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लाइफस्टाइल

रक्षाबंधन के दिन इस तरह लाएं चेहरे में चमक…

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Rakhi-
प्रतीकात्मक तस्वीर

भाई-बहन के अटूट प्यार और समर्पण के त्योहार रक्षाबंधन में बहनें भारतीय सौंदर्य तथा परिधनों में काफी आकर्षक तथा सम्मोहक दिखाई देती हैं। इस बार रक्षाबंधन 15 अगस्त को है।

इस त्योहर के दिन जहां भाई नए अंदाज में दिखते हैं तो बहनें भी स्टाइलिश दिखने में कोई कसर नहीं छोड़ती। इस खास त्योहार में आप कुछ आयुर्वेदिक सौंदर्य नुस्खों की मदद से इस दिन को यादगार बना सकती हैं।

सौंदर्य विशेषज्ञ शहनाज हुसैन ने कहा कि बरसात के गर्म तथा आद्रता भरे मौसम में त्वचा की रंगत तथा ताजा रखने के लिए कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप त्योहार में आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि तरबूज का जूस त्वचा की रंगत तथा ताजगी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

तरबूज के जूस से त्वचा के रूखेपन को भी रोका जा सकता है। यह त्वचा में कोमलता तथा प्राकृतिक चमक प्रदान करता है। तरबूज के जूस को चेहरे पर लगाकर 20 मिनट बाद ताजे तथा साफ पानी से धो डालिए।

फ्रूट मास्क : केला, सेब, पपीता तथा संतरे को मिलाकर इस मिश्रण को आधा घंटा तक चेहरे पर लगाकर चेहरे को ताजे ठंडे पानी से धो डालिए। यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है, मृतक कोशिकाओं को साफ करता है तथा त्वचा पर काले धब्बे को दूर करता है।

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कुलिंज मास्क : खीरे के जूस में दो चम्मच पाउडर दूध तथा अण्डे का सफेद भाग मिलाकर मिश्रण बना लें। इस पेस्ट को चेहरे तथा तथा गर्दन पर आधा घंटा तक लगाकर बाद में ताजे तथा साफ पानी से धो डालिए।

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तैलीय त्वचा के लिए मास्क : एक चम्मच मुलतानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर आधा घंटा बाद चेहरे को साफ पानी से धो डालिए। फेस्क मास्क लगाने के बाद दो कॉटनवूल पैड को गुलाब जल में भिगोएं तथा इन्हें आई पैड की तरह उपयोग कीजिए।

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काटनवूल पैड से गुलाब जल को निचोड़ कर इसे बन्द पलकों पर रखकर लेट जाऐं तथा आराम कीजिए। उपयोग में लाए गए टी-बैग भी सौन्दर्य में चार चांद ला सकते है। प्रयोग किए गए टी-बैग को गुनगुने पानी में भीगोकर पानी को निचोड़ लें तथा बाद में इन्हें आई-पैड की तरह उपयोग में लाएं।

हर्बल क्वीन के नाम से मशहूर शहनाज हुसैन ने कहा कि खुरदरे, उलझे तथा घुंघराले बालों को मुलायम तथा चमकदार करने के लिए क्रीमी हेयर कंडीशनर में साफ जल मिलाकर इसे स्प्रे बोतल में डाल दें। इस मिश्रण को बालों पर छिड़काने के बाद बालों को कंघी कर लें ताकि यह बालों पर पूरी तरह फैल जाए।

बाद में एक घंटा बाद बालों को ताजे तथा साफ पानी से धो डालिए। उन्होंने कहा कि यदि आपकी त्वचा साफ है तो फाउंडेशन से परहेज करें। त्वचा को साफ करने के बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर सहित सनस्क्रीन का उपयोग करने के बाद पाउडर लगाएं।

तैलीय त्वचा के लिए मॉइस्चराइजर की जगह अस्ट्रीजेंट लोशन का उपयोग करें तथा इसके बाद कम्पैक्ट पाउडर का उपयोग करें। चेहरे के नाक, माथे तथा ठोढ़ी जैसे तैलीय भागों की तरफ विशेष ध्यान दीजिए। इस पाउडर को हल्की गीली स्पंज से चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। इससे पाउडर लंबे समय तक टिका रहता है।

शहनाज हुसैन ने कहा कि आंखों की सुंदरता के लिए दिन में आई पेंसिल का उपयोग काफी होगा। आप अपनी आंखों की पलकों को भूरे तथा स्लेटी आई शैडो से भी लाईन कर सकती हैं। इससे काफी सौम्य प्रभाव दिखने में लगेगा।

इसके बाद मस्कारा का एक कोट लगाने से आंखों में चमक आ जाएगी। लिपिस्टिक के लिए गहरे भूरे रंग के उपयोग से परहेज करें। आप हल्का गुलाबी, हल्के बैंगनी, हल्के भूरे, कांस्य या तांबे के रंग की लिपस्टिक का उपयोग कर सकती हैं।

–आईएएनएस

ब्लॉग

लौंगी भुइंया से दशरथ मांझी बनने की पूरी कहानी

लौंगी भुइंया के साथ के लोग शायद अब उनके साथ न हों पर आने वाली उस गाँव की पीढ़ी “लौंगी भुइंया” का हमेशा शुक्रगुज़ार रहेगी।

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Longi Bhuiyan

अभी हाल ही में महामारी के दौरान आप सभी को पता लगा… की लोग शहर छोड़ अपने-अपने गाँव लौट रहे है। और उनमें जो मजदूर थे वो ज़्यादातर बिहार से ताल्लुक रखते थे। ख़ैर ये तो बात थी उनके लौटने की।उनके अपने गाँव छोड़ शहर जाने की कहानी भी बहुत लम्बी है …पर उसके बारे में बात फिर कभी।

फिलहाल उन्हीं लम्बी कहानियों में से एक कहानी हैं, बिहार के “गया” ज़िले की राजधानी पटना से 200 किमी दूर बांकेबाज़ार प्रखंड की कहानी हैं।

यहाँ पर रहने वाले लोगों की ज़िन्दगी खेती पर ही निर्भर हैं और खेती निर्भर है पानी पर… यानी सिंचाई पर। और यहीं से शुरू होती है यहाँ पर रहने वाले लोगों के संघर्ष की कहानी।

यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। मगर धान और गेहूं की खेती के लिए जो पानी उन्हें चाहिए था उस पानी और वहाँ रहने वालों के बीच जो सबसे बड़ा रोड़ा था वो था एक “पहाड़” ।

और यहीं से शुरू होती है देश के दूसरे दशरथ मांझी लौंगी भुइंया की कहानी।

पानी की किल्लत की वजह से वहां से लोगों का पलायन शुरू हुआ, और पलायन का असर उनके घर तक आ पहुंचा।

यहाँ तक की उनके खुद के बेटों ने भी वो गाँव छोड़ दिया। फिर एक दिन हुआ यूँ की लौंगी भुइंया उसी पहाड़ पर बकरी चरा रहे थे की अचानक उनको ख्याल आया की अगर ये पहाड़ तोड़ दिया जाए तो पलायन रुक सकता है।

उस दिन उस ख्याल ने उन्हें ढंग से सोने नहीं दिया। उनकी पत्नी ने भी उनसे कहा की…. ये तुमसे नहीं हो पायेगा । पर लौंगी भुइंया को अपनी ज़िद्द के आगे कुछ समझ नहीं आया।
फिर क्या था…. फावड़ा उठाया और चल दिया पहाड़ तोड़ने।

30 साल अकेले फावड़े और दूसरे औज़ारों से उन्होंने आज 3 किमी लम्बी नहर खोद डाली और पानी गाँव तक पहुंचा दिया। इस साल पहली बार उनके गाँव तक बारिश का पानी पहुंचा और इसी वजह से आसपास के तीन गाँव के किसानों को भी इसका लाभ मिल रहा हैं। लोगों ने इस बार धान की फसल भी उगाई है। पर अफ़सोस की अब तक गाँव के कई लोग दूसरे शहरों में पलायन कर चुके हैं।

लौंगी भुइंया के साथ के लोग शायद अब उनके साथ न हों पर आने वाली उस गाँव की पीढ़ी “लौंगी भुइंया” का हमेशा शुक्रगुज़ार रहेगी।

लौंगी भुइंया कहते हैं “हम एक बार मन बना लेते हैं तो पीछे नहीं हटते। अपने काम से जब फुर्सत मिलता हम नहर काटने में लग जाते।

हमारी पत्नी कहती थी की तुमसे नहीं हो पायेगा…. लेकिन मुझे लगता था की हो जायेगा।

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राष्ट्रीय

कोरोना मामलों में वृद्धि के बीच 188 दिन बाद खुला ताजमहल

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Taj mahal

महामारी के कारण 188 दिनों तक बंद रहने के बाद प्रेम का प्रतीक, 17वीं सदी का स्मारक ताजमहल आगंतुकों के लिए फिर से खोल दिया गया। हालांकि आगरा में कोविड-19 के 144 नए मामले सामने आए हैं, जिसने जिला प्रशासन के लिए परेशानी बढ़ा दी है।

एएसआई के अधिकारियों ने सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों के साथ स्मारक के परिसर की सामाजिक दूरी, मास्क पहनने और स्वच्छता से संबंधित दिशानिदेशरें का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया। एक गाइड ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बिक्री ने आगंतुकों की उचित स्क्रीनिंग सुनिश्चित की है।

स्मारक के खुलने से स्थानीय पर्यटन उद्योग के लोग उत्साहित हैं और आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के पुनरुद्धार की उम्मीद कर रहे हैं।

जिला मजिस्ट्रेट पी. एन. सिंह ने कहा कि सभी सावधानियां बरती गई हैं और कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

हालांकि अभी तक एडवांस में होटल बुकिंग को लेकर प्रतिक्रिया इतनी उत्साहजनक नहीं हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा और अगर सारी चीजें बिना किसी परेशानी के चलती रहेंगी, तो आगरा में दर्शकों की संख्या बढ़ सकती है। होटल व्यवसायियों को उम्मीद है कि आगरा को प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली कुछ नई उड़ानें पर्यटकों को यहां आने के लिए प्रेरित करेंगी।

पिछले 24 घंटों में यहां कोरोनावायरस के 144 नए मामलों का पता चला, जिसके साथ संक्रमण की कुल संख्या 4,850 हो गई। अब तक 3,852 लोग इससे उबर चुके हैं। मरने वालों की संख्या 118 है, जबकि सक्रिय रोगियों की संख्या 880 है।

जिला अधिकारियों ने कोविड रोगियों को एडमिट करने के लिए निजी क्षेत्र में नौ एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) अप्रूव्ड अस्पतालों को अनुमति दी है, क्योंकि विशेषज्ञों को डर है कि आने वाले दिनों में 1000 बेड की आवश्यकता हो सकती है। वहीं भारतीय रेलवे के विशेष रूप से डिजाइन किए गए कोविड कोच बिना उपयोग के यार्ड में पड़े हुए हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि 26 आइसोलेशन कोच तैयार हैं और अगर प्रशासन चाहे तो इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस बीच पिछले कुछ दिनों में मांग बढ़ने के बाद ऑक्सीजन की आपूर्ति काफी हद तक बहाल कर दी गई है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि मरीजों को सलाह दी गई है कि वे एक ऐप के माध्यम से अपना टेस्ट रिपोर्ट ऑनलाइन एकत्र करें।

वहीं आगरा में विशेषज्ञों ने कहा कि, कुछ दिनों में आईसीएमआर द्वारा देशभर में किए गए सीरो सर्वे के निष्कर्षों के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

एस.एन.मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने कहा, “सामाजिक संपर्क के अधिक अवसर और सख्ती में दिए गए ढील के साथ लोगों को दिशानिदेशरें का पालन करने में बहुत सावधानी बरतनी थी।”

एक अधिकारी ने संकेत दिया कि मंदिर और स्कूल 1 अक्टूबर से पहले नहीं खुलेंगे।

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लाइफस्टाइल

बच्चों में बढ़ती आंखों की समस्या

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Children

 कोरोना महामारी के चलते स्कूल वगैरह बंद हैं, ऐसे में पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज और बाहर ज्यादा न निकलने की अवस्था में गेमिंग में बच्चे अपना अधिक समय बिता रहे हैं और इन सारी चीजों का प्रभाव उनकी आंखों पर पड़ रहा है।

मोटे तौर पर, हाल के सप्ताहों में करीब 40 प्रतिशत बच्चों में आंखों व देखने की तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ अनिल रस्तोगी के मुताबिक, इनमें से अधिकतर बच्चों में अभिसरण अपर्याप्तता की समस्या देखी गई – यह एक ऐसी अवस्था है, जहां निकट स्थित किसी चीज को देखने के दौरान आंखें एक साथ काम करने में असक्षम रहती हैं। इस स्थिति के चलते एक आंख के अंदर रहने के दौरान दूसरी बाहर की ओर निकल आती है, जिससे चीजें या तो दो या धुंधली लगती हैं।

उन्होंने आगे कहा, बच्चे कंप्यूटर के आगे लंबे समय तक बैठे रहते हैं, स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं जिससे आंखों में खुजली और जलन की समस्या पैदा हो जाती है, ध्यान लगाने में परेशानी होती है, सिर दुखता है, आंखों में दर्द होता है।

नेत्र विशेषज्ञ शिखा गुप्ता भी यही कहती हैं कि लॉकडाउन के चलते बच्चे आठ से दस घंटे तक का समय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में बिताते हैं। वे या तो ऑनलाइन क्लासेज कर रहे हैं या कार्टून देख रहे हैं या वीडियो गेम्स खेल रहे हैं। माता-पिता को लगता है कि यह उन्हें व्यस्त रखने का सबसे बेहतर तरीका है, लेकिन इतना ज्यादा वक्त इलेक्ट्रॉनिकडिवाइस में बिताने से आंखों को नुकसान पहुंचता है।

इनसे बचने के लिए डॉक्टर्स का सुझाव है कि आंखों की एक्सरसाइज पर ध्यान दें, टीवी/कंप्यूटर/मोबाइल फोन के स्क्रीन से कुछ-कुछ देर का ब्रेक लेते रहें, ताकि आंखों की अच्छी सेहत बरकरार रखी जा सकें।

आईएएनएस

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