Connect with us

राजनीति

नोटबंदी-जीएसटी से बस बर्बादी, गुजरातियों को दिया धोखा: मनमोहन सिंह

Published

on

Manmohan_Singh
मनमोहन सिंह (फाइल फोटो)

गुजरात के राजकोट में गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर नोटबंदी और जीएसटी के जरिए मोदी सरकार पर हमला बोला। मनमोहन सिंह ने कहा कि नोटबंदी का जो बेसिक लक्ष्य था, वही फेल हुआ है। भ्रष्टाचार अभी भी हो रहा है। मनमोहन सिंह ने मांग की, कि नोटबंदी से जुड़े सभी दस्तावेज संसद और जनता के सामने लाने चाहिए।

राजकोट में मनमोहन सिंह ने कहा कि नोटबंदी का जो बेसिक लक्ष्य था, वही फेल हुआ है। भ्रष्टाचार अभी भी हो रहा है। मनमोहन सिंह ने मांग की, कि नोटबंदी से जुड़े सभी दस्तावेज संसद और जनता के सामने लाने चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद जीएसटी से व्यापारियों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गुजरात से हैं, मोदी जी ने गुजरात के व्यापारियों और लोगों को धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि आज सरकार की जो सरकार की विदेश नीति है उससे देश की सुरक्षा खतरे में है। मोदी सरकार के कुछ फैसले ऐसे हैं जो देश के हित में नहीं है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि हमारे कार्यकाल में जब भ्रष्टाचार पर कोई शिकायत आई, तो हमने उसपर तुरंत एक्शन लिया। लेकिन जब एनडीए के दौरान ऐसा हुआ तो कोई एक्शन नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष के बेटे के मामले में भी कोई एक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि मोदी ने नर्मदा के मुद्दे पर कभी भी मुझसे मुलाकात नहीं की थी।

मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर मोदी सरकार को यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में औसत आर्थिक ग्रोथ की बराबरी करनी है तो अपने कार्यकाल के पांचवें साल में उसे कम से कम 10.6 फीसदी की ग्रोथ रेट चाहिए। मुझे खुश होगी अगर ऐसा होता है, लेकिन मुझे ऐसा होते हुए नहीं दिख रहा है।

WeForNews

चुनाव

हिमाचल चुनाव : कई सीटों पर कांटे की टक्कर के बाद जीते नेता

हिमाचल प्रदेश में 1985 के बाद से हर पांच साल बाद चला आ रहा फेरबदल इस बार भी जारी रहा। राज्य में मुकाबला दोनों मुख्य पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच था, जिसके नतीजे में भी जोरदार टक्कर दिखाई दी।

Published

on

Election Himachal

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में सत्ता परिवर्तन की इबारत लिखी जा चुकी है। हिमाचल प्रदेश में 1985 के बाद से हर पांच साल बाद चला आ रहा फेरबदल इस बार भी जारी रहा। राज्य में मुकाबला दोनों मुख्य पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच था, जिसके नतीजे में भी जोरदार टक्कर दिखाई दी। चुनाव में कुछ सीटों पर जीत हार का अंतर हजार मतों से भी कम का रहा। जिनमें से विधानसभा सीट संख्या-68 किन्नौर में टक्कर खासी रोमांचक रही। किन्नौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जगत सिंह नेगी ने भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी को मात्र 120 मतों से शिकस्त दी। बता दें कि यह दोनों नेता 2003 विधानसभा चुनाव के बाद से चार बार एक दूसरे के खिलाफ लड़ चुके हैं जिसमें से तीन बार जगत सिंह नेगी ने बाजी मारी है जबकि 2007 में तेजवंत सिंह नेगी ने जीत हासिल की थी।

वहीं विधानसभा सीट संख्या -39 बड़सर में कांग्रेस के इंद्र दत्त लखनपाल ने भाजपा के बलदेश शर्मा को कांटे के मुकाबले में 439 मतों से हराया। बता दें कि 2012 विधानसभा चुनाव में लखनपाल ने 2658 वोटों से जीत हासिल की थी।

विधानसभा सीट संख्या- 4 डलहौजी में कांग्रेस की दिग्गज नेता आशा कुमारी को जीत हासिल करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। आशा ने भाजपा के डी.एस. ठाकुर को कड़े मुकाबले में 556 मतों से हराया। दिन के शुरुआती रुझानों में आशा, ठाकुर से पीछे थी लेकिन अंतिम चरणों में वह ठाकुर को शिकस्त देने में सफल रही। सीट पर कड़े मुकाबले का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2012 का विधानसभा चुनाव में उन्होंने 7365 मतों के भारी अंतर से जीता था।

इसके अलावा विधानसभा सीट संख्या- 54 कसौली में भारतीय जनता पार्टी के राजीव सैजल ने कांग्रेस उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी को केवल 442 वोटों से पटखनी दी। बता दें कि कसौली में हुए 2012 विधानसभा चुनाव में राजीव ने केवल 24 वोटों से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को शिकस्त दी थी।

साथ ही विधानसभा सीट संख्या- 15 नगरोटा में भाजपा के अरुण कुमार ने कांग्रेस के जी. एस. बाली को 519 मतों से हराया है। जी. एस बाली ने 2012 के विधानसभा चुनाव में 2743 मतों से जीत दर्ज की थी।

इसके साथ ही कांग्रेस की नाक का सवाल बन चुकी विधानसभा सीट संख्या-53 सोलन को कांग्रेस के डॉ. धनी राम शांडिल बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा के राजेश कश्यप को कड़े मुकाबले में मात्र 617 वोटों से हराया। गौरतलब है कि सोलन कई चुनावों से कांग्रेस की सुरक्षित सीटों में से एक रही है। 2012 के विधानसभा चुनाव में शांडिल ने 4472 मतों से जीत हासिल की थी।

हिमाचल में 9 नवंबर को मतदान हुआ था।

Continue Reading

चुनाव

हिमाचल चुनाव : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री उम्मीदवार हारे

Published

on

satti dhumal

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव-2017 के नतीजे सामने आने के बाद राज्य में सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथ में आ चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और दो बार के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट पर 2933 वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार रजिंदर राणा ने उन्हें मात दी है।

वर्ष 2012 में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राणा इस सीट पर दोबारा जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। राणा ने 2012 के चुनाव में 14166 मतों से जीत हासिल की थी। उन्हें किसी समय धूमल का करीबी कहा जाता था। धूमल ने इस चुनाव में अपनी सीट बदली थी।

वहीं भाजपा प्रदेश इकाई अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ऊना विधानसभा सीट पर 3196 वोटों से हार गए हैं। इस सीट पर कांग्रेस के सतपाल सिंह रायजादा ने जीत दर्ज की है। सत्ती पिछले तीन चुनावों से इस सीट पर अजेय रहे थे। ऊना को भाजपा का गढ़ भी कहा जाता था।

–आईएएनएस

Continue Reading

राजनीति

गुजरात की जीत भाजपा की ‘नैतिक हार’ : ममता

गुजरात ने आम लोगों पर हुए अत्याचारों, व्यग्रता व अन्याय के खिलाफ वोट दिया। गुजरात ने 2019 का आगाज कर दिया।

Published

on

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भाजपा की गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत को ‘अस्थायी’ और ‘लाज बचाने वाली’ बताया। ममता ने भाजपा की जीत को ‘नैतिक हार’ करार दिया। ममता ने ट्वीट किया, “मैं गुजरात के मतदाताओं को इस दौर में बहुत ही संतुलित फैसले के लिए बधाई देती हूं। यह अस्थायी व लाज बचाने वाली जीत है, लेकिन यह भाजपा की नैतिक हार को दिखाती है।”

उन्होंने कहा, “गुजरात ने आम लोगों पर हुए अत्याचारों, व्यग्रता व अन्याय के खिलाफ वोट दिया। गुजरात ने 2019 का आगाज कर दिया।”

सत्तारूढ़ भाजपा गुजरात में सत्ता बरकार रखने में सफल रही है और हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज की है।

Continue Reading

Most Popular