राष्ट्रीय

विरोध के बावजूद राजस्थान सरकार ने पेश किया नेताओं-अफसरों को बचाने वाला ऑर्डिनेंस

राजस्थान सरकार
राजस्थान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)

विपक्ष के विरोध के बावजूद राजस्थान सरकार ने सोमवार को आपराधिक कानून अध्यादेश संशोधन बिल को विधानसभा में पेश किया। जिसके बाद विधानसभा को स्थगित कर दिया गया।

आपराधिक कानून संशोधन बिल 2017 आपराधिक संहिता 1973 में बदलाव कर सकता है जिससे मीडिया किसी भी नोकरशाह का नाम तब तक सार्वजिनक नही कर सकता जब तक राजस्थान सरकार जांच की अनुमति न दे। सरकार से अभियोजन मंजूरी मिलने से पहले दागी लोकसेवक का नाम और पहचान उजागर करने पर दो साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
वसुंधरा राजे की सरकार द्वारा लाया जा रहा ये अध्यादेश के बाद सरकार की मंजूरी के बिना किसी कार्यरत और रिटायर्ज जज के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हो पाएगी।

वहीं इस संशोधन ने लोक सेवकों के दायरे को बढ़ा दिया है। अब तक सिर्फ गजटेड ऑफिसर को ही लोक सेवक माना गया था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि राज्य की जनता ने बीजेपी को मनमानी करने के लिए प्रचंड बहुमत नहीं दिया है। यह बिल भ्रष्टों को बचाने के लिए लाया जा रहा है।

उन्होने ये भी कहा कि हम शांतिपूर्ण मार्च कर रहे हैं फिर भी पुलिस हमें हिरासत में ले रही है लेकिन हम ये विरोध जारी रखेंगे।
इस बिल के खिलाफ हाइकोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि सरकार कानून बनाकर करप्शन करने वालों को बचाने की कोशिश कर रही है। राजस्थान हाइकोर्ट के सीनियर एडवोकेट ऐके जैन ने सोशल वर्कर भगवत कॉर की तरफ से ये पिटीशन दायर की।

WeForNews Bureau

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top