जामिया हिंसा पर SC ने याचिकाकर्ताओं को HC जाने के लिए कहा | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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जामिया हिंसा पर SC ने याचिकाकर्ताओं को HC जाने के लिए कहा

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नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को नियुक्त कर सकता है।

बता दें चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं से कहा है था कि वह पहले उन्हें समझाएं कि उनकी याचिका क्यों सुनी जाए। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामला हाई कोर्ट क्यों नहीं ले जाया गया? याचिकाकर्ता से कोर्ट ने कहा कि आपको कानूनी प्रणाली समझना होगा। ऐसे मामलों से आप हमें ट्रायल कोर्ट बना रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि हिंसा पूरे देश में हो रही है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना होगा। इस पर चीफ जस्टिस कहा कि हम ऐसा नहीं करेंगे, इस तरह की भाषा का इस्तेमाल ना करें। याचिकाकर्ता ने जब कहा कि छात्रों की तरफ से हिंसा नहीं हुई है। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि अगर हिंसा नहीं हुई तो बसें कैसे जली थीं?

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सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने की मांग वाली याचिका खारिज

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Supreme Court
भारतीय उच्चतम न्यायालय (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें फर्जी अकाउंट्स पर अंकुश लगाने के उपाय के रूप में आधार कार्ड को सोशल मीडिया अकाउंट्स से जोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायाधीश एल. नागेश्वर राव, कृष्ण मुरारी और एस. रवींद्र भट की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई की। अदालत ने इस याचिका पर विचार करने और उस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 2019 में अपना फैसला सुनाया था। उस समय हाईकोर्ट ने भी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा, “हमें हाईकोर्ट के आदेशों के साथ हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिख रहा है।”

शीर्ष अदालत ने कहा कि विशेष लीव याचिका को खारिज कर दिया गया है। हालांकि, ट्रांसफर केस (सिविल) संख्या 5/2020 में आवेदन दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता दी गई है।

शीर्ष अदालत ने हालांकि याचिका का निपटारा करते हुए उपाध्याय को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के साथ आधार के लिंक के संबंध में एक और मामले में एक निहित आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी, जो अदालत के समक्ष लंबित है।

–आईएएनएस

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पूर्वोत्तर राज्यों में भूस्खलन-बाढ़ से 3 की मौत, 2.50 लाख लोग प्रभावित

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Flood in Northeastern States
बाढ़ और भूस्खलन के बाद गोहाटी में जल-जमाव (आईएएनएस)

गुवाहाटी/ईटानगर। पूर्वोत्तर के तीन राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और बाढ़ से 350 से अधिक गांवों के 2.50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो गए। ईटानगर के अधिकारियों ने बताया कि सोमवार रात को दिबांग घाटी जिले के आरजू गांव में एक महिला और उसके दो बच्चे भूस्खलन के दौरान दबने से जिंदा दफन हो गए। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश से पूरे राज्य में भूस्खलन और बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर तबाही मच गई है।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तीन लोगों की मौत पर गहरा शोक जताया। उन्होंने मृतकों के परिवार को तत्काल 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

असम में सात जिलों के 230 गांवों के लगभग दो लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमों को उपकरणों के साथ 40 स्थानों पर पहले ही तैनात किया जा चुका है।

मेघालय में लगातार बारिश और चक्रवाती तूफान ने पहाड़ी राज्य के कुछ हिस्से प्रभावित हुए हैं, जिससे 21 गांवों में 2,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

मेघालय के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री किर्मन शायला ने कहा कि पांच जिले प्रभावित हुए हैं।

इस बीच, जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने मंगलवार को असम की ब्रह्मपुत्र नदी के लिए बाढ़ अलर्ट जारी किया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इससे पहले, मंगलवार को भी असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी थी। असम और पड़ोसी राज्यों के कई हिस्सों में पिछले सप्ताह जब चक्रवात अम्फान आया था, तब से भारी बारिश हो रही है।

–आईएएनएस

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लॉकडाउन में पूर्ण वेतन देने के खिलाफ अर्जियों पर तुरंत ध्यान दें मोदी सरकार: सुप्रीम कोर्ट

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भारतीय उच्चतम न्यायालय (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि लॉकडाउन के दौरान कामगारों को पूर्ण वेतन का भुगतान करने के गृह मंत्रालय के 29 मार्च के आदेश को चुनौती देने अर्जियों को अर्जेसी के साथ निपटाए। न्यायाधीश एस. के. कौल और न्यायाधीश एम. आर. शाह के साथ न्यायाधीश अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र से इस मामले पर अपना जवाब दर्ज करने को कहा और इस मामले पर अगले सप्ताह तक सुनवाई टाल दी।

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने पीठ के समक्ष दलील दी कि केंद्र ने 17 मई को एक नई अधिसूचना जारी की है, जो 29 मार्च के केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश को रद्द कर देती है।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा कि छोटे उद्योग राष्ट्रव्यापी बंद के कारण बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और अगर वे कमाई नहीं कर सकते हैं, तो किस माध्यम से कर्मचारियों को पूर्ण वेतन दे सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने 15 मई को कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान श्रमिकों को पूर्ण मजदूरी का भुगतान करने में असमर्थ नियोक्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत के इस निर्देश ने वस्तुत: गृह मंत्रालय के 29 मार्च के परिपत्र पर रोक लगा दी थी।

शीर्ष अदालत की प्रतिक्रिया औद्योगिक इकाइयों द्वारा दायर याचिकाओं पर आई है, जिसने अदालत में दावा किया है कि उनके पास भुगतान करने का कोई साधन नहीं है क्योंकि उनका तमाम काम व उत्पादन ठप पड़ा है।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि भारत सरकार ने कार्यबल के लिए कोई कदम नहीं उठाया है और इसके बजाय पूरी मजदूरी देने के लिए नियोक्ताओं/मालिकों पर पूरा बोझ डाल दिया है। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत के समक्ष कहा कि कोरोनावायरस महामारी के मद्देनजर लागू किए गए राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान संगठनों को उनके कार्यबल का भुगतान करने से पूरी तरह से छूट दी जानी चाहिए।

–आईएएनएस

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