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ओला-उबर की हड़ताल, दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर इन शहरों में दिखा असर

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Ola_Uber
फाइल फोटो

ऐप द्वारा टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियां ओला और उबर के ड्राइवर्स की देर रात से हड़ताल शुरू हो गई है। हालांकि दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर देश के बाकी शहरों में इसका असर देखने को मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर में केवल कंपनी की कैब चल रही हैं, जिससे स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में है।

इन शहरों में पड़ा असर

इस हड़ताल का असर इन शहरों पर पड़ा है उनमें कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद सहित अन्य शहर शामिल हैं। इन शहरों में ज्यादातर लोग ऑफिस आने-जाने के लिए इन कंपनियों की कैब का प्रयोग करते हैं।

ओला और उबर चालकों के हड़ताल पर रहने से इन दोनों कंपनियों की सभी सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। इसके चलते आम लोगों को ऑफिस, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य जरूरी कामों के लिए आना-जाना मुश्किल हो रहा है। कैब चालकों ने अपने कैब बुकिंग करने वाले डिवाइस को देर रात से बंद कर दी।

ड्राइवर्स का कहना है कि उनकी आमदनी में लगातार कमी हो रही है। इन कंपनियों की ड्राइवर्स यूनियन की प्रमुख मांग है कि पहले की तरह उनको कम से कम 1.25 लाख रुपये का व्यापार मिले। दूसरा, कंपनी अपने द्वारा चलाई जा रहीं कैब को बंद करें।

तीसरा, उन ड्राइवर्स को दुबारा से रखा जाए जिनको कस्टमर्स ने कम रेटिंग दी है। चौथा, गाड़ी की कॉस्ट के मुताबिक, किराये का निर्धारण किया जाए और पांचवा, कम किराये पर बुकिंग को बंद किया जाए।

बता दें कि ओला जहां देश के 110 शहरों में अपनी सर्विस देती है, वहीं उबर 25 शहरों में मौजूद है। ओला से रोजाना करीब 20 लाख लोग सफर करते हैं। 10 लाख लोग उबर की टैक्सी से अपना रोजाना का सफर पूरा करते हैं।

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मप्र : हाईकोर्ट के सामने धरना देने वाले न्यायाधीश की हमेशा के लिए छुट्टी

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Madhya Pradesh Judge

जबलपुर, 19 अप्रैल | मध्य प्रदेश में डेढ़ साल में चार बार तबादले से नाराज होकर उच्च न्यायालय के सामने धरना देने वाले अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश (एडीजे) आर.के. श्रीवास को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। निलंबित एडीजे श्रीवास ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया कि उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है।

उन्होंने कहा, “मैंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किए जाने के खिलाफ आवाज उठाई थी। तबादला नीति का पालन नहीं किए जाने पर मैंने 17 मार्च, 2016 को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और 6 अप्रैल, 2016 को सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखा था।”

एडीजे श्रीवास ने डेढ़ साल में चौथी बार तबादला किए जाने के खिलाफ एक अगस्त, 2017 से तीन दिन तक उसके बाद 26 अगस्त से तीन दिन उच्च न्यायालय के सामने धरना दिया था। उनका आरोप था कि तबादला नीति की अनदेखी करते हुए डेढ़ साल के भीतर उनका तबादला धार से शहडोल, शहडोल से सिहोरा, सिहोरा से जबलपुर हाईकोर्ट और नीमच कर दिया गया। अपनी नौ सूत्री मांगों के समर्थन में उनका तीन दिवसीय सांकेतिक धरना तीन अगस्त को समाप्त हुआ था।

श्रीवास का कहना है कि 8 अगस्त, 2017 को नीमच पहुंचकर उन्होंने दो बजे कार्यभार ग्रहण किया था और शाम को छह बजे उन्हें फैक्स से निलंबन आदेश प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने जन्मदिन 19 अगस्त को नीमच से जबलपुर तक साइकिल से न्याय यात्रा की शुरुआत की थी। 26 अगस्त को जबलपुर पहुंचकर उच्च न्यायालय के सामने फिर धरना दिया था। धरने के तीसरे दिन उच्च न्यायालय के सामने प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी थी, जिसका पालन करने हुए उन्होंने अपना धरना खत्म कर दिया था।

–आईएएनएस

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मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल को बताया ‘तानाशाह’

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Manish Sisodia
फाइल फोटो

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल को ‘तानाशाह’ करार दिया और उन पर राज्य में ‘समानांतर सरकार’ चलाने का आरोप लगाया। शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मुद्दे पर बैजल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सिसोदिया का गुस्सा फूटा।

सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा, “एलजी सर, कृपया तानाशाह मत बनिए। यह दिल्ली में समानांतर सरकार चलाने का प्रयास है। यह अवैध है। आपके पास सरकार के कार्यक्षेत्र में आने वाले मुद्दों पर बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है।”

उन्होंने कहा कि संविधान के तहत उप राज्यपाल निर्वाचित सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर केवल ‘विचारों का मतभेद जाहिर कर सकते हैं। कृपया संविधान का सम्मान कीजिए।’

बैजल ने कहा, “दिल्ली में सीसीटीवी कैमरों की वर्तमान हालात के मद्देनजर कानून व्यवस्था बैठक की अध्यक्षता की। एसओपी तैयार करने के लिए इंटर-एजेंसी समूह बनाने का निर्देश दिया है जो कैमरे लगाने में एकरूपता, निजता, सुरक्षा, फीड शेयरिंग, एकीकरण व अनुकूल उपयोग के मुद्दे को हल करेगा।”

–आईएएनएस

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जम्मू एवं कश्मीर में कठुआ मामले पर छात्रों संग सुरक्षा बलों की झड़प

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फाइल फोटो

जम्मू के कठुआ जिले में जनवरी माह में आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना के खिलाफ गुरुवार को उत्तरी कश्मीर के बारामूला और दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिलों में विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों की सुरक्षा बलों से झड़प हो गई।

प्रदर्शनकारियों ने शोपियां कस्बों और बारामूला के डेलिना इलाके में सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करनी शुरू कर दी जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

प्रशासन द्वारा श्रीनगर, गंदरबाल, पुलवामा, कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग जिलों के कई स्थानों के शैक्षिक संस्थानों में कक्षाओं को बंद करने के बावजूद विरोध प्रदर्शन हुआ।

इस घटना को लेकर बुधवार को एक दर्जन से अधिक स्थानों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों और बलों के बीच टकराव से बचने के लिए उपाय अपनाए हैं।

–आईएएनएस

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