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सेंसेक्स में 35 अंकों की तेजी

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 देश के शेयर बाजारों में सोमवार को तेजी दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 35.19 अंकों की तेजी के साथ 34,450.77 पर और निफ्टी 20.65 अंकों की तेजी के साथ 10,584.70 पर बंद हुआ।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 78.11 अंकों की तेजी के साथ 34,493.69 पर खुला और 35.19 अंकों या 0.10 फीसदी की तेजी के साथ 34,450.77 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 34,663.95 के ऊपरी और 34,259.27 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी रही। मिडकैप सूचकांक 82.17 अंकों की तेजी के साथ 16,881.11 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 96.17 अंकों की तेजी के साथ 18,274.20 पर बंद हुए।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 28.75 अंकों की तेजी के साथ 10,592.80 पर खुला और 20.65 अंकों या 0.20 फीसदी की तेजी के साथ 10,584.70 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 10,638.35 के ऊपरी और 10,514.95 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के 19 में से 15 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (1.78 फीसदी), स्वास्थ्य (1.29 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.67 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.64 फीसदी)फीसदी) और उपभोक्ता गैन-अनिवार्य वस्तु एवं सेवाएं (0.60 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

बीएसई के गिरावट वाले शेयरों में – धातु (0.90 फीसदी), तेज खपत उपभोक्ता वस्तुएं (0.43 फीसदी), आधारभूत सामग्री (0.23 फीसदी) और उपभोक्ता वस्तुएं (0.01 फीसदी) शामिल रहे।

–आईएएनएस

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सेंसेक्स में 232 अंकों की गिरावट

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देश के शेयर बाजारों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 232.17 अंकों की गिरावट के साथ 34,616.13 पर और निफ्टी 79.70 अंकों की गिरावट के साथ 10,516.70 पर बंद हुआ।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 24.86 अंकों की तेजी के साथ 34,873.16 पर खुला और 232.17 अंकों या 0.67 फीसदी की गिरावट के साथ 34,616.13 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 34,973.95 के ऊपरी और 34,593.82 के निचले स्तर को छुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 20.3 अंकों की तेजी के साथ 10,616.70 पर खुला और 79.70 अंकों या 0.75 फीसदी की गिरावट के साथ 10,516.70 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 10,621.70 के ऊपरी और 10,505.80 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के मिडकैप सूचकांक और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट रही। मिडकैप सूचकांक 259.93 अंकों की गिरावट के साथ 15,635.75 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 380.40 अंकों की गिरावट के साथ 16,946.38 पर बंद हुए।

बीएसई के 19 में से सिर्फ तीन सेक्टरों -सूचना प्रौद्योगिकी (0.14 फीसदी), तेल और गैस (0.10 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (0.07)- में तेजी रही। बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे- रियल्टी (3.11 फीसदी), स्वास्थ्य सेवाएं (2.55 फीसदी) उपभोक्ता सेवाएं (2.07 फीसदी), उद्योग (2.03 फीसदी), और वाहन (1.92 फीसदी)।

–आईएएनएस

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5 साल में देश के निजी बैंकों के NPA में 450 प्रतिशत का इजाफा

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पिछले 5 वर्षों में देश के 10 निजी बैंकों का 1 लाख करोड़ का कर्ज डूब गया है।

आईसीआईसीआई बैंक जैसे देश के सबसे बड़े निजी बैंक समेत कई बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए 5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। वर्ष 2013-14 में जहां इन बैंकों का कुल एनपीए 19800 करोड़ था, वहीं मार्च 2018 में यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ से ज्यादा यानी 109,076 करोड़ हो गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, देश के निजी बैंकों के एनपीए में यह इजाफा करीब 450 प्रतिशत का है। बैंकों के एनपीए में सबसे बड़ा आईसीआईसीआई बैंक का है, जिसकी एमडी व सीईओ चंदा कोचर पर हाल ही में वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत को कर्ज देकर उसे एनपीए में बदलने का आरोप लगा है। बढ़े एनपीए के कारण इन बैंकों का घाटा भी बढ़ा है। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार चौथी तिमाही में इस बैंक के मुनाफे में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं फेडरल बैंक के मुनाफे में इसी अवधि में 44 प्रतिशत का नुकसान दर्ज किया गया है।

जिन निजी बैंकों के कर्ज पांच साल में सबसे ज्यादा डूबे हैं, उनमें सबसे पहला नंबर आईसीआईसीआई बैंक का है। वर्ष 2013-14 में इस बैंक का एनपीए जहां 10506 करोड़ था, वहीं अगले 4 वर्षों में यह बढ़कर 54063 करोड़ पर पहुंच गया। इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर एक्सिस बैंक है, जिसका एनपीए 2013-14 में 3146 करोड़ था, लेकिन मार्च 2018 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में एक्सिस बैंक का यह आंकड़ा बढ़कर 34249 करोड़ पर पहुंच गया। एनपीए की फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर रहे एचडीएफसी बैंक का कर्ज वित्तीय वर्ष 2013-14 में जहां 2989 करोड़ था, वहीं मार्च 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 8607 करोड़ पर पहुंचा। देश के निजी बैंकों के एनपीए में यह बढ़ोतरी बड़ा नुकसान।

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पेट्रोल-डीजल ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, कई शहरों में 80 पार पहुंचे दाम

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दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। रविवार को तेल एवं गैस के क्षेत्र की सरकारी कम्पनी-इंडियन ऑयल कॉर्प ने परिवहन ईंधन की कीमतों में वृद्धि की घोषणा की। ईंधन के दैनिक मूल्य परिवर्तन प्रणाली पर 20 दिनों की रोक थी और अब इसके समाप्त होने के साथ ही ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत गतिशील मूल्य निर्धारण के तहत रिकॉर्ड उच्च स्तर 76.24 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। यह 14 सितंबर 2013 के पिछले रिकॉर्ड स्तर 76.06 रुपये प्रतिलीटर से भी ऊपर पहुंच गई।

कर्नाटक चुनावों के आसपास निलंबन के बाद गतिशील मूल्य निर्धारण शुरू होने के बाद से पिछले दिन के बाद रविवार को की गई 33 पैसे की बढ़ोतरी सबसे ज्यादा थी।

पेट्रोल की कीमतें दूसरे शहरों में भी कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसमें कोलकाता, मुंबई व चेन्नई में क्रमश: 78.91 रुपये, 84.07 रुपये व 79.13 रुपये प्रति लीटर हो गईं।

दिल्ली में रविवार को डीजल की कीमत 67.57 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। डीजल की कीमतें रविवार को कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं। ये कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में क्रमश: 70.12 रुपये, 71.9 4 रुपये और 71.32 रुपये प्रति लीटर रहीं।

भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमतें अप्रैल के औसत 69.30 डॉलर से बढ़ने के इस महीने 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।

बीते दो वित्तीय वर्ष के दौरान यह औसतन 47.56 डॉलर व 56.43 डॉलर प्रति बैरल रहीं। इस सप्ताह के शुरू में सऊदी अरब के ऊर्जा, उद्योग व खनिज संसाधन मंत्री खालिद अल फलीह से पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कच्चे तेल की कीमतों की बढ़ोतरी पर चिंता जताई थी।

–आईएएनएस

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