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पासपोर्ट का रंग बदलने को राहुल ने बताया भेदभाव वाला कदम

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राहुल गांधी (फाइल फोटो)

इसीआर (इमिग्रेशन चेक रिक्‍वायर्ड) स्‍टेटस वाले पासपोर्ट धारकों के लिए नारंगी रंग के पासपोर्ट जैकेट वाले पासपोर्ट जारी होने की घोषणा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने इसे केंद्र सरकार का भेदभाव भरा कदम बताया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब अभी तक पासपोर्ट का रंग नीला ही रहा है तो इस बदलने की क्या जरूरत है। राहुल ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, ‘काम की तलाश में विदेश जाने वाले भारतीय लोगों के साथ दोयम दर्जे वाला व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे बीजेपी के भेदभाव से भरे सोच का पता चलता है।’

बता दें है कि विदेश मंत्रालय ने बीते दिनों ही इसकी घोषणा की थी। नए पासपोर्स में आखिरी पन्ने को भी हटा दिया गया है जिसमें पासपोर्ट धारक की सभी जानकारियों रहती थी। हालांकि पहले जारी किए गए नीले रंग के पासपोर्ट भी वैध रहेंगे।

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सिब्‍बल ने शाह से पूछा- कैसी है वो सरकार जहां महिलाओं का गैंगरेप और किसान कर रहे हों खुदकुशी

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कपिल सिब्‍बल, पूर्व केंद्रीय मंत्री (फाइल फोटो)

वरिष्‍ठ नेता कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्‍बल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्‍यक्ष अमित शाह से पूछा कि बतायें वो सरकार कैसी हो सकती है जहां महिलाओं का गैंग हो रहा हो, कर्ज में डूबे किसान आत्‍महत्‍या करने पर मजबूर हों।

सिब्‍बल ने पूछा कि अमित जी बतायें कि उस सरकार के बारे में क्‍या कहा जा सकता है जहां भारतीय सेना के जवान औरंगजेब को घर से अगवा करके मार दिया जाये, दलितों पर जुल्‍म ढाये जा रहे हों, फर्जी इनकाउंटर रोज हो रहे हों।

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योगी के मंत्री ने गठबंधन छोड़ने के दिये संकेत, कहा- ‘बड़ा तूफान आएगा’

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ओपी राजभर, कैबिनेट मंत्री, योगी सरकार (फाइल फोटो: एएनआई)

उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्‍यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने एनडीए से रिश्‍ता तोड़ने वाली बात कही। उन्‍होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि गर्मी बहुत बढ़ गई है, आने वाले दिनों में बड़ा तूफान आएगा।

वाराणसी में संवाददाताओं के साथ बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि मैं ऐसी हरकत करता हूं कि बीजेपी मुझे निकाल देगी लेकिन बीजेपी जब तक निकाल नहीं देती, तब तक उसके साथ हूं।

इससे पहले शनिवार को ओमप्रकाश राजभर अपने पुश्‍तैनी गांव में सड़क बनाते दिखे थे। कुछ लोगों ने इसकी तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दीं। बताया जा रहा है कि सड़क बनाने के लिए 6 महीने पहले प्रस्ताव भेजने के बाद भी अब तक कोई काम नहीं होने पर कैबिनेट मंत्री फावड़ा उठाने के लिए मजबूर हुए।

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महबूबा का शाह पर पलटवार, बोलीं- 3 साल तक चुप क्यों रही बीजेपी

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फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी पर पलटवार किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पुराने सहयोगी गलत आरोप लगा रहे हैं। हमारी सरकार ने जम्मू और लद्दाख से कभी भेदभाव नहीं किया है। ऐसे आरोपों की वास्तविकता का कोई आधार नहीं है।

मुफ्ती ने कहा है कि कश्मीर में इस गठबंधन का एजेंडा राममाधव ने तैयार किया था, राजनाथ सिंह जैसे नेताओं ने इसे मंजूरी दी थी। उन्होंने लिखा, “नतीजे सभी के सामने हैं। यदि कुछ भी है तो उन्हें (भाजपा) को अपने मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए, जम्मू के क्षेत्र का काफी हद तक प्रतिनिधित्व किया, अगर ऐसी कोई बात थीं, तो पिछले 3 वर्षों के दौरान इसके बारे में कोई भी राज्य या केंद्रीय स्तर की बात क्यों नहीं की।”

हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि घाटी में लंबे वक्त से उथल-पुथल रहा है और 2014 की बाढ़ एक बड़ा झटका था, इस ओर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता थी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कम विकास हुआ। हमने हमेशा गठबंधन के एजेंडे पर काम किया है।

महबूबा ने कहा कि बीजेपी ने हम पर कई झूठे आरोप लगाए हैं। धारा 370 पर स्थति और पत्थरबाजों के खिलाफ केस वापस करने की बात पहले से तय थी।

बता दें है कि शनिवार को जम्मू पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सहयोगी रही पार्टी पीडीपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उसके विश्वासघात के कारण गठबंधन टूटा। उन्होंने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस पर भी तीखा कटाक्ष करते हुए 2019 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का रोड मैप सामने रखा।

परेड में आयोजित रैली में शाह ने कहा था कि वह जम्मू की जनता को बताने आए हैं कि पीडीपी से भाजपा का गठबंधन टूटने के तीन प्रमुख कारण रहे हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर का संतुलित विकास किया जाना था। कश्मीर की तरह जम्मू और लद्दाख का विकास होना था, लेकिन यह नहीं हुआ।

कश्मीर में शांति बनाए रखने के प्रयास और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने के बजाय कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। सेना के जवान की हत्या कर दी गई। पत्रकार की हत्या हो गई। ऐसे में गठबंधन तोड़कर सरकार से बाहर निकलने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। भाजपा को वोट जम्मू संभाग से मिले हैं।

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