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निकारागुआ: सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, 10 की मौत

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Nicaragua
(Photo credit AP)

निकारागुआ में सुरक्षाबलों और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 10 लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जन से अधिक घायल हुए। ये प्रदर्शनकारी सड़कों को अवरुद्ध किए हुए हैं।

एएनडीपीएच के कार्यकारी सचिव अल्वारो लेवा ने रविवार को एफे को बताया,”इन झड़पों में मसाया में छह, दिरिया में दो जबकि कटारिना में दो की मौत हो गई।”

उन्होंने कहा कि मसाया में जिन चार लोगों की मौत हुई हैं, वे पुलिसकर्मी हैं। राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा की सरकार ने संवैधानिका आदेश को बाधित करने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अप्रैल महीने से शुरू हुई इस अशांति में अब तक 351 लोगों की मौत हो गई है।

–आईएएनएस

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अमेरिका ने वाजपेयी के निधन पर शोक जताया

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फाइल फोटो

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक जताया। उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए साझा प्रयासों की स्वाभाविक साझेदारी के रूप में वाजपेयी के दृष्टिकोण की सराहना की।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में पोम्पियो ने वाजपेयी के निधन पर भारत के लोगों के लिए प्रति संवेदना जताई। पूर्व प्रधानमंत्री के योगदानों का उल्लेख करते हुए बयान में कहा गया,”उन्होंने अपने देश के विकास के लिए बिना थके प्रयास किए और हर भारतीयों के जीवन में सुधार के लिए समर्पित रहे, जिससे देश एक वैश्विक और आर्थिक शक्ति बना।”

उन्होंने कहा,”वर्ष 2000 में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष अमेरिका-भारत संबंधों को साझा प्रयासों की स्वाभाविक साझेदारी के रूप में चिह्न्ति किया।”

बयान के मुताबिक, “उन्होंने बहुत पहले ही जान लिया था कि अमेरिका और भारत अपने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर साझेदारी विकसित कर सकते हैं, जो आर्थिक समृद्धि और क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा में योगदान देगा।”

उन्होंने कहा, “आज, हमारे दोनों देश और द्विपक्षीय संबंध प्रधानमंत्री वाजपेयी के ²ष्टिकोण से लाभान्वित हो रहे हैं।” अटल बिहारी वाजपेयी (93) का गुरुवार शाम नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था।

–आईएएनएस

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अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप के मीडिया पर हमलों के खिलाफ खड़े हुए अमेरिका के 350 अखबार

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donald-trump

वाशिंगटन, 16 अगस्त | अमेरिका में कम से कम 350 समाचार संस्थानों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मीडिया पर हमले का सामना करने और स्वतंत्र मीडिया के पक्ष में एक अभियान शुरू किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्थाज विनयार्ड टाइम्स से लेकर डलास मॉर्निग न्यूज, साउथ डकोटा के यांक्तन काउंटी ऑबजर्वर से मैने के बैंगोर डेली न्यूज समेत सैकड़ों अमेरिकी समाचार पत्रों ने गुरुवार को देश में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के एक संयुक्त प्रयास में अपने-अपने अखबारों में खाली जगह छोड़ी।

यह कदम मीडिया के खिलाफ राष्ट्रपति के ‘डर्टी वॉर’ की राष्ट्रव्यापी निंदा के लिए बॉस्टन ग्लोब द्वारा शुरू किया गया, जिसमें हैशटैग एनेमीऑफनन का प्रयोग किया गया। इसने ‘प्रशासन द्वारा प्रेस पर हमले के खतरों को लेकर’ एक संपादकीय लिखने का संकल्प लिया और दूसरों से भी ऐसा करने को कहा।

यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने ही वाशिंगटन और न्यूयॉर्क की सीमा से बाहर निकालकर देश भर के समुदायों को ट्रंप के हमलों को लेकर संवाद शुरू किया है।

ट्रंप अक्सर मीडिया खबरों को ‘झूठी खबरें’ (फेक न्यूज) बताते हैं और पत्रकारों को लोगों का दुशमन करार देते हैं।

शुरू में 100 समाचार संगठनों से मिली सकरात्मक प्रतिक्रिया 350 संगठनों तक पहुंच गई, जिसमें अमेरिका के प्रमुख समाचार पत्रों से लेकर छोटे स्थानीय अखबारों ने ट्रंप के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। इसमें उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशक जैसे ब्रिटेन के समाचार पत्र द गार्डियन का भी समर्थन हासिल हुआ।

–आईएएनएस

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पाकिस्तान ने ट्विटर को दी बंद करने की धमकी

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twitter
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (पीटीए) ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर से कहा है कि वह आपत्तिजनक सामग्री को हटाने व ब्लॉक करने के अनुरोध का पालन करे नहीं तो उसे देश में बंद किया जा सकता है।

डॉन ऑनलाइन की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विटर पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लगाए जाने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि सरकार तकनीकी दिग्गज को सरकार सार्वजनिक प्रयोग के लिए क्या उपयुक्त है या वैध अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक दायरे के भीतर क्या आता है, इस बारे में अपने विचारों को मनवा पाने में सक्षम नहीं दिख रही है।

पीटीए ने बुधवार को कैबिनेट सचिवालय की सीनेट स्थायी समिति को सूचित किया कि जब फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया मंच सरकार के आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाने के अनुरोध का पालन कर रहे हैं तो फिर ट्विटर क्यों नहीं।

पीटीए की इंटरनेट नीति के महानिदेशक और वेब विश्लेषक निसार अहमद ने समिति को बताया, “आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाने के पाकिस्तान के 100 अनुरोधों में से केवल पांच फीसदी पर ही कार्रवाई की गई। ट्विटर ने बाकी सभी अनुरोधों को नजरअंदाज कर दिया।”

समिति, सोशल मीडिया के माध्यम से देश, उसके नागरिक और उसके संस्थानों को निशाना बनाकर की जाने वाली अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ पीटीए द्वारा निर्धारित जुर्माना पर एक ब्रीफिंग के लिए एकत्र हुई थी।

अहमद ने समिति को पिछले सप्ताह इस्लामाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के बारे में सूचित किया, जिसमें ट्विटर को अंतिम नोटिस जारी किया गया था। इस निर्देश में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट से पाकिस्तान के अनुरोधों पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया था, ऐसा नहीं करने पर उसे देश में प्रतिबंधित किए जाने के खतरे में बारे में भी जानकारी दी गई थी।

–आईएएनएस

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