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अंतरराष्ट्रीय

रूस ने ईरान परमाणु समझौते की समीक्षा का जोरदार विरोध किया

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Russia
फाइल फोटो

रूस के अधिकारियों ने कहा है कि ईरान के परमाणु समझौते की समीक्षा के बारे में अमेरिका के नवीनतम बयान को लेकर मॉस्को का दृष्टिकोण अस्वीकृति वाला है और वह इस समझौते को रद्द करने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए हर संभव उपाय करेगा।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने संवाददाताओं से कहा कि रूस, ईरान परमाणु समझौते में बदलाव के लिए अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ वार्ता के आयोजन की अमेरिकी घोषणा से चिंतित है।

उन्होंने कहा, “इन वार्ताओं से परमाणु समझौते और इस पूरे परिस्थिति के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम इसका गंभीरतापूर्वक विश्लेषण करेंगे और इन घटनाओं पर निर्णय लेना जारी रखेंगे।”

उन्होंने कहा कि 2015 में ईरान और रूस, फ्रांस, चीन, ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी द्वारा हस्ताक्षित इस समझौते को संशोधित नहीं किया जा सकता है और मास्को ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह आखिरी बार ईरान के लिए परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंधों में राहत देंगे। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी कांग्रेस और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने समझौते की कथित ‘विनाशकारी खामियों’ को ठीक नहीं किया तो अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा।

–आईएएनएस

अंतरराष्ट्रीय

कोलंबिया में पुल ढहा, 10 की मौत

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प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्य कोलंबिया में सोमवार को एक निर्माणाधीन पुल ढह गया, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस घटना में दो लोग लापता हैं जबकि चार घायल हो गए हैं।

मेटा विभाग के नागरिक सुरक्षा विभाग के निदेशक जॉर्ज डियाज ने कहा कि पीड़ित मजदूर थे, जो पुल ढहने की वजह से लगभग 280 मीटर की ऊंचाई से गिरे।

घटना के समय लगभग 20 मजदूर काम कर रहे थे। डियाज ने स्थानीय मीडिया को बताया, “10 लोगों की मौत हो गई है। नौ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि एक ने अस्पताल में अंतिम सांस ली।” काराकोल वेबसाइट पर पोस्ट वीडियो में देखा जा सकता है। आधा पुल अभी भी खड़ा है जबकि आधा ढह चुका है।

–आईएएनएस

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अंतरराष्ट्रीय

भारत के सेना प्रमुख का बयान शांति के लिए नुकसानदेह : चीन

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CHINA-SPOKESMAN

चीन ने रविवार को भारत के सेना प्रमुख बिपिन रावत के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे ‘अरचनात्मक’ बयान सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति को प्रभावित करेंगे।

जनरल रावत ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत को अपना ध्यान पाकिस्तान से सटी अपनी पश्चिमी सीमा से हटाकर चीन से सटी अपनी उत्तरी सीमा पर केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर चीन शक्तिशाली है तो भारत भी कमजोर नहीं है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, “पिछले एक वर्ष के दौरान भारत और चीन के संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।”

लू ने कहा कि बीते सितंबर में भारत-चीन के नेताओं के बीच दोनों पक्षों के मतभेदों को सही तरीके से दूर करने और भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी थी।

लू ने कहा, “हाल में दोनों पक्षों ने परामर्श और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत को आगे बढ़ाया है और सुधार एवं विकास को गति प्रदान की है।”

लू ने आगे कहा, “इस पृष्ठभूमि में भारत के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई अरचनात्मक टिप्पणी राष्ट्र केदो प्रमुखों की सहमति के खिलाफ है और दोनों पक्षों द्वारा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार एवं विकास के लिए किए गए प्रयासों के विरुद्ध है।”

उन्होंने कहा, “यह सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने में सहायता नहीं करेगा।”

–आईएएनएस

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अंतरराष्ट्रीय

मैं नस्लवादी नहीं हूं : ट्रंप

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donald trump
File Photo

अफ्रीकी देशों को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के बाद आलोचना झेल रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा है कि वह नस्लवादी नहीं हैं। वाशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप के हवाले से बताया, नहीं, मैं एक नस्लवादी नहीं हूं।

मैं आपको यह कह सकता हूं आपने अब तक जिन लोगों का भी साक्षात्कार लिया होगा मैं उन सभी में सबसे कम नस्लवादी हूं। ओवल ऑफिस में पिछले सप्ताह हुए बैठक में मौजूद लोगों के अनुसार, ट्रंप इस बात पर गुस्से में थे कि अल साल्वाडोर, हैती और कुछ अफ्रीकी देशों के प्रवासियों को अमेरिका में अनुमति दी गई थी।

ट्रंप ने कहा, शिटहोल्स देशों से हमारे देश में लोग क्यों आते हैं। बैठक में माजूद सिनेटर टॉम कॉटन और डेविड पर्डयू ने कहा कि उन्हें याद नहीं कि ट्रंप ने इस शब्द का इस्तेमाल किया था। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने शुक्रवार को कहा कि अल सल्वाडोर और हैती के राष्ट्रों के संबंध में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी नस्लवादी है।

संयुक्त राष्ट्र मानवधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविले ने ट्रंप के बयान की निंदा करते हुए कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणियां आश्चर्यजनक और शर्मनाक हैं। मुझे माफ करिएगा लेकिन उन्हें नस्लवादी के अलावा किसी और रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।”

–आईएएनएस

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