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शेयर बाजारों के शुरुआती कारोबार में मजबूती

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File Photo

देश के शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मंगलवार को मजबूती का रुख है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.26 बजे 131.50 अंकों की मजबूती के साथ 32,013.66 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 33.70 अंकों की बढ़त के साथ 10,039.00 पर कारोबार करते देखे गए।

बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 146.99 अंकों की बढ़त के साथ 32029.15 पर, जबकि नेशनल
स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 50.8 अंकों की बढ़त के साथ 10,056.85 पर खुला।

 

–आईएएनएस

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खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल से 9 फीसदी पिछड़ा

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प्रतीकात्मक फोटो

मानसून की प्रगति के साथ देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई में भी पिछले दो हफ्तों में तेजी आई है, लेनिक चालू खरीफ बुवाई सीजन 2018-19 में पिछले साल के मुकाबले खरीफ फसलों का रकबा अब तक नौ फीसदी पिछड़ा हुआ है।

छह जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले 14 फीसदी कम थी। केंद्रीय कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 631.53 लाख हेक्टेयर में विभिन्न खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में खरीफ फसलों का रकबा 696.35 लाख हेक्टेयर था।

धान का रकबा अब तक 156.51 लाख हेक्टेयर हो चुका है जो पिछले साल की समान अवधि में दर्ज रकबा 178.73 लाख हेक्टयर से 12.43 फीसदी कम है।

दलहन फसलों का रकबा अब तक 82.41 लाख हेक्टेयर हो गया है जो पिछले साल के 100.94 लाख हेक्टेयर से 17.63 फीसदी कम है।

मोटे अनाज की बुवाई का रकबा 118.84 लाख हेक्टेयर है और यह पिछले साल के 132.88 लाख हेक्टेयर से 10.57 फीसदी कम है।

तिलहन फसलों की बुवाई में अधिक प्रगति देखी जा रही है। अब तक देश में 123.58 लाख हेक्टेयर भूमि में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के 123.69 लाख हेक्टेयर में हुई थी। इस तरह तिलहनों का रकबा तकरीबन पिछले साल के बराबर है।

गóो का रकबा पिछले साल के 49.72 लाख हेक्टेयर से 1.61 फीसदी बढ़कर 50.52 लाख हेक्टेयर हो गया है।

चालू सीजन में 92.70 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में देशभर में कपास का रकबा 104.27 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले 11.09 फीसदी पिछड़ा हुआ है।

जूट और मेस्ता का रकबा 6.97 लाख हेक्टेयर हो चुका है जबकि पिछले साल 7.02 लाख हेक्टेयर था।

–आईएएनएस

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सेंसेक्स में 145 अंकों की तेजी

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फाइल फोटो

देश के शेयर बाजारों में शुक्रवार को तेजी रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 145.14 अंकों की तेजी के साथ 36,496.37 पर और निफ्टी 53.10 अंकों की तेजी के साथ 11,010.20 पर बंद हुआ।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 25.8 अंकों की तेजी के साथ 36,377.03 पर खुला और 145.14 अंकों या 0.40 फीसदी की तेजी के साथ 36,496.37 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 36,567.34 के ऊपरी स्तर और 36,335.61 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक में तेजी रही। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 110.52 अंकों की तेजी के साथ 15,196.46 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 64.21 अंकों की तेजी के साथ 15,721.43 पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 6.4 अंकों की तेजी के साथ 10,963.50 पर खुला और 53.10 अंकों या 0.48 फीसदी की तेजी के साथ 11,010.20 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में निफ्टी ने 11,030.25 के ऊपरी और 10,946.20 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के 19 सेक्टरों में से 14 सेक्टरों में तेजी रही। सूचना प्रौद्योगिकी (1.51 फीसदी), प्रौद्योगिकी (1.38 फीसदी), स्वास्थ्य (1.06 फीसदी), दूरसंचार (1.04 फीसदी) और पूंजीगत वस्तुएं (0.94 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

बीएसई के गिरावट वाले पांच सेक्टरों में तेल और गैस (0.65 फीसदी), धातु (0.55 फीसदी), वाहन (0.40 फीसदी), आधारभूत सामग्री (0.19 फीसदी) और गैर-अनिवार्य वस्तु एवं सेवाएं (0.11 फीसदी) शामिल रहे।

–आईएएनएस

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रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

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प्रतीकात्मक फोटो

डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को ऐतिहासिक गिरावट के साथ बंद हुआ था। जबकि शुक्रवार को इसमें और भी गिरावट देखी गई और ये 69.12 के स्तर पर पहुंचा है। यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को 43 पैसे टूटकर 69.05 पर बंद हुआ था।

बता दें कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी से डॉलर के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के साथ रुपए में यह गिरावट आई है। किसी एक दिन में 29 मई के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले, 28 जून को रुपया 69.10 के रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर तक चला गया था। रुपया शुरुआती कारोबार में बैंकों तथा आयातकों की अमेरिकी करेंसी की भारी मांग के बीच गिरावट के साथ 68.72 पर पहुंच गया था। जबकि बाद में रुपया 69.07 तक चला गया था और अंत में रुपया 69.05 पर बंद हुआ था।

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