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मोदी सरकार को झटका, औद्योगिक उत्पादन गिरा, खुदरा महंगाई में उछाल

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Industrial production
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली। देश के विनिर्माण क्षेत्र में नरमी रहने के कारण दिसंबर 2019 दौरान औद्योगिक उत्पादन में दौरान 0.3 फीसदी की गिरावट आई। एक साल पहले इसी महीने मं देश के औद्योगिक उत्पादन में 2.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। औद्योगिक ये आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में दिसंबर 2018 के दौरान 2.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में बीते दिसंबर में 1.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले इसी महीने में विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि दर 2.9 फीसदी दर्ज की गई थी।

खाने-पीने का सामान महंगा होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.59 प्रतिशत पर पहुंच गयी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2019 में 7.35 प्रतिशत रही थी। वहीं पिछले साल जनवरी महीने में यह 1.97 प्रतिशत रही थी।
खुदरा मुद्रास्फीति में यदि खाद्य मुद्रास्फीति की बात की जाये तो जनवरी 2020 में यह 13.63 प्रतिशत रही जबकि एक साल पहले जनवरी 2019 में इसमें 2.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, यह दिसंबर 2019 के 14.19 प्रतिशत के मुकाबले कम हुई है।

वहीं, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई है। दिसंबर 2019 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक 14.19 फीसदी था जो जनवरी 2020 में घटकर 13.63 फीसदी हो गया है।

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होटल, हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में 75 फीसदी कर्मचारियों की नौकरियों पर लटकी तलवार

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Job Cut

कोरोना काल में बुरी तरह प्रभावित होटल व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में करीब 75 फीसदी कर्मचारियों की नौकरियों पर तलवार लटकी हुई है। ये होटलों के स्थाई कर्मचारी हैं, जबकि अस्थाई व ठेके पर काम करने वालों की छुट्टी तो पहले ही हो चुकी है। उद्योग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, छंटनी की प्रक्रिया लगातार जारी है और जिनकी नौकरियां बची हुई हैं, उनको 20 से 50 फीसदी तक वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

होटल कारोबार के जानकार बताते हैं कि होटल व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के हालात काफी खराब हैं और इसमें अगले दो महीनों में सुधार नहीं आया तो 60 से 75 फीसदी तक कर्मचारियों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ सकती है।

होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसीडेंट के.बी. कचरू से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि स्थिति वास्तव में बेहद गंभीर है और इस सेक्टर में काम करने वाले करीब पांच करोड़ लोगों के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि अगले महीने-दो महीने में हालात में सुधार नहीं आया तो 60 फीसदी तक लोगों की नौकरियां जा सकती हैं।

कचरू ने बताया कि चाहे फाइव स्टार होटल हों, बजट होटल, सभी की वित्तीय स्थिति खराब है, इसलिए होटल कर्मचारियों के लिए रोजगार का संकट बना हुआ है।

जानकार सूत्र बताते हैं कि 30-40 फीसदी तक छंटनी हो चुकी है। कारोबारी बताते हैं कि छंटनी में कुछ ऐसे भी कर्मचारी हैं, जिनको लीव विदाउट पे पर चले जाने को कहा गया है। वहीं, कारोबार की रिस्ट्रक्च रिंग की की गई है। जहां तक वेतन कटौती का सवाल है तो सीनियर मैनेजमेंट लेवल के अधिकारी 50 फीसदी तक अपना वेतन कटाने लगे हैं।

ट्रैवल, टूरिज्म व हॉस्पिैलिटी सेक्टर के विशेषज्ञ रोहित कौल कहते हैं कि यह एक ऐसा सेक्टर है जिस पर एक दिन का भी असर काफी मायने रखता है, क्योंकि एक दिन किसी वजह से काम नहीं होने या बंद होने से अप्रत्यक्ष रूप से इस सेक्टर में रोजी-रोटी कमाने वालों की आमदनी रुक जाती है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में अप्रत्यक्ष रूप से इस सेक्टर से जुड़े लोग तो बहुत पहले ही बेरोजगार हो चुके हैं और अब जो प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, यानी स्थाई कर्मचारी हैं, उनकी भी छंटनी शुरू हो चुकी है।

आईटीसी के पूर्व सीईओ और उद्योग संगठन सीआईआई के टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी नेशनल कमेटी के सलाहकार दीपक हक्सर ने आईएएनएस से कहा कि इस सेक्टर में काम करने वाले 2.5 करोड़ लोगों की नौकरियां जा सकती हैं।

उन्होंने दिल्ली में होटल नहीं खुलने पर हैरानी जताते हुए कहा कि जब कोई सेक्टर बदहाली के दौर से गुजर रहा हो तो उसे पटरी पर लाने की कोशिशें की जानी चाहिए और इस समय होटल व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को बचाने के लिए सबसे पहले उसे खोलने की जरूरत है, क्योंकि होटल खुलेंगे तभी वहां लोग आएंगे और वहां काम करने वालों की नौकरियां बची रहेंगी।

हक्सर ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 31 जुलाई को लिखे पत्र में उन्होंने होटल को हॉस्पिटल से डिलिंक करने के लिए आभार जताते हुए कहा है कि देश की राजधानी होने के कारण पर्यटन के संवर्धन में इसकी विशेष भूमिका है।

यहां बिजनेस के सिलसिले में आने वाले यात्रियों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल और ग्लोबल लीडर्स आते हैं। उन्होंने पत्र में उद्योग की विभिन्न मांगों के साथ-साथ मुख्यंत्री से होटल को खोलने की भी मांग की।

— आईएएनएस

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मंद पड़ी मानसून की चाल, दलहन, तिलहन फसलों को बारिश की दरकार

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प्रतीकात्मक तस्वीर

मानसून इस साल सही वक्त पर आया और तेज रफ्तार के साथ पूरे देश को कवर कर सीजन की शुरुआत में खूब मेहरबानी दिखाई लेकिन जुलाई से इसकी चाल सुस्त पड़ गई है, जिससे देश के कई इलाकों में खरीफ फसल प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। खासतौर से राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में दलहन और तिलहन की फसलों को बारिश की दरकार है।

जानकार बताते हैं कि अगले एक सप्ताह से 10 दिनों तक बारिश नहीं हुई तो कपास, सोयाबीन, उड़द, मूंग व अन्य दलहन फसलों को नुकसान हो सकता है।

भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चालू मानसून सीजन में एक जून से लेकर तीन अगस्त के दौरान औसत से दो फीसदी कम बारिश हुई है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और गुजरात समेत देश के 36 मानसून सबडिवीजन में से छह में सूखा रहा है। मतलब औसत से 20 फीसदी या उससे ज्यादा बारिश का अभाव रहा है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा समेत देश के अधिकांश हिस्सों में कम बारिश हुई है।

आईएमडी के अनुसार, जून में देशभर में औसत से 17 फीसदी ज्यादा बारिश हुई जबकि जुलाई में 10 फीसदी कम बारिश हुई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे सीजन में अब तक दो फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि एक जून से तीन अगस्त तक देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर में औसत से 10 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है जबकि उत्तर पश्चिम भारत में 20 फीसदी और मध्य भारत में सात फीसदी कम। वहीं, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में इस दौरान 14 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में बारिश कम होने से दलहन फसलों की वृद्धि रुकने की आशंका है, जिससे पैदावार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों से जो रिपोर्ट मिल रही है उसके अनुसार, अगले एक चार दिन से एक सप्ताह के भीतर अगर बारिश नहीं होगी तो दलहनों की फसल की पैदावार पर असर पड़ सकती है।

कुछ इसी प्रकार की रिपोर्ट खाद्य तेल उद्योग संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पास है। एसईए के कार्यकारी निदेश डॉ. बी.वी मेहता ने आईएएनएस को बताया कि सोयाबीन, कपास समेत तमाम तिलहन और दलहन फसलों के लिए इस समय बारिश बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर 10 दिनों के भीतर बारिश नहीं होगी तो फसल खराब हो सकती है, जिससे पैदावार पर असर होगा।

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि देश में दलहनों और तिलहनों की खेती मुख्य रूप से असिंचित भूमि क्षेत्र में होती है जहां मानसून की अच्छी बारिश का काफी महत्व होता है। लेकिन अभी तक मानसून कमजोर रहने का अनुमान नहीं है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। अगस्त में अच्छी बारिश होने का अनुमान है, इसलिए इस समय फसल को नुकसान का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

आईएमडी ने मानूसन सीजन के आखिरी दो महीनों में 104 फीसदी बारिश का पूवार्नुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में 97 फीसदी बारिश हो सकती है।

आईएएनएस

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जुलाई में बजाज ऑटो की बिक्री में 33 प्रतिशत की गिरावट

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कोविड-19 से हुए आर्थिक नुकसान के कारण दोपहिया निर्माता बजाज आटो की बिक्री 33 प्रतिशत घटी है। बजाज ने सोमवार को बताया कि जुलाई महीने में उसके वाहनों की कुल बिक्री पिछले साल के इसी माह की तुलना में 33 प्रतिशत घटकर 2,55,832 इकाई रही। कंपनी ने एक साल पहले जुलाई माह में कुल 3,81,530 वाहन बेचे थे।

जुलाई 2020 में घरेलू बाजार में बजाज के 1,58,976 वाहन बिके, जबकि एक साल पहले उसने घरेलू बाजार में 2,05,470 वाहन बेचे थे। इस प्रकार इसमें 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

जुलाई माह में कंपनी के वाहनों का निर्यात 45 प्रतिशत घटकर 96,856 इकाई रहा। पिछले साल जुलाई में बजाज ने 1,76,060 वाहनों का निर्यात किया था।

कंपनी की दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री 2,38,558 इकाई रही। पिछले साल के मुकाबले इसमें 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल जुलाई में कंपनी ने 3,22,210 दो पहिया वाहन बेचे थे।

कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन माह के दौरान उसके वाणिज्यिक वाहनों की कुल बिक्री 17,276 इकाई रही, जबकि पिछले साल जुलाई में उसने 59,320 वाणिज्यिक वाहन बेचे थे। यह गिरावट 71 प्रतिशत की रही।

आईएएनएस

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