के लिए पानी में रख दें। सुबह इसका पेस्ट बना लें।

इस पेस्ट को अपने चेहरे पर करीब 15 से 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।

ठंडे पानी से धो लें।

4. टेन और सनबर्न हो छू (Tan And Sunburn)

उड़द की दाल में कूलिंग इफेक्ट होते हैं जो सनबर्न को ठीक करने में मददगार हैं।

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कैसे करें इस्तेमाल-

एक चौथाई कप उड़द की दाल पूरी रात के लिए पानी में रख दें। सुबह इसका पेस्ट बना लें।

इसमें तीन चम्मच दही मिलाकर पेस्ट को तैयार कर लें।

इस पेस्ट को अपने चेहरे और उन हिस्सों पर लगाएं जहां सनबर्न हुआ हो।

पर करीब 15 से 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।

ठंडे पानी से धो लें।

5. दाग धब्बे होंगे दूर (Skin Spots)

उड़द की दल चेहरे पर उभर आए दाग धब्बों को दूर करने में भी मददगार सबित होती है।

Image result for दाग धब्बे होंगे दूरकैसे करें इस्तेमाल-

एक चौथाई कप उड़द की दाल पूरी रात के लिए पानी में रख दें। सुबह इसका पेस्ट बना लें।

इसमें आधा कम राइज पाउडर डालें और मिलाकर पेस्ट को तैयार करें।

अब इसमें कुछ बूंद नींबू का जूस ड़ालें।

इस पेस्ट को अपने चेहरे लगाएं और पर करीब 15 से 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।

ठंडे पानी से धो लें।

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