Connect with us

राजनीति

जिन्ना और श्यामा प्रसाद के ज़रिये संजय सिंह का बीजेपी पर करारा हमला

Published

on

sanjay singh

पाकिस्तान के क़ायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना की अलीगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन में लगी तस्वीर को लेकर गरमायी सियासत और इससे पनपे हिंसक विरोध के दरम्यान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर करारा हमला किया है।

संजय सिंह ने जाने-माने इतिहासकार आर सी मज़ूमदार की किताब का हवाला देते हुए कहा है कि आज़ाद भारत के इतिहास में बीजेपी के चोटी के नेता रहे लाल कृष्ण आडवाणी के सिवाय कभी भी, किसी भी अन्य पार्टी के नेता या मंत्री ने मोहम्मद अली जिन्ना की न तो कभी तारीफ़ की और ना ही किसी ने कभी जिन्ना की मज़ार पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

वाजपेयी सरकार में उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे लाल कृष्ण आडवाणी ने 2005 में अपने जन्मस्थान कराची का दौरा किया। उस वक़्त आडवाणी, बीजेपी के अध्यक्ष थे और अपनी कराची यात्रा के दौरान आडवाणी ने जिन्ना की मज़ार पर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। यही नहीं, उस वक़्त आडवाणी ने जिन्ना को सेक्यूलर नेता भी बताया था।

Lal Krishan Advani lays a flower wreath at the mausoleum of Mohammed Ali Jinnah, founding father of Pakistan, in Karachi on June 4 2005.

Lal Krishan Advani lays a flower wreath at the mausoleum of Mohammed Ali Jinnah, founding father of Pakistan, in Karachi on June 4 2005.

#Watch Video:  Pays homage at his mausoleum

जिन्ना को सेक्यूलर बताने की वजह से इतना राजनीतिक बवंडर उठा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आडवाणी को बीजेपी का अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए मज़बूर कर दिया। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने भी जिन्ना की ओर से पाकिस्तान की संविधान सभा में दिये गये भाषण का हवाला देकर बताया था कि आडवाणी ने कुछ भी ग़लत नहीं कहा, क्योंकि जिन्ना ने कहा था कि पाकिस्तान एक सेक्यूलर देश बने। जिन्ना से जुड़े इस प्रसंग से आडवाणी की ऐसी मिट्टी पलीद हुई कि फिर उन्हें देखते ही देखते अपनी ही पार्टी में हाशिये पर ढकेल दिया गया। वहीं अंज़ाम आज तक मौजूद है। आज भी मोदी-योगी युग में वयोवृद्ध आडवाणी हाशिये पर ही हैं।

संजय सिंह ने कहा कि ये किसी से छिपा नहीं है कि आज़ादी की लड़ाई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई योगदान नहीं था। उल्टा संघियों को जब भी मौका मिला, उन्होंने अँग्रेज़ों का ही साथ दिया। यहाँ तक कि बीजेपी के पूर्व अवतार जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्हें बीजेपी वाले अपना प्रेरणा पुरुष बताते नहीं अघाते हैं, वही श्यामा प्रसाद आज़ादी से पहले की बंगाल की उस सरकार में उपमुख्यमंत्री थे, जिसकी अगुवाई मुस्लिम लीग़ के उसी नेता फ़ज़लुल हक़ कर रहे थे, जिसमें देश के विभाजन में बड़ी भूमिका निभायी थी। बँटवारे के बाद यही फ़ज़लुल हक़, पाकिस्तान की पहली लियाक़त अली सरकार में गृहमंत्री बने थे।

इतिहारकार आर सी मज़ूमदार की किताब का हवाला देते हुए संजय सिंह ने कहा कि 1942 में जब भारत छोड़ो आन्दोलन यानी क्विट इंडिया मूवमेंट अब चरम पर था, जब श्यामा प्रसाद मुखर्ज़ी ने अँग्रेज़ गर्वनर को मशविरा दिया था कि कैसे और क्यों इस आन्दोलन का सख़्ती से दमन करना ज़रूरी है।

इस ऐतिहासिक तथ्य से साफ़ है कि सत्ता लोपुप श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने निजी और संघ के राजनीतिक स्वार्थ की सिद्धि के लिए उन अँग्रेज़ों का साथ लिया था, जिनसे संघर्ष करते हुए महात्मा गाँधी की अगुवाई में काँग्रेसी लोग आज़ादी हासिल करने के लिए तमाम जद्दोज़हद कर रहे थे।

Watch Video :

जिन्ना की क़ब्र पर फूल चढ़ाने वाले आडवाणी जी और भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी को मानने वाले देश भक्ति का पाठ न पढ़ाये देश तोड़ने वाले जिन्ना के लिये भारत में कोई स्थान नही

Posted by Sanjay Singh on Thursday, 3 May 2018

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर संघी नारा लगाते हैं कि ‘जहाँ हुआ बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है’, लेकिन सच्चाई ये है कि मुखर्जी उस वक़्त मुस्लिम लीग़ में बड़े नेता की हैसियत रखते थे, जब उसकी बंगाल में सत्ता थी। कालान्तर में जब मुस्लिम लीग़ की राजनीति की वजह से देश के बँटवारे के हालात बन गये तो मुखर्जी ने अपना सियासी चोला बदल लिया और वो काँग्रेस में शामिल हो गये। आज़ादी के बाद उनके सियासी क़द और अनुभव को देखते हुए जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया।

लेकिन महात्मा गाँधी की हत्या के बाद जब इस बात की भनक लगी कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और संघ के शीर्ष नेताओं ख़ासकर वीर सावरकर के बीच बहुत नज़दीकी है तो हालात ऐसे बन गये कि मुखर्जी ने नेहरू की कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया और जल्द ही हिन्दू महासभा से रूपान्तरित होकर बनी भारतीय जनसंघ के संस्थापक बन गये। जनसंघ की स्थापना के पीछे उस सावरकर की अहम भूमिका थी, जिसने 1911 और 1913 में अँग्रेज़ों से माफ़ी माँगकर अपनी कालापानी की सज़ा में रियायत की फ़रियाद की और बदले में अँग्रेज़ों की हर-सम्भव मदद करने का वादा किया। ऐसे ही प्रयासों की वजह से सावरकर को 1921 में राहत देकर उनके गृहनगर पुणे की यरवदा जेल में भेज दिया था। आगे चलकर यही रहते हुए अँग्रेज़ों की इच्छा के मुताबिक, सावरकर ने उस संघ की स्थापना की जो उस सिक्के का दूसरा पहलू था जिसके एक ओर कट्टरपन्थी मुसलमान थे तो दूसरी ओर कट्टरपन्थी हिन्दू। इन दोनों को ही अँग्रेज़ों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का काम सौंपा था। ताकि काँग्रेस और उसकी अगुवाई में चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलन में दिखने वाली आवाम की एकता को कमज़ोर किया जा सके।

राजनीति

आशुतोष के इस्तीफे को केजरीवाल ने अस्वीकार किया

Published

on

AAP leader ashutosh

नई दिल्ली, 15 अगस्त | आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता आशुतोष ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बुधवार को पार्टी छोड़ दी लेकिन आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया। 23 वर्षो तक पत्रकार रहने के बाद 2014 में पार्टी में शामिल होने वाले आशुतोष ने ट्वीट कर पार्टी छोड़ने की घोषणा की और समर्थन देने के लिए पार्टी का शुक्रिया अदा किया।

आशुतोष ने ट्वीट किया, “हर सफर का अंत होता है। आप के साथ मेरा सहयोग जो अच्छा और क्रांतिकारी रहा, वह भी खत्म हो गया है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है (और) इसे स्वीकार करने के लिए अनुरोध किया है।”

उन्होंने कहा, “इसके पीछे पूरी तरह से व्यक्तिगत कारण हैं। पार्टी और उन लोगों को धन्यवाद, जिन्होंने मुझे पूरा समर्थन दिया। धन्यवाद।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने मीडिया से उनकी निजता का सम्मान करने का अनुरोध किया।

आशुतोष के आप की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले ट्वीट को रीट्वीट करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह अपने जीवन में इस इस्तीफे को स्वीकार नहीं कर सकते।

केजरीवाल ने ट्वीट किया, “हम आपका इस्तीफा कैसे स्वीकार कर सकते हैं। नहीं, इस जीवन में तो नहीं।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, “आशुतोष सर, हम सभी आपसे बहुत प्यार करते हैं।”

पूर्व पत्रकार आशुतोष ने राज्यसभा में तीन उम्मीदवारों में से दो के चयन पर नाराजगी जताई थी। एक समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीब नजर आने वाले आशुतोष को इसके बाद से पार्टी की अधिकांश गतिविधियों से दूर रखा जाने लगा था।

आशुतोष 2014 लोकसभा चुनाव में दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र से आप के उम्मीदवार थे, उन्हें भाजपा के हर्षवर्धन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

2019 के लिए पार्टी के प्रवक्ता पंकज गुप्ता को चांदनी चौक के प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है और इस बात की भी उम्मीद है कि वह वहां से उम्मीदवार भी होंगे।

पार्टी के राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य और सांसद संजय सिह ने कहा कि उनका इस्तीफा ‘दिल को तोड़ने वाला है।’ आशुतोष भी इस समिति के सदस्य हैं। संजय सिंह ने आशुतोष से इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया।

दिल्ली के कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने इस निर्णय को ‘दुखद’ बताया।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है और उन्हें अपने निर्णय पर विचार करने के लिए कहा गया है।

–आईएएनएस

Continue Reading

राजनीति

जो राष्ट्रध्वज नहीं संभाल सकते, वे राष्ट्र क्या संभालेंगे : कांग्रेस

Published

on

Amit Shah

नई दिल्ली, 15 अगस्त | कांग्रेस ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि जो राष्ट्रध्वज नहीं संभाल सकते, उनसे राष्ट्र संभालने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

कांग्रेस की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब शाह यहां भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रध्वज फहराने के दौरान गड़बड़ा गए थे। शाह ने जैसे ही तिरंगे की रस्सी खींची, राष्ट्रध्वज सरक कर जमीन पर आ गया।

कांग्रेस पार्टी ने इस घटना का एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया, “जो लोग राष्ट्रध्वज नहीं संभाल सकते, वे राष्ट्र कैसे संभाल पाएंगे? जिन लोगों ने 50 सालों तक तिरंगे का मजाक उड़ाया, यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया होता, तो यह स्थिति नहीं हुई होती।”

कांग्रेस ने आगे कहा, “जो लोग दूसरों को देशभक्ति का प्रमाण-पत्र देते हैं, वे राष्ट्रगान के शिष्टाचार से अनभिज्ञ हैं।”

कई अन्य ट्वीटर उपयोगकर्ताओं ने भी उसी वीडियो को तीखी टिप्पणियों के साथ साझा किया।

–आईएएनएस

Continue Reading

चुनाव

भाजपा ने एकसाथ चुनाव की रपट खारिज की

Published

on

BJP

नई दिल्ली, 14 अगस्त | भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने मंगलवार को अगले वर्ष की शुरुआत में लोकसभा और 11 राज्य विधानसभाओं के चुनाव को एकसाथ कराने की रपट खारिज कर दी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “भाजपा ऐसी किसी भी गलतफहमी को खारिज करती है।”

उन्होंने कहा कि जहां तक ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का सवाल है, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को विधि आयोग को लिखे अपने पत्र में इस मामले में सभी हितधारकों के साथ सकारात्मक चर्चा करने की अपील की है।

पात्रा ने कहा, “जैसा कि मीडिया के कुछ वर्गो की ओर से रपट किया जा रहा है, शाह के पत्र में, लोकसभा और 11 राज्य विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने का कोई जिक्र नहीं है।”

उन्होंने कहा कि भाजपा ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का समर्थन किया है, लेकिन किसी को भी इस बारे में गलतफहमी नहीं फैलानी चाहिए।

पात्रा ने कहा, “लोकतंत्र में किसी भी तरह के सुधार के लिए सकारात्मक चर्चा अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए चर्चा करने का आह्वान किया है और कहा है कि इस मामले में सहमति बनती है तो, यह देश के लिए अच्छा होगा।”

भाजपा नेता ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन किया है।

Continue Reading
Advertisement
Ajit Wadekar
खेल2 hours ago

भारत को विदेश में पहली बार जीत दिलाने वाले कप्तान अजीत वाडेकर नहीं रहे

PM Modi Red Fort
ज़रा हटके2 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से ये पांच झूठ

MODI-SHAH
ब्लॉग3 hours ago

‘एक देश एक चुनाव’ यानी जनता को उल्लू बनाने के लिए नयी बोतल में पुरानी शराब

AAP leader ashutosh
राजनीति4 hours ago

आशुतोष के इस्तीफे को केजरीवाल ने अस्वीकार किया

atal bihari vajpai
राष्ट्रीय5 hours ago

पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक

Amit Shah
राजनीति5 hours ago

जो राष्ट्रध्वज नहीं संभाल सकते, वे राष्ट्र क्या संभालेंगे : कांग्रेस

Chief Justice of India, Justice Dipak Misra
राष्ट्रीय6 hours ago

व्यवस्था को बर्बाद या कमजोर न करे, रूपांतरित करें : प्रधान न्यायाधीश

Kerala Floods
शहर6 hours ago

केरल में रेड अलर्ट जारी, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 58 हुई

PM Modi Red Fort
राष्ट्रीय17 hours ago

मोदी खुद को बदलाव के वाहक के रूप में पेश किया

राष्ट्रीय23 hours ago

देश मना रहा अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस

TEMPLE-min
ज़रा हटके4 weeks ago

भारत के इन मंदिरों में मिलता है अनोखा प्रसाद

chili-
स्वास्थ्य3 weeks ago

हरी मिर्च खाने के 7 फायदे

School Compound
ओपिनियन3 weeks ago

स्कूली छात्रों में क्यों पनप रही हिंसक प्रवृत्ति?

pimple
लाइफस्टाइल3 weeks ago

मुँहासों को दूर करने के लिए अपनाएंं ये 6 टिप्स…

Kapil Sibal
ब्लॉग3 weeks ago

लिंचिंग के ख़िलाफ़ राजनीतिक एकजुटता ज़रूरी

Mob Lynching
ब्लॉग4 weeks ago

जो लिंचिंग के पीछे हैं, वही उसे कैसे रोकेंगे!

Gopaldas Neeraj
ज़रा हटके4 weeks ago

अब कौन कहेगा, ‘ऐ भाई! जरा देख के चलो’

Indresh Kumar
ओपिनियन3 weeks ago

संघ का अद्भुत शोध: बीफ़ का सेवन जारी रहने तक होती रहेगी लिंचिंग!

Bundelkhand Farmer
ब्लॉग3 weeks ago

शिवराज से ‘अनशनकारी किसान की मौत’ का जवाब मांगेगा बुंदेलखंड

No-trust motion Parliament
ब्लॉग4 weeks ago

बस, एक-एक बार ही जीते विश्वास और अविश्वास

sui-dhaga--
मनोरंजन3 days ago

वरुण धवन की फिल्म ‘सुई धागा’ का ट्रेलर रिलीज

pm modi
ब्लॉग5 days ago

70 साल में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के शब्द संसद की कार्रवाई से हटाये गये

flower-min
शहर7 days ago

योगी सरकार कांवड़ियों पर मेहरबान, हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

Loveratri-
मनोरंजन1 week ago

आयुष शर्मा की फिल्म ‘लवरात्र‍ि’ का ट्रेलर रिलीज

-fanney khan-
मनोरंजन2 weeks ago

मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर रिलीज हुआ ‘बदन पे सितारे’ का रीमेक

tej pratap-min
राजनीति2 weeks ago

तेज प्रताप का शिव अवतार…देखें वीडियो

nawal kishor yadav-min
राजनीति2 weeks ago

शर्मनाक: बीजेपी विधायक ने गवर्नर को मारने की दी धमकी

Dr Kafeel Khan
शहर3 weeks ago

आर्थिक तंगी से जूझ रहे गोरखपुर के त्रासदी के हीरो डॉक्टर कफील

sonakshi-
मनोरंजन3 weeks ago

डायना पेंटी की फिल्म ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ का ट्रेलर रिलीज

Lag Ja Gale-
मनोरंजन3 weeks ago

‘साहेब, बीवी और गैंगस्टर 3’ का गाना रिलीज

Most Popular