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वृंदावन में विधवाओं ने मनाई पटाखा रहित हरित दिवाली

दीये जलाकर अंधेरा मिटाने की परंपरा का पालन करते हुए गोपनीनाथ मंदिर में सुलभ इंटरनेशनल की ओर से आयोजित हरित दिवाली कार्यक्रम में आसपास के आश्रमों से करीब 700 विधवाओं ने हिस्सा लिया।

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Diwali Gopinath temple
Bindeshwar Pathak celebrates Diwali with widows at Gopinath temple (Pic IANS)

वृंदावन, 5 नवंबर | धार्मिक नगरी वृंदावन में रविवार को लोकप्रिय गीत-संगीत, भजन-कीर्तन और पुष्प-वर्षा के बीच दिवाली त्योहार मनाया गया। कहीं कोई पटाखा नहीं चलाया गया।

प्रदूषण रहित दिवाली मनाने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए शाम में वृंदावन वासियों ने सिर्फ मिट्टी के दीये और मोमबत्तियों से अपने घरों को रोशन किया।

दीपावली पर पटाखे जलाने से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का निर्देश दिया है। इस लिहाज से वृंदावन वासियों द्वारा हरित दिवाली मनाने का फैसला काफी महत्वपूर्ण है।

वृंदावन में निवास कर रही बंगाल की विधवा मनु घोष ने कहा, “हमने इस बार पटाखे और फुलझड़ी को छुए बिना दिवाली मनाने का फैसला लिया।”

उन्होंने बताया कि यहां गोपीनाथ मंदिर में अनेक दूसरी विधवाओं ने भी इस बार मिट्टी के दीये जलाए और वे फूलों और दीयों से दीपावली मना रही हैं।

पास के आश्रम में 30 साल से रह रहीं ललिता अधिकारी और कनक लता ने भी बताया कि वे पटाखे रहित दिवाली मना रही हैं क्योंकि पटाखे जलाने से शोर-गुल और धुआं फैलते हैं जो उनके लिए समस्या पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा, “हम भविष्य में भी पटाखे रहित दिवाली मनाना चाहते हैं।”

दिल्ली-एनसीआर में पिछले साल दिवाली और उसके बाद वायु प्रदूषण के स्तर के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालया द्वारा दिए गए आदेश के आलोक में यहां पहली बार विधवाओं ने प्रदूषण रहित दिवाली मनाई।

अदालत ने इस बात का अवलोकन किया कि पटाखों के बुरे परिणामों के कारण वायु की गुणवत्ता बहुत की खराब और चिंताजनक बन गई थी।

दीये जलाकर अंधेरा मिटाने की परंपरा का पालन करते हुए गोपनीनाथ मंदिर में सुलभ इंटरनेशनल की ओर से आयोजित हरित दिवाली कार्यक्रम में आसपास के आश्रमों से करीब 700 विधवाओं ने हिस्सा लिया।

करीब 400 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर के अहाते को रंगोली और मिट्टी के दीयों से सजाया गया था। भक्तिन विधवाओं ने बाद में भजन-कीर्तन किया।

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने कहा, “इनके जीवन की सांझ वेला में खुशियों की किरणें लाने के लिए हमने अनोखे तरीके से दीपोत्सव का त्योहार मनाया।”

सुलभ की ओर से यहां विधवाओं की रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति करने के अलावा उनको स्वास्थ्य सुविधा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

–आईएएनएस

मनोरंजन

Holi 2019: इन गानों के बिना अधूरी हैं होली…

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Holi song
File Photo

होली का त्योहार आते ही देशभर में उत्साह और उमंग की लहर दौड़ने लगती हैं। होली रंगो और गानों के बिना मनाना लगभग नामुमकिन है।

होली के गीतों से त्योहार में डबल मजा आ जाता हैं। नाच गानों की महफिल और सभी रंगों में सराबोर हो जाते हैं। बॉलीवुड में भी हमेशा से ही ऐसे तमाम गाने फिल्माए गए हैं जो होली पर आधारित हैं।

ये गाने आज भी काफी ज्यादा सुने जाते हैं। होली के मौके पर सूने ये नए और पुराने कुछ शानदार गाने।

https://www.youtube.com/watch?v=-GPAzK1hMfg

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लाइफस्टाइल

बुंदेलखंड में अब बदला है होली के हुड़दंग का ढंग

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प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में हर तीज-त्योहार मनाने के अलग-अलग रिवाज रहे हैं। अब होली को ही ले लीजिए।

करीब एक दशक पूर्व तक होलिका दहन के बाद रात में गांवों के ‘लंबरदार’ अपने यहां ‘चौहाई’ (मजदूरी) करने वाले चुपके से दलितों के घरों में मरे मवेशियों की हड्डी, मल-मूत्र और गंदा पानी फेंका करते थे, इसे ‘हुड़दंग’ कहा जाता रहा है।

लेकिन इसे कानून की सख्ती कहें या सामाजिक जागरूकता, यह दशकों पुराना गैर सामाजिक रिवाज अब बंद हो चुका है। होली में ‘हुड़दंग’ सभी से सुना होगा, लेकिन बुंदेली हुड़दंग के बारे में शायद ही सबको पता हो। एक दशक पूर्व तक महिला और पुरुषों की अलग-अलग टोलियों में ढोलक, मजीरा और झांज के साथ होली गीत गाते हुए होलिका तक जाते थे और गांव का चौकीदार होलिका दहन करता था।

यहां खास बात यह थी कि होलिका दहन करने से पूर्व सभी महिलाएं लौटकर अपने घर चली आती थीं। तर्क दिया जाता था कि होलिका एक महिला थी, महिला को जिंदा जलते कोई महिला कैसे देख सकती है?

होलिका दहन के बाद शुरू होता था ‘होली का हुड़दंग’। गांव के लंबरदार (काश्तकार) मरे मवेशियों की हड्डियां, मल-मूत्र व गंदा पानी अपने साथ लाकर अपने यहां चौहाई (मजदूरी) करने वाले दलित के दरवाजे और आंगन में फेंक देते थे।

सुबह दलित दंपति उसे समेट कर डलिया में भर कर और लंबरदार को भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए उनके दरवाजे में फेंक देते। दलित मनचाही बख्शीस (इनाम) मिलने के बाद ही हुड़दंग का कचरा उठाकर गांव के बाहर फेंकने जाया करते थे। दलितों को बख्शीस के तौर पर काफी कुछ मिला भी करता था।

बांदा जिले के तेंदुरा का कलुआ बताते हैं कि उनके बाबा पंचा को लंबरदार नखासी सिंह ने हुड़दंग की बक्शीस में दो बीघा खेत हमेशा के लिए दे दिया था, जिस पर वह आज भी काबिज हैं। अब वह किसी की चौहाई नहीं करते।

हालांकि ‘हुड़दंग’ जैसी इस गैर सामाजिक परंपरा की कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुरजोर मुखालफत भी की और इसके खिलाफ एक अभियान चलाया। इनमें ‘जल पुरुष’ राजेंद्र सिंह के शिष्य सुरेश रैकवार (निवासी तेंदुरा गांव) का नाम सबसे आगे आता है।

बकौल सुरेश, “हुड़दंग एक गैर सामाजिक परंपरा थी, जो मानवाधिकारों का भी उल्लंघन करती थी। वह कहते हैं कि इसकी आड़ में दलितों की आबरू से भी खिलवाड़ किया जाता था जिसका विरोध करने पर कथित लंबरदार जानलेवा हमला भी कर देते थे। तेंदुरा गांव में ही हुड़दंग का विरोध करने पर अमलोहरा रैदास को गोली मार दी गई थी, जिससे उसे अपना एक हाथ कटाना पड़ा था।”

बांदा के पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा कहते हैं, “होली का त्योहार भाईचारे का त्योहार है, प्रेम से रंग-गुलाल लगाया जा सकता है। कानून हुड़दंग (उपद्रव) करने की इजाजत नहीं देता है। अगर किसी ने भी होली की आड़ में गैर कानूनी कदम उठाया तो उसकी खैर नहीं होगी। सभी थानाध्यक्षों और गांवों में तैनात चौकीदारों को अराजकतत्वों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।”

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

इन बीमारियों को दूर करता है चुकंदर का जूस

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beetroot juice
File Photo

ज्यादातर आप चुकंदर का इस्तेमाल सलाद बनाने के लिए करते हैं। कुछ लोग चुकंदर मूली के साथ खाते हैं। इतना नहीं कुछ को चुकंदर का जूस पीना भी पसंद होता है।

अगर आप चुकंदर को अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो इससे आपकी सेहत को फायदे होगा। क्योंकि चुकंदर खाने या उसका जूस पीने से आपके शारीर में तेजी से खून बढ़ता है। ये खून के बढ़ाने के साथ-साथ आपका शुगर लेवल कंट्रोल करता है।

क्योंकि चुकंदर में सोडियम और पोटेशियम फास्फोरस अदि तत्व पाए जाते हैं। इससे आपके शरीर में ताकत आती है और बीमारियों से भी दूर रहते हैं।

आइए हम आपको बताते हैं कि चुकंदर खाने के क्या-क्या फायदा होता है।

एनिमिया

शारीर में खून की कमी होना एनिमिया कहलाता है। हमारे शारीर में पर्याप्त मात्रा में खून होना ज़रूरी होता है। अगर आपके शारीर में खून की कमी है तो आप चुकंदर के जरिए उसे पूरा कर सकते हैं।

थकान करे दूर

आज की भागदौड़ की जिंदगी में हमें बहुत जल्दी थकान हो जाती है। ऐसे में अगर आप चुकंदर का सेवन करेंगे तो इससे आपकी सेहत को बहुत फायदा होगा। चुकंदर आपके शारीर के रोगों को दूर करता है साथ ही बॉडी में एनर्जी पैदा करता है। चुकंदर का जूस आपकी सारी थकान मिटा देता है।

ब्लड शुगर लेवल कम करें

अगर आपको ब्लड शुगर की बीमारी है तो आपके लिए चुकंदर का सेवन करना बेहद लाभकारी है।

कब्ज से राहत

अगर आपको पेट की समस्या है तो आप के लिए चुकंदर का सेवन करना चाहिए ये पेट को सही करने के लिए सबसे बेहतर दावा है। इसका जूस पीने से आपका वजन भी कम होता है।

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