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राष्ट्रीय

एजीआर पर SC ने कंपनियों और मोदी सरकार को फटकारा, भेजा अवमानना का नोटिस

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Supreme Court
भारतीय उच्चतम न्यायालय (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के बकाया चुकाने में देरी पर टेलीकॉम कंपनियों और मोदी सरकार जमकर फटकारा। कोर्ट ने कहा कि उसे जो आदेश देना था दे चुका है और अब टेलीकॉम कंपनियों को पैसा चुकाना ही होगा। जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा कि यह अवमानना का मामला है, क्या हमें अब सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए? अदालत ने सरकार और कंपनियों के वरिष्ठ अफसरों को कोर्ट की अवमानना का नोटिस भी भेजा है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में एजाआर के मसले पर फिर से सुनवाई शुरू हुई। टेलीकॉम कंपनियों ने एजीआर चुकाने के लिए मोहलत मांगी थी। अंतिम तिथि 23 जनवरी बीत चुकी है।

जस्टिस अरुण मिश्रा ने याचिकाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘ये याचिकाएं दाखिल नहीं करनी चाहिए थीं, ये सब बकवास है, क्या सरकारी डेस्क अफसर सुप्रीम कोर्ट से बढ़कर है जिसने हमारे आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा, “अभी तक एक पाई भी जमा नहीं की गई है, हम सरकार के डेस्क अफसर और टेलीकॉम कंपनियों पर अवमानना की कार्रवाई करेंगे। क्या हम सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दें? क्या देश में कोई कानून बचा है? क्या ये मनी पॉवर नहीं है?”

इस मसले पर देरी पर काफी नाराजगी दिखाते हुए जस्ट‍िस मिश्रा ने कहा, ‘सरकार का टेबल पर बैठा एक अधिकारी हमारे आदेश को रोक देता है, इस देश में कोई कानून बचा है या नहीं? उस अधिकारी को यहां बुलाएं।’ कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से स्पष्टीकरण देने को कहा कि आखिर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए टेलीकॉम कंपनियों को मोहलत कैसे दी।

भारती एयरटेल, वोडाफोनआइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने नई याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से यह गुहार लगाई थी कि करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये के एजीआर बकाया चुकाने के लिए उन्हें और मोहलत दी जाए। जस्ट‍िस अरुण मिश्रा, एस अब्दुल नजीर और एमआर शाह की पीठ ऐसी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

गौरतलब है कि इसके पहले 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर चुकाने के अपने आदेश पर पुनर्विचार करने की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इसके लिए कोई ‘वाजिब वजह’ नहीं दिखती। पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर का बकाया दूरसंचार विभाग को देना ही होगा।

इस आदेश के मुताबिक एयरटेल को 21,682.13 करोड़ रुपये, वोडाफोन को 19,823.71, रिलायंस कम्युनिकेशंस को 16,456.47 करोड़ रुपये औरबीएसएनएल को 2,098.72 करोड़ रुपये देने हैं।

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है। इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है।

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राजनीति

कन्हैया के आरोप-पत्र पर निर्णय के लिए विधि विभाग से कहेंगे केजरीवाल

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Arvind kejriwal
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और भाकपा नेता कन्हैया कुमार के देश विरोधी नारों के मामले पर निर्णय लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी वह इस पर जल्द निर्णय के लिए विधि विभाग से कहेंगे। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाए जाने के कथित मामले में कन्हैया कुमार व अन्य के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दायर किया है। यह आरोप-पत्र एक साल पहले जनवरी 2019 में दायर किया गया था। तब दिल्ली पुलिस को अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब तक दिल्ली सरकार आरोप-पत्र दायर करने की मंजूरी नहीं देती, तब तक हम इस पर संज्ञान नहीं लेंगे।

दिल्ली सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कन्हैया के मामले में आरोप-पत्र को मंजूरी देना या न देना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यह एक स्वतंत्र व अलग विभाग का मामला है। फिर भी हम संबंधित विभाग से कहेंगे कि वह जल्द ही इस पर अपना निर्णय ले।”

दरअसल, देशद्रोह के मामले में सीआरपीसी के सेक्शन 196 के तहत जब तक सरकार मंजूरी नहीं दे देती, तब तक अदालत आरोप-पत्र पर संज्ञान नहीं ले सकती। इसलिए कन्हैया कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे देशद्रोह के मामले में दिल्ली सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य है।

अदालत इस मामले में पहले ही कह चुकी है कि आरोप-पत्र पर सरकार से अनुमति लेनी होगी। इस पर पुलिस ने 10 दिनों के अंदर मंजूरी ले आने की बात कही थी, लेकिन दिल्ली सरकार से अब तक मंजूरी नहीं मिली है।

दिल्ली सरकार की अनुमति मिलने तक अदालत आरोप-पत्र में देशद्रोह वाली धारा पर संज्ञान नहीं लेगी। अगर दिल्ली सरकार ने अनुमति नहीं दी तो देशद्रोह की धारा स्वत: खत्म हो जाएगी। दिल्ली सरकार की अनुमति लिए बिना ही आरोप-पत्र दाखिल करने पर सवाल भी उठ रहे हैं। दिल्ली सरकार के पास कन्हैया कुमार के आरोप-पत्र पर अनुमति के लिए यह फाइल पिछले एक साल से लंबित है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में आरोप-पत्र दायर करने के लिए तीन साल का समय लिया है। अब दिल्ली सरकार का कानूनी मामलों से संबंधित विभाग इस विषय का अध्ययन कर रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार का संबंधित विभाग जल्द ही इस मसले पर अपना निर्णय लेगा।

गौरतलब है कि कन्हैया कुमार के आरोप-पत्र को अनुमति दिए जाने का मामला विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा उठाया गया था। भाजपा ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए केजरीवाल पर कन्हैया कुमार को बचाने का आरोप भी लगाया है।

— आईएएनएस

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राष्ट्रीय

उप्र बोर्ड परीक्षा के पहले दिन 2.39 लाख परीक्षार्थी अनुपस्थित

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CBSE
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ। बोर्ड परीक्षा के पहले दिन कक्षा 10 और 12 के करीब 2.39 लाख छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। कुल 56 लाख छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार (18 फरवरी) को 2,39,133 परीक्षार्थी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देने के लिए नहीं पहुंचे।

इसमें से 1,57,042 हाई स्कूल के और 82,091 इंटरमीडिएट के परीक्षार्थी हैं।

परीक्षा छोड़ने वाले छात्रों की बड़ी संख्या चौंकाने वाली है। दोनों कक्षाओं के लिए पहला प्रश्नपत्र हिंदी का था।

अधिकारियों ने छह परीक्षार्थियों व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न थानों में नकल विरोधी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है।

परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए कुल 34 परीक्षार्थी पकड़े भी गए। इसमें 26 लड़के और एक लड़की हाईस्कूल की और सात लड़के इंटरमिडिएट के हैं।

यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने कहा, “परीक्षा छोड़ने वाले छात्रों की संख्या और ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई जिलों से रिपोर्ट अभी नहीं आई है। बीते साल परीक्षा के पहले दो दिनों के बाद सिर्फ 40,392 छात्रों ने ही पेपर छोड़ा था। इस आंकड़े में 20,674 छात्र शामिल है, जो 2019 में पहले दिन परीक्षा देने नहीं पहुंचे थे।”

उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि ये वे छात्र हैं, जिन्होंने कई जिलों से यूपी बोर्ड की परीक्षा में आवेदन किया था।

उन्होंने कहा, “इन छात्रों ने एक जिले से परीक्षा दी और दूसरे जिलों को छोड़ दिया।”

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मैं पहले दिन 2.39 लाख छात्रों के परीक्षा छोड़ने से बिल्कुल आश्चर्य में नहीं हूं। संतोष की बात यह है कि सभी 75 जिलों में परीक्षा सुचारु रूप से हुई और कोई बड़ी घटना नहीं हुई।”

साल 2018 में 12.5 लाख परीक्षार्थियों ने बीच में परीक्षा छोड़ दी और 2019 में यह संख्या घटकर 6.69 लाख हो गई।

–आईएएनएस

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राष्ट्रीय

चीन से आए सभी भारतीय स्वस्थ, जारी हुआ प्रमाणपत्र

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Corona Virus
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संदेह में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के दिल्ली स्थित शिविर में रखे गए सभी 406 भारतीय नागरिकों को घर जाने की अनुमति दे दी गई है। इन सभी भारतीयों को चीन के वुहान शहर से भारत लाया गया था। वुहान ही चीन का वह शहर है, जहां कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे अधिक फैल चुका है। गनीमत है कि आइटीबीपी के शिविर में ठहराए गए सभी भारतीयों में से कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस के संक्रमण से ग्रस्त नहीं पाया गया है।

बाहरी दिल्ली स्थित आइटीबीपी के छावला शिविर में ये सभी 406 संदिग्ध दो सप्ताह से अधिक समय बिता चुके हैं। यहां रह रहे सभी व्यक्तियों को अब घर जाने की अनुमति दे दी गई है। इन सभी 406 व्यक्तियों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र जारी किया है।

एयर इंडिया के दो विशेष विमानों से कुल 647 भारतीय नागरिकों को चीन से वापस लाया गया था। भारत सरकार ने चीन से आने वाले सभी भारतीयों को दिल्ली के छावला व हरियाणा के मानेसर स्थित इंडियन आर्म फोर्स मेडिकल सर्विसेज के भवन में ठहराने का इंतजाम किया था। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, “चीन से लौटे इन सभी लोगों को कम से कम दो सप्ताह तक शेष भारतीय नागरिकों से अलग रखने का फैसला किया गया था और यह समय सीमा पूरी होने पर अब इन्हें घर भेजा जा रहा है।”

वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का यह संक्रमण अब चीन के 30 अलग-अलग राज्यों में फैल चुका है। वुहान ही चीन का वह शहर है, जहां अधिकांश भारतीय छात्र व अन्य नागरिक फंसे हुए हैं। चीन से स्वदेश लौटने वाले अधिकांश भारतीयों में सबसे ज्यादा संख्या छात्रों की ही है।

दिल्ली और हरियाणा में बने अस्थायी शिविरों में ले जाने से पहले चीन से आने वाले सभी भारतीयों की पहले चीन में और फिर दिल्ली पहुंचने पर एयरपोर्ट परिसर में ही गहन जांच की गई थी, जिसमें थर्मल स्क्रीनिंग भी शामिल रही। इसके बाद चीन से लौटे इन सभी भारतीयों को विशेष वाहनों से छावला व मानेसर ले जाया गया। छावला और मानेसर के इन शिविरों में चीन से लौटे भारतीयों को विशेषज्ञ एवं चिकित्सा दल की सघन निगरानी में रखा गया।

इन शिविरों में प्रतिदिन इनकी नियमित जांच की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, “जांच में पता चला है कि इनमें से कोई भी भारतीय कोरोना वायरस से ग्रसित नहीं है।”

शिविर में रहने के दौरान चीन से आए ये सभी लोग अपने परिवार समेत किसी भी अन्य व्यक्ति से नहीं मिल सके थे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, “विदेश मंत्रालय भारतीय नागरिकों के मामले में चीन की सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और जल्द ही भारत लौटने के इच्छुक अन्य नागरिकों को स्वदेश लाया जाएगा।”

–आईएएनएस

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