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राहुल का पीएम से सवाल- खेती पर गब्बर सिंह की मार, किसानों से क्यों इतना सौतेला व्यवहार?

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राहुल गांधी (फाइल फोटो)

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए अपना नौंवा सवाल किया है। राहुल ने किसानों का जिक्र करते हुए लिखा कि पीएम ने उनके साथ सौतेला व्यवहार किया है।

राहुल ने लिखा कि न की कर्ज माफी, न दिया फसल का सही दाम, मिली नहीं फसल बीमा राशि, न हुआ ट्यूबवेल का इंतजाम, खेती पर गब्बर सिंह की मार, छीनी जमीन, अन्नदाता को किया बेकार, पीएम साहब बतायें, खेडुत (किसानों) के साथ क्यों इतना सौतेला व्यवहार?

बता दें कि इससे पहले बुधवार (6 दिसंबर) को राहुल ने गुजरात में खराब स्वास्थय सेवाओं के होने का दावा करते हुए आठवां सवाल किया था। राहुल ने लिखा था कि 39% बच्चे कुपोषण से बेजार, हर 1000 में 33 नवजात मौत के शिकार, चिकित्सा के बढ़ते हुए भाव, डाक्टरों का घोर अभाव, भुज में ‘मित्र’ को 99 साल के लिए दिया सरकारी अस्पताल, क्या यही है आपके स्वास्थ्य प्रबंध का कमाल?

बता दें कि राहुल गांधी रोज पीएम पर हमला बोलते हुए एक नया सवाल दाग रहे हैं। इससे पहले किए गए ट्वीट में बढ़ती महंगाई पर तंज कसा गया था। उसमें राहुल ने लिखा था कि जुमलों की बेवफाई मार गई, नोटबंदी की लुटाई मार गई, GST सारी कमाई मार गई, बाकी कुछ बचा तो- महंगाई मार गई, बढ़ते दामों से जीना दुश्वार, बस अमीरों की होगी भाजपा सरकार?

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अलवर मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

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फाइल फोटो

देश के कई हिस्सों से सामने आए लिंचिंग के मामलों ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों द्वारा की गई रकबर खान की हत्या का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें अलवर मामले को लेकर राजस्थान सरकार के खिलाफ अवमानना याचिकाओं पर 20 अगस्त को सुनवाई करेगा। तहसीन पूनावाला और तुषार गांधी ने अवमानना याचिकाओं में आरोप लगाया है कि गोरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अपराध हो रहे हैं।

आपको बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने लिंचिंग को लेकर कई दिशा निर्देश जारी किए थे, केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देशों का पालन करने को कहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी देश में इस प्रकार की घटनाएं नहीं रुकीं।

क्या है अलवर मामला?

आपको बता दें कि राजस्थान के अलवर जिले में मॉब लिंचिंग में रकबर खान की मौत के मामले में राज्य पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की जगह बरामद गायों को पहले गौशाला पहुंचाने को तरजीह दी। यही नहीं, पुलिस ने खुद भी रकबर की पिटाई की। इसकी वजह से रकबर को अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे की देरी हुई और उसकी मौत हो गई।

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मानसून सत्र: संसद में कार्यवाही जारी

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प्रतीकात्मक फोटो

संसद का मॉनसून सत्र आज फिर शुरू हुआ है। इस दौरान सदन में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर हंगामे के आसार हैं। इस मुद्दे को विपक्ष जोर-शोर से उठा सकता है। इसके अलावा विपक्ष किसान, दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक की घटनाओं पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगा।

मोदी सरकार के खिलाफ शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। जिसे मोदी सरकार ने आसानी से पार कर लिया था। केंद्र सरकार इस सत्र में तीन तलाक रोकथाम कानून, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा, दुष्कर्म के दोषियों को सख्त दंड के प्रावधान समेत कई अहम बिलों को पास कराने की कोशिश में है।

अपडेट-

  • टीडीपी सांसद जयदेव गल्ला ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हमने सरकार के सामने जो सवाल उठाए, पीएम मोदी ने उसपर कोई जवाब नहीं दिया। इसलिए हमारे रूख में फिलहाल कोई बदलाव नहीं आया है।

  • टीडीपी सांसद नरमल्ली शिव प्रसाद फिर एक नए रूप में नजर आए। उन्होंने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए अन्नमैया (भगवान बाला जी की भक्त) का रूप धारण किया। इससे पहले भी वे कई अलग-अलग रूपों में नजर आए हैं।

  • केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े एक बयान को लेकर राज्यसभा में काफी हंगामा हुआ जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित हो गई।

  • पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने बेरोजगारी के मुद्दे पर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।

  • आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर टीडीपी सांसदों ने आज फिर संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

  • उधर टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून पर चर्चा के लिए नोटिस दिया।

  • सीपीआई नेता डी राजा ने भी मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चर्चा के लिए कार्यस्थगन का नोटिस दिया है।
  • बीजेपी सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे ने राज्यसभा में कार्यस्थगन (सस्पेंशन ऑफ बिजनेस) का नोटिस दिया है ताकि देश के कई हिस्सों में बाढ़ के खतरे पर सदन में चर्चा की सके।

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जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की रोक हटी

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फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने पर लगी पाबंदी हटा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने जंतर-मंतर और इंडिया गेट के पास बोट क्लब पर प्रदर्शन की अनुमति देने के संबंध में केन्द्र को दिशा-निर्देश तय करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने मजदूर किसान शक्ति संगठन और अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। याचिकाओं के जरिए सेंट्रल दिल्ली में शांतपूर्ण ढंग से प्रदर्शन को इजाजत दिए जाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि दलील थी कि प्रदर्शनों पर रोक से लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

साल 2017 में नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूलन यानी एनजीटी के आदेश के बाद जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन नहीं हो रहे। 10 अक्टूबर से पुलिस ने यहां प्रदर्शनों को बंद करा दिया था।

जनवरी के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर एमसीडी, दिल्ली पुलिस और एनडीएमसी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा था कि उन्हें जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन से रोक दिया गया है और यह उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने इस मामले में नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को चुनौती दी थी। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों और सभाओं के आयोजन पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया था। एनजीटी ने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन रामलीला मैदान में हो सकते हैं।

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