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ओपिनियन

मोदी राज की सबसे ग़ैर-मामूली घटना है ‘रेपिस्ट समर्थक मंत्री बनो’ योजना…!

अभी तो संघ प्रमुख मोहन भागवत की ओर से तो ये यक्ष-प्रश्न उछाला ही नहीं गया है कि काँग्रेस के ज़माने में कितने बलात्कार और हत्याएँ होती थीं! राहुल गाँधी पहले अपनी चार पीढ़ियों के राज में हुए रेप का ब्यौरा दें, फिर उनके कैंडल-मार्च को गम्भीरता से लेने पर विचार किया जा सकता है!

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Deputy CM Kavinder Gupta

‘कठुआ रेप एंड मर्डर मामूली घटना है!’ और ‘इतने बड़े देश में कठुआ और उन्नाव जैसी घटनाएँ होती रहती हैं! इसे लेकर बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए!’ ये दोनों बयान बीजेपी के दो वरिष्ठ नेताओं के हैं। ‘मामूली घटना’ बताने वाले कविन्द्र गुप्ता को जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री का ताज मिला है तो ‘बतंगड़’ सिद्धान्त के प्रतिपादक और परम विद्वान सन्तोष गंगवार, मोदी सरकार में राज्यमंत्री के आसान पर शोभायमान हैं!

यदि इतना पढ़कर आप क्रोधित हो रहे हों, जो ज़रा ये भी जान लीजिए कि इन दोनों और लाखों भक्तों के गुरु घंटाल श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी उर्फ़ प्रधानमंत्री सेवक उर्फ़ माननीय चौकीदार महाशय उर्फ़ ज़नाब नसीबवाला साहब का तो मानना है कि ‘कठुआ रेप को लेकर आरोप-प्रत्यारोप नहीं होना चाहिए!’ जन्म-जन्मान्तर से ‘आरोप-प्रत्यारोप’ से बचते आये मितभाषी मोदी तो कठुआ रेप एंड मर्डर से इस क़दर सदमे में जा डूबे थे कि भारत में प्रवास के दौरान उसके मुँह से रविशंकर प्रसाद की शैली में ‘कड़ी भर्त्सना’ का बोल तक नहीं फूट सका!

वो तो भला हो मोदी जी की विदेश यात्रा का, जिसमें साफ़ और ताज़ा हवा के सेवन के बाद उनकी सुध-बुध वापस लौट पायी। तब कहीं जाकर लन्दन में वो बोल पाये कि ‘एक बेटी के साथ अत्याचार कैसे सहन कर सकते हैं! मैंने लाल क़िले से कहा था कि बेटियों से सवाल करने वाले बेटों से सवाल क्यों नहीं करते? बेटी के साथ जघन्य अपराध करने वाला भी तो, किसी का बेटा ही होता है!’

अब देश की आदत तो रही ही नहीं कि वो अपने नेता की किसी पते की बात पर ग़ौर करे और द्रवित हो। क्योंकि जब रात-दिन जुमलों की फेंका-फेंकी ही होती रहेगी तो काम की बात को पकड़ना, हर किसी के लिए मुश्किल ही होता जाएगा। बहरहाल, जनता ने जब अपने लफ़्फ़ाज़ चौकीदार की बातें नहीं सुनी तो उसने उस लाल क़िले की ही पहचान बदल देने का फ़ैसला ले लिया जहाँ से उसने जनता को अपनी आँखें खोलने का सन्देश दिया था। लाल क़िले को अब डालमिया समूह के हवाले करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यही है।

इससे पहले अत्यन्त बहादुरी दिखाते हुए 56 इंची वाले के चेलों ने अध्यादेश लाकर उस POSCO क़ानून को बदल दिया, जिसका कठुआ कांड पर कोई असर नहीं पड़ सकता। क्योंकि आपराधिक दंड विधान के मुताबिक़, किसी भी अपराध की सज़ा को किसी भी पिछली तारीख़ से प्रभावी नहीं किया जा सकता। ज़ाहिर है कि जब अगली ‘मामूली घटना’ यानी किसी मासूम के साथ रेप होगा तो नये अध्यादेश के मुताबिक़, मुक़दमा चलाया जाएगा, वो भी तब यदि रेपिस्टों के समर्थन में संघियों ने तिरंगा चमकाकर रैलियाँ नहीं निकाली तो…!

बाक़ी, यदि रेप में ‘आरोप-प्रत्यारोप’ और ‘बतंगड़’ बनाने की गुँजाइश हुई तो आसाराम और गुरमीत राम रहीम फ़ार्मूले का इस्तेमाल किया जाएगा! वो भी तभी जब विजय रुपाणी वाले नारद जी, त्रिपुरा के परम प्रतापी मुख्यमंत्री बिप्लव देब के कान में ज्ञान-मंत्र फूँकेंगे कि इंटरनेट से पता चला है कि महाभारत काल में राजकुमारी द्रौपदी का जब भरे राज दरबार चीरहरण हो सकता है तो देश की आम महिलाओं की बिसात ही क्या है!

अभी तो संघ प्रमुख मोहन भागवत की ओर से तो ये यक्ष-प्रश्न उछाला ही नहीं गया है कि काँग्रेस के ज़माने में कितने बलात्कार और हत्याएँ होती थीं! राहुल गाँधी पहले अपनी चार पीढ़ियों के राज में हुए रेप का ब्यौरा दें, फिर उनके कैंडल-मार्च को गम्भीरता से लेने पर विचार किया जा सकता है! इतना ही नहीं, ममता बनर्जी भी पहले ये साफ़ करें कि पश्चिम बंगाल में होने वाले रेप की रोकथाम में वो सफल क्यों नहीं हुई?

जब तक इन सवालों का जबाब देश के सामने नहीं होगा, तब तक पेट्रोल-डीज़ल का दाम कुलाँचे भरता रहेगा, नोटबन्दी में बन्द हुए 1000/500 के नोट गिने ही जाते रहेंगे, ‘विकास’ नज़रबन्द ही रहेगा, कालाधन भूमिगत ही रहेगा, दलितों पर अत्याचार जारी रहेंगे, बेरोज़गारों की फौज़ बढ़ती रहेगी, जजों की रहस्यमय मौत होती रहेगी, नीरव-चोकसी-माल्या-ललित देश को लूटकर फ़ुर्र होते रहेंगे, सुप्रीम कोर्ट के जज ख़तरे में फँसे लोकतंत्र को बचाने की दुहाई देते रहेंगे, अविश्वास प्रस्ताव की गरिमा तार-तार होती रहेगी, चीन और पाकिस्तान के साथ बग़ैर एजेंडा वाली शिखर बैठकें होती रहेंगी! जनता के ख़ून-पसीने की कमाई पर सैर-सपाटा होता रहेगा! अर्थव्यवस्था, आईसीयू में कोमा में पड़ी रहेगी! क्योंकि ये सब तो रेप से कहीं अधिक ‘मामूली’ हैं!

एक बात और गाँठ बाँध लीजिए कि जम्मू-कश्मीर के नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री को शपथ लेते ही कठुआ रेप एंड मर्डर कांड के ‘मामूली’ होने का दिव्य ज्ञान यूँ ही नहीं प्राप्त हो गया! ऐसा मोदी राज की चमत्कारी ‘रेपिस्ट समर्थक मंत्री बनो’ योजना के सफल क्रियान्वयन की वजह से ही हो पाया है!

दरअसल, बीजेपी बुनियादी तौर पर एक चमत्कारी पार्टी रही है। लेकिन मोदी राज में तो तक़रीबन रोज़ाना ही कोई न चमत्कार होता है! बीजेपी का ताज़ा चमत्कार ये है कि रेपिस्टों के समर्थन में तिरंगा चमकाओ, रैली निकालो और मंत्री पद पाओ!

तभी तो जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ़्ती सरकार में बीजेपी के कोटे से मंत्री बनाये गये लोगों में वो विधायक भी शामिल है जिसने कठुआ रेप और हत्याकांड के आरोपियों के समर्थन में ज़ोरदार प्रदर्शन किया था।

जम्मू-कश्मीर सरकार तो पूरी की पूरी चमत्कारों से भरी पड़ी है। सबसे बड़ा और बुनियादी चमत्कार तो वहाँ का गठबन्धन है। एक ओर उत्कट राष्ट्रवादी पार्टी बीजेपी जिसकी नीति है, रेपिस्टों का समर्थन तो दूसरी तरफ़ है पीडीपी, जो अलगाववादियों का समर्थन करके गौरवान्वित होती रही है!

ऐसे चमत्कार को ही शास्त्रों में ‘एक ही घाट पर शेर और बकरी के पानी पीने’ की उपमा दी गयी है! ऐसा चमत्कार सिर्फ़ इसलिए मुमकिन हो पाता है कि बीजेपी हो या पीडीपी, दोनों का एजेंडा साफ़ है कि उसूल सिर्फ़ विरोधियों के लिए होने चाहिए, हमें तो हर हाल में सत्ता चाहिए!

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

ओपिनियन

2019 में भी मोदी जीते तो 36 नहीं बल्कि 72 राफ़ेल मिलेंगे और वो भी बिल्कुल मुफ़्त!

अब तक सवा सौ करोड़ भारतवासियों के सामने 9, 20, 26 और 40 फ़ीसदी कम पर राफ़ेल सौदा करने का दावा किया जा चुका है! इसमें ग़ौर करने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जैसे-जैसे वक़्त बीत रहा है, वैसे-वैसे राफ़ेल सौदे पर हुई बचत का आँकड़ा भी विकास के नये-नये कीर्तिमान बना रहा है! बिल्कुल पेट्रोल-डीज़ल, सीएनजी और रसोई गैस के क़ीमतों की तरह!

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Rafale deal scam

क्या आप जानते हैं कि फ़्राँस से अन्ततः भारत को 36 राफ़ेल विमान बिल्कुल मुफ़्त मिलने वाले हैं! जानकारों का तो यहाँ तक कहना है कि नरेन्द्र मोदी सरकार की राष्ट्रभक्ति और ईमानदारी को देखते हुए मुमकिन है कि भारतीय वायु सेना को आख़िरकार 36 की जगह 72 राफ़ेल हासिल हो जाएँ! और, वो भी बिल्कुल मुफ़्त! जी हाँ, ‘एक के साथ एक फ़्री’ के रूप में! मुमकिन है कि आपको ये ख़बर फ़ेक लगे! लेकिन ये फ़ेक नहीं हो सकती क्योंकि राफ़ेल सौदे के बारे में मोदी सरकार के मंत्री जिस तरह से आये-दिन सनसनीखेज़ ख़ुलासे कर रहे हैं, उसे देखते हुए वो दिन दूर नहीं जब परम माननीय प्रधानसेवक श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी महाराज की ओर से ऐलान कर दिया जाए कि वास्तव में पूरा का पूरा राफ़ेल सौदा ही सवा सौ करोड़ भारतवासियों को मुफ़्त में हासिल होने वाला है!

विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने शनिवार 30 सितम्बर 2018 को दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास में जुटे भारतीय समुदाय के सामने दावा किया कि “संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन सरकार ने 126 विमानों के लिए जिस मूल क़ीमत को लेकर बातचीत की थी और उड़ान की स्थिति आते-आते राफ़ेल विमान की जो प्रभावी क़ीमत बैठेगी, यदि दोनों की तुलना की जाए तो मोदी सरकार ने राफ़ेल सौदा 40 प्रतिशत कम में किया है।”

मुमकिन है कि इतना पढ़ते ही आप उछल पड़े हों, क्योंकि अभी तक तो आपको यही बताया गया था कि मनमोहन सिंह सरकार के मुक़ाबले मोदी सरकार ने राफ़ेल सौदे में 20 फ़ीसदी की बचत हासिल करके दिखाया है। 29 अगस्त 2018 को भारत के सबसे बड़े गणितज्ञ और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने रहस्योद्घाटन किया था कि “राफ़ेल डील की तुलना यदि 2007 की क़ीमतों से की जाए तो साल 2016 में हुई डील 20 फ़ीसदी कम क़ीमत पर की गयी है। दरअसल, एनडीए सरकार की डील, लोडेड एयरक्राफ्ट की है, जो हथियारों से लैस है। जबकि काँग्रेस ने सिर्फ़ बेसिक या ढाँचा एयरक्राफ्ट का सौदा किया था।”

उसी वक़्त जेटली ने कृतज्ञ राष्ट्र को ये भी समझाया कि राफ़ेल की क़ीमत में जो अन्तर है वो बेसिक और लोडेड की वजह से है। लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी, काँग्रेस को इतनी सी बात भी समझने की अक़्ल नहीं है। इसीलिए उसके अध्यक्ष राहुल गाँधी सवा सौ करोड़ भारतवासियों को ग़ुमराह कर रहे हैं और पूर्व फ़्राँसिसी राष्ट्रपति फ्रॉस्वा ओलांद के साथ साज़िश रचकर मोदी सरकार को दुनिया भर में बदनाम कर रहे हैं। राफ़ेल सौदे की अद्भुत विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए जेटली ने बताया था कि “2007 के लोडेड एयरक्राफ्ट की तुलना यदि 2016 के लोडेड एयरक्राफ्ट से की जाए तो मोदी सरकार ने क़रीब 20 फ़ीसदी पैसा बचाया है।”

अब ज़रा और पीछे चलिए। 24 जुलाई 2018 को मोदी सरकार के एक और बेहद विद्वान, ईमानदार, निष्ठावान और साहसी मंत्री श्रीमान रविशंकर प्रसाद जी ने दुनिया भर में बिखरे हुए भारतवंशियों को ज्ञानालोकित किया था कि “2011 में काँग्रेस के शासन में हुई डील में एक राफ़ेल जेट की क़ीमत 813 करोड़ रुपये रखी गयी थी। 2016 में हमारी सरकार के दौरान हुए समझौते में इसकी क़ीमत 739 करोड़ रुपये तय हुई। जो यूपीए सरकार की कुल क़ीमत से 9% कम है।”

इसके एक दिन पहले यानी 23 जुलाई 2018 को केन्द्रीय क़ानून और सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने राष्ट्रसेवा की बड़ी मिसाल पेश करते हुए ट्वीट करके एक ही झटके में कई लोगों को चरित्र प्रमाणपत्र बाँट दिया। उन्होंने लिखा कि “एके एंटनी 8 साल तक देश के रक्षामंत्री थे। वो देश के रक्षा क्षेत्रों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को समझते हैं। लेकिन जब एक पार्टी किसी परिवार के इर्द-गिर्द हो जाती है, तो सभी नेताओं को भीड़ की तरह ही बोलना पड़ता है। 2004 से 2014 तक काँग्रेस की सरकार भ्रष्टाचार से ग्रस्त थी। आज जब हम ईमानदारी से काम कर रहे हैं। देश विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बन रही है। राहुल गाँधी ने राफ़ेल डील के बारे में लोकसभा में झूठ बोला। फ़्राँस के राष्ट्रपति से बातचीत को लेकर बोले गये झूठ ने तो मनमोहन सिंह और आनन्द शर्मा को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। राहुल गाँधी को देश के संवेदनशील मुद्दों की कितनी समझ है? जनता ये समझ गयी है।”

मोदी सरकार में रविशंकर प्रसाद से कोई कम समझदार और विदुषी नहीं हैं माननीय रक्षा मंत्री सुश्री निर्मला सीतारमन! ये देवी भी नारी-शक्ति की महान भारतीय परम्पराओं को निभाते हुए 18 सितम्बर 2018 को दोहराती हैं कि “यूपीए के मुक़ाबले एनडीए का सौदा 9 प्रतिशत सस्ता है।” हालाँकि, सीतारमन के 9 फ़ीसदी के दावे को उनके महकमे के ही वायु सैनिक अधिकारी एयर मार्शल रघुनाथ नाम्बियार ने भी फ़ुस्स साबित कर दिया। वायुसेना के उपप्रमुख नाम्बियार कह चुके हैं कि 2008 में जिस स्तर से यूपीए सरकार ने सौदेबाज़ी या मोलतोल शुरू की थी, उसके मुक़ाबले मोदी सरकार ने 40 फ़ीसदी कम दाम पर सौदा किया है।

इसी तरह, आपको ये जानकर भी शायद ही आश्चर्य हो कि संसद में राफ़ेल सौदे को गोपनीय बताने वाली मोदी सरकार ने 19 अप्रैल 2016 को बेहद की कलात्मक ब्यौरे के साथ ट्वीट करके विश्व को बताया था कि ‘मोदी सरकार ने 12 अरब डॉलर के सौदे में 3.2 अरब डॉलर बचा लिये हैं।’ हिसाब लगाएँ तो ये बचत 26 फ़ीसदी से ऊपर बैठती है! यानी, अब तक सवा सौ करोड़ भारतवासियों के सामने 9, 20, 26 और 40 फ़ीसदी कम पर राफ़ेल सौदा करने का दावा किया जा चुका है! इसमें ग़ौर करने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जैसे-जैसे वक़्त बीत रहा है, वैसे-वैसे राफ़ेल सौदे पर हुई बचत का आँकड़ा भी विकास के नये-नये कीर्तिमान बना रहा है! बिल्कुल पेट्रोल-डीज़ल, सीएनजी और रसोई गैस के क़ीमतों की तरह!

विकास की ऐसी ऐतिहासिक लीला कोई साधारण बात नहीं है। 70 साल में कभी इतना शानदार विकास, देखा था किसी ने? राफ़ेल सौदे से जुड़ी ये उपलब्धि इसलिए भी मामूली नहीं है, क्योंकि ये जानकारियाँ भारतवर्ष की उन जीती-जागती महान विभूतियों के हवाले से है जो हमारे संवैधानिक पदों पर आसीन हैं और जिनके चाल-चरित्र और चेहरे की सौगन्ध खाकर देवलोक के देवतागण भी अपनी सत्ता संचालित करते हैं! बहरहाल, अब जल्द ही आपको एक और परम विदुषी और नाट्य शास्त्र के प्रणेता भरत मुनि की वंशज सुश्री स्मृति इरानी का ये बयान सुनने को मिलेगा कि राफ़ेल सौदे पर मोदी सरकार ने 60 फ़ीसदी का बचत की है!

इसके कुछ समय बाद महान शिक्षा शास्त्री और समाज सुधारक श्रीमान प्रकाश जावड़ेकर का ये ख़ुलासा सामने होगा कि मोदी सरकार ने राफ़ेल सौदे में मनमोहन सिंह सरकार के मुक़ाबले 80 फ़ीसदी की बचत की है! इसीलिए ये सारी की सारी रक़म भारत के एक अन्य महान सपूत और कर्ज़ों में डूबे हुए उद्योगपति अनिल अम्बानी को तोहफ़े के रूप में दे दी जाएगी! इसके भी कुछ वक़्त बाद, सदाचार के सबसे बड़े पुरोधा श्रीमान राजनाथ सिंह का बयान आएगा कि पाकिस्तान को मुँहतोड़ जबाब देने के संकल्प को देखते हुए फ़्राँस की डसॉल्ट एविएशन कम्पनी ने फ़ैसला किया है कि वो भारत को 36 लोडेड राफ़ेल बिल्कुल मुफ़्त देगा!

फिर 2019 का चुनाव नज़दीक आते-आते बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का बयान आएगा कि फ़्राँस के मौजूदा राष्ट्रपति इम्मुअल मैक्रों ने प्रस्ताव भेजा है कि युगपुरुष नरेन्द्र मोदी जी की चतुर्दिक तपस्या को देखते हुए भारत को ‘एक के साथ एक फ़्री’ वाला ऑफ़र दिया जाएगा! इसके लिए बस एक ही शर्ते होगी कि 2019 में मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनवाया जाए! यदि मोदी प्रधानमंत्री बने तो पाकिस्तान में दिवाली मनायी जाएगी, क्योंकि आख़िर राफ़ेल के रूप में आने वाले 72 विमानों से पाकिस्तान का ही तो काम तमाम होना है!

अमित शाह, तब देश को ये भी बताएँगे कि संयुक्त राष्ट्र से सम्मानित नरेन्द्र मोदी, भारत के लिए तभी 72 आँधियाँ या राफ़ेल (फ़्रेंच शब्द राफ़ेल का हिन्दी में अर्थ आँधी या तेज़ हवा होता है) ला पाएँगे, जब जनता बीजेपी को 350 सीटें जिताएगी! आख़िर में, धुआँधार चुनाव प्रचार करते हुए नरेन्द्र मोदी ख़ुलासा करेंगे कि राहुल गाँधी जानना चाहते हैं कि मैंने अनिल भाई को फ़ायदा क्यों पहुँचाया? तो जान लीजिए कि अनिल के अलावा राफ़ेल का मेल और किसी से हो ही नहीं सकता! क्योंकि अनिल का मतलब भी वही है जो राफ़ेल का है। यानी, ‘पवन, वायु, हवा’!

फिर मोदी गरजेंगे कि भाईयों-बहनों, मैं पूछना चाहता हूँ कि अनिल और राफ़ेल के मेल को कोई तेल और पानी का मिलन कह सकता है क्या? लेकिन नामदार को इतनी समझ कहाँ है! इसीलिए वो कहते फिरते हैं कि राफ़ेल सौदा दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला है! मैं पूछता हूँ कि 70 साल में काँग्रेस एक भी ऐसा घोटाला क्यों नहीं कर सकी? क्योंकि इसकी नीयत ठीक नहीं थी। जबकि मेरी नीयत पहले दिन से साफ़ थी। इसीलिए आज तक काले धन का एक रुपया भी विदेश से नहीं आया। अच्छे दिन तो बस, आते ही रह गये।

भाईयों-बहनों,

नोटबन्दी और 2000 के नोट के ज़रिये मैंने काला धन रखने वालों की कितनी बड़ी मुसीबत दूर कर दी, ये उनसे पूछिए जिनके पास काला धन है और जिन्हें काले कारोबार में महारत हासिल है! नोटबन्दी में मैंने पूरे देश को लाइन में लगा दिया। लेकिन क्या कहीं किसी को कोई धन्ना सेठ या अफ़सर कभी लाइन में दिखायी दिया? नहीं ना! ऐसा सिर्फ़ इसलिए हुआ कि मेरे दोस्तों को पता था नोटबन्दी का असली मक़सद ही सारे काले धन को सफ़ेद बनाना था! इस काम को काँग्रेस 70 साल में भी नहीं कर पायी, लेकिन मैंने 50 दिन से भी कम में करके दिखा दिया! ये कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। इसकी वजह से किसी भी रईस व्यक्ति ने ख़ुदकुशी क्यों नहीं की? क्योंकि उसे मालूम था कि नोटबन्दी का मक़सद, ग़रीबों को सबक सिखाना था, उनके पास दबे रुपयों को बाहर निकालना था!

भाईयों-बहनों,

ऐसी ही गर्व करने वाली कहानी जीएसटी की भी है। लेकिन इसकी बात फिर कभी। अभी तो आप से जानकार गदगद रहिए कि राफ़ेल दिनों-दिन सस्ता होते-होते, कैसे नसीबवालों की वजह से बिल्कुल मुफ़्त मिलने वाला है। वो भी ‘एक के साथ एक फ़्री’! अलबत्ता, इतना ज़रूर है कि मैं अनिल भाई से कह दूँगा कि वो काँग्रेस को 36 करोड़ रुपये का चन्दा पेटीएम से भेज दें, ताकि 2019 में काँग्रेस भी 44 से घटकर 36 पर ही सिमट जाए!

भाईयों-बहनों,

आपको मेरे मंत्रियों की देश भक्ति की ख़ास तौर पर दाद देनी चाहिए क्योंकि दिन-रात तरह-तरह की बयानबाज़ी करने में निपुण मेरे किसी भी मंत्री को, कभी नहीं लगा कि राफ़ेल सौदा करके मैंने काँग्रेस को भारी नुक़सान नहीं पहुँचाया है! राहुल गाँधी और उनके सहयोगी दलों को तथा यशवन्त सिन्हा और अरूण शौरी जैसे लोगों को भले ही राफेल सौदे में भारी घोटाले की बू आ रही हो, लेकिन देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति के सबसे बड़े मन्दिर तथा मेरे प्रिय गुरुकुल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हरेक सिपाही राफ़ेल की सुगन्ध से गदगद है!

Mukesh Kumar Singh

मुकेश कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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ओपिनियन

संशय भरे आधुनिक युग में हिंदू आदर्श धर्म : थरूर

वह धर्म जो सर्वज्ञानी सृजनकर्ता पर सवाल करता हो वह मेरे विचार से आधुनिक और उत्तर आधुनिक चैतन्य के लिए अनोखा धर्म है।

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Shashi-Tharoor

न्यूयॉर्क, 21 सितंबर | कांग्रेस सांसद व लेखक शशि थरूर के अनुसार, हिंदू एक अनोखा धर्म है और यह संशय के मौजूदा दौर के लिए अनुकूल है। थरूर ने धर्म के राजनीतिकरण की बखिया भी उधेड़ी।

न्यूयॉर्क में जयपुर साहित्य महोत्सव के एक संस्करण में के बातचीत सत्र के दौरान गुरुवार को थरूर ने कहा, “हिंदूधर्म इस तथ्य पर निर्भर करता है कि कई सारी बातें ऐसी हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं।”

मौजूदा दौर में इसके अनुकूल होने को लेकर उन्होंने कहा, “पहली बात यह अनोखा तथ्य है कि अनिश्चितता व संशय के युग में आपके पास एक विलक्षण प्रकार का धर्म है जिसमें संशय का विशेष लाभ है।”

सृजन के संबंध में उन्होंने कहा, “ऋग्वेद वस्तुत: बताता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति कहां से हुई, किसने आकाश और धरती सबको बनाया, शायद स्वर्ग में वह जानता हो या नहीं भी जानता हो।”

उन्होंने कहा, “वह धर्म जो सर्वज्ञानी सृजनकर्ता पर सवाल करता हो वह मेरे विचार से आधुनिक और उत्तर आधुनिक चैतन्य के लिए अनोखा धर्म है।”

उन्होंने कहा, “उससे भी बढ़कर आपके पास असाधारण दर्शनग्रहण है और चूंकि कोई नहीं जानता कि भगवान किस तरह दिखते हैं इसलिए हिंदूधर्म में हर कोई भगवान की कल्पना करने को लेकर स्वतंत्र है।”

कांग्रस सांसद और ‘व्हाइ आई एम हिंदू’ के लेखक ने उन लोगों का मसला उठाया जो स्त्री-द्वेष और भेदभाव आधारित धर्म की निंदा करते हैं।

मनु की आचार संहिता के बारे में उन्होंने कहा, “इस बात के बहुत कम साक्ष्य हैं। क्या उसका पालन किया गया और इसके अनेक सूत्र विद्यमान हैं।”

उन्होंने उपहास करते हुए कहा, “इन सूत्रों में मुझे नहीं लगता कि हर हिंदू कामसूत्र की भी सलाह मानते हैं।”

थरूर ने कहा, “प्रत्येक स्त्री विरोधी या जातीयता कथन (हिंदू धर्मग्रंथ में) के लिए मैं आपको समान रूप से पवित्र ग्रंथ दे सकता हूं, जिसमें जातीयता के विरुद्ध उपदेश दिया गया है।”

–आईएएनएस

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ओपिनियन

जानिये क्यों गिर रहा है रुपया

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Rupee Fall

नई दिल्ली, 13 सितम्बर | केंद्र सरकार ने रुपये की गिरावट को थामने की हरसंभव कोशिश करने का भरोसा दिलाया है। इसका असर पिछले सत्र में तत्काल देखने को मिला कि डॉलर के मुकाबले रुपये में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। हालांकि रुपये में और रिकवरी की अभी दरकार है।

डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को रिकॉर्ड 72.91 के स्तर तक लुढ़कने के बाद संभला और 72.19 रुपये प्रति डॉलर के मूल्य पर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार को 72.69 पर बंद हुआ था।

रुपये की गिरावट से अभिप्राय डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आना है। सरल भाषा में कहें तो इस साल जनवरी में जहां एक डॉलर के लिए 63.64 रुपये देने होते थे वहां अब 72 रुपये देने होते हैं। इस तरह रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।

शेष दुनिया के देशों से लेन-देन के लिए प्राय: डॉलर की जरूरत होती है ऐसे में डॉलर की मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने पर देशी मुद्रा कमजोर होती है।

एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने रुपये में आई हालिया गिरावट पर कहा, “भारत को कच्चे तेल का आयात करने के लिए काफी डॉलर की जरूरत होती है और हाल में तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। वहीं, विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश में कटौती करने से देश से डॉलर का आउट फ्लो यानी बहिगार्मी प्रवाह बढ़ गया है। इससे डॉलर की आपूर्ति घट गई है।”

उन्होंने बताया कि आयात ज्यादा होने और निर्यात कम होने से चालू खाते का घाटा बढ़ गया है, जोकि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खाते का घाटा तकरीबन 18 अरब डॉलर हो गया है। जुलाई में भारत का आयात बिल 43.79 अरब डॉलर और निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा।

वहीं, विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार घटता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह को 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया।

गुप्ता बताते हैं, “राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने से भी रुपये में कमजोरी आई है। आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर रहने की आशंकाओं का भी असर है कि देशी मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है। जबकि विश्व व्यापार जंग के तनाव में दुनिया की कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।”

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं जिससे डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक हितों के टकराव के कारण अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुई व्यापारिक जंग से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है।

–आईएएनएस

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रक्षा मंत्री के दावे को पूर्व एचएएल चीफ ने नकारा, कहा- भारत में ही बना सकते थे राफेल

man-min (1)
ज़रा हटके4 weeks ago

इस हॉस्पिटल में भूत-प्रेत करते हैं मरीजों का इलाज

Kapil Sibal
टेक2 weeks ago

बहुमत के फ़ैसले के बावजूद ग़रीब और सम्पन्न लोगों के ‘आधार’ में हुई चूक!

Sonarika Bhadauriya
टेक2 weeks ago

सोशल मीडिया पर कमेंट्स पढ़ना फिजूल : सोनारिका भदौरिया

Matka
ज़रा हटके3 weeks ago

मटकावाला : लंदन से आकर दिल्ली में पिलाते हैं प्यासे को पानी

,Excercise-
लाइफस्टाइल3 weeks ago

उम्र को 10 साल बढ़ा सकती हैं आपकी ये 5 आदतें…

IAF Chief Dhanoa Rafale Jet
ब्लॉग2 weeks ago

राफ़ेल पर सफ़ाई देकर धनोया ने वायुसेना की गरिमा गिरायी!

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ब्लॉग4 weeks ago

मोहन भागवत झूठ पर झूठ परोसते रहे और भक्त झूम-झूमकर कीर्तिन करते रहे!

Vivek Tiwari
ब्लॉग3 weeks ago

विवेक की हत्या के लिए अफ़सरों और नेताओं पर भी मुक़दमा क्यों नहीं चलना चाहिए?

राजनीति2 weeks ago

छेड़छाड़ पर आईएएस की पत्नी ने चप्पल से बीजेपी नेता को पीटा, देखें वीडियो

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राष्ट्रीय2 weeks ago

Air Force Day: 8000 फीट की ऊंचाई से उतरे पैरा जंपर्स

Assam
शहर2 weeks ago

…अचानक हाथी से गिर पड़े असम के डेप्युटी स्पीकर, देखें वीडियो

Karnataka
ज़रा हटके2 weeks ago

कर्नाटक में लंगूर ने चलाई यात्रियों से भरी बस, देखें वीडियो

Kangana Ranaut-
मनोरंजन2 weeks ago

कंगना की फिल्म ‘मणिकर्णिका’ का टीजर जारी

BIHAR
राजनीति3 weeks ago

नीतीश के मंत्री का मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार, देखें वीडियो

Hyderabad Murder on Road
शहर3 weeks ago

हैदराबाद: दिनदहाड़े पुलिस के सामने कुल्हाड़ी से युवक की हत्या

Thugs of Hindostan-
मनोरंजन3 weeks ago

धोखे और भरोसे के बीच आमिर-अमिताभ की जंग, ट्रेलर जारी

kapil sibal
राष्ट्रीय3 weeks ago

‘आधार’ पर मोदी सरकार का कदम असंवैधानिक ही नहीं अलोकतांत्रिक भी था: सिब्‍बल

rahul gandhi
राजनीति4 weeks ago

राहुल ने मोदी से पूछा- अब तो बताओ, ओलांद सच कह रहे हैं या झूठ

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