Connect with us

स्वास्थ्य

शुरुआती निदान से कैंसर को रोकें

Published

on

कैंसर
फाइल फोटो

सबसे पहले शरीर के किसी अंग में होने वाला कैंसर प्राइमरी ट्यूमर कहलाता है। इसके बाद शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाला ट्यूमर मैटास्टेटिक या सेकेंडरी कैंसर कहलाता है। मैटास्टेटिक कैंसर की कोशिकाएं भी प्राइमरी कैंसर के जैसी ही होती हैं। मैटास्टेटिक कैंसर शब्द का इस्तेमाल सोलिड यानी ठोस ट्यूमर के लिए किया जाता है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया हो।

कैंसर की मुख्य रूप से चार अवस्थाएं होती हैं। पहली और दूसरी अवस्था में कैंसर का ट्यूमर छोटा होता है और आस-पास के टिश्यूज की गहराई में नहीं फैलता।

तीसरी अवस्था में कैंसर विकसित हो चुका होता है। ट्यूमर बड़ा हो चुका होता है और इसके अन्य अंगों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है। चौथी अवस्था कैंसर की आखिरी या सबसे विकसित अवस्था होती है। इसमें कैंसर अपने शुरुआती हिस्से से अन्य अंगों में फैल जाता है। इसे विकसित या मैटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है।

कैंसर के फैलने के तीन तरीके हैं। डायरेक्ट एक्सटेंशन या इंवेजन, जिसमें प्राइमरी ट्यूमर आस-पास के अंगों और टिश्यूज में फैल जाता है। उदाहरण के लिए प्रोस्टेट कैंसर ब्लैडर तक पहुंच जाता है।

लिम्फेटिक सिस्टम में कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट जाती हैं और इसके जरिए शरीर के दूसरे अंगों तक चली जाती हैं। लिम्फेटिक सिस्टम टिश्यूज और अंगों का ऐसा समूह है जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए कोशिकाएं बनाता और इन्हें स्टोर करके रखता है।

कैंसर खून से भी फैलता है। इसे हीमेटोजिनस स्प्रैड कहा जाता है, इसमें कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट कर खून में आ जाती हैं और खून की धारा के साथ शरीर के अन्य हिस्सों तक चली जाती हैं। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर खून या लिम्फेटिक सिस्टम में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं पर हमला करती है और इन्हें नष्ट कर देती हैं। लेकिन कभी-कभी कैंसर की कोशिकाएं जीवित रह कर शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच जाती हैं और नया ट्यूमर बन लेती हैं।

जब कैंसर फैल रहा होता है, उस समय इस बात की पूरी संभावना होती है कि यह शरीर के अन्य अंगों पर असर डाले। रोग के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर कौन से हिस्से में हुआ है। कैंसर के आम लक्षण हैं वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या खून आना। यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि अगर किसी भी व्यक्ति को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हो सकता है कि यह कैंसर न हो लेकिन रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होता है।

भारत में कैंसर के 60 फीसदी मामले तीन प्रकार के होते हैं- मुंह, स्तन एवं गर्भाशय का कैंसर। हालांकि इनका निदान आसान है, लेकिन पूरा इलाज सिर्फ शुरुआती अवस्था में ही संभव है। अक्सर मरीज जब डॉक्टर के पास पहुंचता है तब बहुत देर हो चुकी होती है और कैंसर अडवान्स्ड अवस्था में पहुंच चुका होता है।

नियमित जांच के द्वारा समय पर निदान किया जा सकता है। व्यक्ति को अपने शरीर के अंगों एवं कार्यो के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। अगर शरीर के अंगों या कार्यो में कोई भी बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और आवश्यकतानुसार जांच करवानी चाहिए।

भीतरी अंगों के कैंसर का निदान अक्सर देर से होता है जैसे फेफड़े, ईसोफेगस, पैनक्रियाज, लिवर, ओवरी का कैंसर शरीर में धीरे धीरे बढ़ता है। ऐसे मामलों में आवश्यकतानुसार जांच की जाती है।

भारत में आजकल पश्चिमी देशों की तरह कैंसर के इलाज के सभी आधुनिक तरीके उपलब्ध हैं जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, हॉर्मोनल थेरेपी और टारगेट थेरेपी। मरीज के जीवित रहने की संभावना कैंसर के ग्रेड, नंबर और मैटस्टेसिस की साइट पर निर्भर करती है। हालांकि मरीज की सकारात्मक सोच भी उसे ठीक होने में मदद करती है।

अगर कैंसर का निदान समय पर हो जाए तो यह जानलेवा नहीं है अैर इसका इलाज किया जा सकता है। कैंसर का इलाज मरीज पर अच्छी तरह काम करता है अगर मरीज खुश रहे, उम्मीद बनाए रखे, उसे परिवार एवं दोस्तों का प्यार और सहयोग मिले।

भारत में कैंसर के आम प्रकार हैं- मुंह, स्तन, सर्वाइकल, फेफड़ों और प्रोस्टेट का कैंसर। शरीर के किसी भी अंग या इसके कार्यो में बदलाव दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अपनी जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा हर व्यक्ति को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए, घर का बना सेहतमंद आहार लें और रोजाना हल्का व्यायाम करें। भारत में मुंह के कैंसर के कारण सबसे ज्यादा मौतें होती हैं, इसका मुख्य कारण धूम्रपान और तंबाकू है। इसलिए तंबाकू का सेवन और धूम्रपान न करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

(डॉ. पवन गुप्ता जेपी हॉस्पिटल, नोएडा में सर्जिकल ओंकोलॉजी के एडिशनल डायरेक्टर हैं)

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

75 फीसदी मधुमेह रोगियों को होती रेटिनोपैथी : शोध

Published

on

भारत में डायबिटीज मेलिटस काफी व्यापक है और इसके रोगियों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। डायबिटीज यानी मधुमेह के कारण डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) हो सकता है, जो रेटिना का तेजी से फैलने वाला रोग है, जिससे दृष्टिहीनता भी हो सकती है।

मधुमेह से पीड़ित लोगों में अन्य लोगों की तुलना में दृष्टिहीन होने का जोखिम 25 प्रतिशत अधिक होता है। यह तथ्य एक शोध में सामने आया है। डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) में रेटिना में तरल संचित हो जाता है। ऐसा रिसती रक्त वाहिकाओं के कारण होता है। यदि किसी व्यक्ति में डायबेटिक रेटिनोपैथी (डीआर) पाई जाती है तो उसे डीएमई हो सकता है। डीएमई डीआर का सबसे आम रूप है।

मधुमेह से पीड़ित प्रत्येक रोगी को डीआर होने का जोखिम रहता है। डीएमई के लक्षणों में धुंधला या अस्पष्ट दिखना, सीधी लाइनों का लहरदार दिखना, कॉन्ट्रैस्ट कम होना या रंग समझने की क्षमता जाना, एक दूरी से देखने में कठिनाई, दृष्टि के केंद्र में छोटा, लेकिन बढ़ता हुआ धब्बा शामिल है।

दिल्ली आई केयर में ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट एवं आई सर्जन डॉ. शशांक राय गुप्ता ने बताया, “मेरे क्लीनिक में आखों की जांच के लिए आने वाले 75 प्रतिशत मधुमेह रोगियों में डायबेटिक रेटिनोपैथी की कोई न कोई अवस्था पाई जाती है। मधुमेह और डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें प्रारंभिक अवस्था में रोगियों की पहचान करने के लिये मजबूत ²ष्टिकोण की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि मधुमेह रोगियों को अपनी आंखों के प्रति सजग रहना चाहिए और नियमित अंतराल पर आंखों की जांच करवानी चाहिए, ताकि नेत्र रोग का पता चल सके, खासकर रेटिना के रोग।

दिल्ली आई केयर में आई सर्जन डॉ. शशांक राय गुप्ता ने कहा, “मधुमेह के रोगियों को अपने आंखों के स्वास्थ्य से बेहद सतर्क रहना चाहिए। विशेष रूप से रेटिना के उन लोगों को अक्सर उनकी ²ष्टि जांचनी चाहिए। मधुमेह मैकुलर एडीमा (डीएमई) का बोझ बढ़ रहा है और हमें शुरुआती चरण में रोगियों की पहचान करने के लिए एक मजबूत ²ष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।”

मधुमेह की रोकथाम के उपाय :

-मधुमेह से पीड़ित रोगियों को प्रत्येक 6 माह में ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए और तय अपॉइंटमेंट से चूकना नहीं चाहिए।

-रोगियों को डीएमई के लक्षणों के प्रति सचेत रहना चाहिए, जैसे धुंधला या अस्पष्ट दिखाई देना, सीधी लाइनें लहरदार दिखाई देना, रंगों के प्रति असंवेदनशीलता, केंद्रीय दृष्टि में धब्बे, आदि और ²ष्टि में परिवर्तन होने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

–आईएएनएस

Continue Reading

स्वास्थ्य

बच्चों में बढ़ रहा है डायबिटीज खतरा…

Published

on

Diabetes-
File Photo

बच्चों में बढ़ता मोटापा आज चिंता का विषय बन चुका गया है। जो कई बीमारियों का कारण बनता जा रहा है।

कई कारणों से बच्चे आज मोटापे का शिकार बन रहे हैं जैसे लगातार टीवी देखना, इंटरनेट, गेमिंग डिवाइसेज पर समय बिताना, खेलकूद की कमी, जंक फूड का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली।  मोटापे का एक घातक परिणाम डायबिटीज के रूप में सामने आता है और डायबिटीज का बुरा असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है।

पिछले साल किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दिल्ली में लगभग 35 फीसदी किशोरों का वजन सामान्य से अधिक है या वे मोटापे से ग्रस्त हैं।आजकल बच्चे खेल-कूद के बजाए इन्डोर गतिविधियों में ज्यादा समय बिताते हैं। ऐसे में मोटापे का शिकार हो जाते हैं और इसका एक घातक परिणाम डायबिटीज के रूप में सामने आता है और डायबिटीज का बुरा असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है।”

डायबिटीज नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है और ज्यादातर लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। नियोनेटल डायबिटीज बच्चों में छह माह की उम्र से पहले भी हो सकता है।”एक अनुमान के अनुसार अकेले दिल्ली में 32 लाख बच्चे डायबिटीज से पीड़ित हैं।

ज्यादातर मामलों में ये बच्चे मोटापे का शिकार होते हैं या इनका वजन सामान्य से अधिक होता है। अध्ययन के अनुसार, बच्चों में मोटापा टाईप 2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। लेकिन समय पर निदान के द्वारा रोग के लक्षणों को नियन्त्रण में रखा जा सकता है और प्री डायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से रोका जा सकता है।

डायबिटीज का मुख्य कारण असेहतमंद जीवनशैली है और अच्छी आदतों द्वारा इस पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। सबसे पहले अपने वजन पर नियन्त्रण रखें। ब्लड शुगर को नियन्त्रण में रखने के लिए बीएमआई सही होना बहुत जरूरी है। इसके लिए काबोर्हाइड्रेट का सेवन सीमित मात्रा में करें।

फाईबर और प्रोटीन से युक्त आहार लें। हरी सब्जियों, फलों, फलियों और साबुत अनाज का सेवन करें।”अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है तो आपको नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए। अपने ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लीसराईड पर नियन्त्रण रखें। डायबिटीज दिल की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल को नियन्त्रित रखना बहुत जरूरी है।

WeForNews

Continue Reading

स्वास्थ्य

रोजाना 3-4 कप कॉफी मधुमेह में मददगार

Published

on

coffee
File Photo

रोजाना तीन-चार कप काफी पीने से मधुमेह टाइप-2 का खतरा 25 फीसदी कम हो सकता है। यह सुझाव एक शोध के नतीजों के आधार पर दिया गया है।

मधुमेह टाइप-2 के मामलों में काफी पीने का असर पुरुष और महिला दोनों में पाया गया है। शोध में कैफीन रहित काफी पीने से भी उसी प्रकार का प्रतिरक्षी प्रभाव पाया गया।स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर मैट्टियस काल्स्ट्रोम ने कहा कि महज कैफीन नहीं, बल्कि हाइड्रॉक्सीसिनेमिक एसिड्स के कारण यह असर होता है। ‘

हाइड्रॉक्सीसिनेमिक एसिड्स में मुख्य रूप से क्लोरोजेनिक एसिड, ट्राजोनेलिन, कैफेस्टॉल, कॉवियोल और कैफिक एसिड होते हैं।शोध के नतीजे यूरोपीय एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ डायबिटीज के 2018 में जर्मनी में आयोजित सालाना सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए। शोधार्थी दल ने कुल 111,85,210 प्रतिभागियों को शामिल किया और 30 संभावित अध्ययनों की समीक्षा की।

–आईएएनएस

Continue Reading
Advertisement
Faf du Plessis
खेल2 hours ago

टी-20 विश्व कप-2020 के बाद डु प्लेसिस लेंगे संन्यास

CBI
राष्ट्रीय2 hours ago

आंध्र में बिना इजाजत सीबीआई के प्रवेश पर पाबंदी

sabrimala
राष्ट्रीय3 hours ago

खुले सबरीमाला के पट, बिना दर्शन वापस लौटीं तृप्‍ती देसाई

bjp
चुनाव4 hours ago

राजस्थान में बीजेपी के 162 घोषित उम्मीदवारों में मुस्लिम चेहरा नदारद

rahul gandhi
राजनीति4 hours ago

डीयू पर आरएसएस का ‘फर्जिकल स्ट्राइक’ जारी है: राहुल

Dancer Snatcher
शहर4 hours ago

तीन प्रेमिकाओं का शौक पूरा करने के लिए डांसर से बना झपटमार

राजनीति5 hours ago

ममता का ऐलान- हर राज्‍य के विस चुनाव में TMC उतारेगी अपने प्रत्‍याशी

sensex-min
व्यापार5 hours ago

सेंसेक्स में 197 अंकों की तेजी

accident
शहर5 hours ago

जम्मू-कश्मीर: सड़क दुर्घटना में 7 पुलिसकर्मी घायल

akhilesh yadav
राजनीति5 hours ago

अखिलेश का बीजेपी पर वार- ‘धार्मिक नक्सलियों से देश को ज्यादा खतरा’

jeans
लाइफस्टाइल4 weeks ago

जानिए जीन्स का इतिहास, इसमें छुपे एक-एक राज…

Sleep
लाइफस्टाइल3 weeks ago

सुबह बिस्तर से उठने का मन नहीं करता, तो हो सकती है ये बीमारी

Whatsapp-
टेक1 week ago

वॉट्सऐप में जुड़ा नया फीचर, कर सकेंगे प्राइवेट रिप्लाई

Manoj Nath Myar Madhuli Wana
मनोरंजन6 days ago

लेटेस्ट कुमाऊनी गीत ‘म्यर मधुली वाना’ रिलीज

yoga1
अंतरराष्ट्रीय3 weeks ago

‘चीन में किशोरावस्था से लोग करते हैं योग’

लाइफस्टाइल4 weeks ago

करवा चौथ के दिन ऐसे निखारें अपनी त्वचा…

zeera-
लाइफस्टाइल4 weeks ago

जीरे का पानी पीने से तेजी से कम होता है वजन…

oily-skin--
लाइफस्टाइल4 weeks ago

वायु प्रदूषण पहुंचा रहा त्वचा को नुकसान

JIO
टेक3 weeks ago

Jio नेटवर्क पर बैन हुई पोर्न वेबसाइट्स

RAKESH ASTHANA Alok Verma
ब्लॉग3 weeks ago

सीबीआई के अच्छे दिनों के लिए तो अभी दिल्ली बहुत दूर है!

kailash new
मनोरंजन2 days ago

कैलाश सत्यार्थी पर बनी डॉक्यूमेंट्री का ट्रेलर जारी

SHIVRAJ
राजनीति3 days ago

वोट मांगने गई शिवराज की पत्नी को महिला ने सुनाई खरी खोटी…देखें वीडियो

kedatnath-
मनोरंजन4 days ago

सुशांत की फिल्म ‘केदारनाथ’ का ट्रेलर रिलीज

Manoj Nath Myar Madhuli Wana
मनोरंजन6 days ago

लेटेस्ट कुमाऊनी गीत ‘म्यर मधुली वाना’ रिलीज

शहर2 weeks ago

गुजरात के गांधीनगर सचिवालय में तेंदुआ घुसने से मचा हड़कंप

राजनीति2 weeks ago

दो से ज्यादा बच्चे पैदा करे उसे न हो मतदान का अधिकार: रामदेव

Rajniknat-
मनोरंजन2 weeks ago

अक्षय और रजनीकांत की फिल्म ‘2.0’ का ट्रेलर रिलीज

Patna
शहर2 weeks ago

पटना में महिला पुलिसकर्मी की मौत पर फूटा गुस्सा

kapil sibal
राजनीति2 weeks ago

कोर्ट फैसला करेगा कि अयोध्‍या केस की सुनवाई कब हो: सिब्‍बल

शहर2 weeks ago

लंदन में दिवाली से पहले यूं जश्न मनाती दिखीं महिलाएं

Most Popular