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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ केस ट्रांसफर करने की मांग पर जम्मू-कश्मीर सरकार से मांगा जवाब

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कठुआ केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार को पीड़िता के परिवार और वकील को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से इस केस को चंडीगढ़ शिफ्ट किए जाने पर भी मांगा की। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप न करे। पीड़िता के परिवार और वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके इस केस को जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की है।

पीड़िता के परिवार के तरफ से वकील इंदिरा जयसिंह ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि पुलिस ने अच्छा काम किया, न सिर्फ उसने सभी आरोपियों को पकड़ा बल्कि साइंटिफिक आधार पर सबूत भी जुटाए। वहीं इस मामले को लेकर आज सीजेएम कोर्ट में भी सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट ने अब 28 अप्रैल की तारीख दी है।

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या के मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ सुनवाई की जाएगी, जिन पर एक बच्ची को जनवरी महीने में एक सप्ताह तक एक मंदिर में बंधक बनाकर रखने और उसका गैंगरेप कर हत्या करने का आरोप है। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है जिसके खिलाफ एक अलग चार्जशीट दाखिल की गई है।

अधिकारियों ने बताया है कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एक चार्जशीट सुनवाई के लिए सत्र अदालत भेजेंगे, जिसमें सात आरोपी नामजद हैं। जबकि नाबालिग आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनवाई करेंगे। जम्मू कश्मीर सरकार ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष वकीलों की नियुक्ति की है। ये दोनों ही सिख हैं।

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महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कैदियों को विशेष माफी

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Mahatma Gandhi

नई दिल्ली, 18 जुलाई | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कारागारों से कैदियों को विशेष माफी देने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कुछ खास श्रेणी के कैदियों को विशेष माफी दी जाएगी और उन्हें तीन चरणों में रिहा किया जाएगा। पहले चरण में कैदियों को दो अक्टूबर (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा। दूसरे चरण में कैदियों को 10 अप्रैल, 2019 (चम्पारण सत्याग्रह की वर्षगांठ) को रिहा किया जाएगा। तीसरे चरण में कैदियों को दो अक्टूबर, 2019 (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा।”

रविशंकर ने कहा, “जिन कैदियों को रिहा किया जाएगा, उनमें महिला कैदी जिसकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिसने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे किन्नर कैदी, जिनकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे पुरुष कैदी, जिनकी आयु 60 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दिव्यांग/शारीरिक रूप से 70 प्रतिशत या इससे अधिक अक्षमता वाले कैदी, जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दोष सिद्ध कैदी जिनने अपनी दो-तिहाई (66 फीसदी) वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो शामिल हैं।”

प्रसाद ने कहा, “ऐसे कैदियों को विशेष माफी नहीं दी जाएगी, जो मृत्युदंड की सजा का सामना कर रहे हैं, अथवा जिनकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। इसके अलावा दहेज मृत्यु, दुष्कर्म, मानव तस्करी और पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पोस्को एक्ट, धन शोधन, फेमा, एनडीपीएस, भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम आदि के दोषियों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।”

उन्होंने कहा, “गृह मंत्रालय सभी पात्र कैदियों के मामलों की पहचान के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी करेगा। राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को इन मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने की सलाह दी जाएगी। राज्य सरकार इस समिति की सिफारिशों को राज्यपाल के पास विचार और संविधान की धारा 161 के तहत मंजूरी के लिए भेजेगी। मंजूरी मिलने के बाद कैदियों को दो अक्टूबर, 2018, 10 अप्रैल, 2019 और दो अक्टूबर, 2019 को रिहा किया जाएगा।”

— आईएएनएस

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अविश्वास प्रस्ताव पर 20 जुलाई को चर्चा

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फोटो: सोशल मीडिया

लोकसभा में बुधवार को मोदी सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर ने स्वीकर कर लिया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार (20 जुलाई) को चर्चा और मत विभाजन होगा।

इससे पहले, संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष ने हंगामा किया। राज्‍यसभा में टीडीपी सांसदों ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्‍य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर नारेबाजी की।

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मोदी ने गोद लिए चार गाँवों में सांसद निधि से एक पैसा नहीं खर्च हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जिन चार गांवों को गोद लिया है उनको लेकर दिलचस्प जानकारी सामने आई है वो भी आरटीआई के जरिए. एक RTI में ये खुलासा हुआ है कि पीएम मोदी ने गोद लिए गांवों में सांसद निधि से एक पैसे का काम नहीं करवाया है. पूरी खबर आप नीचे पढ़ सकते हैं.

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Narendra Modi

नयी दिल्ली, 18 जुलाई 2018: सूचना के अधिकार यानी आरटीआई से एक दिलचस्प ख़ुलासा हुआ है कि नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जिन चार गाँवों को प्रधानमंत्री ने गोद लिया था, उनमें से किसी भी गाँव में मोदी की सांसद निधि से एक पैसे का काम नहीं  हुआ है।

RTI Reply Modi Village

इस आरटीआई को कन्नौज ज़िले के छिबरामऊ कस्बे के मोहल्ला कटरा निवासी दिनेश चन्द्र वर्मा ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, वाराणसी (DRDA) से हासिल की है। वर्मा ने जानना चाहा था कि प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र में किन-किन गाँवों को कब-कब गोद लिया और वहाँ के विकास के लिए सांसद निधि से कितनी-कितनी रकम खर्च की गयी।

जबाब में DRDA ने बताया कि मोदी ने जयापुर गाँव को 7 नवम्बर 2014 को, नागेपुर गाँव को 16 फरवरी 2016 को, ककरहिया गाँव को 23 अक्टूबर 2017 को और डोमरी गाँव को 6 अप्रैल 2018 को गोद लिया था। लेकिन इन चारों चुने गये गाँवों में 30 जून 2018 तक सांसद निधि से एक दमड़ी तक नहीं खर्च की गयी।

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