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मिसाइल बटन दबने की अफवाह से अमेरिका में हड़कंप

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Hawaii
मिसाइल बटन दबने की अफवाह से अमेरिका में हड़कंप

अमेरिका के हवाई में मिसाइल हमले के अलर्ट से स्थानीय नागरिकों में हड़कंप मच गया लेकिन जल्द ही यह चेतावनी झूठी साबित हुई। हवाई के नागरिकों को शनिवार को एक मोबाइल संदेश मिला, जिसमें लिखा था, हवाई में बैलिस्टिक मिसाइल हमला होने वाला है। तुरंत कहीं भी शरण लें। यह ड्रिल नहीं है।

The missile-strike message Hawaiians saw on their phones was a false alarm

बीबीसी के मुताबिक, स्टेट गवर्नर डेविड इगे ने माफी मांगते हुए कहा कि एक कर्मचारी द्वारा गलत बटन दबाने की वजह से ऐसा हुआ।

अमेरिकी सरकार ने इस मामले की पूर्ण जांच कराने की घोषणा की है। उत्तर कोरिया की ओर से हवाई पर संभावित मिसाइल हमले की वजह से अलर्ट प्रणाली मुस्तैद की गई है।

शीतयुद्ध खत्म होने के बाद से पहली बार दिसंबर में हवाई में परमाणु चेतावनी सायरन को परखा गया था। हमले का गलत चेतावनी संदेश लोगों के मोबाइल पर भेजा गया और यह टेलीविजन और रेडियो स्टेशनों पर भी प्रसारित हुआ।

होनोलुलु स्टार-एडवर्टाइजर के मुताबिक, हालांकि, इस गलती को ईमेल भेजकर सुधारा गया। गवर्नर इगे ने कहा कि आपात प्रबंधन एजेंसी (ईएमए) में शिफ्ट में बदलाव के दौरान यह मानवीय गलती हुई और यही इस झूठे अलर्ट का कारण है।

उन्होंने बताया, “यह एक प्रक्रिया थी जो शिफ्ट में बदलाव के दौरान होती है, जब वे जांचते हैं कि प्रणाली ठीक से काम कर रही है या नहीं और इस बीच एक कर्मचारी ने गलत बटन दबा दिया।”

ईएमए प्रशासक वर्न मियागी ने कहा, “यह गलती थी। तीन लोगों के बीच शिफ्ट में बदलाव हुआ। ऐसा नहीं होना चाहिए था।” राज्य के टेलीविजन और रेडियो प्रसारकों ने आपात संदेश देते हुए लोगों को बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी।

संदेश के मुताबिक, “यदि आप बाहर हैं तो तुरंत किसी इमारत में शरण ले लें। अंदर ही रहें और खिड़कियों से दूर रहें। यदि आप गाड़ी चला रहे हैं तो सावधानी से उसे सड़क किनारे पार्क कर दें और किसी इमारत में शरण ले लें या जमीन पर लेट जाएं। खतरा टलने पर हम इसकी घोषणा कर देंगे। यह ड्रिल नहीं है।”

इस बीच संदेश मिलने के बाद अमेरिका के लोग अपने सगे संबंधियों से इस पल की कहानियां साझा करने लगे। सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो में हवाई विश्वविद्यालय के छात्रों को देखा जा सकता है, जो मिसाइल अलर्ट मिलने के बाद शरण लेने के इधर-उधर भाग रहे हैं। हवाई प्रतिनिधि सभा के सदस्य मैट्ट लोप्रेस्टी ने कहा कि जब उन्हें मोबाइल फोन पर हमले का अलर्ट मिला तो वह घर पर थे।

–आईएएनएस

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कोलंबिया में पुल ढहा, 10 की मौत

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प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्य कोलंबिया में सोमवार को एक निर्माणाधीन पुल ढह गया, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस घटना में दो लोग लापता हैं जबकि चार घायल हो गए हैं।

मेटा विभाग के नागरिक सुरक्षा विभाग के निदेशक जॉर्ज डियाज ने कहा कि पीड़ित मजदूर थे, जो पुल ढहने की वजह से लगभग 280 मीटर की ऊंचाई से गिरे।

घटना के समय लगभग 20 मजदूर काम कर रहे थे। डियाज ने स्थानीय मीडिया को बताया, “10 लोगों की मौत हो गई है। नौ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि एक ने अस्पताल में अंतिम सांस ली।” काराकोल वेबसाइट पर पोस्ट वीडियो में देखा जा सकता है। आधा पुल अभी भी खड़ा है जबकि आधा ढह चुका है।

–आईएएनएस

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भारत के सेना प्रमुख का बयान शांति के लिए नुकसानदेह : चीन

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CHINA-SPOKESMAN

चीन ने रविवार को भारत के सेना प्रमुख बिपिन रावत के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे ‘अरचनात्मक’ बयान सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति को प्रभावित करेंगे।

जनरल रावत ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत को अपना ध्यान पाकिस्तान से सटी अपनी पश्चिमी सीमा से हटाकर चीन से सटी अपनी उत्तरी सीमा पर केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर चीन शक्तिशाली है तो भारत भी कमजोर नहीं है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, “पिछले एक वर्ष के दौरान भारत और चीन के संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।”

लू ने कहा कि बीते सितंबर में भारत-चीन के नेताओं के बीच दोनों पक्षों के मतभेदों को सही तरीके से दूर करने और भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी थी।

लू ने कहा, “हाल में दोनों पक्षों ने परामर्श और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत को आगे बढ़ाया है और सुधार एवं विकास को गति प्रदान की है।”

लू ने आगे कहा, “इस पृष्ठभूमि में भारत के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई अरचनात्मक टिप्पणी राष्ट्र केदो प्रमुखों की सहमति के खिलाफ है और दोनों पक्षों द्वारा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार एवं विकास के लिए किए गए प्रयासों के विरुद्ध है।”

उन्होंने कहा, “यह सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने में सहायता नहीं करेगा।”

–आईएएनएस

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मैं नस्लवादी नहीं हूं : ट्रंप

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donald trump
File Photo

अफ्रीकी देशों को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के बाद आलोचना झेल रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा है कि वह नस्लवादी नहीं हैं। वाशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप के हवाले से बताया, नहीं, मैं एक नस्लवादी नहीं हूं।

मैं आपको यह कह सकता हूं आपने अब तक जिन लोगों का भी साक्षात्कार लिया होगा मैं उन सभी में सबसे कम नस्लवादी हूं। ओवल ऑफिस में पिछले सप्ताह हुए बैठक में मौजूद लोगों के अनुसार, ट्रंप इस बात पर गुस्से में थे कि अल साल्वाडोर, हैती और कुछ अफ्रीकी देशों के प्रवासियों को अमेरिका में अनुमति दी गई थी।

ट्रंप ने कहा, शिटहोल्स देशों से हमारे देश में लोग क्यों आते हैं। बैठक में माजूद सिनेटर टॉम कॉटन और डेविड पर्डयू ने कहा कि उन्हें याद नहीं कि ट्रंप ने इस शब्द का इस्तेमाल किया था। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने शुक्रवार को कहा कि अल सल्वाडोर और हैती के राष्ट्रों के संबंध में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी नस्लवादी है।

संयुक्त राष्ट्र मानवधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविले ने ट्रंप के बयान की निंदा करते हुए कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणियां आश्चर्यजनक और शर्मनाक हैं। मुझे माफ करिएगा लेकिन उन्हें नस्लवादी के अलावा किसी और रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।”

–आईएएनएस

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