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सेंसेक्स पहुंचा 32,000 के पार

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बीते सप्ताह सेंसेक्स 32,000 के स्तर को पार कर रिकार्ड ऊंचाइयों पर पहुंच गया। अब जून के खुदरा महंगाई के आंकड़ों में आई गिरावट ने निवेशकों के मन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जगा दी है।

इसके अलावा वैश्विक बाजार में स्थितियां अनुकूल दिख रही है। अमेरिकी फेरडल रिवर्ज की अध्यक्ष जेनेट येलन ने संकेत दिया है कि उच्च दरों के लिए दृष्टिकोण अभी स्थिर है। इसका मतलब यह है कि निवेशक जोखिम भरे उभरते बाजारों में निवेश जारी रखेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स साप्ताहिक आधार पर 660.12 अंको या 2.10 फीसदी की बढ़ोतरी 32,020.75 पर तथा निफ्टी 220.55 अंकों या 2.28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 9,886.35 पर बंद हुआ।

इस दौरान बीएसई के मिडकैप सूचकांक में 1.64 फीसदी और स्मॉलकैप सूचकांक में 0.49 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोमवार को सेंसेक्स 335.01 अंकों या 1.13 फीसदी की बढोतरी के साथ 31,715.64 पर बंद हुआ। मंगलवार को भी इसमें तेजी रही और यह 31.45 अंकों या 0.10 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 31,747.09 पर बंद हुआ। बुधवार को सेंसेक्स 57.73 अंकों या 0.18 फीसदी की तेजी के साथ 31,804.82 पर बंद हुआ।

गुरुवार को एक बार फिर सेंसेक्स में तेजी देखी गई और यह 232.56 अंकों या 0.73 फीसदी की तेजी के साथ 32,037.38 पर बंद हुआ। कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई और यह 16.63 अंकों या 0.05 फीसदी की गिरावट के साथ 32,020.75 पर बंद हुआ।

इस सप्ताह के सेंसेक्स के तेजी वाले शेयरों में प्रमुख रहे – भारती एयरटेल (5.45 फीसदी), एनटीपीसी (5.00 फीसदी), इंफोसिस (3.85 फीसदी), टीसीएस (2.86 फीसदी), व्रिपो (1.13 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक  (2.83 फीसदी), रिलायंस इंडस्ट्रीज (2.70 फीसदी), टाटा मोटर्स (3.46 फीसदी), बजाज ऑटो (3.77 फीसदी), मारुति सुजुकी इंडिया (1.72 फीसदी) और सन फार्मा (0.20 फीसदी)।

सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज कटौती से देश की थोक मुद्रास्फीति पर आधारित महंगाई दर में जून में रिकार्ड गिरावट देखी गई और यह 0.90 फीसदी  दर्ज की गई। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने की उद्योग जगत की तरफ से मांग बढ़ गई है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) नए संशोधित आधार वर्ष 2011-12 जून में 0.90 फीसदी रही, जबकि मई में यह 2.17 फीसदी थी। मंत्रालय ने कहा, “मासिक डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति की सालाना दर जून में 0.90 फीसदी (अनंतिम) रही (साल 2016 के जून की तुलना में), जबकि पिछले महीने यह 2.17 फीसदी (अनंतिम) थी और यह पिछले साल के समान महीने में (-)0.09 फीसदी थी।”

मंत्रालय ने कहा, “चालू वित्त वर्ष में अब तक मुद्रास्फीति की दर (-)0.44 फीसदी रही है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 3.71 फीसदी थी। वर्तमान डब्ल्यूपीआई का आधार साल 2004-05 के जून से संशोधित कर साल 2011-12 कर दिया गया है, जिसमें अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं है, इस प्रकार थोक स्तर पर मुद्रास्फीति में अस्थिरता घट गई है।

वहीं, बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी जून में गिरावट दर्ज की गई और 1.54 फीसदी रही, जबकि मई में यह 2.18 फीसदी थी। खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट का मुख्य कारण खाद्य पदार्थो की कीमतों में तेज गिरावट रही, जिसमें दालें, सब्जियां प्रमुख रही।

 

–आईएएनएस

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