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इन बीमारियों को दूर करता है आलू का रस

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आलू एक ऐसी सब्जी है जो हर भारतीय किचन में आसानी मिलती है। लेकिन बहुत कम लोग इसके जूस से होने वाले फायदों के बारे में जानते होंगे।

आलू का रस कई सारी खतरनाक बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। आलू का रस जोड़ो के दर्द को दूर करने में बेहद फायदेमंद होता हैं। साथ ही इसका सेवन से ट्यूमर, कैंसर, कब्ज, सिरदर्द जैसी समस्या से भी निजात मिलती हैं।

आइए जानते हैं किन बीमारियों को दूर करने में मददगार है आलू का रस।

आलू का रस पीने से किडनी से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं। ये गाल ब्लैडर की गंदगी और लिवर की गंदगी को शरीर से बाहर निकाल फेंकता है।

आलू का रस हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए आलू का जूस पीना लाभकारी होता है। अगर आपको अपना वजन कम करना हैं तो उसके लिए सुबह नाश्ते से 2 घंटे पहले आलू का रस पी लें। इससे आपका वजन तेजी से कम होगा।

आलू का रस पीने के बाद आपको भूख सीमित मात्रा में लगेगी। जिससे आपकी बार-बार खाना खाने की आदत छूट जाएगी। इससे आपका वजन भी कम रहेगा। आलू का रस कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल रखने में भी मदद करता हैं। साथ ही आलू का रस पीने से गठिया का रोग दूर हो जाता है।

बता दें आलू के जूस यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकलता है तथा गठिया की सूजन को कम कर देता। इतना ही नहीं आलू के रस का सेवन करने से पेट से जुड़ी बीमारियां भी दूर हो जाती है।

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इन बीमारी के मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोना वायरस…

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कोरोना का कहर पुरी दुनिया में जारी हैं। वहीं, एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना वायरस से डाईबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को ज्यादा खतरा होता है।

‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें कोरोना से थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। क्योंकि इस बीमारी में जो मरीज को ड्रग दिया जाता है उसे ACE (एंजियोटेंसिन कन्वर्टिंग एंजाइम) कहते है।

इसका असर इंसान की की कोशिकाओं पर पड़ता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ड्रग से कोशिकाओं में बदलाव आने के बाद कोरोना वायरस के लिए हमला करना आसान हो जाता है। पूरी दुनिया में हर साल करोड़ों लोग डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए इन दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं।

अब जो डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज है उनके मन में यह सवाल जरूर आएगा की वो इस ड्रग का सेवन बंद करे या नहीं। लेकिन इस विशेषज्ञों की मानें तो उनका कहना है की बिना डॉक्टर्स की सलाह के दवाइयां बंद ना करें।

भारत में भी जिन लोगों की मौत इस जानलेवा वायरस के चलते हुई है उनकी उम्र काफी ज्यादा थी। साथ ही, दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ने वाली महिला को तो डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का मरीज भी बताया जा रहा है। इसलिए ऐसे मरीजों को थोड़ा सवाधनी बरतनें की जरूरत हैं।

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‘कोरोना पर हर वक्त सोचने से पड़ सकते हैं बीमार’

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नई दिल्ली, चीन से विश्व भर में फैले तथा दुनिया में महामारी घोषित हुए कोविड-19 यानी कोरोना वायरस को मात देने के लिए सरकार और समाज के द्वारा अनेकों प्रयास जारी है। ऐसे में अपने दिलो-दिमाग पर कोरोना के भय को कतई प्रभावी ना होने दें।

हर वक्त कोरोना के बारे में सोचने से आप बेवजह मानसिक तनाव में आ सकते हैं। राज्य नोडल अधिकारी (मानसिक स्वास्थ्य) डॉ. सुनील पाण्डेय ने बताया कि हम जिस विषय में भी बहुत देर तक सोचते व मनन करते हैं वह हम पर हावी हो जाता है। ऐसे में उसका नफा-नुकसान नजर आने लगता है, जो कि किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की स्थिति में सभी चीजें ठहर सी गई हैं। इसके लिए जरूरी है कि अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं और यदि आवश्यक सेवाओं से नहीं जुड़ें हैं, तो घर से बाहर निकलने से परहेज करें।

टीवी, अखबार और सोशल मीडिया में सिर्फ कोरोना के बारे में देखने-समझने और अपनो से सिर्फ उसी बारे में बात करने से बचें। ऐसा करने से आप मानसिक तनाव में आकर अपने साथ ही घर के अन्य सदस्यों को बीमार बना सकते हैं।

उन्होंने इससे ध्यान हटाने के लिए टीवी सीरियल देखने, पुस्तकें पढ़ने आदि की सलाह देते हुए कहा, “खाना बनाने का शौक है तो किचेन में कुछ वक्त बिताएं, यदि आपको घर पर ही रहना है तो अपने शौक को जिंदा रखें। अगर खाना बनाने का शौक है तो अपने हाथों से कुछ नई डिश बनाएं और अपनों के साथ शेयर करें। “

–आईएएनएस

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कॉलोनियों के मंदिरों से दूर नहीं हो पा रहे श्रद्धालु

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नई दिल्ली, 26 मार्च | देश भर के तमाम बड़े मंदिरों को कोरोनावायरस के खतरे के मद्देनजर बंद किया जा चुका है। लेकिन कई छोटे मंदिर अभी भी खुले हुए हैं। खासतौर पर अलग-अलग कॉलोनियों व मोहल्लों में बनाए गए मंदिरों में लोग अभी भी पहुंच रहे हैं। चांदनी चौक के एक ऐसे ही मंदिर के पुजारी शिव प्रसाद त्रिपाठी ने कहा, “हमारा मंदिर काफी छोटा है। यहां दिन भर में 30-40 लोग ही पूजा करने आते हैं, वह भी अलग-अलग समय पर। इसके अलावा हमने स्वयं से किसी भी व्यक्ति को मंदिर आने या न आने के लिए नहीं कहा है।”

त्रिपाठी ने कहा कि वह दिन में तीन बार मंदिर के मुख्य द्वार और भगवानों की मूर्ति को साफ करते हैं, लेकिन नवरात्र होने के कारण मंदिर के दरवाजे बंद नहीं कर सके।

उन्होंने कहा कि अब वह मंदिर के द्वार बंद रखेंगे, ताकि लोगों में इस बीमारी का संक्रमण न फैल सके।

चांदनी चौक स्थित नई सड़क इलाके के मंदिर दर्शन के लिए पहुंची शिवानी शर्मा ने कहा, “हम लोग अपने स्थानीय मंदिर में ही जा रहे हैं। नवरात्र पूजा के लिए हम किसी बड़े या भीड़भाड़ वाले इलाके अथवा मंदिर में नहीं गए। हमारे स्थानीय मंदिर में भी हम लोग तब जा रहे हैं जब वहां अधिक लोग मौजूद नहीं हैं।”

इस प्रकार की लापरवाही लगातार कई स्थानों पर सामने आई है, जहां लोग सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचने के बाद अपने-अपने तर्क देते नजर आए। हैरानी की बात तो यह है कि यहां कई लोग ऐसे मंदिरों के बाहर भी पहुंचे, जिनके दरवाजों पर ताला लगा हुआ है।

चांदनी चौक स्थित मोर सराय में रहने वाली वाली मीना देवी अपने बच्चों के साथ एक ऐसे ही मंदिर के बाहर पूजा करने गईं। उन्होंने कहा, “हम बरसों से नवरात्र में मंदिर के लिए भोग और भेंट निकालते हैं और इस बार भी हमने ऐसा ही किया है। मंदिर बंद था इसीलिए मंदिर के बाहर से ही हमने आरती की और भोग एवं भेट अर्पित किया।”

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