Connect with us
CJI Dipak Misra CJI Dipak Misra

ब्लॉग

अब सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा कि उसके मुखिया पर महाभियोग चलेगा या नहीं?

सच-झूठ को तय करने के लिए ही जाँच की जाती है। संविधान के मुताबिक़, उपराष्ट्रपति चाहकर भी जाँच समिति की जगह नहीं ले सकता। वेंकैया का ऐसा निर्णय इसीलिए असंवैधानिक है।

Published

on

मोदी राज के कर्ताधर्ताओं का व्यवहार ऐसा है, जैसे ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि!’ मोदी राज में हम देखते रहे हैं कि किस तरह से शीर्ष संवैधानिक संस्थाओं का पतन हो रहा है। न्यायपालिका में जारी गिरावट हमारे सामने है, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अँगुलियाँ उठती रही हैं, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) का कामकाज संविधान की भावना के मुताबिक़ नहीं हो रहा है, नोटबन्दी से लेकर बैंकों की डकैती डालकर देश से फ़ुर्र हो चुके बेईमानों ने साबित कर दिया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक की दशा कितनी दयनीय हो चुकी है! लोकतांत्रिक मूल्यों, सिद्धान्तों और परम्पराओं के पतन का ऐसा अपूर्व सिलसिला अब और आगे बढ़ते हुए देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद यानी उपराष्ट्रपति की गरिमा को भी आहत कर चुका है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ विपक्ष की ओर से लाये गये महाभियोग प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जिस मनमाने ढंग से ख़ारिज़ कर दिया है, उससे अब अराजनीतिक माना जाने वाला उनका पद भी राजनीति का मोहरा बन चुका है। वेंकैया नायडू का फ़ैसला ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक है। इसीलिए शर्मनाक है। काँग्रेस की ये दलील हर तर्क के आधार पर सही है कि किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ लगाये गये आरोपों की जाँच किये बग़ैर उसे निर्दोष कैसे ठहराया जा सकता है? जाँच करना उपराष्ट्रपति के क्षेत्राधिकार में ही नहीं है। महाभियोग के मामले में जजों की ही एक ख़ास समिति ही जाँच कर सकती है। लेकिन यदि आरोप उस समिति के हवाले ही नहीं किये जाएँगे तो जाँच होगी कैसे?

उच्च न्यायपालिका के किसी जज को हटाना ज़रूरी है या नहीं, ये तय करना सांसदों का काम है। देश में किसी भी जज को, किसी भी मामले में, सही या ग़लत फ़ैसला सुनाने के लिए, दंडित नहीं किया जा सकता। इसका सिर्फ़ एक अपवाद हो सकता है कि जज ने किसी वजह से दुराचरण किया हो। ज़िला अदालतों के किसी जज के दुराचरण की जाँच करने और उसे दंडित करने का अधिकार सम्बन्धित हाईकोर्ट को होता है। जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के दुराचरण के मामले में संविधान के अनुच्छेद 124 के मुताबिक़, सिर्फ़ महाभियोग चलाने का प्रावधान है। कोई मामला महाभियोग के लायक है या नहीं इसे तय करने का अधिकार सिर्फ़ सांसदों को है। सांसदों को भी निजी तौर पर महाभियोग का निर्णय लेना होता है।

महाभियोग के लिए पार्टियाँ अपने सांसदों को कोई आदेश नहीं दे सकतीं। सांसद भी सीधे किसी जज को नहीं हटा सकते। उन्हें संसद के किसी भी सदन में महाभियोग के लिए प्रस्ताव देना होगा, क्योंकि महाभियोग का मतलब ही है, महा-मुक़दमा यानी बहुत बड़ा मुक़दमा! इसे बहुत बड़ा बनाने के लिए इसकी शर्तों को बेहद सख़्त बनाया गया है। इसी सख़्ती की वजह से संविधान में महाभियोग के प्रस्ताव पर ग़ौर करने के लिए भी राज्यसभा के कम से कम 50 या लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर की शर्त रखी गयी है। ताकि महाभियोग को किसी भी राजनीति से बचाया जा सके। सांसदों को भी सिर्फ़ अपेक्षित हस्ताक्षर जुटा लेने से ही, किसी जज को बर्ख़ास्त करने में कामयाबी नहीं मिल सकती। हस्ताक्षर से तो सिर्फ़ जज के ख़िलाफ़ लगाये गये आरोपों की जाँच की शुरुआत हो सकती है।

जज के ख़िलाफ़ जाँच करने का ज़िम्मा भी पुलिस-सीबीआई जैसी जाँच एजेंसियों को नहीं दिया जा सकता। इस काम को तीन सदस्यों की एक समिति की कर सकती है। जिसमें एक सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा जज, एक किसी हाईकोर्ट का चीफ़ जस्टिस और एक जाने-माने क़ानून-विद् को होना चाहिए। ये समिति अपनी जाँच रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपेगी। तब राष्ट्रपति, संसद से उस रिपोर्ट पर ग़ौर करने को कहेगी। संसद के दोनों सदनों को अलग-अलग से फ़ैसला देना होगा कि जाँच समिति की रिपोर्ट के मुताबिक़, वो अमुक जज के ख़िलाफ़ लगाये गये आरोपों को सही पाते हैं। सांसद चाहें तो जज से ज़िरह करने के लिए उसे संसद में तलब भी कर सकते हैं। जहाँ जज ख़ुद या उनका वकील उनका बचाव कर सकता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद दोनों सदनों को अलग-अलग ये प्रस्ताव पारित करना होगा कि वो दो-तिहाई बहुमत से जज को बर्ख़ास्त करने के पक्षधर हैं। इतनी सारी कठोर शर्तों को निभाने के बाद ही महाभियोग सफल हो सकता है। अन्त में, राष्ट्रपति ही दोषी जज को बर्ख़ास्त करने का आदेश जारी करते हैं।

अब ज़रा ये समझिए कि भारत के प्रधान न्यायाधीश के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को लेकर पहली सीढ़ी तब चढ़ी गयी जब राज्यसभा के 64 सांसदों ने उपराष्ट्रपति को महाभियोग प्रस्ताव दिया। दूसरी सीढ़ी थी, प्रस्ताव को मंज़ूर या ख़ारिज़ करना। फ़िलहाल, मामला इसी स्तर पर अटक गया। क्योंकि वेंकैया नायडू ने इसे ख़ारिज़ कर दिया। नायडू के ऐसा जिन आधारों पर किया वो उसे तय करने के लिए अधिकृत ही नहीं है। मसलन, बग़ैर जाँच के नायडू ये नहीं कह सकते कि आरोप जाँच के लायक नहीं हैं। यहीं ये समझना ज़रूरी है कि आख़िर ये कैसे तय होगा कि कौन सा आरोप जाँच के लायक हो सकता है और कौन से नहीं?

कल्पना कीजिए कि यदि सांसद ये आरोप लगाकर महाभियोग प्रस्ताव पेश कर दें कि अमुक जज सिर्फ़ चार घंटा सोते हैं। लिहाज़ा, उन्हें हटा देना चाहिए। तो क्या इस आरोप की पड़ताल के लिए महाभियोग प्रस्ताव को जाँच समिति के भेज देना चाहिए? ऐसी दशा में लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति से ये अपेक्षित है कि वो प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाएँ, बल्कि सीधे ख़ारिज़ कर दें। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए विवेकाधीन निर्णय लेने का दायरा ऐसे ही काल्पनिक आरोपों तक सीमित हो सकता है, क्योंकि ये सबको मालूम है कि जज तो क्या, किसी का कम ये ज़्यादा सोना, किसी भी लिहाज़ से दुराचरण नहीं है।

वेंकैया नायडू ने अपनी विवेकाधीन शक्तियों का बेज़ा इस्तेमाल किया है। वो सिर्फ़ ये जाँचने के अधिकारी हैं कि कहीं सांसदों के आरोप महज कपोल-कल्पना पर तो आधारित नहीं हैं? क्या सांसदों के दस्तख़त सही और पूरे हैं? यदि ऐसा कोई ख़ोट नहीं है, तो उनके पास ये तय करने का अधिकार नहीं है कि सच्चे सही हैं या झूठे? सच-झूठ को तय करने के लिए ही जाँच की जाती है। संविधान के मुताबिक़, उपराष्ट्रपति चाहकर भी जाँच समिति की जगह नहीं ले सकता। वेंकैया का ऐसा निर्णय इसीलिए असंवैधानिक है। चूँकि वो बीजेपी से सम्बन्धित रहे हैं और बीजेपी, बग़ैर जाँच के लिए महाभियोग को ग़ैर-ज़रूरी ठहराना चाहती है। लिहाज़ा, वेंकैया के व्यवहार से साफ़ दिख रहा है कि उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी को ख़ुश करने के लिए राज्यसभा के सभापति के विवेकाधीन अधिकारों और उससे जुड़ी गरिमा के साथ समझौता किया है। इस तरह से अपने फ़ैसले की वजह से वेंकैया ने भारत के संसदीय इतिहास के लिए एक कलंकित मिसाल पैदा की है।

अब सवाल है कि आगे क्या? महाभियोग प्रस्ताव लाने वाले सांसदों की ओर से वेंकैया के फ़ैसले को आड़े हाथों लेते हुए कहा गया है कि उनके पास अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने के लिए सिवाय और कोई विकल्प नहीं है। उम्मीद है कि कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट में ये फ़रियाद दायर हो जाएगी कि महाभियोग प्रस्ताव पर लिये गये वेंकैया नायडू के फ़ैसले को असंवैधानिक ठहराया जाए। मज़े की बात ये है कि इस याचिका की सुनवाई ख़ुद प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा नहीं कर सकते, क्योंकि सारा प्रसंग उनसे ही जुड़ा हुआ है। वो ख़ुद से जुड़े मामले की सुनवाई ख़ुद नहीं कर सकते। भले ही, उनके पास किसी भी याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करने और उसके लिए उपयुक्त खंडपीठ (बेंच) तय का सबसे अहम विशेषाधिकार हो! लिहाज़ा, अब सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा कि उसके मुखिया पर महाभियोग चलेगा या नहीं? न्यायपालिका को इस मामले में इतिहास के कई पन्ने लिखने होंगे।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

ब्लॉग

बिहार : समस्तीपुर में डेयरी संयंत्र, भोजपुर में पशु आहार कारखाना लगेंगे

Published

on

By

dairy products

मोतिहारी, 19 जनवरी | बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यहां शनिवार को कहा कि अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड (कम्फेड) द्वारा समस्तीपुर में पांच लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी संयंत्र और भोजपुर के बिहिया में 300 मीट्रिक टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के पशु आहार कारखाने लगाए जाएंगे। पूर्वी चंपारण जिले के मठबनवारी में 11 महीने के रिकार्ड समय में बन कर तैयार मदर डेयरी के प्रति दिन एक लाख लीटर क्षमता के दूध प्रसंस्करण संयंत्र का शनिवार को उद्घाटन करने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस संयंत्र द्वारा मार्च से 1250 गांवों के 50 हजार किसानों से प्रतिदिन 2 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि अब सुधा व मदर डेयरी, दोनों मिलकर किसानों से दूध खरीदेगी।

मोदी ने कहा, “वर्तमान वित्तीय वर्ष में सुपौल में एक लाख लीटर क्षमता का डेयरी संयंत्र, समस्तीपुर व हाजीपुर में 30-30 मीट्रिक टन के दूध पाउडर संयंत्र, पटना व नालंदा में 20-20 हजार किलो दैनिक क्षमता के आइसक्रीम प्लांट स्थापित किए जाने के साथ ही पटना में पूर्व से स्थापित 100 मीट्रिक टन क्षमता के पशु आहार फैक्ट्री को 150 मीट्रिक टन में विस्तारित और 150 मीट्रिक टन की नई इकाई स्थापित की गई है।”

डेयरी स्थापित करने वाले किसानों को सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 66 प्रतिशत अनुदान दिए जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी केवल धान, गेहूं की खेती करने से दोगुनी नहीं होगी, बल्कि इसके लिए समग्र रूप से वानिकी, डेयरी, मछली और मुर्गी पालन को अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि फिलहाल बिहार में प्रतिदिन 18 लाख किलो दूध का संग्रह व 14 लाख लीटर की मार्केटिंग सुधा डेयरी द्वारा की जा रही है।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, बिहार सरकार में मंत्री प्रमोद कुमार, राणा रणधीर सिंह समेत कई अधिकारी और नेता मौजूद थे।

Continue Reading

ब्लॉग

मुकेश अंबानी ने ‘डेटा औपनिवेशीकरण’ के खिलाफ अभियान का आह्वान किया

Published

on

By

mukesh ambani

गांधीनगर, 18 जनवरी | औपनिवेशीकरण के खिलाफ महात्मा गांधी के अभियान को याद करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘डेटा औपनिवेशीकरण’ के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने की गुजारिश की और कहा कि भारतीय डेटा भारतीयों के ‘स्वामित्व और नियंत्रण’ में होने चाहिए। उन्होंने यहां वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2019 में कहा, “हम अपने राष्ट्रपिता को उनकी 150वीं जयंती के वर्ष में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गांधी जी ने राजनीतिक औपनिवेशीकरण के खिलाफ आन्दोलन चलाया था.. आज हम सब मिलकर डेटा औपनिवेशीकरण के खिलाफ नया अभियान शुरू कर रहे हैं।” इस समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

अंबानी ने कहा कि डेटा नई दुनिया में ‘नया तेल और धन’ है। उन्होंने कहा कि भारत के डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण भारतीय लोगों के हाथ में ही होना चाहिए और कॉर्पोरेट्स द्वारा नहीं किया जाना चाहिए, खासतौर से वैश्विक कॉर्पोरेशंस द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री, मैं आश्वस्त हूं कि आप अपने डिजिटल इंडिया मिशन के प्रमुख लक्ष्यों में इसे भी शामिल करेंगे।”

उन्होंने कहा, “भारत को इस डेटा संचालित क्रांति में सफल होने के लिए, हमें भारतीय डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण वापस भारत भेजना होगा.. दूसरे शब्दों में भारतीय संपत्ति वापस लौटानी होगी। भारतीय डेटा को भरतीयों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए, न कि वैश्विक कॉर्पोरेट्स द्वारा। डेटा का नियंत्रण हमें अपने हाथों में लेने के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता है।”

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अक्टूबर में कहा था कि सभी डिजिटल भुगतान कंपनियों जैसे गूगल प्ले, वाट्सएप और अन्य को अपने भारतीय कारोबार का डेटा स्थानीय तौर पर स्टोर करना चाहिए।

Continue Reading

ओपिनियन

बसपा-सपा गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं : शीला दीक्षित

Published

on

By

sheila dikshit-min

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं मिल रहे हैं, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस के परिणाम चौंकाने वाले होंगे।

शीला दीक्षित ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, “उनको एक साथ आने दीजिए। वे मिलते और जुदा होते रहे हैं और फिर साथ आ रहे हैं। मेरा अभिप्राय यह है कि उनमें स्थिरता नहीं है और वे स्थायित्व के संकेत नहीं दे रहे हैं। अब आगे देखते हैं।”

तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं दीक्षित (80) सपा और बसपा गठबंधन को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रही थीं। सपा और बसपा ने कांग्रेस को महागठबंधन से अलग रखते हुए प्रदेश में 80 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए एक गठबंधन किया है। दीक्षित को 10 जनवरी को दिल्ली कांग्रेस की कमान सौंपी गई।

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने से पहले शीला दीक्षित को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था। दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीद क्षीण पड़ गई है।

दीक्षित की टिप्पणी से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नेता चुनाव अभियान के दौरान सपा और बसपा को निशाना बनाएंगे, जबकि उनका सीधा मुकाबला सत्ताधारी पार्टी भाजपा से होगा।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, लेकिन पार्टी ने भाजपा को शिकस्त देने वाले सेक्यूलर दलों के लिए दरवाजा खुला रखा है।

उत्तर प्रदेश में पार्टी नेता उम्मीदवारों को बता सकते हैं कि कांग्रेस ही नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से बाहर कर सकती है और भाजपा को शिकस्त दे सकती है।

कांग्रेस इस बात पर बल देंगे कि इस चुनाव के नतीजों से प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि देश का प्रधानमंत्री चुना जाएगा।

लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो ही सीटें बचा पाई थीं, जबकि उससे पहले 2009 में पार्टी ने 21 सीटों पर जीत हासिल की थी, जब केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) दूसरी बार केंद्र की सत्ता को बरकार रख पाई थी।

दीक्षित ने कहा कि उनसे कहा जाएगा तो वह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगी, लेकिन वह दिल्ली पर अपना अधिक ध्यान केंद्रित करेंगी क्योंकि उनको यहां काफी काम करना है।

उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश करने का अनुमोदन किया।

उन्होंने कहा, “पार्टी को इस पर फैसला लेने दीजिए। हम चाहते हैं और खासतौर से मैं चाहती हूंं और हमारे बीच अधिकांश लोग चाहते हैं। लेकिन इस पर पूरी पार्टी द्वारा फैसला लिया जाएगा।”

गैर-भाजपा दलों में प्रधानमंत्री का पद विवादास्पद मसला है। राहुल गांधी ने खुद भी कहा कि इसका फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा और पहला काम नरेंद्र मोदी सरकार को पराजित करना है।

संपूर्ण भारत में महागठबंधन की संभावना पर पूछे जाने पर दीक्षित ने कहा कि लोग इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन इस पर अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है।

विपक्षी दलों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में गठबंधन की संभावना कम है, लेकिन भाजपा को शिकस्त देने के लिए राज्य विशेष में गठबंधन होगा।

Continue Reading
Advertisement
Vijay Rupani
राष्ट्रीय2 hours ago

गुजरात सीएम रूपाणी पर एफआईआर का आदेश

Kapil Sibal
राष्ट्रीय3 hours ago

देश के भविष्य से जुड़ा है ईवीएम का मुद्दा: सिब्बल

Shivakumar Swami
राष्ट्रीय5 hours ago

सिद्दगंगा मठ प्रमुख के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

Pravin Togadia
राजनीति6 hours ago

तोगड़िया 9 फरवरी को करेंगे नई पार्टी का ऐलान

Odisha
शहर6 hours ago

भुवनेश्वर : मिनी ट्रक खाई में गिरा, 8 की मौत

mj akbar
राष्ट्रीय9 hours ago

एमजे अकबर के मानहानि मामले में प्रिया रमानी को तलब करने का फैसला सुरक्षित

राजनीति9 hours ago

ईवीएम हैकिंग मामले में गोपीनाथ मुंडे के भतीजे ने की RAW से जांच कराने की मांग

vicky-kaushal--
मनोरंजन10 hours ago

विक्की कौशल की फिल्म ‘उरी’ 100 करोड़ के क्लब में शामिल

MODI
राष्ट्रीय10 hours ago

प्रवासी भारतीयों से बोले मोदी- आप देश की ताकत दुनिया को बता रहे हैं

virat kohli
खेल10 hours ago

आईसीसी के तीनों अवॉर्ड जीतने वाले पहले क्रिकेटर बने विराट

Siddhartha Nath
शहर3 weeks ago

राममंदिर पर शीघ्र निर्णय दे न्यायालय : सिद्धार्थ नाथ

health Issue
Viral सच2 weeks ago

जहां 40 की उम्र में आता है बुढ़ापा

rahul gandhi
राजनीति4 weeks ago

‘फोटो खिंचवाने के बजाय खनिकों को बचायें मोदी’

Abhishek-Manu-Singhvi
राजनीति3 weeks ago

जेटली बने राफेल डिफेंसिव मिनिस्‍टर, 72% बढ़े बैंक फ्रॉड: सिंघवी

kapil sibal
राष्ट्रीय3 weeks ago

CBDT सर्कुलर ने नेशनल हेराल्ड मामले में सरकार को किया बेनकाब : कपिल सिब्बल

टेक3 weeks ago

गूगल डुओ में ग्रुप चैट, लो लाइट मोड जल्द : रिपोर्ट

GST
ब्लॉग3 weeks ago

GST ने मोदी राज के तमाम झूठ की पोल खोली

Rafale in Supreme Court
ब्लॉग3 weeks ago

सुप्रीम कोर्ट में ही हादसे का शिकार हुई राफ़ेल की सच्चाई

heart
लाइफस्टाइल4 weeks ago

सर्दियों में ऐसे रखें अपने दिल का ख्याल

Kader-Khan-Twitter
मनोरंजन3 weeks ago

काबुल से कनाडा तक ऐसा रहा कादर खान का सफरनामा…

Total Dhamaal-
मनोरंजन1 day ago

फिल्म ‘टोटल धमाल’ का ट्रेलर रिलीज

sunil-shetty
मनोरंजन3 days ago

प्रियदर्शन की पीरियड थ्रिलर फिल्म में एक योद्धा नजर आएंगे सुनील शेट्टी

Shakeela-
मनोरंजन3 days ago

‘पापी पप्पी’ से लेकर ‘ठरकी स्कूटर’ तक ये हैं शकीला के 12 बोल्ड पोस्टर्स…

Priya Prakash
मनोरंजन1 week ago

प्रिया प्रकाश की फिल्म ‘श्रीदेवी बंग्लो’ का टीजर जारी

Makar Sankranti 2019
राष्ट्रीय1 week ago

कुंभ में पहला शाही स्नान शुरू

Game of Thrones
मनोरंजन1 week ago

Game of Thrones सीजन 8 का टीजर जारी

BIHAR
शहर1 week ago

वीडियो: देखें, बिहार में रंगदारों का आतंक

Ranveer Singh-
मनोरंजन2 weeks ago

रणवीर की फिल्म ‘गली बॉय’ का ट्रेलर’ रिलीज

Nageshwar Rao
राष्ट्रीय3 weeks ago

आंध्र यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बोले- टेस्ट ट्यूब बेबी थे कौरव

Vikram Saini
राजनीति3 weeks ago

बीजेपी विधायक बोले- ‘असुरक्षित महसूस करने वालों को बम से उड़ा दूंगा’

Most Popular