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वायु नलिकाओं में सूजन से होता है दमा

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File Photo

अस्थमा (दमा) फेफड़ों की वायु नलिकाओं में सूजन के कारण होता है, जिसमें बार-बार घरघराहट और सांस फूलती है। अस्थमा का सबसे प्रमुख कारण परिवार में अस्थमा का इतिहास होना भी है।

हालांकि, वायु प्रदूषण, घरेलू एलर्जी जैसे बिस्तर में खटमल, स्टफ्ड फर्नीचर, तंबाकू का धुआं और रासायनिक पदार्थ अस्थमा के प्रमुख कारकों में शामिल हैं।विभिन्न वजहों से होने वाले अस्थमा के भी कई प्रकार होते हैं जैसे एडल्ट ऑनसेट अस्थमा, एलर्जिक ऑक्यूपेशनल अस्थमा, व्यायाम से होने वाला अस्थमा और गंभीर (सीवियर) अस्थमा इत्यादि।

पुराने अस्थमा का अमूमन निरंतर दवाओं द्वारा इलाज किया जाता है। लेकिन गंभीर लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए अधिक उन्नत उपचार की आवश्यकता होती है। अस्थमा से ग्रसित लोगों की कुल आबादी में गंभीर अस्थमा से ग्रस्त लोग तकरीबन 8-10 प्रतिशत है। 

दुनिया के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 13 भारत में हैं। भारत में वायु प्रदूषण ने स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। इस मामले में, भारत में अस्थमा कुल जनसंख्या के लगभग 15 से 20 प्रतिशत लोगों यानी तकरीबन 3 करोड़ लोगों पर असर डाल रहा है। आने वाले वर्षों में, बढ़ते प्रदूषण का स्तर इस संख्या को सैकड़ों-लाखों में बढ़ा सकता है। 

नोएडा स्थित मेट्रो रेस्पिरेटरी सेंटर के वरिष्ठ सलाहकार और चेयरमैन डॉ. दीपक तलवार कहते हैं, “जिन लोगों को इनहेलर्स लेने के बावजूद 1-2 महीने तक घरघराहट या खांसी आती रहती है, वे गंभीर अस्थमा की श्रेणी में आते हैं। जो मरीज अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए वर्ष में दो बार से अधिक ओरल स्टेरॉयड लेते हैं वे भी अस्थमा की गंभीर श्रेणी में आते हैं और अंतर्निहित सूजन को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय तक रोज दवा की आवश्यकता होती है।”

उन्होंने कहा कि अगर मानक उपचार रोगी के लक्षणों को लगभग 3 से 6 महीने तक नियंत्रित करने में विफल रहता है, तो इसे एक गंभीर अस्थमा का मामला माना जाता है। उन्हें ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी जैसे चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।

डॉ. तलवार के मुताबिक, अच्छी खबर यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचारों ने उन रोगियों के लिए गंभीर अस्थमा के लक्षणों का उपचार करना आसान बना दिया है जो लंबे समय से दवाओं पर भरोसा करते आए हैं। इस क्षेत्र में एक अग्रणी आविष्कार, ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी गंभीर अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक के रूप में उभरी है, जो कि अधिकतम चिकित्सा उपचार के बावजूद अस्थमा के लक्षणों से ग्रस्त हैं।

उन्होंने कहा कि सामान्य श्वास के साथ, फेफड़ों के वायुमार्ग पूरी तरह से खुले होते हैं। गंभीर अस्थमा वाले लोगों में वायुमार्ग की अत्यधिक चिकनी मांसपेशियां होती हैं जो उनके वायुमार्ग की परिक्रमा करती हैं। वायुमार्ग की सूजन के साथ यह अतिरिक्त मांसपेशी वायुमार्ग की दीवारों को मोटा बनाने के लिए जुड़ जाती हैं। अस्थमा के दौरे के दौरान, वायुमार्ग की चिकनी मांसपेशी सिकुड़ जाती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। 

डॉ. तलवार कहते हैं कि ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी के दौरान, एक छोटी लचीली ट्यूब को मुंह या नाक के माध्यम से रखे गए एक मानक लचीले ब्रोन्कोस्कोप के माध्यम से वायुमार्ग में लगाया जाता है। उपचार वायुमार्ग की दीवारों को नियंत्रित तापीय ऊर्जा प्रदान करके वायुमार्ग में स्मूद मसल मास को कम करता है। यह तीन ब्रोंकोस्कोपी में किया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह थेरेपी लगभग 80 प्रतिशत तक मांसपेशियों को सामान्य आकार में लाने में सहायक होती है। मांसपेशियों के आकार में कमी का उन रोगियों पर अंतर्निहित प्रभाव पड़ता है जो दवा पर निर्भर हैं, क्योंकि यह अधिक प्रभावी हो जाता है और वायुमार्ग थोड़ा अधिक खुल जाता है। यह अस्थमा के दौरे के दौरान दीवार की संकुचन और संकीर्ण होने की क्षमता को कम करता है। पिछल कई वर्षों में, ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी ने गंभीर अस्थमा रोगियों को उनकी स्थिति को बेहतर ढंग से उपचारित करने में मदद की है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।

डॉ. तलवार कहते हैं कि अस्थमा के तमाम उपचार सामने आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा प्रदाता शायद ही कभी उनका उपयोग करते हैं या उनके बारे में जानते हैं। अफसोस की बात यह है कि बीटी जैसे उपचार दुनिया भर में जीवन बदल रहे हैं, लेकिन भारत में उनके बारे में बहुत कम जानकारी है। परिणामों में पर्याप्त सुधार के लिए एक नए नजरिये की आवश्यकता है। 

–आईएएनएस

अंतरराष्ट्रीय

नेपाल ने करीब 5 महीने बाद खोला माउंट एवरेस्ट

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Mount Everest

नेपाल के पर्यटन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार कोविड-19 महामारी के कारण लगभग 5 महीने से बंद माउंट एवरेस्ट और अन्य हिमालयी चोटियों को गुरुवार से फिर से खोल दिया है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर मार्च से मई तक वसंत के मौसम के दौरान चलने वाले चढ़ाई अभियानों को भी निलंबित कर दिया गया था।

सरकार ने अभियान के लिए चढ़ाई के परमिट जारी करने की प्रक्रिया भी रोक दी थी। साथ ही 13 मार्च, 2020 को वसंत के मौसम के लिए जारी किए गए परमिट भी रद्द कर दिए थे। आमतौर पर एवरेस्ट के एक अभियान में 45 से 90 दिन लगते हैं। इसके अलावा चढ़ाई का समय मौसम की अनुकूलता पर भी निर्भर करता है।

डिपार्टमेंट ऑफ टूरिज्म की निदेशक मीरा आचार्य ने कहा, “पर्वतारोहियों के लिए अब पहाड़ खुले हैं और विभाग ने आज (गुरुवार) से चढ़ाई शुरू करने के लिए परमिट जारी करना शुरू कर दिया है।”देश ने पर्वतारोहण के मकसद से 414 शिखर खोले हैं। इसके साथ ही आर्थिक गतिविधियों में छूट देने के साथ सरकार ने गुरुवार से होटल, रेस्तरां, ट्रेकिंग और पर्वतारोहण सेवाओं को फिर से शुरू करने की अनुमति दी है।

नेपाल को पर्वतारोहियों से सालाना रॉयल्टी के रूप में 40 लाख डॉलर से अधिक की राशि मिलती है। डिपार्टमेंट माउंट एवरेस्ट के सामान्य मार्ग के लिए चढ़ाई शुल्क के रूप में 5,500 डॉलर और सर्दियों के दिनों में दूसरे मार्ग के लिए 5,000 डॉलर एकत्र करता है।देश अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को फिर से शुरू करने के लिए भी कमर कस रहा है और इसके जरिए शरद ऋतु के मौसम के लिए पर्यटकों की उम्मीद कर रहा है।

आचार्य ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया, “क्वारंटीन को लेकर चर्चा अभी भी चल रही है, इसी के कारण हम देश में पर्वतारोहियों के फ्लो को बनाने में असमर्थ हैं।”हिमालयी राष्ट्र में अब तक 19,273 कोरोनावायरस मामले सामने आए हैं और 49 मौतें हुई हैं।

 आईएएनएस

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राष्ट्रीय

बकरीद : हैदराबाद में बकरे की ऑनलाइन बिक्री, आउटसोर्स कुर्बानी

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Online payment
प्रतीकात्मक तस्वीर

हैदराबाद में इस बार बकरीद के मौके पर कुर्बानी के लिए कोई जानवर खरीदने को बाजार में भागदौड़ करता नजर नहीं आ रहा है, जानवरों के कत्ल के लिए कसाई को तलाशने की जरूरत नहीं और कोरोनावायरस महामारी के समय में जगह को साफ रखने को लेकर कोई चिंता नहीं है।

इस बार ईद-उल-अजहा हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य हिस्सों में मुसलमानों के लिए अलग होगा, क्योंकि उनमें से ज्यादातर अपने घरों में ही बैठकर कुर्बानी दे रहे होंगे।

वे पशु व्यापारियों और अन्य समूहों को काम आउटसोर्स कर रहे हैं, जो न केवल उनके लिए भेड़, बकरी या मवेशी खरीद रहे हैं, बल्कि जानवरों का कत्ल भी करते हैं और उनके घर के दरवाजे तक मांस भी पहुंचाते हैं या अपनी इच्छा के अनुसार इसे गरीबों और जरूरतमंदों में वितरित करते हैं।

1 अगस्त को मनाया जाने वाला ईद-उल-अजहा जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, इस बार कई मायनों में अलग होगा। अब तक जिस तरह से यह त्योहार मनाया जाता रहा है, उसके मनाने के अंदाज को कोविड-19 ने बदल दिया है।

चूंकि राज्य में वायरस का फैलाव जारी है, और हैदराबाद हॉटस्पॉट बना हुआ है, इसलिए अधिकांश मुसलमान व्यापारियों, गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और कुछ इस्लामी सेमनेरी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

एहतियात को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर लोग जानवर खरीदने के लिए बाहर निकलने या घर पर कुर्बानी करने से बच रहे हैं। वे जानवर को मारने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने या कसाई को बुलाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। हर साल, सैकड़ों व्यापारी विभिन्न जिलों से भेड़ या बकरियों को हैदराबाद लाते हैं और अपने अस्थायी स्टॉल लगाते हैं।

इस बार, अधिकांश व्यापारियों ने अपने स्मार्टफोन पर संभावित खरीदारों के लिए जानवरों की तस्वीरें और वीडियो भेजकर और उनके भुगतान विकल्पों की पेशकश करके अपना व्यवसाय ऑनलाइन किया है। हर बार अधिकांश लोग कुर्बानी के लिए कसाइयों की सेवा लेते हैं, लेकिन कोरोना के चलते इस बार कई ने अपनी योजना बदल दी है।

अपने दम पर जानवरों की बलि देने के बजाय, वे इस काम को व्यापारियों और संगठनों को आउटसोर्स कर रहे हैं। ये समूह हर साल इज्तेमाई कुर्बानी या सामूहिक कुर्बानी की व्यवस्था करते हैं, लेकिन यह उन लोगों के लिए होता है जो मवेशियों की साझा खरीद में हिस्सा लेते हैं।

सात व्यक्ति एक बड़े जानवर की कुर्बानी में शामिल हो सकते हैं, जबकि एक भेड़ या बकरी को एक व्यक्ति द्वारा कुर्बान किया जा सकता है। हर साल कई समूह और व्यक्ति सामूहिक कुर्बानी का आयोजन करते हैं।

टोली चौकी क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता फारूक अहमद, जो हर साल इज्तेमाई कुबार्नी की व्यवस्था करते हैं, ने कहा कि इस बार उनके समूह ने पेशेवर कसाई सहित कई अन्य लोगों के साथ करार किया है।

इस साल प्रत्येक हिस्सा की कीमत 3,400 रुपये है, जो पिछले साल 3,000 रुपये थी, क्योंकि जानवरों की कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।

मौलवियों का कहना है कि तीन दिवसीय त्योहार पैगंबर इब्राहिम के महान बलिदान को याद करने का एक अवसर है, जिन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे पैगंबर इस्माइल को कुर्बान करने की पेशकश की। अल्लाह के रहम से जब इस्माइल अपने बेटे की कुर्बानी देने चले तब उनके बेटे की जगह एक मेमना आ गया।

एक बुजुर्ग शख्स इश्तियाक अहमद ने कहा, यह एक बड़ी कुर्बानी को याद करने और अल्लाह की राह में कुछ भी कुर्बान करने के लिए तैयार रहने का संकल्प लेने का अवसर है।

आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

ब्यूटी रिटेल को किस तरह पुनर्परिभाषित कर रहे एआई, एआर

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फोचो- सोशल मीडिया

सौंदर्य तकनीक में इनोवेशन की गति तेज हो रही है, लेकिन ब्यूटी रिटेल में इनोवेशन आज भी ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरी तरह से हल करने में असफल है। ऐसा मानना है हाउस ऑफ ब्यूटी की संस्थापक और सीईओ रितिका शर्मा का।

ब्यूटी एंड वेलनेस कंपनी ने हाल ही में एक नया ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बोडेस डॉट कॉम लॉन्च किया है। ऐसे में आईएएनएस ने शर्मा से यह जानने के लिए बात की कि कैसे ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ब्यूटी टेक की अवधारणा को फिर से परिभाषित कर रहे हैं।

उनसे पूछे जाने पर कि आप बोडेस में एआई और एआर तकनीकों का उपयोग कैसे कर रही हैं? इस पर उन्होंने कहा, “हमारी टीमों ने पिछले कुछ महीनों में भारत में अग्रणी त्वचा विशेषज्ञों के साथ हमारी मशीन लनिर्ंग डेटाबेस को त्वचा के प्रकारों को ध्यान में रखते हुए उसका निर्माण करने का प्रयास किया है।

हमने पुरुषों और महिलाओं की हजारों हाई रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें लीं, हमारे स्किन मेट्रिक्स (हाइड्रेशन, झुर्रियां, काले धब्बे, त्वचा की उम्र आदि) के साथ उनकी त्वचा की स्थिति को टैग किया। जब हम यह कलेक्शन करते हैं, तो हम अपने एल्गोरिदम को त्वचा के रंगों, उम्र के संबंध में विविध प्रकार से प्रशिक्षित करना सुनिश्चित करते हैं।

जब हम इस डेटा सेट पर अपने एल्गोरिदम को प्रशिक्षित करते हैं, तो उसके बाद हर सप्ताह इस एल्गोरिदम को बेहतर बनाने के लिए सुपरवाइज्ड मशीन लनिर्ंग मॉडल बनाते हैं।”

वहीं उनसे पूछे जाने पर कि उनका लक्ष्य क्या है, इस पर उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य ग्राहकों को सूचित करना, उत्पादों को लेकर निर्णय लेने में मदद करना है, जिससे उन्हें खोज, सीखने में आनंद महसूस होता है। यही कारण है कि बोडेस ने एआर/वीआर स्किन डायग्नोस्टिक में निवेश किया। साथ ही उपकरण और मेकअप, बाल, त्वचा जैसे क्षेत्रों में महारथ हासिल कर चुके कलाकारों को फूल-टाइम के लिए नियुक्त किया है।”

आईएएनएस

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